Monday, 2 March 2009

विद्युत उत्पादन गिरा, त्राहि-त्राहि

, हल्द्वानी: गर्मी का आगाज होते ही ऊर्जा प्रदेश में बिजली का संकट खड़ा हो गया है। मांग एवं उत्पादन में भारी अंतर को पाटने के लिए रोस्टिंग का सहारा लिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से की जा रही बैंकिंग भी फिलहाल हालात काबू करने में निरर्थक साबित हो रही है। उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश भी कहा जाता है। इसकी वजह है यहां बड़ी संख्या में नदियां व उनका जल स्तर काफी होना। लेकिन गर्मी की दस्तक से पहले ही प्रदेश में फिर से संकट गहराने लगा है। इस समय प्रदेश की विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं से आठ मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि मांग करीब तिगुनी 22 एमयू बनी हुई है। यह स्थिति पखवाड़े भर से भी अधिक समय से चल रही है। ऐसे में रोस्टिंग को सहारा लेकर आपूर्ति बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं। ऋषिकेश कंट्रोल रूम से बारी-बारी अलग क्षेत्रों में रोस्टिंग की जा रही है। कंट्रोल रूम सूत्रों के मुताबिक इस समय राज्य में विद्युत उत्पादन सभी परियोजनाओं को मिलकर करीब आठ मिलियन यूनिट है, जबकि इसकी सापेक्ष मांग तिगुनी है। इसकी बड़ी वजह नदियों का गिरता जल स्तर है। ऐसे में रोस्टिंग अनिवार्य हो गयी है। हालात पर काबू पाने के लिए वर्तमान में बीएसएस (दिल्ली) एवं गुजरात से बिजली बैकिंग के माध्यम से ली जा रही है ताकि उत्पादन में आई कमी को पूरा किया जा सके। पावर कारपोरेशन (कुमाऊं) के महाप्रबंधक पीसी पंत का कहना है कि इस समय उत्पादन में कमी से ट्रांसफार्मरों एवं लाइनों के लॉस होने का खतरा बढ़ जाता है। इसको देखते हुए रोस्टिंग के साथ-साथ शटडाउन का भी सहारा लिया जा रहा है।

1 comment:

  1. Why dont our govt think on the way of other developed countries where 24X7 supply of electrcity is available. We are stable enough to maintain this on our own resources but still none of them are systematic to overcome from this problem.

    MPandey
    Florida, USA

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