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हल्द्वानी: सप्ताह भर पूर्व भारत-आस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य राफ्टिंग अभियान के दौरान लापता कैप्टन कैलाश राणा की आस्ट्रेलिया में मृत्यु होने की पुष्टि हुई है
15 JAN 09- इंजीनियरिंग कालेज के रजिस्ट्रार का इस्तीफा द्वाराहाट (रानीखेत): नाटकीय घटनाक्रम में कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज के रजिस्ट्रार ने बुधवार को अचानक इस्तीफा दे दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस्तीफा देने का कारण निजी बताया जा रहा है, लेकिन त्यागपत्र देना कालेज में भारी अनियमितताओं की ओर इशारा कर रहा है। कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज के रजिस्ट्रार कुंवर सिंह वैसला ने त्यागपत्र दे दिया है। 15 JAN 09- विवाद: पंजाब-उत्तराखंड आमने सामने , हल्द्वानी: बस संचालन को लेकर उत्तराखंड-पंजाब आमने सामने आ गए हैं। वजह यह है कि दोनों राज्यों में संचालन को लेकर अंतराज्यीय समझौता नहीं हो पा रहा है। इसमें हैरत की बात यह है कि कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी दोनों राज्य आठ साल से केवल हस्ताक्षर नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए अब 22 को देहरादून में बैठक होने जा रही है। राज्य की उम्र आठ साल हो चुकी हैं। लेकिन उत्तराखंड अभी भी पंजाब समेत कई राज्यों से अंतराज्यीय समझौता नहीं कर पाया है। 15 JAN 09-उत्तरकाशी में हुई सौगात की बरसात उत्तरकाशी,: मुख्यमंत्री भुवनचन्द्र खंडूड़ी ने बुधवार को उत्तरकाशी में अलग-अलग स्थानों पर 13 करोड़ 88 लाख की लागत से निर्मित होने वाली छह योजनाओं का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी से देहरादून की दूरी 75 किमी. कम करने के लिए उत्तरकाशी-सुवाखोली मोटर मार्ग का निर्माण जल्द पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं का लाभ हर तबके तक पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार मुक्त राज्य की परिकल्पना को सार्थक करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने डुण्डा में इंडोर स्टेडियम, वरुणावत बफर जोन में स्थित राजस्व विभाग के आवास श्रेणी दो व तीन एवं 16 आवासीय भवनों, ज्ञानसू में भागीरथी पर पैदल पुल, भूस्खलन से क्षतिग्रस्त लोनिवि आवासीय भवनों की पुर्नस्थापना, डुंडा-थाती-सेम-मुखेम मोटर मार्ग व उत्तरकाशी में संस्कृति विभाग के आडिटोरियम का शिलान्यास किया। इस मौके पर प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते कहा कि आपातकालीन 108 सेवा अब तक 7 लाख 50 हजार काल पर जरूरत मंदों तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि मोबाइल 108 के बाद सरकार एक करोड़ का मोबाइल चिकित्सालय हर व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश में है। गंगोत्री क्षेत्र के विधायक गोपाल रावत ने उत्तरकाशी जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की मांग उठाई। जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान ने मनेरी भाली फेज-टू की झील को पर्यटन के लिहाज से विकसित किए जाने की मांग की।
