Thursday, 15 January 2009
तीन साल में 1467 नियुक्तियां,गिरा आरक्षण ग्राफ
14 jan9-
देहरादूनओबीसी कमीशन को शिक्षा महकमे द्वारा दिए गए ब्योरे में आरक्षण नियमों की अनदेखी और आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को बर्खास्त करने के तर्क को जायज ठहराने की सूरत नजर नहीं आ रही है। तीन साल तक की गई कुल 1467 नियुक्तियों में ओबीसी को 11 फीसदी और एससी को दस फीसदी आरक्षण दिया गया। शिक्षा महकमे ने आरक्षित वर्गो के शिक्षकों को बर्खास्त तो कर दिया पर अब नियुक्तियों में आरक्षण की अनदेखी भारी पड़ रही है। ओबीसी कमीशन को वर्ष 1999 से 2002 तक की नियुक्तियों के दिए गए ब्योरे में आरक्षण का ग्राफ और नीचे गिरा है। वर्ष 1997 की विज्ञप्ति के आधार पर रिक्त पदों में तकरीबन तीन सौ फीसदी बढ़ोत्तरी हुई पर आरक्षित पदों पर भर्ती का आंकड़ा और गिर गया। ओबीसी को सिर्फ 11.17 और एससी अभ्यर्थियों को 10.36 फीसदी आरक्षण दिया गया। वर्ष 1997 में एलटी शिक्षकों के विज्ञापित 532 पदों में 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी की व्यवस्था सेवा नियमावली में नहीं है। महकमे ने स्वीकार किया है कि गढ़वाल मंडल में वर्ष 1997 की विज्ञप्ति के आधार पर वर्ष 1999 से 2002 तीन वर्षो की अवधि में कुल 1467 पदों पर नियुक्तियां की गई। इनमें सामान्य श्रेणी में 1122, एससी के 152, ओबीसी के 164, एसटी के तीन अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली। आंकड़ों से साफ है कि एससी को सिर्फ 10.36 फीसदी, ओबीसी को 11.17 फीसदी आरक्षण दिया गया। विषयवार अंग्रेजी में 189, व्यायाम में 159, जीव विज्ञान में 87, हिंदी में 207, गणित में 488, सामान्य में 278 नियुक्तियां की गई। इनमें ओबीसी के क्रमश: 20, 13, 14, 32, 59, 26 अभ्यर्थी चयनित हुए। एससी के क्रमश: 22, 17, 28, 41 व 27 अभ्यर्थी नियुक्त हुए। कला वर्ग की 57 व काष्ठ कला की दो नियुक्तियों में ओबीसी व एससी का एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हुआ। आंकड़ों से साफ है कि वर्ष 1999 में की गई 1114 नियुक्तियों में ओबीसी व एससी को क्रमश: 14 व 19 फीसदी आरक्षण दिया गया था। बाद के वर्षो में आरक्षित श्रेणी की नियुक्ति का ग्राफ और नीचे गिर गया। उधर, बर्खास्त किए गए आरक्षित वर्गो के शिक्षकों ने आज शिक्षा सचिव डा. राकेश कुमार से भी मुलाकात की। उन्होंने नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों की अनदेखी के साथ ही हाईकोर्ट से मिले स्टे आर्डर का अनुपालन नहीं करने की शिकायत की। शिक्षकों का कहना था कि हाईकोर्ट ने दस मई, 2007 को पारित आदेश में 17 जून, 1999 के शिक्षकों के नियुक्ति के निरस्तीकरण आदेश को अमान्य करार दिया था। आरोप है कि महकमे ने हाईकोर्ट के आदेश की मनमानी व्याख्या की है। सचिव ने उनकी मांगों पर समुचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया।
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