Friday, 6 March 2009

फ्योंली के फूल अब राजधानी में भी

देहरादून पर्वतीय लोकजीवन में गहराई तक रचे-बसे फ्योंली के फूल अब पहाड़ी के खेत की मेढ़ों और रास्तों में ही नहीं, राजधानी में भी मुस्कान बिखरेंगे। इसके लिए उद्यान महकमे ने मुहिम शुरू कर दी है। प्रयास सफल हुए तो फ्योंली जल्द ही तराई व भाबर के इलाकों में इठलाती नजर आएगी। इसके पीछे ध्येय है कि लोगों का पहाड़ के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़े और वे यहां की लोकसंस्कृति से रूबरू हो सकें। ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही पहाड़ में घर-आंगन, खेतों की मेढ़ों व रास्तों आदि में इठलाते फ्योंली के फूल बरबस ही हर किसी का ध्यान खींचते हैं। फ्योंली नई उमंग एवं उल्लास का प्रतीक हंै। ये फूल चट्टानों, पहाड़ों पर खिलकर हर स्थिति में मुस्काते रहने का संदेश देते हैं। इसका पहाड़ की लोक संस्कृति से अटूट रिश्ता है। फ्योंली के पहाड़ के लोकजीवन में गहराई तक रचे-बसे होने का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि जब भी पहाड़ के सौंदर्य की बात होती है, उसमें फ्योंली का जिक्र भी आता है। लोकगीतों में भी इसे पर्याप्त स्थान मिला है। कहना न होगा कि फ्योंली पहाड़ का प्रतिनिधि फूल है। जंगली फूलों की श्रेणी में आने वाली फ्योंली अब पहाड़ों ही नहीं, बल्कि सूबे के मैदानी इलाकों में भी आभा बिखेरेगी। इसके लिए उद्यान विभाग ने कोशिशें आरंभ कर दी हंै। पहल की गई है राजधानी के सर्किट हाउस से। प्रथम चरण में वहां दस गमलों में फ्योंली के पौधे लगाए गए हैं। जल्द ही इसे व्यापक स्वरूप देने की योजना है। यदि प्रयास रंग लाए तो एक से छह हजार फुट तक की ऊंचाई पर पाई जाने वाली फ्योंली भाबर व तराई के इलाकों में भी खिलेगी। उद्यान निदेशक डा.बीपी नौटियाल बताते हैं कि फ्योंली उन फूलों में शामिल है, जो फोक बेस्ड हैं। इसीलिए इसे सूबे के मैदानी इलाकों में उगाने का प्रयास शुरू किया गया है, ताकि अधिकाधिक लोग इसका करीब से दीदार करने के साथ ही इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकें। यही वह फूल है जो बसंत से शुरू होकर करीब नौ माह तक जगह-जगह खिला रहता है।

Thursday, 5 March 2009

उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षाएं आज से

रामनगर: उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाएं गुरुवार से शुरू हो रही हैं। इसमें 264792 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन के लिए राज्य में 13 मुख्य और 18 उप संकलन केंद्र बनाए हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए राज्य में 1125 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर सुरक्षा के लिए शासन ने जिला प्रशासन को विशेष निर्देश दिए हैं। बीते वर्ष कुछ परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में हुई चूक से नसीहत लेकर बोर्ड ने ऐहतियात बरती है। अब हर केंद्र पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को दो कस्टोडियन रहेंगे। संवेदनशील व अति संवेदनशील केंद्रों पर सुरक्षा बंदोबस्त कड़े रहेंगे। डीईओ को इन केंद्रों की वीडियोग्राफी कराने को कहा गया है। इस बार हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की तादाद में तकरीबन तीन हजार का इजाफा हुआ, जबकि इंटर में यह आंकड़ा करीब 24 हजार घट गया है।

सचिवालय के अनुभाग अधिकारियों, निजी सचिवों व समान संवर्ग पदों को उच्च वेतनमान

देहरादून, सरकार ने आचार संहिता के दायरे में आने से पहले सचिवालय के अनुभाग अधिकारियों, निजी सचिवों व समान संवर्ग पदों को उच्च वेतनमान थमा दिया है। वित्त महकमे ने यह भी साफ किया है कि केंद्र से समानता सिर्फ वेतन में ही नहीं, बल्कि जवाबदेही व कामकाज में भी होनी चाहिए। राजकीय कर्मचारियों, शिक्षकों, बिजली कर्मियों व निगम कर्मियों को छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक उच्च वेतन स्वीकृत किया जा चुका है। इस कड़ी में सचिवालय कार्मिकों को भी तोहफा दिया गया है। वित्त प्रमुख सचिव आलोक जैन ने बताया कि सरकार ने वेतन समिति के चौथे प्रतिवेदन को स्वीकार कर लिया। लिहाजा, उत्तराखंड सचिवालय व इसके समकक्ष विभागों के अनुभाग अधिकारियों, निजी सचिवों व समान संवर्गो के पदों के लिए ग्रेड वेतन में इजाफा किया है। उनके मौजूदा 6500-10500 वेतनमान को संशोधित कर 7500-12000 किया गया है। उनका ग्रेड वेतन 4800 होगा। चार साल पूरा करने पर उन्हें संशोधित वेतनमान 8000-13500 दिया जाएगा। इस अवधि के लिए ग्रेड वेतन 5400 होगा। उच्चीकृत वेतन एक अप्रैल, 2009 से दिया जाएगा। यही नहीं, सरकार ने उच्चीकृत वेतनमान के साथ कुछ शर्ते भी जोड़ी हैं। इसके मुताबिक राज्य सचिवालय का कंप्यूटरीकरण केंद्रीय सचिवालय के कंप्यूटरीकरण की तर्ज पर करने को कहा गया है। सचिवालय कर्मियों से गुणवत्तापूर्ण कार्य, जवाबदेह प्रशासन की अपेक्षा की गई है। अनुभाग अधिकारियों को पत्रावलियों समेत तमाम काम कंप्यूटर पर करने, अनुभागों का रेफरेंस रजिस्टर कंप्यूटर पर रखने, अधीनस्थों के कार्य का हर माह मूल्यांकन और इसकी रिपोर्ट सचिव व अपर सचिव को देनी होगी। निजी सचिवों को कंप्यूटर पर कार्य करने में दक्ष होने के साथ ही ई-मेल व इंटरनेट की अच्छी जानकारी रखनी होगी। अधिकारी की गैर मौजूदगी में उन्हें विभागों व अनुभागों से तालमेल रखना होगा।

संबद्धता में अब नहीं झंझट

देहरादून: कोटद्वार में प्रस्तावित सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर एंड जियोइनफोरमेटिक्स को एफिलिएशन के लिए ज्यादा हाथ-पांव नहीं मारने पड़ेंगे। इंस्टीट्यूट की स्थापना करने वाली भारत सरकार कीसंस्था नेशनल इंस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट (एनआईआरडी) को जल्द डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलेगा। भारत सरकार के ग्राम्य विकास मंत्रालय की संस्था एनआईआरडी की पहल पर राज्य के खाते में एक और प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षण संस्थान जुड़ गया है। संस्थान की स्थापना और संचालन पर होने वाला पूरा खर्च एनआईआरडी उठाएगी। राज्य सरकार इस संस्था को भूमि मुहैया करा रही है। इसके लिए कोटद्वार-भाबर क्षेत्र में करीब 60 एकड़ भूमि अब तक चिन्हित की जा चुकी है। इस संस्थान को एफिलिएशन के लिए राज्य अथवा केंद्र के विश्र्वविद्यालयों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। संस्थान को एनआईआरडी से ही एफिलिएशन मिलेगा। यूजीसी से दो माह के भीतर ही एनआईआरडी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल होगा। इस बाबत संस्था के अधिकारियों ने राज्य सरकार को सूचित किया है। यही नहीं, संस्थान का ढांचा, पाठ्यक्रमों की संख्या, फैकल्टी समेत विभिन्न मामलों पर एनआईआरडी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यह रिपोर्ट जल्द सरकार को सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक कोटद्वार में कृषि शिक्षा संस्थान की स्थापना का रास्ता साफ हो चुका है। राज्य को इस रिपोर्ट का बेताबी से इंतजार है। इसमें संस्थान का पूरा ब्ल्यू प्रिंट दर्ज होगा।

