Saturday, 14 February 2009

सरकार पर एक लाख अर्थदंड

नैनीताल: हाईकोर्ट ने एक पेंशनभोगी कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सेवानिवृत्त लाभ समेत ग्रेच्युटी व बेची गई पेंशन की एकमुश्त धनराशि का भुगतान करने के कड़े निर्देश सरकार को दिए हैं। भुगतान में अनावश्यक विलम्ब होने पर कोर्ट ने उप्र तथा उत्तराखंड सरकार पर एक लाख का अर्थदंड भी किया है। सेवानिवृत्त फॉरेस्टर उदयराम उनियाल द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि वह टौंस फारेस्ट डिवीजन पुरोला, उत्तरकाशी में फॉरेस्टर के पद से 31 अक्टूबर 98 को रिटायर हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद याचिकाकर्ता को 90 प्रतिशत ग्रेच्युटी, फंड तथा बीमा धनराशि का भुगतान किया गया परन्तु उसकी 10 प्रतिशत ग्रेच्युटी की धनराशि तथा बेची गई पेंशन की धनराशि सक्षम प्राधिकारी की संस्तुति के अभाव में रोक दी गई। 15 जुलाई 99 को याची को उप वन संरक्षक पुरोला द्वारा भेजे गए पत्र में उससे व्यक्तिगत रूप से कार्यालय से उक्त धनराशि का भुगतान लेने को कहा गया। वह 22 जुलाई 99 को उप वन संरक्षक कार्यालय गया परन्तु उसे चेक नहीं दिए गये। तत्पश्चात विभाग द्वारा 24 जुलाई 99 को एक लाख 17 हजार रुपए के चेक उसे भेजे गए, जिन्हें उसने स्टेट बैंक कीर्तिनगर के खाते में जमा कर दिया। 17 अगस्त 99 को उसे बैंक का पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि उक्त चेक का भुगतान कोषाधिकारी देहरादून की आपत्ति के चलते खाते में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इस पर उसने उप वन संरक्षक पुरोला से संपर्क कर चेक का भुगतान न होने की बात बताई। इस पर 19 मई 2000 को वित्त नियंत्रक लखनऊ को पुन: संस्तुति पत्र देने को लिखा गया। 27 जुलाई 2000 को वित्त नियंत्रक को नये सिरे से संस्तुति पत्र लिखने को कहा गया, क्योंकि पुराना भुगतान आदेश कालातीत हो गया था। 18 जून 01 को वित्त नियंत्रक द्वारा नया भुगतान आदेश भेजा गया। डीएफओ टौंस द्वारा 16 जुलाई 01 को उसे एक पत्र भेजा गया, जिसमें 25 जुलाई 01 को कार्यालय में उपस्थित होने को कहा गया। वह कार्यालय गया तो उसे कोषाधिकारी से संपर्क करने को कहा गया। इधर कोषाधिकारी ने इस आधार पर भुगतान करने से मना कर दिया कि वह अपनी पेंशन टिहरी गढ़वाल कोषागार से प्राप्त कर रहा है। 31 अगस्त 01 को डीएफओ द्वारा पुन: एक पत्र वित्त नियंत्रक लखनऊ को भेजा गया कि वह पुराने भुगतान आदेश को संशोधित कर कोषागार देहरादून के नाम कर दें। 21 दिसंबर 03 को पुन: उनके द्वारा वित्त नियंत्रक लखनऊ को पत्र भेजा गया, जिसमें भुगतान आदेश भेजने को लिखा गया, परन्तु पांच वर्ष से अधिक का समय बीतने पर भी उसे अवशेष देयक नहीं दिये गये। 19 सितंबर 07 को वरिष्ठ कोषाधिकारी टिहरी गढ़वाल द्वारा डीएफओ पुरोला उत्तरकाशी को सूचना दी गई कि जैसे ही संशोधित भुगतान आदेश प्राप्त होगा याचिकाकर्ता को भुगतान कर दिया जाएगा।

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