Saturday, 7 February 2009

काफल

, नैनीताल: जलवायु परिवर्तन के कारण समय से पहले पक चुका पर्वतीय कंदमूल काफल सरोवर नगरी में मिठाई से भी अधिक दामों में बिक रहा है। समय से पहले पके काफलों पर रस भले ही कम हो लेकिन खरीदने वालों की कमी नहीं है। दो सौ रुपये प्रति किलो कीमत होने के बावजूद काफल का स्वाद लेने वाले स्वयं को भाग्यशाली समझ रहे हैं। उल्लेखनीय है इस साल बारिश व बर्फबारी न होने के कारण पर्वतीय अंचलों में जलवायु परिवर्तन का असर साफ नजर आ रहा है। बुरांश जहां समय से पहले खिलकर खुशबू बिखेर रहा है, वहीं काफल लोगों के मुंह में मिठास घोल रहा है। आम तौर पर अप्रैल-मई में पकने वाला काफल जनवरी-फरवरी में ही बाजारों में धूम मचा रहा है। मौसम विज्ञानी इससे भले ही चिंतित हों लेकिन काफल बेचकर आजीविका चलाने वालों की बल्ले-बल्ले हो रही है। पिछले 15-20 साल से काफल व अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के कंदमूल व अन्य फल बेचकर आजीविका चलाने वाले हस्तिनापुर, हरियाणा निवासी रामपाल सिंह के अनुसार समय से पूर्व पके काफल का दाम वर्तमान में दो सौ रुपये प्रति किलो है। ऊंचे दाम के बावजूद ग्राहक काफल बड़े चाव से खरीद रहे हैं। उसने बताया कि काफल को वह 160 रुपये प्रति किलो की दर से रानीखेत मार्ग पर स्थित पाडली से खरीदे हैं। रामपाल के मुताबिक पदमपुरी व शहरफाटक आदि क्षेत्रों में भी काफल पक गए हैं। औषधीय गुणों को देखते हुए ग्राहक भी कीमत को नजरअंदाज कर रहे हैं। मौसम का यही रुख रहा तो बाजारों में काफल की आमद बढ़ने का अनुमान है। बहरहाल सरोवर नगरी में काफल ने मिठाई के दामों को पीछे धकेल दिया है। function popupWindow(articleid,location) { var articleid1 = articleid; var location1 = location; var retValue=window.open('http://in.jagran.yahoo.com/epaper/article/index.php?location='+location1+'&choice=show_image&articleid='+ articleid1 +'','popupWindow','width=500, height=500, left=100, top=100, status=yes, resizable=yes, scrollbars=yes, toolbar=no, location=no, menubar=no'); if (retValue == "yes") { window.location.href=window.location.href; } }