प्रशासनिक पद छोड़ो या लो उच्च वेतन

देहरादून सरकारी शिक्षकों और प्रधानाचार्यो को पदोन्नति के बाद शैक्षणिक कैडर से प्रशासनिक कैडर में छलांग लगाना मुमकिन नहीं होगा। केंद्रीय उच्च वेतन का लाभ उठाने वालों के लिए सरकार ने सिर्फ शैक्षणिक कैडर का रास्ता ही खुला छोड़ा है। सरकार ने शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों व प्रधानाचार्यो को केंद्र के समान वेतन देने की मंजूरी तो दी है, साथ में शैक्षणिक व प्रशासनिक कैडर अलग-अलग कर दिए हैं। शिक्षा महकमे में पदोन्नति के रूप में शिक्षकों व प्रधानाचार्यो को अब दो लाभ एक साथ नहीं मिलेंगे। शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान संबंधी आदेश में उच्चीकृत वेतनमान सिर्फ शैक्षणिक कैडर पर ही लागू किया गया है। केंद्र सरकार की व्यवस्था भी कमोवेश यही है। राज्य ने वेतन के साथ कार्यप्रणाली में भी अब केंद्र के साथ समानता की प्रणाली स्वीकार कर ली है। इससे महकमे के सामने नया संकट भी खड़ा हो गया है। अभी विकासखंडों में वरिष्ठ प्रधानाचार्य बीईओ का जिम्मा संभाले हुए हैं। पुरानी व्यवस्था में शिक्षकों व प्रधानाचार्यो को शैक्षणिक व प्रशासनिक कैडरों का समान रूप से लाभ उठाने की छूट मिली थी। इसके चलते ही अभी तक राजकीय इंटर कालेजों के प्रधानाचार्यो को बेसिक व माध्यमिक में एडीईओ के साथ ही डीईओ की जिम्मेदारी से नवाजा जा रहा है। हाल ही में हुए तबादलों में भी कुछ अफसरों को इंटर कालेज प्रधानाचार्य व प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत को प्रशासनिक पदों पर भेजा गया है। अब उच्च वेतनमान सिर्फ शैक्षणिक कैडर का विकल्प लेने पर ही मुहैया होगा। अभी तक प्राइमरी शिक्षक जूनियर हाईस्कूल हेडमास्टर के बाद उप खंड शिक्षा अधिकारी के कैडर में भी जाते रहे हैं। प्राइमरी शिक्षा के राजकीयकरण के बाद उनके लिए इंटर कालेज प्रधानाचार्य और फिर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) समेत विभिन्न प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति का विकल्प है। माध्यमिक शिक्षक भी हाईस्कूल प्रधानाध्यापक व इंटर कालेज प्रधानाचार्य पद से पदोन्नति के बाद प्रशासनिक पदों को संभाले हुए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस नई समस्या के लिए शासन और महकमा कारगर समाधान ढूंढ नहीं पाया है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से फिलहाल नई अथवा मौजूदा पुरानी व्यवस्था से छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है। चुनाव के बाद ही इस बारे में निर्णय लिया जा सकेगा।

हाइवे का निर्माण रुकवाया

उत्तरकाशी, : वैकल्पिक गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से मांडौं गांव पर बढ़ रहे भूस्खलन के खतरे व रास्तों के टूटने से आक्रोशित गांव की महिलाओं ने निर्माण कार्य रोककर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने मांग की कि गांव की सुरक्षा इंतजाम के बाद सड़क निर्मित की जाए। वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत निर्माणाधीन वैकल्पिक गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ेथी-तेखला के निर्माण के चलते मांडौं गांव पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा गांव के ऊपर से बहकर आ रही कर्मनाशा नदी पर मार्ग निर्माण का मलबा डालने से बरसात में गांव को खतरा हो सकता है। इसके अलावा गांव के रास्ते सड़क निर्माण से ध्वस्त हो गए हैं। ग्रामीणों ने बीआरओ के बुल्डोजर रोक कर निर्माण बंद करा दिया।

अब कार्निवल भी निरस्त

गोपेश्वर, राज्य सरकार द्वारा सैफ गेम्स के आयोजन में वर्ष 2007 से लेकर अब तक तैयारी पूरी नहीं कराई गई, जिसकी वजह से इसके आयोजन की तिथि इस वर्ष दिसंबर तक बढ़ानी पड़ी, वहीं मार्च में होने वाले कार्निवल भी अब रद्द करना पड़ा है। इस पूरे समय अंतराल में राज्य सरकार आयोजन से जुड़े 50 फीसदी से अधिक के कार्यो को पूरा नहीं कर पाई। गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से चल रही हीलाहवाली के बाद शासन-प्रशासन को इन खेल आयोजन तैयारियों की याद भले ही आई हो लेकिन तब बहुत देर हो चुकी थी। आगामी दो से सात मार्च तक औली में बहुप्रतिक्षित विंटर सैफ गेम्स आयोजन को तब करारा झटका लगा जब गत सात जनवरी को राजधानी देहरादून में इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन आईओए के महासचिव रणधीर सिंह के सम्मुख राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने आयोजन की तैयारियों की वस्तु स्थिति सामने रखी। इससे पूर्व ही राज्य सरकार ने तैयारियां पूरी न हो पाने के चलते मार्च माह में औली में नंदा देवी इंटरनेशनल स्नो कार्निवल का आयोजन किए जाने की घोषणा की। इसके बाद जब फिर आयोजन से जुड़े विभागों को लगा कि उक्त कार्निवल के लिए भी तैयारियां पर्याप्त नहीं हैं तो फिर अभी कुछ समय पहले उसे भी निरस्त कर दिया गया। निरस्त होने का कारण गोपेश्वर: औली में बहुप्रतीक्षित विंटर सैफ गेम्स दक्षिण एशियाई शीत खेल आयोजन के बार-बार निरस्त होने के पीछे अब तक मुख्य वजह आधी अधूरी तैयारियां ही रही हैं। पूर्व में जहां मौसम के अनुकूल न होने के चलते इस आयोजन को निरस्त किया जाता रहा वहीं इस वर्ष मार्च में इस आयोजन को लेकर पहले से ही यह व्यवस्था की जा रही थी कि मौसम के साथ न देने के बाद भी कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनें स्थापित कर इससे निपटा जा सकेगा। इसके बाद लापरवाही का आलम यह रहा कि कृत्रिम बर्फ बनाने की मशीनों की स्थापना तो दूर अन्य कई प्रकार की मशीनें भी नहीं लग पाई। आयोजन निरस्त होने के पीछे आधारभूत तैयारियां भी निर्धारित समय तक पूरी न हो पाना भी मुख्य वजह रही। आयोजन तैयारियों की स्थिति गोपेश्वर: औली में वर्तमान में निर्माण कार्यो की स्थिति दयनीय बनी हुई है। अभी तक जहां स्की स्लोप ही बनकर तैयार नहीं हो पाया वहीं कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए पानी की योजना पर भी काफी समय लगने की संभावना बनी हुई है। उक्त योजना का मुख्य टैंक ही अभी तक नहीं बन पाया है। इसके अलावा आवासीय भवनां की स्थिति भी अभी शुरूआती दौर में चल रही है। अब होंगे कार्य गोपेश्वर: विंटर सैफ गेम्स आयोजन को लेकर वर्तमान में मुख्य रूप से जो कार्य अभी तक अधूरे हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण स्की स्लोप का निर्माण है जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए पानी की योजना भी अभी तक तैयार नहीं हो पाई है साथ ही इस योजना का मुख्य टैंक भी अभी तक अधूरा ही बन पाया है। इसके अतिरिक्त आवासीय भवन भी अभी तक पूरे नहीं बन पाए हैं।

बर्लिन में होगी पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड की ब्रांडिंग

