राजेंद्र शाह की दुर्घटना में मौत ऋषिकेश : उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व उप मंत्री रहे मसूरी विस क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेंद्र शाह की दुर्घटना में मौत हो गई। रैनापुर रानीपोखरी निवासी पूर्व विधायक 55 वर्षीय राजेंद्र शाह गुरुवार सायं करीब साढ़े सात बजे देहरादून से वैगन-आर कार यूए 14 एसी 2825 से रैनापुर स्थित अपने आवास आ रहे थे। रैनापुर मोड़ के समीप कार अनियंत्रित होकर होकर खाई में जा गिरी। वह कार स्वयं चला रहे थे। दुर्घटना होते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें कार से बाहर निकाला। इसके बाद आपातकालीन 108 सेवा से उन्हें हिमालयन हास्पिटल जौलीग्रांट ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने शोक संवेदना व्यक्त की है। मसूरी गोलीकांड के दौरान कहा था-मुझे गोली मारकर दिखाओ याद आया शाह का साहस मसूरी, उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास में मसूरी गोलीकांड का अध्याय राजेंद्र शाह के जिक्र के बिना अधूरा रह जाता है। इस कांड में उन्होंने जनप्रतिनिधि रहते हुए जिस तरह बहादुर सिपाही की भूमिका निभाई, वह आज भी यहां के लोगों के मन-मस्तिष्क में ताजा है। खासकर वह घटना, जब सेंट मेरी अस्पताल में आंदोलनकारियों के शव रखे हुए थे और उन्होंने अधिकारियों को कहा था कि उनमें हिम्मत है तो मेरे सीने में गोली मारकर दिखाओ। इससे वहां का वातावरण भावुक और तनावयुक्त हो गया था। ऐसे सच्चे और साहसी आंदोलनकारी के असामयिक निधन से पर्यटन नगरी ामगीन है। खटीमा कांड के विरोध में 2 सितंबर, 1994 जुलूस निकाल रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस और पीएसी ने मसूरी में गोलियां चला दी थीं। इसमें एक पुलिस अधिकारियों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। इस कांड से तत्कालीन विधायक राजेंद्र सिंह शाह अत्यंत क्षुब्ध हो गए थे। उन्होंने इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश विधानसभा से इस्तीफा देने दे दी थी। वे तत्कालीन डीएम राकेश बहादुर व एडीएम तनवर जफर अली पर खूब बिफरे। सेंट मेरी में आंदोलनकारियों के शव रखे हुए थे। उस वक्त राजेंद्र शाह भावुक हो गए। वे अफसरों पर बिफर पड़े। उन्होंने ललकारा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे उन पर गोली मारें। यह सुनकर डीएम व पुलिस के अधिकारी सन्न रह गए। इस घटना के तत्काल बाद राजेंद्र शाह पर रासुका लगा दी गई। राजेंद्र शाह के निधन पर मसूरी के लोग गमजदा हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों व संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विधायक जोत सिंह गुनसोला, उरत्ताखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष देवी गोदियाल, महिला आंदोलनकारी सुभाषिनी बत्र्वाल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में राजेंद्र शाह ने सच्चे सिपाही की भूमिका निभाई थी। टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष व राज्य आंदोलनकारी हुकम सिंह रावत, डा. हरिमोहन गोयल, भाजपा नेता अमीचंद मंगला, मदनमोहन शर्मा, राधेश्याम तायल, अनीता सक्सेना आदि ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
बीएड: मैनेजमेंट कोटे में 43 प्रतिशत सीटें 16 jan-हल्द्वानी लंबे समय से बीएड काउंसिलिंग की प्रतीक्षा कर रहे छात्र-छात्राओं का इंतजार खत्म हो गया है। शासन ने कुमाऊं के 14 निजी कालेजों को हरी झंडी देने के साथ ही 43 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कोटे की कर दी हैं। निजी बीएड कालेजों को शासन स्तर से अनुमति मिलने के साथ ही कुमाऊं विश्र्वविद्यालय ने काउंसिलिंग की तिथि भी निर्धारित कर दी है। काउंसिलिंग 16 से 21 जनवरी तक उत्तराखंड फारेस्ट हास्पिटल ट्रस्ट मेडिकल कालेज, हल्द्वानी के सभागार में होगी। गुरुवार को देर रात तक विश्र्वविद्यालय के अधिकारी इसकी तैयारी में जुटे रहे। हर निजी कालेज में 100 सीटें निर्धारित की गयी हैं। इसमें स्टेट कोटे की 50 फीसदी सीटों पर कुमाऊं विश्र्वविद्यालय काउंसिलिंग कराएगा। निजी कालेजों की 43 सीटें मैनेजमेंट कोटे से भरी जायेंगी। सात सीटें एनआरआई कोटे की निर्धारित की गयी हैं। इसके अलावा मंडल के आठ राजकीय स्ववित्तपोषित कालेजों में 800 सीटों के लिए भी काउंसिलिंग होनी है। विडंबना यह है कि कई निजी कालेज संचालकों के पास शासनादेश अभी तक नहीं पहुंचा है। कुमाऊं विश्र्वविद्यालय के कुलसचिव भुवन चन्द्र जोशी का कहना है कि कट ऑफ सूची से