Saturday, 7 February 2009

हाईकमान की झंडी का इंतजार

देहरादून भागीरथी पर स्थगित दो जल विद्युत परियोजनाओं को अभी भी प्रदेश सरकार के फैसले का इंतजार है। कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान के इशारे पर स्थगित ये परियोजनाएं अब वहीं के निर्देश पर ही शुरू हो सकेंगी। इधर, संभावना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय भागीरथी की मूल धारा में अधिक पानी छोड़ने का निर्णय ले सकता है। भागीरथी की मूल धारा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर उठे सवालों का हल तलाशने को केंद्र सरकार ने एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप चुकी है। इसमें लीन पीरियड में भागीरथी की मूल धारा में चार क्यूमेक्स पानी छोड़ने की संस्तुति की गई है। इधर, भागीरथी पर राज्य सरकार ने अपनी दो परियोजनाओं पाला मनेरी और भैरोघाटी को स्थगित कर रखा है। इससे राज्य को कई तरह से नुकसान हो रहा है। काम पिछड़ने से लागत तो बढ़ ही रही है, पावर जनरेशन का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। राज्य की जरूरतों के मुताबिक ऊर्जा उत्पादन न होने पर निश्चित रूप से ओवर-ड्रा के जरिए महंगी बिजली लेनी पड़ेगी। इसके बाद भी राज्य सरकार मौन है। केंद्रीय कमेटी की रिपोर्ट पर भी कुछ नहीं कहा जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रो. जीडी अग्रवाल के अनशन के घबरा कर सरकार परियोजनाओं को स्थगित कर दिया था और इस निर्णय में पार्टी हाईकमान का भी अहम रोल था। खतरा भागीरथी की आस्था के चुनावी मुद्दा बनने का था। अब तो चुनाव एकदम नजदीक हैं। नई दिल्ली में प्रो. अग्रवाल ने अनशन फिर शुरू कर दिया है। ऐसे में भाजपा कोई भी निर्णय सियासी नफा-नुकसान को तोल कर ही लेना चाहती है। शायद यही कारण है कि इस मुद्दे को टाला जा रहा है। एक बात और, विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के बाद कई लोगों ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे से भेंट की। सूत्रों के अनुसार श्री शिंदे मामले को सुलझाने के लिए भागीरथी की मूल धारा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाने का निर्णय ले सकते हैं।