-प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचकारी एडवेंचर, लुभावने वन्यजीव व आध्यात्मिक आनंद -सूबे के पर्यटन मंत्री व अपर सचिव पर्यटन भी करेंगे मार्ट में शिरकत देहरादून, : जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हो रहे इंटरनेशनल टूरिज्म बोर्स (अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट) में उत्तराखंड भी उन बिरले नामों में शुमार होगा, जो पर्यटन व्यवसाय के अंतर्राष्ट्रीय 'शोकेस' में एक कंप्लीट पैकेज के रूप में नजर आएंगे। कंप्लीट पैकेज इसलिए कि पर्यटन व्यवसाय के अंतर्राष्ट्रीय महारथियों को इस छोटे से पहाड़ी राज्य में प्रकृति का नैसर्गिक सौंदर्य, एडवेंचर टूरिज्म, वाईल्ड लाइफ व आध्यात्मिक शांति जैसे सभी प्रमुख आकर्षण एक साथ मिलेंगे। यही कारण है कि 'आईटीबी बर्लिन-09' में उत्तराखंड की ब्रांडिंग के लिए प्रदेश ने 'प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचकारी एडवेंचर, लुभावने वन्यजीव व आध्यात्मिक आनंद' को अपनी थीम बनाया है। 11 से 14 मार्च तक बर्लिन में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में उत्तराखंड समेत देश के करीब बीस राज्य शिरकत करेंगे। देश के इन सभी राज्यों के स्टॉल केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के 'इनक्रेडिबल इंडिया' के बैनर तले इंडिया पवेलियन में मौजूद होंगे। केंद्रीय पर्यटन सचिव सुजीत बनर्जी 11 मार्च को इंडिया पवेलियन का उदघाटन करेंगे, जबकि 12 मार्च को 'इंडिया नाइट' का आयोजन होगा। प्रदेश की ओर से पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत व अपर सचिव राजीव भरतरी इस मार्ट में भाग लेंगे। पर्यटन मंत्री श्री पंत का कहना है कि यह विश्व का सबसे बड़ा पर्यटन मार्ट है, जिसमें 200 से ज्यादा देशों के भाग लेने की उम्मीद है। लिहाजा, यह विश्व समुदाय के समक्ष उत्तराखंड की ब्रांडिंग का एक बेहतरीन मौका भी है। चार दिवसीय मार्ट में पहाड़ी सूबे में मौजूद मोक्षदायिनी गंगा, पर्वतराज हिमालय, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वाइल्ड लाईफ, आध्यात्मिक शांति की ब्रांडिंग कर ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी। इस दौरान ट्रैवल-ट्रेड से जुड़े विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों व मीडिया के साथ भी संवाद किया जाएगा। साथ ही, सूबे में मौजूद पर्यटन के विविध रूपों पर आधारित डाक्युमेंटरी भी दिखाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की चार निजी संस्थाएं भी मार्ट में शिरकत करने जा रही हैं। इनमें से तीन संस्थाएं रामनगर (कार्बेट नेशनल पार्क) व एक सरोवर नगरी नैनीताल से है।

ासूम की हत्या के विरोध में बाजार बंदपीपलकोटी

ासूम की हत्या के विरोध में बाजार बंदपीपलकोटी, गोपेश्वर और चमोली के बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा गोपेश्वर। चमोली में व्यापारी की दो वर्षीय बच्ची के अपहरण के बाद उसकी बेरहमी से हत्या पर मंगलवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग जहां सड़कों पर उतरे वहीं व्यापारियों ने बाजार बंद रख अपना विरोध जताया।गोपेश्वर, पीपलकोटी और चमोली में बाजार बंद रहे। प्रदर्शनकारियों में व्यापारी नेता भगवती प्रसाद भट्ट, पूर्व विधायक डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, पालिकाध्यक्ष प्रेम बल्लभ भट्ट, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हयात सिंह बिष्ट, कुलदीप वर्मा, अतुल शाह, संदीप चमोली, सतीश सेमवाल, देवी जोशी, पुरूषोत्तम आदि शामिल थे।

टिहरी जिले में बसाए नगर नहीं हो पाए विकसितनई टिहरी।

महाराजा सुदर्शन शाह ने जब टिहरी रियासत की टिहरी में नींव रखी थी, तब ज्योतिषियों ने उस नगर की उम्र दो सौ साल से कम आंकी थी। आखिरकार हुआ भी वही। टिहरी दो सौ वर्ष का जीवन पूरा नहीं कर पाया और बांध की झाील में हमेशा के लिए जलसमाधिस्थ हो गया। टिहरी रियासत के अधीन जितने भी नए शहरों का निर्माण किया गया, आश्चर्यजनक रूप से वह 5ाी बहुत अधिक विकसित नहीं हो पाए।टिहरी के महाराजाओं ने कीर्तिनगर, प्रतापनगर और नरेंद्रनगर में कभी राजसी वैभव की शान रही, लेकिन अब यह नगर अपनी चमक खो गए। कीर्तिनगर समीपवर्ती श्रीनगर की छाया से उभर नहीं पा रहा है, तो टिहरी रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा प्रतापनगर 5ाी लंबगांव से प्रतिस्पद्र्धा नहीं कर पा रहा है। वर्षों तक रियासत की राजधानी और बाद में जिला मु2यालय रहे नरेंद्रगनर की स्थिति भी अलग नहीं है। जिला मु2यालय के नई टिहरी शि3ट होने के बाद यहां 5ाी बाहरी आवाजाही कम हो गई है। सामाजिक अध्येता आरएस रावत कहते हैं कि नरेंद्रनगर, प्रतापनगर और नई टिहरी ऐसे स्थानों पर बसाए गए हैं, जहां निकट में गांवों की मात्रा नगण्य है। किसी भी शहर के विकास के लिए निकटवर्ती क्षेत्रों में ऐसी आबादी होनी जरूरी है, जिसकी निर्भरता उस शहर पर हो, लेकिन टिहरी में बसाए गए शहरों में ऐसा न होने से वह विकास की गति नहीं पकड़ पाए।

पौड़ी परिसर में बीएड शुरूपौड़ी।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के पौड़ी परिसर में बीएड पाठ्यक्रम मंगलवार से शुरू हो गया है। पाठ्यक्रम के शुभारंभ समारोह में विद्यार्थियों से परिसर में शिक्षा का बेहतर माहौल बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया गया। पहले दिन विद्यार्थियों को बेसिक जानकारियों के साथ-साथ पाठ्यक्रम के बारे में बताया गया।परिसर के कला संकाय भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बीएड पाठ्यक्रम का शुभारंभ बिड़ला परिसर की बीएड विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो किरण पांडे ने किया। उन्होंने कहा बीएड के विद्यार्थी परिसर में शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने बीएड के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम और बीएड से संबंधित कई जानकारियां भी दी। कार्यक्रम में पौड़ी परिसर के परिसर निदेशक प्रो एन एस बिष्ट और पूर्व परिसर निदेशक प्रो जेके गोदियाल ने परिसर में इस पाठ्यक्रम की शुरुआत को छात्रों के लिए एक उपल4िध बताया। बीएड पाठ्यक्रम के प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो टीपी पंत ने बताया परिसर में इस पाठ्यक्रम के लिए पुस्तकालय और प्रयोगशाला इत्यादि पूरी व्यवस्था है। छात्रावास की सुविधा भी है। बताया परिसर के लिए निर्धारित १०० सीटों में से ९२ अ5यर्थी आ चुके हैं। आठ सीटों पर अ5यर्थी आने अभी बाकी है। इस मौके पर परिसर के सभी शिक्षक कर्मी मौजूद थे।

हास-परिहास का अनूठा संगम है होली स्वांग

नैनीताल: होली के गीतों की गूंज घर-घर सुनाई देने लगी है। बैठकी होली पूरे शबाब पर है। होल्यारों का जोश भी देखते ही बनता है। होली की अनूठी विधा है महिला स्वांग। समाज में व्याप्त अच्छाई व बुराईयों को विभिन्न चरित्रों के माध्यम से महिलाएं स्वांग के जरिए दर्शाती हैं। बसंत के आगमन पर प्रकृति में चारों ओर नाना प्रकार के रंग-बिरंगे फूल अपनी होली तो खेल चुके हैं। अब इंतजार है सब लोगों को अपनी होली का। बरसाने (मथुरा) की लठमार होली जहां विश्र्व भर के लोगों को आकर्षित करती है वहीं कुमाऊं की होली भी अपनी विशिष्ट शैली के लिए लोकप्रिय हैं। कुमाऊं में जहां खड़ी व बैठकी होली प्रमुख रूप से धमार, खमाज, पीलू, देश, जैजेवंती व विहाग जैसे रागों पर आधारित होती है वहीं होली की अनूठी परम्परा समेटी महिला स्वांग होली का अपना ही आनंद है। नैनीताल के रंगकर्मी बृजमोहन जोशी के अनुसार महिला स्वांग होली पर महिलाओं का वर्चस्व नकारा नहीं जा सकता। घरों पर आयोजित होने वाली महिलाओं की होली में महिलाएं सामाजिक घटनाक्रमों, राजनीतिक व प्रसिद्ध व्यक्तियों का चरित्र हास्य व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत करती हैं। दहेज प्रथा, शराबी पति, महंगाई, बाल-विवाह आदि मुद्दे भी होली पर स्वांग के माध्यम से उठाए जाते हैं। गौर्दा, गुमानी पंत व मौलाराम जैसे लोकप्रिय जन कवियों ने अपनी होली रचनाओं में स्वांग का प्रयोग किया है। उत्तराखंड के लोकप्रिय जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा महिला स्वांग होली पर कहते हैं कि होली रंगों के पर्व के साथ अभिव्यक्ति का पर्व भी है। होली पर महिलाएं विभिन्न सामाजिक चरित्रों को स्वांग के जरिए उजागर करती हैं। गिर्दा बताते हैं कि स्वांग को होली थेटर भी कहते हैं। स्वांग में महिलाएं पुरुष चरित्रों को प्रमुखता से उठाती हैं। नैनीताल में विगत 30 सालों से महिला स्वांग होली को समर्पित पार्वती बिष्ट कहती हैं कि स्वांग में मुख्यत: वर्तमान समय की समस्याओं को व्यंग्य व चरित्रों के माध्यम से पेश किया जाता है। इस समय बाबा रामदेव, अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा, लालू यादव, सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन, ओसामा बिन लादेन के चरित्र बेहद लोकप्रिय हैं। पार्वती बिष्ट के अनुसार युवा पीढ़ी का स्वांग के प्रति रुझान न होना चिंता का विषय है।

