Friday, 3 April 2009

दोहन से बुरांश का अस्तित्व खतरे में

Apr 03, नई टिहरी (टिहरी गढ़वाल)। अपनी खूबियों व औषधीय गुणों के कारण राज्य वृक्ष बुरांस का अस्तित्व खतरे में है। लगातार दोहन से बुरांस के जंगल धीरे-धीरे सिमटते जा रहे है। बुरांस के फूलों से बने जूस में अनेक औषधीय गुण मौजूद है। इन्हीं गुणों के कारण बुरांस के जूस की मांग बढ़ती जा रही है। इससे जहां बुरांस के फूलों का अनियंत्रित दोहन हो रहा है, वहीं इसके लिए अभी तक कोई नीति नहीं बनी गई है। लगातार फूलों की दोहन से जहां नई पौध उगना बंद हो गई है, वहीं पेड़ों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पहाड़ में भले ही बुरांस से लोगों की आजीविका बढ़ी हो पर इसके दोहन से पर्यावरणीय खतरा पैदा हो गया है। पादप विशेषज्ञों प्रेम सिंह चौहान का कहना है कि बुरांस की पूरी दुनिया में 850 प्रजातियां है, जिनमें से भारत में 80 प्रजातियां है। पांच प्रजातियां हिमालयी क्षेत्र में उगती है। बुरांस की सबसे महत्वपूर्ण प्रजाति रोडो डेनड्रोन आरपोरिया है। अपने गुणों और औषधीय उपयोगिता के चलते इसका लगातार दोहन हो रहा है। बुरांस के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए समय-समय पर वन विभाग व मंत्रालय को भी लिखा गया, लेकिन वन अधिनियम में फूलों के दोहन को रोकने का प्रावधान न होने से इसका गलत फायदा उठाया जा रहा है।

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