Wednesday, 14 January 2009

हेडमास्टर देंगे गुणवत्ता का सर्टिफिकेट

14 jan 09- देहरादून: राज्य में प्राइमरी व अपर प्राइमरी के बच्चों की सेहत के साथ समझौता अफसरों पर भारी पड़ेगा। मिड-डे मील खाद्यान्न की खराब गुणवत्ता के लिए जवाबदेही तय की गई है। शिक्षा महकमे की टीम ने कुछ अरसा पहले कई जिलों में स्कूलों का दौरा किया। इसमें मिड डे मील खाद्यान्न की गुणवत्ता खराब मिली। बच्चों की सेहत से जुड़े इस मामले में सरकार ने सख्ती से पेश आने का फैसला किया है। शिक्षा सचिव ने इस संबंध में आज आदेश जारी किए हैं। स्कूलों में भोजन के लिए फेयर एवरेज क्वालिटी अथवा ग्रेड-ए चावल मुहैया कराना जरूरी है। भारतीय खाद्य निगम, संभागीय खाद्य नियंत्रक, जिला पूर्ति अधिकारी के साथ ही सस्ता गल्ला विक्रेता को स्कूलों में दिए गए चावल का नमूना महीनेवार सुरक्षित रखना होगा। जरूरत पड़ने पर नमूने का परीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक स्तर पर चावल का उठान करने वालों को गुणवत्ता संबंधी प्रमाण पत्र देना होगा।

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