नलिनी में फिर घुसा गुलदार

कालाढुंगी: महिला को मौत के घाट उतारने वाला गुलदार बीती रात नलनी गांव में फिर घुस आया। उसने बछिया को निवाला बनाया। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने गुलदार को मारने की मांग को लेकर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। बीते दिवस आदमखोर गुलदार ने नलिनी गांव की कौशल्या देवी को मौत के घाट उतार दिया था। ग्रामीण जब महिला का शव उठाने गये, तो गुलदार उनपर भी दहाड़ने लगा। लिहाजा ग्रामीणों ने फायरिंग कर शव को उठाया। इसका आक्रोश अभी ठंडा भी नहीं हुआ था,कि बीती रात गुलदार गांव में ही घुस आया। उसने कौशल्या द्वारा दान की गयी बछिया को निवाला बना लिया। ग्रामीणों ने सुबह उठकर देखा, तो उन्हें गुलदार के आने की जानकारी हुई। इसके विरोध में ग्रामीणों ने वनविभाग के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया।

फिर मुड़कर नहीं देखा उत्तराखंड

देहरादून उत्तराखंड के लोग अपने सांसदों की तलाश में हैं। जब से वे उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए हैं, लोगों ने उन्हें देखा तक नहीं है। यह बात अलग है कि इन सांसदों की विकास निधि निरंतर आ रही है, लेकिन उसकी बंदरबांट कुछ ऊंची पहुंच वालों के माध्यम से ही हो रही है। कांग्रेस शासनकाल में उत्तराखंड कोटे से पहले कै. सतीश शर्मा उसके बाद सत्यव्रत चतुर्वेदी राज्यसभा के लिए चुने गए थे। राज्यसभा के लिए बाहरी नेताओं को चुने जाने का दबी जुबान में विरोध भी हुआ था, लेकिन हाईकमान के सामने यह नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित हुई। चुने जाने के बाद उन्होंने बड़े-बड़े दावे किए थे। उत्तराखंड के प्रतिनिधित्व की कीमत दिल्ली में चुकाने का वादा करने वाले उत्तराखंड की तरफ एक बार भी लौटकर नहीं आए। हालांकि कांग्रेस नेता रामशरण नौटियाल दावा करते हैं कि सतीश शर्मा दून, उत्तरकाशी तथा टिहरी में कई बार आ चुके हैं। यह तय है कि इन जन प्रतिनिधियों को उत्तराखंड से कोई लेना देना नहीं है। ये सिर्फ हाईकमान की मर्जी से राज्य पर थोपे गए हैं लेकिन जब तक ये उत्तराखंड के जनप्रतिनिधि हैं, इनकी सांसद निधि पर तो उत्तराखंड का हक है। सतीश शर्मा 04-05 में चुने गए थे। इस वित्तीय वर्ष में उनकी निधि से 88.316 लाख रुपये मंजूर हुए थे। इसमें देहरादून को सबसे अधिक 22.90 लाख, टिहरी को 20.80 लाख, उत्तरकाशी को 17.50 लाख, नैनीताल को 11.986 लाख, ऊधमसिंह नगर को 9.58 लाख और चमोली को 5.55 लाख रुपये दिए गए हैं। कन्या कुमारी को 11 लाख दिए गए हैं। वर्ष 05-06 में भी 190.200 लाख रुपये श्री शर्मा की निधि से स्वीकृत हुए हैं। इस वर्ष भी देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी को टॉप प्रायरिटी दी गई। हरिद्वार तथा चमोली जिले को कुछ नहीं मिला, अन्य जिलों के हिस्से कुछ आया है। 06-07 में भी वही कहानी दोहराई गई है। 07-08 में देहरादून के हिस्से कम आया है लेकिन उत्तरकाशी और टिहरी फिर भी आगे रहे हैं। सत्यव्रत चतुर्वेदी 06-07 में राज्य सभा के लिए चुने गए। इस वर्ष उन्होंने 196.9 लाख रुपये मंजूर किए। पौड़ी, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा उनकी सूची में सबसे ऊपर हैं। वर्ष 07-08 में उन्होंने दो करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां दी। नैनीताल, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और हरिद्वार को उन्होंने प्राथमिकता दी।

शहीदों के नाम पर राज्य के स्कूलों का नामकरण

देहरादून, : राज्य के कई राजकीय स्कूलों का नामकरण स्वतंत्रता सेनानियों व कारगिल शहीदों के नाम पर किया गया है। यही नहीं, सरकार ने कई स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों व भवन निर्माण कार्यो के लिए जिलाधिकारियों व शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए हैं। सरकार ने नैनीताल जिले के जीआईसी अमिया का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी नैन सिंह जीआईसी, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोपड़ा नैनीताल का नामकरण कारगिल शहीद मुकेश जीना किया गया है। जिले के अन्य जीआईसी का नामकरण 1008 हेड़ाखान के नाम पर किया गया है। ऊधमसिंहनगर में जीआईसी दिनेशपुर का नामकरण स्वर्गीय चितरंजन राहा के नाम पर किया गया है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार ने कई स्कूलों के नाम परिवर्तन के साथ ही करीब दर्जन से ज्यादा स्कूलों को अतिरिक्त कक्षों व निर्माण कार्यो के लिए जिला योजना व शिक्षा निदेशालय के मदों से वित्तीय सहायता मुहैया कराने और इस संबंध में शासन को दिन में प्रस्ताव मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस फैसले से अब स्कूलों में निर्माण कार्य को लेकर दिक्कतें पेश नहीं आएंगी। सरकार ने बागेश्र्वर में एनसीसी सेंटर खोलने पर सहमति जताई है। यह तय किया है कि इस संबंध में केंद्र सरकार से वार्ता की जाएगी।

दरबार में झंडे का आरोहण 15 को

देहरादून, : द्रोणनगरी में हर साल लगने वाले ऐतिहासिक झंडा मेले की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दरबार साहिब में झंडा 15 मार्च को पंचमी के दिन चढ़ाया जाएगा। झंडा मेले की परंपरा के अनुसार पंजाब की पैदल संगत के लिए 5 मार्च को विहलौलपुर के महंत बियंत दास के नाम का हुक्मनामा बड़ा गांव ले जाया जाएगा, जहां से 7 मार्च को वापसी होगी। 8 मार्च के दिन द्वादशी को श्री महाराज पैदल संगत के स्वागत में सहसपुर स्थित श्री गुरु रामराय इंटर कालेज जाएंगे, जहां भजन-कीर्तन व प्रसाद वितरण के बाद उनकी दरबार साहिब में वापसी होगी। त्रयोदशी के दिन 9 मार्च को श्री महाराज पैदल संगत के स्वागत को कांवली गांव स्थित प्राइमरी स्कूल पहुंचेंगे और इसी दिन संगत का आना आरंभ हो जाएगा। इसके बाद चतुर्दशी व पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाएगा। पड़वा एवं द्वितीय को संगत के दरबार साहिब में पहुंचने के उपरांत वहां गिलाफ की सिलाई होगी। साथ ही दरबार साहिब में अनेक स्थानों पर लंगर चलेंगे।तृतीय को पूर्वी संगत यानि बिजनौर, मुरादाबाद, ज्योतिबाफुलेनगर व ऊधमसिंह नगर के सेवकों का चढ़ावा पुरानी प्रथा के अनुसार किया जाएगा। चौथ को सायंकाल में पूर्वी संगत के मसंदों को श्री महाराज द्वारा प्रसाद, ताबीज एवं आशीर्वाद दिया जाएगा। पंचमी के दिन 15 मार्च को सुबह आठ से नौ बजे के बीच झंडे को उतारकर सेवकों द्वारा दही, घी एवं गंगाजल से स्नान कराया जाएगा। 10 बजे से सादा लिहाफ चढ़ाने को कार्यक्रम आरंभ होगा और दोपहर बाद एक बजे शनील के गलेफ चढ़ाए जाएंगे। अंत में जलादोवाला (पंजाब) निवासी करतार सिंह पुत्र बचन सिंह द्वारा दर्शनी गलेफ चढ़ाया जाएगा। शाम पांच बजे श्री महाराज के हाथों झंडे का आरोहण होगा। 16 मार्च को दिनभर श्री महाराज सेवकों को आशीर्वाद देंगे और 17 मार्च को सेवकों द्वारा पुराना नगर परिक्रमा की जाएगी। 18 मार्च की शाम खुशी का प्रसाद वितरण और 19 को पैदल

