Saturday, 14 February 2009

सूखा: मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को लिखा पत्र

१३ देहरादून, सूखे की चपेट में आए उत्तराखंड में 16.88 की आबादी प्रभावित हुई है। मैदानी इलाकों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र में खासा ज्यादा नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूड़ी ने इस बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को एक पत्र भेजा है। बारिश न होने की वजह से देवभूमि उत्तराखंड इस वर्ष भयंकर सूखे की चपेट में है। अब तक का आंकलन बता रहा है कि प्रदेशभर में 34 तहसीलों के 5131 गांवों में फसलें बुरी तरह से प्रभावित हुईं हैं। अभी जनपदों से विस्तृत ब्योरा तैयार करवाया जा रहा है। इन हालात से सरकार खासी चिंतित है। राज्य सरकार अपने स्तर से हरसंभव उपाय कर रही है। अब निगाहें केंद्र सरकार की ओर हैं। मुख्यमंत्री श्री खंडूड़ी ने अब केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को एक पत्र भेजा है। इसमें केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया गया है कि सूबे में सूखे की स्थिति का आंकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजी जाए। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुभाष कुमार ने पत्र भेजे जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया है कि राज्य में नवंबर माह से ही बारिश नहीं हुई है। इससे यहां सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत पचास फीसदी नुकसान होने की स्थिति में ही राज्य के सूखाग्रस्त माना जाता है। यहां तो हालात इससे भी ज्यादा खराब हो गए हैं। प्रदेश की लगभग 34 तहसीलों में 85 फीसदी से ज्यादा फसलें नष्ट हो गईं हैं। पर्वतीय इलाकों में तो हालात और भी बदतर हैं। फसलों को 86 फीसदी तक नुकसान हुआ है। ऐसे में राज्य को केंद्र सरकार से ज्यादा मदद की दरकार है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि राज्य में सूखे की स्थिति का आंकलन करने के लिए एक केंद्रीय टीम भेजी जाए। केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र सरकार से मदद मिलती है।

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