डेडबर्न्ट मैग्नेसाइडट का उत्पादन करने वाली दोनों धमन भट्ठियां बंद अल्मोड़ा मंदी ने कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र के एकमात्र सरकारी उद्योग अल्मोड़ा मैग्नेसाइट फैक्ट्री की कमर भी तोड़ दी है। स्थिति यह है कि डेडबर्न्ट मैग्नेसाइडट का उत्पादन करने वाली दोनों धमन भट्ठियां बंद कर दी गई हैं। इस कारण फैक्ट्री से प्रत्यक्ष रूप से जुडे़ 500 कर्मचारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है। यही नहीं, झिरोली स्थित इस फैक्ट्री से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 2000 से अधिक परिवारों के समक्ष भी रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। कुमाऊं के आयुक्त व कंपनी के चेयरमैन एस.राजु ने बताया कि जिन स्टील फैक्टि्रयों को डेडबर्न्ट मैग्नेसाइट की सप्लाई की जाती थी, वहां से आर्डर नहीं मिल रहे हैं। इसलिए कहा नहीं जा सकता कि उत्पादन कब तक ठप रहेगा। प्रबंध निदेशक पीएस रावत के अनुसार उत्पादन के एकचौथाई आर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण उत्पादन फिलहाल रोकना पड़ा है। कर्मचारियों का क्या होगा, यह पूछने पर उन्होंने बताया कि उनसे वैकल्पिक काम लिया जा रहा है। जैसे ही आर्डर मिलने शुरू होंगे, धमन भट्ठियां चालू कर दी जाएंगी। फिलहाल 400 टन तैयार माल फैक्ट्री परिसर में डंप पड़ा है। उन्होंने बताया कि खदान में काम जारी है। उल्लेखनीय है कि यह फैक्ट्री टाटा और उत्तर प्रदेश सरकार का संयुक्त उपक्रम है। 1971 में इस फैक्ट्री की स्थापना से पहले डेडबर्न्ट मैग्नेसाइट कोरिया व चीन से आयात किया जाता था। इसकी उत्पादन क्षमता 20 हजार टन प्रतिवर्ष है। एमईसीएल के सर्वेक्षण के अनुसार झिरौली क्षेत्र में 11 मिलियन टन कच्चे मैग्नेसाइट का भंडार है। अल्मोड़ा मैग्नेसाइट में उत्पादन ठप छंटनी के दौर में ठग आए नौकरी बांटने नई दिल्ली, भाषा: आर्थिक मंदी के चलते लागत घटाने का बहाना बनाकर कंपनियां नौकरियां देने के बजाय ले रही हैं। इससे ज्यादा चिंता की बात यह है कि छंटनी के इस दौर में ठग आपको नौकरी बांटने आ गए हैं। अगर इन हाईटेक ठगों के झांसे में आ गए तो नौकरी तो नहीं मिलेगी, जेब जरूर खाली हो जाएगी। छंटनी के मौजूदा दौर में नौकरियों के मौके भले ही कम हुए हों, लेकिन इसने ठगों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। नए जमाने के ठग खुद को दिग्गज आईटी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा दे रहे हैं। इसके बदले में मोटी रकम वसूली जा रही है। हाईटेक ठग दिग्गज आईटी कंपनियों मसलन एचसीएल, विप्रो जैसे नामों का इस्तेमाल कर नौकरी के इच्छुक युवाओं को ई-मेल भेज रहे हैं। ये मैनेजमेंट शेष पृष्ठ 13 पर 2स्टील फैक्टि्रयों से आर्डर न मिलने से आयी नौबत 2500 कर्मचारियों को दूसरे काम में लगाया 15 JAN- क्या रंग लाएगी बुजुर्ग प्रो. की अलख हरिद्वार:उत्तरकाशी में 12 जुलाई 2008 को जब जीडी अग्रवाल आमरण अनशन पर बैठे तो किसी को आभास भी न था कि बुजुर्ग प्रोफेसर का यह आंदोलन देशव्यापी मुहिम छेड़ देगा। संत समाज, सामाजिक संगठन, सियासी दल और नामी गिरामी हस्तियां एक मंच पर जुट जाएंगी और गंगा को राष्ट्रीय धरोहर का तमगा हासिल हो जाएगा। ऐसे में जब वे गंगा की अविरल धारा को लेकर नई दिल्ली में धरने पर बैठ गए हैं तो पूरे देश की निगाहें फिर अनायास ही उनकी ओर उठ रही हैं। यूं तो गंगा रक्षा को लेकर पहले भी सुगबुगाहटं होती रही हैं। वर्ष 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तत्परता के चलते गंगा एक्शन प्लान को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी। करोड़ों रुपये का बजट एलाट किया गया। हालांकि तंत्र की विफलता के कारण इसके उद्देश्य पूरे नहीं हो पाए। इसके बाद वर्ष 2006 में जब उत्तराखंड के राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल हरिद्वार पहुंचे तो उन्होंने यहां पर गंगा रक्षा के लिए मुहिम छेड़ने की बात कही लेकिन गंगा रक्षा की असल मुहिम शुरू हुई 12 जून 2008 से, जब आईआईटी कानपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर व पर्यावरण प्रेमी प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उत्तरकाशी में आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने गंगा की राह में बाधा बनने वाली परियोजनाओं को बंद करने के लिए आवाज बुलंद की जिसके चलते उत्तराखंड सरकार को अपनी दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पाला मनेरी और भैरों घाटी को स्थगित करना पड़ा था। इस आंदोलन ने पूरे देश की राजनीति को प्रभावित किया। गंगा रक्षा आंदोलन को इस मुहिम से प्राण वायु मिली। फिर तो योगगुरु बाबा रामदेव ने गंगा रक्षा की कमान थाम ली। 