एफआरआई के इतिहास से रूबरू होंगे लोग

देहरादून: जल्द ही आप भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई)के चित्रमय इतिहास से रूबरू हो सकेंगे। पुराने रेंजर्स कॉलेज यानी शताब्दी वन विज्ञान केंद्र में एफआरआई प्रशासन एक अनूठी फोटो गैलरी स्थापित कर रहा है। जहां एफआरआई से जुड़े दुर्लभ छाया चित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। शताब्दी वन विज्ञान केंद्र के निदेशक व एफआरआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. ओमकार सिंह ने बताया कि गैलरी के लिए एफआरआई के पुराने संग्रह से फोटो एकत्र की गई हैं। इसी के साथ एफआरआई से जुड़े रहे वन वैज्ञानिकों और अफसरों से भी उनके निजी संग्रहों से फोटो देने का अनुरोध किया गया है। गैलरी में वानिकी से जुड़े छायाचित्र भी प्रदर्शित किए जाएंगे। ओमकार सिंह ने बताया कि पुराने चित्रों को कंप्यूटर की मदद से रिप्रोड्यूस किया जा रहा है ताकि बड़े आकार के फोटो सजाए जा सकें। डॉ. ओमकार सिंह के मुताबिक फोटो गैलरी में लोग एफआरआई के इतिहास की झलक पा सकेंगे। उन्होंने बताया 1878 में परेड ग्राउंड के पास फॉरेस्ट रेंजरों के प्रशिक्षण के लिए कॉलेज बना था। 1884 में ब्रिटिश भारत की सरकार ने उसका अधिग्रहण कर लिया।

बिजली कर्मी व शिक्षक होली में मनाएंगे दिवाली

4 feb-

शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान देहरादून,

: चुनावी बेला पर राज्य के प्राइमरी से माध्यमिक तक हजारों शिक्षकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। राज्य सरकार ने उन्हें केंद्रीय शिक्षकों के समान वेतन देने का आदेश जारी कर दिया है। सरकार ने शिक्षकों को उनकी एक सूत्रीय मांग के मुताबिक वेतन तो दिया है, लेकिन केंद्रीय शिक्षकों की तर्ज पर ही उनकी दक्षता व कार्यकुशलता का आकलन किया जाएगा। इसके लिए उन्हें शैक्षिक स्तर बनाए रखने के कड़े मानकों पर खरा उतरना होगा। अगला उच्चतर वेतनमान देने से पहले नियमित अंतराल में उनकी कार्य क्षमता परखी जाएगी। छठवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में एक जनवरी, 2006 से प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षण संस्थाओं के शैक्षणिक पदों को रिप्लेसमेंट स्केल उच्चीकृत किया गया है। इसका लाभ शिक्षा विभाग, प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगा। वित्त प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने उक्त संबंध में शिक्षा सचिव के लिए आदेश जारी किए हैं। केंद्रीय शिक्षकों की भांति राज्य के शिक्षकों को एक अप्रैल, 2009 से उच्चीकृत वेतनमान स्वीकृत हुआ है। सरकार ने राज्य के शिक्षकों के साधारण, चयन व प्रोन्नत वेतनमान को केंद्रीय शिक्षकों के समान ग्रेड-तीन, ग्रेड-दो व ग्रेड-एक श्रेणी में वर्गीकृत किया है। प्राथमिक शिक्षक के साधारण वेतनमान 4500-7000, चयन वेतनमान 5000-8000 व प्रोन्नत वेतनमान 5500-9000 को उच्चीकृत कर अब क्रमश: 6500-10500, 7450-11500 व 7500-12000 किया गया है। उन्हें क्रमश: 4200, 4600 व 4800 ग्रेड वेतन मिला है। इसी क्रम में प्राइमरी हेडमास्टर को उच्चीकृत

देहरादून, : छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर बिजली कर्मियों का आंदोलन आखिर रंग ले आया। प्रदेश सरकार ने तीनों बिजली निगमों में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करके करीब 8000 अधिकारी-कर्मचारियों की पांचों उंगलियां घी में डुबो दीं। होली से पहले सबसे बड़ा तोहफा यह, कि छठा वेतनमान तो उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की तर्ज पर मिला, जबकि भत्ते उत्तराखंड की सेवा नियमावली के हिसाब से मिलेंगे। इसका अर्थ यह कि उन्हें राज्य सरकार के मुलाजिमों से ज्यादा पगार मिलेगी। बीते रोज हुए शासनादेश के बाद तीनों बिजली निगमों (ऊर्जा निगम, जलविद्युत निगम व पारेषण निगम) के प्रबंधन ने भी छठे केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप पुनरीक्षित वेतनमान का कार्यालय ज्ञाप जारी कर दिया। शासनादेश के मुताबिक निगमों में छठा वेतनमान एक जनवरी 2006 से लागू होगा। वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप 31 मार्च 2009 तक के एरियर का भुगतान तीन किश्तों में होगा। यानी, वर्ष 2009-10 में 40 प्रतिशत, 2010-11 में 30 फीसदी व 2011-12 में 30 प्रतिशत कर्मचारियों के भविष्य निर्वाह निधि अथवा बाँड के रूप में दिया जाएगा। खास बात यह है कि सूबे के बिजली को छठा वेतनमान तो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के पावर कारपोरेशन की तर्ज पर मिला है, जबकि महंगाई भत्त व अन्य भत्ते उत्तराखंड सरकार के समान अनुमन्य किए गए हैं।

Monday, 2 March 2009

बाघों के संरक्षण को विश्र्व बैंक आगे आया

, रामनगर: विश्र्व में बाघों की घटती संख्या से चिन्तित हो विश्र्व बैंक ने उनके संरक्षण के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में विश्र्व बैंक का चार सदस्यीय दल शनिवार को कार्बेट नेशनल पार्क का भ्रमण किया। दल ने यह जानने का प्रयास कि बाघों की सुरक्षा एवं उनके संरक्षण के लिए अधिकारियों एवं वन कर्मियों द्वारा क्या प्रयास किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि बाघों की सुरक्षा के लिए विश्र्व बैंक ने भारत में उत्तराखंड एवं कर्नाटक दो राज्यों का चयन किया है। भ्रमण से पूर्व दल के सदस्यों ने मुख्य सचिव उत्तराखंड इन्दु कुमार पांडे की अध्यक्षता में बाघों की सुरक्षा को लेकर बैठक की। बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि संरक्षित क्षेत्रों में बाघों को बचाए जाने की नितांत आवश्यकता है। बैठक में विश्र्व बैंक के सदस्यों एवं वनाधिकारियों की बैठक में यमुना नदी से शारदा नदी तक फैले क्षेत्रों बाघों के संरक्षण पर विचार विमर्श किया गया। बाघों की सुरक्षा के लिए आए चार सदस्यीय दल ने कार्बेट नेशनल पार्क में किए जा रहे कार्यो का नजदीकी से न केवल अध्ययन किया बल्कि अपने सुझाव भी दिए। उल्लेखनीय है कि पूरे विश्र्व में बाघों की कुल नौ प्रजातियां थी। इसमें अब केवल पांच ही प्रजातियां बची है। इन्हें बचाए जाने की कवायद विश्र्व बैंक द्वारा शुरू की गई है। चार सदस्यीय दल ने अपने इस अभियान को कर्नाटक के साथ ही उत्तराखंड में भी चलाने की इच्छा जताई है। दल ने कालागढ़ में बने वन्य जीव प्रशिक्षण संस्थान भी देखा। दल में बाघों के विशेषज्ञ जॉन साइडेस स्टेकर, आन्धे्र केसिविल, डा. अनुप जोशी, कुमार राघवेन्द्र सिंह शामिल थे। सीटीआर भ्रमण में उनके साथ मुख्य संरक्षक वित्त दिग्विजय सिंह खाती, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त एवं कार्यकारी निदेशक कपिल जोशी, पार्क वार्डन डीएस रावत, प्रभागीय वनाधिकारी पराग मधुकर धकाते, रवीन्द्र जुयाल, पीके पात्रों विवेक पांडे आदि वनाधिकारी मौजूद थे। रामनगर के बाद दल नेपाल के लिए रवाना हुआ है।

