7 feb-
नैनीताल: विद्यालयों में कम छात्र संख्या के बावजूद कक्षाओं में अलग-अलग सेक्शन बनाकर लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे शिक्षकों को हटाने के लिए शासन ने फार्मूला खोज निकाला है। अब सभी कक्षाओं के सेक्शनों के मानक तय करते हुए 10 फरवरी तक सरप्लस शिक्षकों की सूची तलब कर ली गयी है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शीघ्र सूची मुहैया कराने को कहा गया है। राज्य में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशों के दौरान शासन के संज्ञान में यह तथ्य आया कि कई विद्यालयों में शिक्षक मानकों से कम छात्र संख्या के बावजूद कक्षा 6 से 12वीं तक की कक्षाओं के अलग-अलग सेक्शन बनाकर एक ही स्थान पर डटे हैं। इस अव्यवस्था से विभाग के समक्ष दोहरी चुनौती उत्पन्न हो गई। एक तो सुगम क्षेत्रों के विद्यालयों में मानकों से अधिक शिक्षक तैनात हो गए, दूसरा दुर्गम क्षेत्रों के शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षण कार्य चौपट हो गया। अब शासन ने कक्षाओं में छात्र संख्या के आधार पर सेक्शन तय कर शिक्षकों की तैनाती का फरमान जारी कर दिया है। शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर करते हुए 10 फरवरी तक विद्यालय में निर्धारित मानकों से अधिक शिक्षकों की सूची निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि सरप्लस शिक्षकों का अन्यत्र तबादला किया जा सके। नए मानकों के तहत अब कक्षा 6-8 तक के लिए 60 छात्रों का एक सेक्शन होगा, जबकि हाईस्कूल कक्षाओं के लिए 65 व इंटरमीडिएट के लिए 80 तक छात्र संख्या निर्धारित कर दी गई है। जूनियर विद्यालयों की एक कक्षा में दो सेक्शन बनाने के लिए न्यूनतम 91 छात्र, हाईस्कूल में 99 व इंटर के लिए 121 छात्र संख्या होनी जरूरी है। इसी तरह एक कक्षा में तीन, चार, पांच व छह सेक्शन बनाने के लिए भी छात्र संख्या के मानक तय कर दिए गए हैं। शासन ने कक्षा 6 से 12 तक की कक्षाओं के शिक्षकों के लिए भी पीरियड निर्धारित कर दिए हैं। अब प्रवक्ता को हर माह में न्यूनतम 30 पीरियड व सहायक अध्यापक को न्यूनतम 36 पीरियड पढ़ाने होंगे। शिक्षा निदेशक के इस फरमान के बाद अलग-अलग सेक्शन बनाकर वर्षो से एक स्थान पर जमे शिक्षकों पर तलवार लटक गई है।