Monday, 12 January 2009

केंद्रीय कमेटी का भागीरथी दौरा

देहरादून: लगातार कई बैठकों के बाद भागीरथी नदी में जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर केंद्रीय कमेटी किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच पाई है। इसी पर निर्णय लेने से पहले कमेटी के सदस्य भागीरथी का मौका मुआयना करने निकले हैं। भागीरथी नदी पर निर्माणाधीन पाला मनेरी और भैरोंघाटी जल विद्युत परियोजनाओं को उत्तराखंड सरकार ने आंदोलन के दबाव में स्थगित कर दिया था, जबकि इसी नदी पर केंद्रीय एजेंसी एनटीपीसी द्वारा निर्माणाधीन लोहारी नागपाला परियोजना पर कार्य निरंतर चल रहा है। इसके बावजूद पर्यावरणविदों के दबाव में केंद्र सरकार ने एक कमेटी का गठन किया, जिसे तय करना है कि परियोजना के लिए सुरंग में पानी लेने के बाद मूल नदी में लीन पीरियड में कितना पानी छोड़ा जाए। इसी बिंदु पर केंद्रीय कमेटी लगातार चर्चा करती रही है। सभी बैठकों में यह चर्चा का केंद्र बिंदु रहा है। इसके बावजूद कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। निर्णय लेने में हो रही देरी की वजह से उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थगित की गई जल विद्युत निगम की निर्माणाधीन दो परियोजनाओं पाला मनेरी और भैरोंघाटी का कार्य ठप पड़ा हुआ है। इन दोनों परियोजनाओं पर उत्तराखंड का सौ करोड़ रुपये से अधिक व्यय हो चुका है। जल विद्युत परियोजना निर्माण के लिए जाड़ों का यही सीजन मुफीद होता है। जिसका अधिकांश समय गुजर चुका है। इससे अब यह लगभग तय हो गया है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम की ये दोनों परियोजनाएं एक साल पिछड़ जाएंगी। जिससे एक तरफ परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी, दूसरी तरफ राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य भी पिछड़ जाएंगे। केंद्रीय कमेटी में उत्तराखंड जल विद्युत निगम के चेयरमैन योगेंद्र प्रसाद भी शामिल हैं। रविवार को दिल्ली से आए केंद्रीय कमेटी के दल के साथ योगेंद्र प्रसाद भागीरथी के दौरे पर निकले। माना जा रहा है कि इस बार यह कमेटी कोई अंतिम निर्णय ले लेगी। क्योंकि कमेटी इस बात पर पहले ही निर्णय ले चुकी है कि भागीरथी पर किसी भी परियोजना को रोका नहीं जाएगा। राष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सभी परियोजनाएं जारी रखी जाएंगी। अब यह टीम मौके पर जाकर देखेगी कि मूल धारा में कितना पानी छोड़ा जाना उचित होगा, ताकि भागीरथी नदी का पारिस्थितिक संतुलन कायम रह सके।

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