छोटी उम्र में बड़ा कारनामा

देहरादून, नाम: मरीश कुमार देवगन। उम्र: 14 वर्ष। कक्षा: सातवीं। स्कूल: दि एशियन स्कूल, देहरादून। उपलब्धि: बंजी जंपिंग में व‌र्ल्ड रिकार्ड। सितार वादक अग्नि वर्मा के गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने के एक माह के भीतर ही दून के खाते में एक और उपलब्धि आ गई है। इस बार एशियन स्कूल के छात्र मरीश कुमार देवगन ने विश्व स्तर पर देहरादून व सूबे का नाम रोशन किया है। मरीश ने दुनिया के सबसे ऊंचे बंजी जंपिंग टावर मकाऊ, हांगकांग से जंप लगाकर व‌र्ल्ड रिकार्ड बनाने का कारनामा कर दिखाया है। खास बात यह कि बंजी जंपिंग का उनका यह पहला प्रयास था। शनिवार को एशियन स्कूल में आयोजित पत्रकार वार्ता में मरीश ने व‌र्ल्ड रिकार्ड बनाने के बाद अनुभव बांटे। मरीश ने बताया कि गत 10 जनवरी को हांगकांग के मकाऊ टावर से उन्होंने जंप लगाई थी। उस वक्त पता नहीं था कि यह व‌र्ल्ड रिकार्ड बन जाएगा। यह छलांग 233 मीटर की थी और टावर से यह दूरी उन्होंने 4 सेकंड में 200 किमी प्रति घ्ंाटे की रफ्तार से पूरी की। मरीश ने बताया कि उनके पिता मनोज कुमार देवगन व माता रजनी देवी हांगकांग में व्यवसायी हैं। पिता ने उन्हें साहसिक खेलों के प्रति प्रोत्साहित किया। छलांग के दौरान टावर पर वे भी मौजूद थे। मरीश के मुताबिक बंजी जंपिंग का उनका यह पहला प्रयास था। इससे पहले एक बार वह स्काइ जंप भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड के विख्यात जंपर एजे हक्केट की देखरेख में उन्होंने यह सफलता प्राप्त की। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले मरीश ने सफलता पर अपने अध्यापकों का भी आभार जताया। क्या मिला: ब्रुकलिन में आलीशान घर, पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति, एनर्जी ड्रिंक माइलो के साथ दो वर्षीय विज्ञापन अनुबंध, वैश्विक स्तर पर फ्री स्टंट देने की अनुमति।

भट्ट ने उठाया गठबंधन धर्म निभाने का बीड़ा!

देहरादून सूबे की सत्ता में भागीदार उत्तराखंड क्रांति दल लोकसभा चुनाव में भाजपा से दो-दो हाथ करने को तैयार है। दल के विधायक सदन में सरकार को घेर रहे हैं तो कार्यकर्ता सरेआम भाजपा और सरकार पर प्रहार कर रहे हैं। ऐसे में उक्रांद कोटे से काबीना मंत्री दिवाकर भट्ट अकेले ही गठबंधन धर्म निभा रहे हैं। शायद यही कारण है कि पार्टी के भारी दबाव के बाद भी वे पौड़ी लोस सीट से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। पहले बात विरोध और गठबंधन धर्म निभाने की। उक्रांद कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि भाजपा बड़ा दल होने के नाते इस धर्म का पालन नहीं कर रही है। मुद्दों के आधार पर भाजपा का समर्थन करने वाले क्षेत्रीय दल उक्रांद का लगता है अब मोहभंग हो रहा है। कार्यकर्ता साफ कहते घूम रहे हैं कि सत्ता में भागीदारी से दल को खासा नुकसान हो रहा है। दल के हर सम्मेलन में कार्यकर्ता इस समर्थन का मुद्दा उठाते हैं पर उनकी बात नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह दब जाती है। अब कार्यकर्ता और तमाम पदाधिकारी मीडिया के माध्यम से अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं। शुक्रवार को विधानसभा में उक्रांद के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने वेल में जाकर यह दिखाया कि कि सत्ता में साथ रहते हुए भी सरकार के विरोध में किस हद तक जाया जा सकता है। अब सवाल आता है गठबंधन धर्म निभाने का। लग रहा है कि उक्रांद की तरफ से इस काम का पूरा जिम्मा काबीना मंत्री दिवाकर भट्ट ने उठा रखा है। पार्टी ने सभी पांच सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया। श्री भट्ट को पहले तो हरिद्वार से मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया। बाद में तय किया गया कि उन्हें पौड़ी सीट से प्रत्याशी बनाया जाए। उक्रांद की सोच थी कि मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा से जुड़ी इस सीट के जरिए ही भाजपा पर हमलावर हुआ जाए। दल के कार्यकर्ताओं ने चुनाव के लिए श्री भट्ट पर खासा दबाव बनाया। तर्क दिया गया कि भाजपा के दो मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। उक्रांद का भी एक मंत्री मैदान में उतरेगा तो चुनाव में सत्ता का कुछ तो फायदा मिलेगा। लाख कोशिशें की गईं पर दिवाकर ने चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया। उक्रांद को मजबूरन किसी और को प्रत्याशी बनाना पड़ा। इससे पहले भी उक्रांद कार्यकर्ता और विधायक सत्ता में भागीदारी के बाद भी सरकार पर तोहमत लगाते रहे पर काबीना मंत्री ने आज तक कुछ नहीं कहा। उक्रांद के सबसे अहम मुद्दे राजधानी गैरसैण के बारे में श्री भट्ट यही कहते रहे जिस दिन उक्रांद के 36 विधायक हो जाएंगे, उस दिन राजधानी खुद ही गैरसैण चली जाएगी। जाहिर है कि भाजपा के साथ उक्रांद का गठबंधन धर्म निभाने का बीड़ा इस समय अकेले श्री भट्ट ने ही उठा रखा है।

औली: मजाक बना स्कीइंग प्रशिक्षण

देहरादून: औली में सैफ देशों के स्कीइंग खिलाडि़यों का प्रशिक्षण मजाक बनकर रह गया है। बर्फ के अभाव में नेपाल तथा भूटान के खिलाड़ी इधर-उधर भटक रहे हैं। ओलंपिक एसोसिएशन ने 20 फरवरी से चार मार्च तक प्रशिक्षण शेड्यूल किया था। इसी के तहत सैफ देशों को आमंत्रित किया गया था। इस समय भूटान के 18 तथा नेपाल के 12 खिलाड़ी औली में हैं। ये खिलाड़ी 19 फरवरी को उत्तराखंड पहुंच गए थे। बर्फ के अभाव में उन्हें गौरसौं तक ले जाया जा रहा है। वहां भी बर्फ काफी कम होने के कारण ऐसे छाया वाले स्थानों को ढूंढा जा रहा है, जहां फिसलने को कुछ तो बर्फ मिल जाए। विंटर गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष एसएस पंागती के अनुसार ये सभी विदेशी नौसिखिए हैं। इन्हें गढ़वाल मंडल विकास निगम के दो पार्ट टाइम प्रशिक्षक प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस कार्यक्रम को लेकर निगम तथा खेल विभाग के बीच भी कोई तालमेल नहीं बन पा रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले किसी को बताए बिना निगम ने कार्निवल स्थगित कर दिया। छह से आठ मार्च तक होने वाले कार्निवल के लिए राज्य सरकार भी सहमत नहीं थी, क्योंकि लोस चुनाव की कभी भी अधिसूचना लागू हो सकती है। साथ ही, सबसे बड़ी समस्या बर्फ को लेकर आ रही है। प्राकृतिक बर्फ औली तो दूर गोरसौं तक में नहीं है। कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीन कब तक काम कर पाएगी, यह बताने को कोई तैयार नहीं है। इस मशीन पर अब तक दस करोड़ के करीब खर्च हो चुका है। यदि कृत्रिम बर्फ बनाने वाली संपूर्ण प्रक्रिया को भी इससे जोड़ दिया जाए तो यह बारह करोड़ के करीब चला जाएगा। अब इस मशीन का उपयोग इस वर्ष के अंत तक जाड़ों में ही हो पाएगा। तब तक इसके जंक की चपेट में आने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। एक बात और। बर्फ बनाने को तैयार किया गया तालाब पर्यटन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण करने वाले एक निजी होटल क्लिफ टाप वरदान बनने जा रहा है। अगले जाड़ों तक होटल वाले इसका प्रयोग करने को तैयार हैं।

