आफ सीजन में बनने और सजने लगीं नौकाएं नैनीताल: आफ सीजन के चलते स्थानीय नाविक अपनी नावों की मरम्मत करने तथा नई नावों के निर्माण में जुट गए हैं। नावों की मरम्मत में खासा समय लगने के कारण इन दिनों यह कार्य जोर शोर से चल रहा है। सरोवरनगरी नैनीताल का दिल कहे जाने वाली नैनी झील में पर्यटकों को सैर कराने वाली नौकाओं की मरम्मत व नई नावों के निर्माण में कई नाविक जुटे हैं। औसतन 22 फिट लम्बी और 4 फिट चौड़ी नौका के निर्माण की तकनीक बेहद रोचक होती है। नावों के निर्माण में तुन की लकड़ी का उपयोग होता है। बताते हैं कि तुन की लकड़ी पर पानी का असर नहीं के बराबर होता है। लगातार कई दिनों तक पानी में रहने के बावजूद तुन की लकड़ी सड़ती नहीं है। नावों के निर्माण में लोहे की कील के स्थान पर तांबे की कील प्रयोग में लाई जाती हैं। बाजार में तांबे की कील 400 से 600 रुपए प्रति किग्रा की दर से उपलब्ध है। तुन की लकड़ी से निर्मित होने वाली नौकाओं की पतवार चीड़ की लकड़ी से बनती है। आजकल पर्यटन सीजन न होने के कारण स्थानीय कुशल कारीगरों द्वारा जनवरी-फरवरी माह में नौकाओं के निर्माण तथा मरम्मत का कार्य किया जाता है। नाव बनाने वाले कारीगर राजेन्द्र कुमार ने बताया कि नाव के निर्माण में लगभग 30 दिन का समय लग जाता है। एक नौका को तैयार करने में लगभग 40 से 50 हजार रुपए तक लागत आती है। अंतिम चरण में नावों को आकर्षक व चटक रंगों से रंगा जाता है। उसके बाद नाव पर्यटकों को नैनी झील की सैर कराने के लिए तैयार होती है।