Sunday, 12 April 2009

तीर्थयात्रियों को मिलेंगे सजावटी पत्थर

हाथ में अगर हुनर हो तो पत्थर भी आजीविका का आधार बन सकते हैं। काशी में कंकर-कंकर में शंकर की कहावत को चरितार्थ करते हुए हिमालय जड़ी बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी ने यमुनोत्री, गंगोत्री और काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद के साथ गंगा भागीरथी के पत्थरों को सजाकर श्रद्धालुओं को उपल4ध कराने का बीड़ा उठाया है।यमुनोत्री और गंगोत्री तीर्थ पर देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को स्थानीय कृषि उत्पादों से तैयार प्रसाद और यहां तैयार धूप और अगरब8ाी आदि पूजा-सामग्री उपल4ध कराने की मुहिम में जुटे हिमालय जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान ने अब प्रसाद के पैकेज में सजावटी पत्थर भी शामिल करने का निर्णय लिया है। संस्था के सचिव द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि हिमालय के पत्थर भी पूज्य हैं। इन पत्थरों को कला के द्वारा सजा कर बाहरी क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को एक यादगार तोहफे के तौर पर दिया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।इस संबंध में महाविद्यालय में चित्रकला विषय की छात्राओं के साथ बैठक कर उन्होंने अपनी कला को रोजगार के तौर पर इस्तेमाल करने की अपील की। विभागाध्यक्ष डा. सुनीता गुप्ता ने कहा कि इस कार्यक्रम से छात्राओं को अ5यास एवं प्रतिभा निखारने के साथ ही रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने इसमें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। इस मौके पर ममता, अमृता, शोभा, पूनम, शीला, अमित, मनोज, आशा, इंद्रमणी, गोपाल आदि मौजूद थे।

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