दून पर जनरल की नजर-ए-इनायत

देहरादून, कर्मचारियों व शिक्षकों पर निगाहें करम के बाद जनरल ने अब विकास कार्यो के लिए पिटारा खोला है। दून के हिस्से में उच्चस्तरीय सिटी सेंटर, फ्लाईओवर व तीन मंजिली पार्किंग आई तो कई इलाकों में सड़कों का डामरीकरण को हरी झंडी मिली है। राज्यभर में मोहल्ला स्वच्छकों के मानदेय में पांच सौ रुपये बढ़ाए गए हैं। चुनावी बेला में जनरल ने राज्य के कई इलाकों के लिए नई घोषणाओं के साथ ही चालू योजनाओं को धरातल पर उतारने का संकल्प जताया है। खासतौर पर दून की जनता को लुभाने की कोशिश की गई हैं। इनमें 150 करोड़ की लागत से उच्चस्तरीय सिटी सेंटर के साथ ही एक ही छत के नीचे शापिंग माल, आडिटोरियम व मनोरंजन की सुविधाएं होंगी। यातायात व्यवस्था को 50 करोड़ लागत से फ्लाईओवर निर्माण व सड़कों के चौड़ीकरण का काम होगा। साथ ही दून में घंटाघर के नजदीक 70 करोड़ की लागत से 660 वाहनों के लिए तीन मंजिला पार्किंग व कांप्लेक्स बनेगा। राज्य के मोहल्ला स्वच्छता समिति के स्वच्छक का मानदेय पांच सौ रुपये बढ़ाया गया है। इससे सरकार पर 60 लाख रुपये सालाना अतिरिक्त खर्चा बढ़ेगा। महासू के नजदीक हैलीपैड निर्माण, पथियान को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित करने व राजपुर नांगल बाईपास पर 1.7 करोड़ की लागत से दो लेन पुल बनाने की घोषणा की गई है। सीएम ने नया चकराता को नए विशेष प्राधिकरण के दायरे में लाने, विकास नगर में राजकीय पालीटेक्निक भवन निर्माण व जल निकासी व सीवर लाइन की योजना तैयार करने, लाखामंडल में बिजलीघर, उधमसिंह नगर में भूरारानी मार्ग सुदृढ़ीकरण के लिए धन देने की घोषणाएं की हैं।

अपहरणकर्ताओं के साथ हल्द्वानी पहुंची पुलिस टीम

हल्द्वानी: अपहृत बच्चे के अपहरणकर्ताओं को लेकर पुलिस टीम रविवार को बिहार के बेतिया से लेकर यहां आ गयी। इन्हें मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस बच्चे के बयान भी मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। ट्रांजिट रिमांड होने के चलते आरोपियों को सामने नहीं लाया गया। रविवार को पुलिस टीम के उत्तम सिंह जिमवाल व उमेश मलिक ठेकेदार शंभू व उसके अपहृत बच्चे के साथ सीओ देवेंद्र पिंचा व कोतवाल केएस असवाल को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सीओ ने बताया कि अपहरण करने वाला मुन्ना अकेला था। वह 12 फरवरी को हल्द्वानी पहुंचा तथा 13 फरवरी को ठेकेदार के घर जायजा लेने गया। इस बीच उसने एक दिन यहां मजदूरी भी की। 15 फरवरी को वह फिर ठेकेदार के घर गया और वहां से बच्चे को साइकिल से घुमाने के बहाने उठा लिया। साइकिल अपने परीचित मजदूरों के पास छोड़ कर बस से बरेली निकल गया। जहां से बेतिया तक ट्रेन से गया। तीनों आरोपियों को मंगलवार को स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाएगा। दान ने खतरे में डाली जान हल्द्वानी: अपहृत बच्चे के पिता व ठेकेदार शंभू के बड़बोलेपन के चलते ही उसके बच्चे की जान खतरे में पड़ी। शंभू ने गांव में बन रहे एक मंदिर में हजारों रुपए दान देने की घोषणा की थी। इसके चलते गांव में आम धारणा थी कि शंभू बहुत धनवान है। इसीके चलते अपहरणकर्ताओं ने उसके बच्चे का अपहरण किया। गौने के लिए मांगे थे जूते व कपड़े हल्द्वानी: अपहर्ता मुन्ना का होली के बाद गौना होना था। इसके लिए उसे नए कपड़े व जूते की जरूरत थी। पिछले काफी समय से काम न मिलने के चलते उसके पास पैसे भी नहीं थे। मुन्ना ने फिरौती में अपनी इन जरूरतों को भी जोड़ दिया। दुनिया घूमने गए थे हल्द्वानी: साढ़े पांच वर्षीय मासूम विक्की तेरह दिन बाद अपने पिता की गोद में खेल रहा था। पूछने पर मासूमियत से उसने जबाव दिया कि बरेली, गोरखपुर व दुनिया घूमने गए थे। उसे यह भी पता था कि मुन्ना अंकल उसे लेकर गए थे। जो रास्ते में टाफी तो दिए लेकिन मारते भी थे।

जागर से लेकर छपेली व झोड़ा का अनूठा प्रदर्शन

२,३,९-, हल्द्वानी: समरसता मेले में जागर से लेकर झोड़ा, छपेली आदि लोकगीत व लोकनृत्य का अनूठा प्रदर्शन देखते ही बन रहा था। साथ ही मेले में लगे स्टॉल भी दर्शकों के लिये आकर्षण का केन्द्र रहे। शाम से समय कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। श्री रावत व श्री कोश्यारी ने लोक संस्कृति के इस कार्यक्रम की सराहना की। साथ ही संस्कृति के संरक्षण के लिये किये जा रहे थे प्रयास की भी प्रशंसा की। इसके लिये आयोजकों को बधाई दी। इससे पहले समरसता गोष्ठी में स्वामी विजयानंद ने कहा कि समरसता को देश के साथ जोड़कर देखना चाहिये। देश का समरस होना ही जागरुकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति को उच्च शिखर पर ले जाने के लिये सभी को एक होना होगा। मेले में कुमाऊं संस्कृति उत्थान समिति खुर्पाताल ने जागर की सुंदर प्रदर्शन किया। साथ ही इसके जरिये जागरुकता का संदेश दिया। वेन्डी पब्लिक स्कूल के देशभक्ति नृत्य ने मन मोहा। बाराही लोक कला, प्रहलाद मेहरा की ओर से झोड़ा, छपेली की मनमोहक प्रस्तुति ने झूमने को मजबूर कर दिया। साथ ही दर्शकों ने स्टाल भी देखे। समिति के अध्यक्ष कौस्तुभानंद जोशी ने कहा कि लोकसंस्कृति का संरक्षण ही मेले का मुख्य उद्देश्य है। इस दौरान प्रदीप जनोटी, दिनेश पाण्डे, अशोक कुमार, विपिन कुमार आदि उपस्थित थे।

जगह-जगह बरसने लगा होली का रंग

होली खेलन आयो कन्हैया.. नैनीताल: फाल्गुन मास शुरू होते ही बैठकी होली गायन का दौर तेज हो गया है। रविवार को प्रसिद्ध सिने अभिनेता हेमंत पाण्डे के निगलाट स्थित आवास पर होली गायकों ने खूब धूम मचाई। होली गीतों पर हेमंत पांडे भी झूम उठे। उन्होंने खुद भी होली गीत गाए और ठुमके लगाए। बैठकी होली का आगाज होली खेलन आयो कन्हैया., नदिया किनारे मेरो गांव. से किया गया। इसके बाद राग काफी में सैयां की सेज कैसे जाऊं, सखी मोरी पायल बाजे. ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद बालम निको लागे तोरे बोल, बइय्यां पकड़ मुख मलत गुललुवा, अब तो तिहारी बन आई छयलुआ के गायन के दौरान श्रोता थिरकने लगे। इससे पूर्व सिने अभिनेता श्री पाण्डे ने होली गायकों को अबीर गुलाल लगाकर स्वागत किया। इस मौके पर गायकों ने एक से बढ़कर बैठकी होली प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इस दौरान हारमोनियम पर हेम जोशी व तबले पर दीपक पंत की संगत में उठी संगीत की मधुर धुनों से श्रोता अपने कदम रोक नहीं पाए। इस अवसर पर भगवत जोशी, शैलेश पाण्डे, दीप जोशी, दुर्गादत्त पांडे, बालम सिंह, कैलाश भट्ट समेत तमाम होली प्रेमी व संस्कृति कर्मी मौजूद थे। सभी ने काफी देर तक होली गायकी का लुत्फ उठाया।

