Sunday, 5 April 2009
अरमान पर भाड़ी न पड़ जाए फरमान
गढ़वाल विवि ने स्ववित्त पोषित कालेजों में प्रवेश पर फिलहाल लगाई रोक
देहरादून, : गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर से हाल में जारी किए गए फरमान से यूपीएमटी की प्रवेश परीक्षा प्रभावित हो सकती है। प्रदेश के ग्यारह मेडिकल कालेजों में विभिन्न स्नातक उपाधियों के लिए यूपीएमटी के जरिए छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इनमें नौ कालेज गढ़वाल विवि से संबद्ध हैं। विवि ने पिछले सप्ताह एक फरमान में सभी स्ववित्त पोषित कालजों में प्रवेश पर रोक लगाई है। अभी यह साफ नहीं है कि इन कालेजों में कब तक प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। प्रदेश में एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस व बीएचएमएस की उपाधियों के लिए सरकारी, सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित संस्थानों की संख्या ग्यारह है। इन कालेजों में सरकारी कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए शासन यूपीएमटी के जरिए छात्र चुनता है। ग्यारह कालेजों में से तीन सरकारी, एक सहायता प्राप्त और सात स्ववित्त पोषित हैं। इनमें से नौ कालेज गढ़वाल विवि से और दो कुमाऊं विवि से संबद्ध हैं। इन कालेजों की कुल 760 सीटों में से 505 सरकारी कोटे की हैं। इनमें से 610 सीटों पर प्रवेश देने वाले कालेज गढ़वाल विवि से संबद्ध है। गढ़वाल विवि से संबद्ध स्ववित्त पोषित कालेज में एमबीबीएस की 35, बीएएमएस की 50, बीडीएस की 100 सीटों के लिए छात्र प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। वहीं, कुमाऊं विवि से संबद्ध सहायता प्राप्त एक कालेज में एमबीबीएस की 85 और स्ववित्त पोषित एक कालेज में बीएचएमएस की 25 सीटों के लिए छात्र यूपीएमटी की परीक्षा में शामिल होते हैं। सरकारी कालेज की बात करें तो प्रदेश में एमबीबीएस के लिए एकमात्र श्रीनगर स्थित कालेज ही है, जो अभी मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से अनुमति मिलने का इंतजार कर रहा है। बीएएमएस के लिए हरिद्वार स्थित दो सरकारी कालेज हैं, जिनमें 110 छात्रों को प्रवेश मिलेगा। बीडीएस और बीएचएमएस के लिए कोई सरकारी कालेज नहीं है, इसमें प्रवेश लिए छात्रों के पास स्ववित्त पोषित कालेजों का ही विकल्प है। गढ़वाल विवि ने 24 मार्च को स्ववित्त पोषित कालेजों व संस्थानों को पत्र जारी कर कहा कि उनकी संबद्धता रखने या न रखने को लेकर दिशा निर्देश तय किए जाने तक कोई भी कालेज या संस्थान नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं करेगा। विवि द्वारा जारी पत्र मेडिकल की शिक्षा देने वाले संस्थानों को भी मिले हैं। उधर, शासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 31 मई से पहले यूपीएमटी की परीक्षा कराने जा रहा है। ऐसे में जब केवल सरकारी या अन्य विवि से संबद्ध कालेजों में ही प्रवेश संभव होगा तो इसका प्रवेश परीक्षा पर प्रभाव पड़ना तय है। उधर, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कालेज के निदेशक अश्वनी कांबोज का कहना है कि विवि परीक्षा का आयोजन करता है, प्रवेश शासन और कालेज के बीच का मामला है। उन्होंने कहा कि प्रवेश परीक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। यदि गढ़वाल विवि संबद्धता नहीं देता है तो किसी अन्य विवि से सरकार संबद्ध कराएगी। छात्रों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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