Monday, 12 January 2009

कामचलाऊ शिक्षकों पर संकट

12 jan 09-देहरादून: केंद्र के फैसले के बाद हेमवतीनंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि को केंद्रीय विवि बनने में अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। उम्मीद है कि अगले सत्र से केंद्रीय विवि काम प्रारंभ कर देगा। इससे पर्वतीय क्षेत्र में गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा की कमी दूर होगी तो साथ ही कामचलाऊ व्यवस्था पर कार्यरत 60 से ज्यादा शिक्षकों को रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है। केंद्रीय विवि बनाने का अध्यादेश जल्द लागू हुआ तो अगले सत्र से गढ़वाल विवि का स्वरूप बदला नजर आएगा। इससे पर्वतीय जनता को बेहतर व रोजगार उपयोगी शिक्षा की उम्मीदें बंधी हैं, साथ ही राज्य तकरीबन 15 करोड़ से ज्यादा की बचत होगी। फिलवक्त सिर्फ वेतन मद में ही 10.42 करोड़ खर्च हो रहे हैं। अवस्थापना विकास मद में भवनों, लैब, उपकरणों आदि पर करीब पांच करोड़ का खर्चा है। केंद्रीय विवि बनने के बाद विवि को केंद्रीय बजट तो मिलेगा ही, मानकों के मुताबिक शिक्षकों, लैबोरेटरी, लाइब्रेरी व हास्टल की व्यवस्था हो सकेगी। मौजूदा समय में छात्रसंख्या के अनुपात में शिक्षकों के पद काफी कम हैं। विवि के मौजूदा नियमित कार्मिकों को केंद्रीय वेतनमान के अलावा बड़ा फायदा कार्यकाल बढ़ने के रूप में मिलेगा। केंद्रीय विवि में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष की जा चुकी है। साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद अन्य देयकों में भी लाभ तय है। एक बात और। अब मनमाने ढंग से नियुक्तियों पर भी अंकुश तय है। यही नहीं, कामचलाऊ व्यवस्था पर वर्षो से कार्यरत शिक्षकों को रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है। अब नियुक्तियां नए मानकों के मुताबिक होंगी। वर्तमान में 60 से ज्यादा शिक्षक कामचलाऊ व्यवस्था पर कार्यरत हैं। विवि शिक्षक नेता इन्हें समायोजित करने का दबाव बनाए हुए हैं। केंद्रीय विवि बनने के बाद कामचलाऊ व्यवस्था जारी रखना मुश्किल होगा। इस बात को शिक्षाविद भी स्वीकार कर रहे हैं। केंद्र के निर्देशों के बाद राज्य सरकार विवि में नई नियुक्तियों पर रोक लगा चुकी है। सिर्फ नियुक्तियां ही नहीं, नए पाठ्यक्रम शुरू करने की कोशिशों पर भी विराम लगना तय है। इन पाठ्यक्रमों को चलाने को केंद्रीय अनुमति की दरकार होगी।

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