आत्महत्या के बारे में सोचने लगे थे नेगी
चक दे इंडिया फेम नेगी ने अपनी आत्मकथा मिशन चक दे में उन्होंने उस मैच हार के दर्द और चक दे इंडिया बनने के बाद जिंदगी में आये बदलावों का जिक्र किया
प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित अपनी आत्मकथा में उन्होंने कहा कि मुझे लगने लगा था कि देश के लिए स्वर्ण जीतने का मेरा सपना सच हो जाएगा। लेकिन टीवी पत्रकार लगातार कह रहे थे कि जिस व्यक्ति ने पाकिस्तान के हाथों सात गोल खाए उसे ही राष्ट्रीय कोच बना दिया गया। ऐसा भारत में ही हो सकता है। मेरा खून खौल उठा और जीत के लिए मेरा इरादा और पक्का हो गया। भारतीय टीम ने बैंकाक एशियाड में स्वर्ण पदक जीता। नेगी की इसी दास्तान पर यशराज फिल्म्ज ने 'चक दे इंडियाÓ बनाई जिसमें शाहरुख खान कोच की भूमिका में थे और इस पूर्व गोलकीपर ने उन्हें खेल की कई बारीकियां बताई। उन्होंने कहा कि शाहरुख ने अपने कालेज के दिनों में हाकी खेली थी और यह खूबी मुझे शूटिंग के पहले ही दिन नजर आ गई। मैने उनसे कहा भी था कि उन्हें फिल्म की किसी फ्रेम में डुप्लीकेट की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। हाकी से किंग खान के लगाव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि फिल्म में एक शाट था जिसमें एक लडक़ी अपनी हाकी फेंक देती है और शाहरुख उसे फिल्मी स्टाइल में अपने पैर से उठाते हैं। उन्होंने इस पर ऐतराज करते हुए कहा कि भारत में हाकी स्टिक का काफी आदर किया जाता है और आज तक किसी ने इसे पैर नहीं लगाया होगा। अंतत: वह सीन हटाना ही पड़ा।
नहीं खेलना चाहता था 1982 एशियाड फाइनल मीररंजन नेगी
पाकिस्तान के खिलाफ 1982 एशियाई खेलों के फाइनल मुकाबले में भारत की शर्मनाक हार के बाद हाकी के खलनायक बने मीररंजन नेगी ने खुलासा किया है कि वह फाइनल खेलने की मानसिक स्थिति में नहीं थे और लेकिन कोच ने नहीं खेलने का उनकी गुजारिश नहीं मानी। दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौजूदगी में खेले गए उस फाइनल में भारत को 7 .। से पराजय का सामना करना पड़ा। गोलकीपर नेगी पर इस हार का ठीकरा फूटा और बरसों तक वह पलायन में रहे। चक दे इंडिया फेम नेगी ने अपनी आत्मकथा मिशन चक दे में उन्होंने उस मैच हार के दर्द और चक दे इंडिया बनने के बाद जिंदगी में आये बदलावों का जिक्र किया है। उन्होंने फाइनल मैच के बारे में बताया मैच से पहले ही मैं काफी तनाव में था। मेेरे मुंह से झाग निकलने लगा था। मैने साथी खिलाड़ी गुरमेल सिंह से कहा कि वह कोच बलबीर सिंह सीनियर से कह दें कि मेरी जगह रोमियो जेम्स को उतार दें। मैं मैच खेलने की मानसिक स्थिति में नहीं हूं। लेकिन कोच ने मेरी बात नहीं सुनी। उन्होंने बताया कि मैच से पहले टीम प्रबंधन ने कई रहस्यमयी फैसले लिये जिसमें खिलाडिय़ों का चयन और उनकी पोजिशनिंग शामिल थी। उन्होंने कहा किसी खिलाड़ी को नहीं पता था कि उसे मैदान पर किस स्थान पर खड़ा होना है। यही नहीं फाइनल के दिन ऐन मौके पर टीम में कई बदलाव कर दिये गए।
भारतीय टीम ने बैंकाक एशियाड में स्वर्ण पदक जीता। इसके नेगी की इसी दास्तान पर यशराज फिल्म्ज ने >चक दे इंडिया बनाई जिसमें शाहंख खान कोच की भूमिका में थे और इस पूर्व गोलकीपर ने उन्हें खेल की कई बारीकियां बताई। उन्होंने कहा शाहंख ने अपने कालेज के दिनों में हाकी खेली थी और यह खूबी मुझे शूटिंग के पहले ही दिन नजर आ गई। मैने उनसे कहा भी था कि उन्हें फिल्म की किसी फ्रेम में डुप्लीकेट की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। हाकी से किंग खान के लगाव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया फिल्म में एक शाट था जिसमें एक लडक़ी अपनी हाकी फेंक देती है और शाहंख उसे फिल्मी स्टाइल में अपने पैर से उठाते हैं। उन्होंने इस पर ऐतराज करते हुए कहा कि भारत में हाकी स्टिक का काफी आदर किया जाता है और आज तक किसी ने इसे पैर नहीं लगाया होगा। अंतत.ं वह सीन हटाना ही पड़ा। नेगी ने कहा हमारे टीम प्रबंधकों ने कोई बैठक नहीं की। खिलाडिय़ों को किसी रणनीति का इल्म नहीं था लिहाजा सब कुछ नियंत्रण से बाहर होता गया। हमें जीत के उपदेश दिये जा रहे थे जिससे अनावश्यक दबाव बन गया।उन्होंने बताया कि मैच से पहले पाकिस्तानी खिलाडिय़ों से शिष्टाचार अभिवादन का भी उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा और हार के बाद उनकी मां और मंगेतर से भी यह सवाल पूछा गया कि हर गोल के लिये उन्होंने पाकिस्तानियों से कितना पैसा लिया था।
उन्होंने कहा उस फाइनल के बाद दिल्ली में और मेरे शहर इंदौर में भी मुझ पर हमले के प्रयास हुए। मेरी मां और मंगेतर को रोककर लोग पूछते थे कि मैने कितनी घूंस ली है। मैं टूट चुका था और आत्महत्या करने की सोचने लगा था।उस फाइनल के सोलह साल बाद 1998 में नेगी सब जूनियर टीम के कोच के तौर पर हाकी परिदृश्य में लौटे। फिर 1998 बैंकाक एशियाई खेलों के लिये उन्हें राष्ट्रीय टीम का कोच बनाया गया। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित अपनी आत्मकथा में उन्होंने कहा मुझे लगने लगा था कि देश के लिये स्वर्ण जीतने का मेरा सपना सच हो जायेगा। लेकिन टीवी पत्रकार लगातार कह रहे थे कि जिस व्यक्ति ने पाकिस्तान के हाथों सात गोल खाये उसे ही राष्ट्रीय कोच बना दिया गया। ऐसा भारत में ही हो सकता है। मेरा खून खौल उठा और जीत के लिये मेरा इरादा और पक्का हो गया
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