Saturday, 14 February 2009

परिवहन निगम की परिसंपत्तियों पर नए सिरे से वार्ता होगी।

3 feb-

देहरादून, : यूपी और उत्तराखंड के बीच परिवहन निगम की परिसंपत्तियों पर नए सिरे से वार्ता होगी। पहले सचिव व प्रबंध निदेशक स्तर पर सहमति के बिंदु तय होंगे और उसके बाद ही मंत्री स्तर पर बातचीत होगी। उत्तराखंड परिवहन निगम के वर्ष 2003 में अस्तित्व में आने के बाद से ही अचल परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी का मामला लटका हुआ है। 21 जुलाई 2004 को इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने एक रिपोर्ट केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय को सौंपी थी। इसमें उत्तराखंड को मिलने वाली हिस्सेदारी पर यूपी में अपना पक्ष रखा है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय पौने पांच वर्ष बीतने के बावजूद इस अहम मसले पर कोई निर्णय नहीं कर पाया है। उत्तराखंड परिवहन निगम भी इस संबंध में कई बार मंत्रालय को अवगत करा चुका है। उत्तर प्रदेश व दिल्ली स्थित चार अचल परिसंपत्तियों में उत्तराखंड को 13.34 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलनी है। इनमें कानपुर की सेंट्रल वर्कशाप व एलन वर्कशाप, लखनऊ का निगम मुख्यालय तथा दिल्ली का गेस्ट हाउस शामिल है। इस मसले पर पूर्व में उत्तराखंड व यूपी के बीच हुई सचिव स्तर की वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकल पाया। अब नए सिरे से इस पेचीदा मसले को हल करने की कोशिश की जा रही है। दोनों राज्यों के बीच होने वाली मंत्री स्तर की बातचीत के लिए सहमति के बिंदु पहले तय होने हैं। परिवहन मंत्री बंशीधर भगत ने बताया कि पूर्व में सचिव स्तर पर एक चक्र की वार्ता परिसंपत्तियों को लेकर हो चुकी है। अब सचिव तथा परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक के स्तर पर वार्ता तय की गई है। इस वार्ता में दोनों राज्य आपसी सहमति से किसी नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करेंगे। इसके बाद मार्च में मंत्री स्तर की वार्ता इस मसले पर होने की उम्मीद है। परिवहन मंत्रालय इस मामले को जल्द हल करने की कोशिश में है, ताकि उत्तराखंड परिवहन निगम आर्थिक रूप से मजबूत हो सके।

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