17 अगस्त को हरिद्वार में गंगा रक्षा मंच का गठन हो गया । बाबा रामदेव और देव संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले। आखिरकार चार नवंबर को गंगा को राष्ट्रीय धरोहर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सहमति दे दी। ऐसे में जब प्रो.अग्रवाल एक बार फिर से नई दिल्ली में गंगा की धारा को अविरल बनाए रखने के लिए धरने पर बैठ गए हैं तो पूरे देश की निगाहें इस पर लग गई हैं कि इस बुजुर्ग प्रोफेसर का यह आंदोलन अब किस शिखर को चूमेगा। 15 JAN 09-इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए कर्नल देहरादून-भारतीय आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खास सहयोगी कर्नल प्रीतम सिंह के निधन के साथ ही नेताजी से जुड़े उनके तमाम संस्मरण इतिहास बन गए हैं। डोईवाला ग्राम सभा के ख?ाा गांव निवासी कर्नल प्रीतम सिंह का जन्म 1917 में पंजाब के कपूरथला के पास खेड़ादोना गांव में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि एक सैनिक की थी। लिहाजा देश प्रेम और रक्षा की बागडोर थामने को उनका मन मचल उठा। 1935 में वे सेना में भर्ती हो गए और ट्रेनिंग लेने के बाद 1939 में सेकेंड लेफ्टिनेंट बनकर विदेशी ताकतों के खिलाफ संघर्ष में लग गए। तभी विश्व युद्ध शुरू हो गया और वे कोटा बलूचिस्तान भेजे गए। 15 फरवरी 1942 तक जापानियों के विरुद्ध लड़ते रहे। उसी समय उनकी ब्रिगेड ने जापानी सेना के आगे आत्मसमर्पण कर दिया। तभी रास बिहारी बोस (आजाद हिंद फौज के संस्थापक मुखिया) के कहने पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की बागडोर संभाली। नेताजी ने उस समय नारा दिया था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। उसी नारे को सुनकर कर्नल प्रीतम सिंह भी प्रेरित हुए और वे आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। उस नारे का इतना असर हुआ कि हर नौजवान नेताजी के लिए अपना सिर कटाने के लिए तैयार हो गया। वालंटियर के रूप में बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए और आजाद हिंद फौज ने अंग्रेज शासकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्नल प्रीतम सिंह की अंग्रेजों के खिलाफ यहीं से जंग प्रारंभ हुई। उन्हें आजाद हिंद फौज में सरदारे जंग के खिताब से नवाजा गया। जब जापानियों ने युद्ध में सहयोग देने से मना कर दिया तो नेताजी ने सभी साथियों से भावी रणनीति पर मशविरा किया। 15 अगस्त 1945 की शाम के भोजन के समय आपस में यह तय किया गया कि अब दो रास्ते बचे हैं या तो भारत में जाकर आत्मसमर्पण किया जाए या फिर सेकेंड फ्रंट रूस से खोला जाए। उस व?त रूस से भारत के संबंध सुधर रहे थे। सभी की राय थी कि भारत की जेलों को भरने के बजाए युद्ध किया जाए। कर्नल प्रीतम सिंह नेताजी के विश्वास पात्र में गिने जाते थे। मृत्यु से पूर्व कर्नल प्रीतम का कहना था कि जिस विमान को क्रैश होना बताया गया था, उस विमान में सवार हबीबुर्रहमान कैसे बच आए। सचाई यह थी कि उस दिन विश्वभर में कोई प्लेन क्रैश ही नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन विदेश सेवा में डा. सत्यनारायण सिन्हा ने स्पष्ट तौर पर बताया था कि नेताजी साइबेरिया की जेल में बैरक नंबर 424 में कैद हैं। वे स्वयं नेताजी से मिले थे, पर उनकी बात सरकार ने दबा दी। इस तरह उनकी मृत्यु एक पहेली बनकर रह गई। इसको सुलझाने के लिए खोखला व मुखर्जी आयोग भी बना, लेकिन रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया। नेताजी के साथ अंतिम समय में रहे उनके 6 सिपाहियों में से 5 सिपाही काल कलवित हो गए थे । मकरैंण पर लगा खिचड़ी का भोग
