Sunday, 8 February 2009
चट्टानें टूटना जारी, नदी में बांध बनने की आशंका
8 feb-
धारचूला (पिथौरागढ़): तहसील क्षेत्र के चेतलकोट के पास दूसरे दिन भी चट्टानों के खिसकने का सिलसिला जारी रहा। विशाल बोल्डर गिरने से काली नदी में बांध बनने की आशंका पैदा हो गई है। मलबे से पटे कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग बंद होने के कारण वाहन और बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। भू-स्खलन से लोग काफी भयभीत हैं। ज्ञात हो कि चेतलकोट के पास चट्टाने दरकने के साथ शुक्रवार को तड़के उनका गिरना शुरू हो गया था। यह सिलसिला दूसरे रोज भी जारी रहा। शनिवार को बडे़-बड़े बोल्डर और भारी मात्रा में मलबा गिरने से काली नदी का प्रवाह थमने और वहां बांध बनने की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है। स्थिति से निपटने के लिए खोतिला और बलुवाकोट में दो अस्थायी आपदा राहत चौकियां बना दी गयी हैं। काली नदी किनारे बसे ग्रामीणों को सचेत कर दिया गया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग दूसरे दिन भी बंद रहने से वाहन और दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। भूस्खलन के चलते खेला गांव के सेरी तोक को भी खतरा पैदा हो गया है। वहां भी भूमि में दरारें पड़ गई हैं। धौलीगंगा जल विद्युत परियोजना के महाप्रबंधक एस कालगांवकर ने कहा है कि इस घटना से परियोजना की टनल को कोई खतरा नहीं है। उनका कहना है कि सेरी गांव में बनी दरारों से भी टनल को सुरक्षित बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां पर भूमिगत टनल एक हजार मीटर नीचे है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही एनएचपीसी के भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम क्षेत्र की भूगर्भीय जांच के लिये धारचूला पहंुच रही है। मुख्य मार्ग बंद होने के कारण लोगों को आठ किमी पैदल चलना पड़ रहा है। लोग खड़ी चढ़ाई चढ़कर धूरा नामक रफली होते हुए तवाघाट पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को तवाघाट में फंसे एसडीएम नवनीत पांडे भी इसी मार्ग से धारचूला लौटे। क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने बताया कि चेतलकोट गांव के सभी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।