कम अंक वाले अभ्यर्थी निजी कालेजों में सीधे आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद निजी कालेज संचालक मैरिट सूची तय करने के बाद ही काउंसिलिंग करेंगे। शासन की उदासीनता तथा एनसीटीई द्वारा राजकीय स्ववित्तपोषित कालेजों को एलओपी नहीं दिये जाने के कारण कुमाऊं विश्र्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षा निदेशालय असहाय बने रहे। इस कारण सत्र इस बार भी सात महीने लेट हो गया है। दूसरी ओर कुमाऊं विश्र्वविद्यालय की बीएड प्रवेश परीक्षा में कट ऑफ सूची से कम अंक लाने वाले अभ्यर्थी निराश हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने उनके साथ खिलवाड़ कर निजी कालेजों में मैनेजमेंट कोटा निर्धारित कर संचालकों को मनमानी का पूरा मौका दे दिया है। उनका कहना है कि शुल्क 40 हजार रुपये रखना दिखावा अधिक नजर आ रहा है। बड़ों ने खरीद ली चंबा फलपट्टी देहरादून-16jan , : सरकार की वन विभाग की जमीन पर एक फल पट्टी विकसित करने की कल्पना को बड़े लोगों ने धूल-धूसरित कर दिया। आज इस जमीन पर फलों के पेड़ों की जगह कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए है। जी हां, अभी हाल में ही हुई एक जांच में चंबा की फल पट्टी की इस बदहाली का खुलासा हुआ है। चंबा-मसूरी मोटर मार्ग पर वन और सिविल भूमि को मिलाकर फल पट्टी विकसित करने की एक योजना सालों पहले बनाई गई थी। उद्यान विभाग की इस योजना के तहत लोगों को पट्टे आवंटित किए गए। आज इस जमीन पर कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं। एक शिकायत के बाद उद्यान और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने जांच की। इस टीम की शासन को मिली रिपोर्ट खासी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट ने अनुसार इस जमीन पर 21 लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया है। सवा चार एक हेक्टेयर जमीन पर जंगली पेड़ों की वजह से फल-पट्टी के योग्य नहीं रह गई है। 10 लोगों के खिलाफ बेदखली पारित हो चुकी है पर इसे अमल में नहीं लाया गया है। 50 से अधिक पट्टाधारकों ने अपनी स्थानीय लोगों जमीन बेच दी है और इस पर खरीद करने वाले ही काबिज हैं। सबसे गंभीर मामला बाहरी लोगों को इस जमीन की बिक्री का सामने आया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीस बाहरी लोगों को जमीनें बिक्री की गईं और इस समय खरीदने वाले ही काबिज हैं। इन लोगों में कांग्रेस शासन में शहरी विकास और वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे नवप्रभात भी शामिल हैं। इनके नाम 114 नाली भूमि दर्ज है। इसके अलावा दिल्ली निवासी अनिल भाटिया, दलीप गांगुली, श्रीमती ऊषा वरदराजन, राकेश मित्तल, नरेश खट्टर, रवींद्र मल्होत्रा के साथ ही ऋषिकेश के अद्वैतानंद सरस्वती आदि शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पट्टे की शतरें के उल्लघंन के साथ अवैध रूप से खरीदी गई इस जमीन से इस समय भी व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन हो रहा है। इतना ही नहीं, शासन को लीज रेंट के नाम पर कोई राजस्व भी नहीं मिल रहा है। इस मामले में अवैध खरीद को निरस्त करने व सभी पट्टों को नए सिरे से प्रभावी करने की सिफारिश की गई है। कुमाऊंनी फिल्म अभिमान का प्रीमियर 16 jan09-हल्द्वानी: कुमाऊंनी फिल्म अभिमान का प्रीमियर शो गुरुवार को हुआ। पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। साथ ही सरगन सिनेमा हॉल में शो का लुत्फ उठाया। श्री पंत ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह कि फिल्में पहाड़ की संस्कृति के प्रति आकर्षण पैदा करती है। रिद्धी-सिद्धी फिल्म्स द्वारा निर्मित अभिमान ठुल घरै चेलिक का प्रीमियर शो में श्री पंत ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा की फिल्में अपनी परम्परा व संस्कृति से लोगों को जोड़ने का काम करती है। सीएम ने की दीपा हत्याकाण्ड की सीबीआई जांच की संस्तुति 16 jan09-रानीखेत: चर्चित दीपा हत्याकांड की मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। लम्बे समय से सीबीआई जांच की मांग कर रहे मृतका दीपा के परिजनों को न्याय की आस जगी है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार 25 मार्च 2008 से पाण्डेकोटा रानीखेत निवासी मृतका दीपा पुत्री देवीदत्त बिष्ट (उम्र 24 वर्ष) लापता हो गई थी। जिसकी 26 मार्च को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के समीप क्षत-विक्षत लाश मिली
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