देहरादून, जागरण संवाददाता: मकर संक्रांति का पर्व राजधानी में पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान मंदिरों में खिचड़ी का भोग लगा और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम हुए। लोगों ने शनिदेव को मनाने काली वस्तुओं का दान भी किया। इसके अलावा हजारों लोगों ने हरिद्वार जाकर वहां पवित्र पावनी गंगा में डुबकी लगाई। पहाड़ी व्यंजनों का जायका 15 JAN 09-देहरादून, पहाड़ी व्यंजनों का जायका लेने के लिए अब आपको गांवों की ओर रुख करने की जरूरत नहीं। राजधानी में भी हरवक्त पहाड़ी डिश उपलब्ध हैं। उत्तराखंड भोजन सप्ताह के साथ बुधवार से इसकी शुरुआत हो गई है। हरिद्वार रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में 21 जनवरी तक चलने वाले उत्तराखंड भोजन सप्ताह में पहाड़ के वह सभी भूले-बिसरे व्यंजन लोगों को परोसे जा रहे हैं, जिनके जायके की अधिकांश लोग कल्पनामात्र ही कर पाते हैं। झंगोरे के साथ तोर की दाल और भांग की चटनी का जायका लेना हो या फिर मंडुवे की रोटी के साथ घी व लहसुन के साथ पिसे नमक का, सब-कुछ आर्डर करते ही आपके पास पहुंच जाएगा। कंडाली की धबड़ी, झंगोरे की खीर, अर्से, काली दाल की पकोड़ी, चैंसू, फाणू जैसी डिश भी हरवक्त तैयार मिलेंगी। फिलहाल 21 जनवरी तक यह सभी डिश लोगों को नि:शुल्क परोसी जाएंगी। अस्पतालों मे ताले –देहरादून 15 JAN 09-हड़ताल के चलते राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई 2 ‑गरीब मरीजों को झेलनी पड़ रही है सबसे अधिक दिक्कत 2 ‑अस्पतालों में तीन दिन से दवा को तरसे मरीज 2 ‑दिन भर उधर-उधर भटकते रहे लोग 2 ‑एक्सरे, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी व ईसीजी जैसी सुविधाएं भी नहीं हो रही मुहैया 2 ‑बुधवार को दून अस्पताल में हुए सिर्फ 98 पंजीकरण 2 ‑नर्सिग स्टाफ के समर्थन के बाद मरीजों को भर्ती करने से परहेज कर रहे हैं अस्पताल 15 JAN 09-
डेढ़ करोड़ डकार डाक्टर दंपति फरार देहरादून, : इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोथेरेपी एंड काउंसिलिंग खोलने के नाम पर देहरादून में डेढ़ करोड़ की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि इंस्टीट्यूट के मालिक डाक्टर दंपति ने छात्रों व विज्ञापन एजेंसियों से करीब डेढ़ करोड़ की ठगी की है। आरोपी दंपति के फरार होने की सूचना मिलने पर विज्ञापन एजेंसी मालिकों ने डाक्टर के आफिस पर जमकर हंगामा किया। कोतवाली से मिली जानकारी के मुताबिक तीन माह पूर्व डा. आरके महेश्वरी ने टैगोर विला में क्लीनिक खोला। वह खुद को बाल रोग विशेषज्ञ और उड़ीसा के पूर्व कोयला मंत्री कुणाल महेश्वरी का पुत्र बताता था। आरोप है कि दो माह पहले डा. महेश्वरी ने देहरादून में इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोथेरेपी एंड काउंसिलिंग खोलने का दावा किया, जिसका उद्घाटन 26 जनवरी को होना था। इंस्टीट्यूट में एक साल का डिप्लोमा इन साइकोथेरेपी एंड काउंसिलिंग कोर्स संचालित करने के लिए पांच-पांच सौ रुपये के पांच सौ प्रास्पेक्टस छपवाए गए। कर्मचारी नरम, हड़ताल टली 15 JAN -देहरादून, : प्रदेश में छठे वेतनमान की सिफारिशें लागू करने को लेकर आंदोलित राज्य कर्मचारियों ने गुरुवार से प्रस्तावित बेमियादी हड़ताल 15 दिनों के लिए टाल दी है।
है।
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