Monday, 9 February 2009
शिक्षकों व कर्मचारियों के चेहरे पर चमक पर स्कूलों मे छात्रों का टोटा
देहरादून शिक्षा महकमे में नए वेतनमान की खुशी तकरीबन 90 हजार शिक्षकों व कर्मचारियों के चेहरे पर भले ही चमक बिखेरे, लेकिन माध्यमिक स्तर के नए स्कूल खोलने और तकरीबन हजार स्कूलों के विकास पर इसका खराब असर पड़ना तय है। महकमे में शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों का स्तर सुधारने की मुहिम पर छठवें वेतनमान की मार साफ नजर आ रही है। सरकार ने पहले अनुपूरक बजट के लिए एक अरब, 56 करोड़ व 70 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का अधिकतर हिस्सा बढ़े हुए वेतन व भत्तों पर खर्च होना है। इसमें सरकारी सेवकों एवं गैर सरकारी सेवकों के वेतन, महंगाई भत्ते, अन्य भत्ते पर होने वाला खर्च शामिल है। पहली तिमाही में वेतन मद में तकरीबन डेढ़ अरब की बढ़ोतरी हुई है। नियोजन महकमा प्लान के सालाना 400 करोड़ के प्रस्तावित बजट में करीब 50 फीसदी कटौती कर उसे 200 करोड़ तक सीमित कर चुका है। प्लान के बजट में कटौती से नान प्लान के बजट पर असर पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। साथ ही इससे राजकोषीय घाटे में इजाफा होगा। अनुपूरक बजट में शिक्षा निदेशालय में वेतन व अन्य भत्तों पर 43.64 लाख, एससीईआरटी में 32 लाख, बीईओ दफ्तर की स्थापना पर 20 लाख, बोर्ड में प्लान के तहत वेतन व महंगाई भत्ते पर करीब 62 लाख, राजकीय माध्यमिक स्कूलों के वेतन पर छह करोड़ व दस लाख, नए हाईस्कूलों की स्थापना के बाद वेतन मद में करीब 38 करोड़ के खर्च को मंजूरी मिली है। वेतन मद पर ही ज्यादातर बजट का उपभोग होने से नए स्कूलों की स्थापना और नए खुले 600 हाईस्कूलों व 300 इंटर कालेजों के विकास मद के लिए जरूरी धन की कमी महसूस की जा रही है। शासन ने जिन मदों में बजट को मंजूरी दी, उससे इतर मदों में खर्च करना महकमे के लिए मुश्किल होगा। ऐसे मदों पर खर्च के लिए पहले शासन की मंजूरी जरूरी होगी। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि स्वीकृत धन का उपयोग चालू वर्ष की नई मदों के क्रियान्वयन पर खर्च नहीं होगा। शासन ने शिक्षा निदेशक को खर्च में एहतियात बरतने और कम खर्च की बाबत जारी शासनादेशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्यो पर धन के अनाप-शनाप खर्च पर अंकुश लगाया गया है। अब निर्माण कार्य में खर्च करने से पहले इस्टीमेट पर तकनीकी मंजूरी लेना भी जरूरी होगा।