Monday, 12 January 2009

उत्तराखंड में बाजार तलाश रहा हिमाचल

देहरादून: हथकरघा व हस्तशिल्प के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाला हिमाचल प्रदेश अपने उत्पादों के लिए अब उत्तराखंड में भी बाजार तलाश रहा है। पड़ोसी राज्य यूं तो लंबे समय से कई राज्यों में अपने उत्पादों का विपणन कर रहा है, लेकिन उसकी उम्मीदों को खास तौर पर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की धरती पर ही पंख लगे। यूपी व एमपी में मिल रहे अच्छे अनुभव के बीच हिमाचली हथकरघा उद्योग की नजर उत्तराखंड के बाजार पर है। यही कारण है कि हिमाचल के उपक्रम राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास सहकारी संघ ने भी देवभूमि का रुख किया है। हिमाचल में हथकरघा उद्योग की प्रगति का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि उसका अपना सरकारी उपक्रम राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास सहकारी संघ ही हैंडलूम में सालाना दो करोड़ से अधिक का व्यवसाय कर रहा है। संघ के तहत 290 सहकारी समितियां संचालित हैं। प्रत्येक समिति में 50 से अधिक सदस्य जुड़े हैं। जाहिर है पड़ोसी राज्य में उसके इस उपक्रम के जरिए 15 हजार से अधिक बुनकरों को सीधे रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण बुनकरों द्वारा तैयार हथकरघा उत्पादों का विपणन संघ स्वयं करता है, जिसके लिए कई वर्षो से आगरा, सोलन, भोपाल, शिमला, डलहौजी, ग्वालियर, नोएडा, जयपुर जैसे कई शहरों में प्रदर्शनी लगाई जा रही हैं। संघ के प्रदर्शनी प्रबंधक राकेश शर्मा बताते हैं कि संघ को सबसे ज्यादा व्यवसाय उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से मिलता रहा है।उत्तराखंड में हथकरघा उत्पादों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है, लिहाजा संघ को यहां भी बेहतर व्यवसाय की उम्मीद है। यही कारण है, कि संघ ने एक ही सीजन में यहां तीन प्रदर्शनियों का आयोजन किया।

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