होरी खेलत नंदलाल सखिन संग धूम मची है हल्द्वानी: होली महोत्सव पर होरी खेलत नंदलाल सखिन संग धूम मची हैं व चतुर तुम कान्हा जाने नहीं पाओगे आदि होली गीतों से डा. पंकज व जेसी पंत ने समा बांध दिया। रविवार को हिमालय संगीत शोध समिति ने होली उत्सव का आयोजन किया। संस्था के संरक्षक जेसी जोशी, पुष्कर सिंह व भोला भट्ट ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मौके पर बड़ी संख्या में कलाकार व लोगों ने रचनाओं से साथ तान छेड़ी। वहीं नवीन चंद्र जोशी ने संग की सहेली निकस गई व पुष्कर नेगी ने मां व्रज देश निगोड़ा, तकत मोरी चोली का डोरा आदि गीतों से लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रकाश वर्मा, संचालन डा. जेसी पंत ने किया। इस अवसर पर ड्रामा डिवीजन के वरिष्ठ कलाकार चंद्रशेखर कपिल, वादक धीरज उप्रेती, जगदीश जोशी, योगेश जोशी, पं. जमुनादत्त कोठारी, गोपाल दत्त पाठक, चंद्र दत्त मठपाल, पत्रकार आनंद बल्लभ उप्रेती, तारा चंद्र गुरूरानी, हरीश पंत, देवेन्द्र नैनवाल, दिनेश पाठक, रामू साह, प्रेम त्रिपाठी, कवि शेरदा अनपढ़, एनसी तिवारी, उमेश तिवारी, गिरीश उप्रेती, ललित मोहन कांडपाल व वीसी जोशी आदि उपस्थित रहे।

विद्युत उत्पादन गिरा, त्राहि-त्राहि

, हल्द्वानी: गर्मी का आगाज होते ही ऊर्जा प्रदेश में बिजली का संकट खड़ा हो गया है। मांग एवं उत्पादन में भारी अंतर को पाटने के लिए रोस्टिंग का सहारा लिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से की जा रही बैंकिंग भी फिलहाल हालात काबू करने में निरर्थक साबित हो रही है। उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश भी कहा जाता है। इसकी वजह है यहां बड़ी संख्या में नदियां व उनका जल स्तर काफी होना। लेकिन गर्मी की दस्तक से पहले ही प्रदेश में फिर से संकट गहराने लगा है। इस समय प्रदेश की विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं से आठ मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि मांग करीब तिगुनी 22 एमयू बनी हुई है। यह स्थिति पखवाड़े भर से भी अधिक समय से चल रही है। ऐसे में रोस्टिंग को सहारा लेकर आपूर्ति बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं। ऋषिकेश कंट्रोल रूम से बारी-बारी अलग क्षेत्रों में रोस्टिंग की जा रही है। कंट्रोल रूम सूत्रों के मुताबिक इस समय राज्य में विद्युत उत्पादन सभी परियोजनाओं को मिलकर करीब आठ मिलियन यूनिट है, जबकि इसकी सापेक्ष मांग तिगुनी है। इसकी बड़ी वजह नदियों का गिरता जल स्तर है। ऐसे में रोस्टिंग अनिवार्य हो गयी है। हालात पर काबू पाने के लिए वर्तमान में बीएसएस (दिल्ली) एवं गुजरात से बिजली बैकिंग के माध्यम से ली जा रही है ताकि उत्पादन में आई कमी को पूरा किया जा सके। पावर कारपोरेशन (कुमाऊं) के महाप्रबंधक पीसी पंत का कहना है कि इस समय उत्पादन में कमी से ट्रांसफार्मरों एवं लाइनों के लॉस होने का खतरा बढ़ जाता है। इसको देखते हुए रोस्टिंग के साथ-साथ शटडाउन का भी सहारा लिया जा रहा है।

पर्यावरण समेत दर्जनभर नए कोर्स होंगे शुरू

देहरादून, : राज्य में तकनीकी और उच्च शिक्षा अत्याधुनिक व नए दर्जनभर कोर्स से लैस होगी। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्र्वविद्यालय, पंतनगर ने भूकंप इंजीनियरिंग, इंट्रोडक्शन टू एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग और प्री सीजन एग्रोनामी पर नए कोर्स विकसित किए हैं। इससे नए सत्र में छात्र-छात्रा लाभान्वित होंगे। सूबे की उच्च व तकनीकी शिक्षा में पर्यावरण व पारिस्थितिकीय पर विशेष जोर दिया गया है। छात्र-छात्राओं को इस विषय पर स्तरीय रोजगारपरक कोर्स का विकल्प मुहैया होगा। पंतनगर विवि के साथ दून विवि में अगले सत्र से पर्यावरण विषय पर नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। विवि प्रशासन व शासन के बीच सहमति बन चुकी है। दून विवि में शैक्षिक व प्रशासनिक गतिविधियां तेज की जा रही हैं। उच्च शिक्षा प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी इस संबंध में विवि के कुलपति प्रो. गिरिजेश पंत को आश्र्वस्त कर चुके हैं। विवि में स्कूल आफ एनवायरनमेंट के साथ स्कूल आफ कम्युनिकेशन को नए सत्र में तवज्जो मिलेगी। पंतनगर प्रौद्योगिकी विवि में इंजीनियरिंग के छह से ज्यादा कोर्स तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। मौजूदा जरूरत के मुताबिक नैनो टैक्नोलाजी, बायोइन्फार्मेटिक्स, पोस्ट हार्वेस्ट, फिजियोलाजी, एनवायरनमेंट इकोनोमी और जलवायु परिवर्तन पर विकसित किए जा रहे नए कोर्स को छात्र-छात्राओं के लिए मुफीद माना जा रहा है। यही नहीं, विवि फार्म और मटकोटा की कार्यशाला को अत्याधुनिक बनाने का काम जारी है। गौरतलब है कि इस प्रतिष्ठित विवि में बीटेक की सौ सीटें बढ़ाई जा चुकी हैं। सीएम के ओएसडी केडी पुरोहित के मुताबिक राज्य में उच्च व तकनीकी शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत बनाने की जरूरत है। इस दिशा में सरकार चरणबद्ध ढंग से कार्य कर रही है।

दर्जनभर स्कूलों का उच्चीकरण

२,३९- देहरादून, : चुनावी बेला में राज्य के करीब दर्जनभर स्कूलों को उच्चीकरण का तोहफा मिला है। तकरीबन दर्जनभर स्कूल भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। शिक्षा पर आखिरकार पापुलर पालिटिक्स का रंग चढ़ रहा है। इसके चलते सरकार को अपने रवैये में तब्दीली करनी पड़ी है। बीती सरकार के कार्यकाल में स्कूलों के बेतहाशा उच्चीकरण के बाद मौजूदा सरकार व उसके मुखिया भुवनचंद्र खंडूड़ी ने इस मुहिम पर रोक लगा दी थी। साथ ही उच्चीकृत स्कूलों में संसाधन मुहैया कराने पर जोर देने की बात कही थी। इस मामले में अब सरकार ढीली पड़ी तो महकमे ने मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक गढ़वाल व कुमाऊं मंडलों में 11 माध्यमिक स्कूलों के उच्चीकरण पर मुहर लगा दी है। इससे शिक्षकों व कर्मचारियों के करीब सौ नए पद सृजित होंगे। राज्य बनने के बाद से अब तक छह सौ हाईस्कूलों व तीन सौ इंटर कालेजों का उच्चीकरण हो चुका है। उच्चीकरण के बाद इन स्कूलों के लिए भूमि-भवन, शिक्षकों, लेबोरेट्री व लाइब्रेरी से लेकर तमाम संसाधन जुटाने में सरकार को मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद कामयाबी कोसों दूर है। यही नहीं, सीएम की घोषणा के मद्देनजर दोनों ही मंडलों

विलायती को भायी दून की माटी

देहरादून, : विलायती फूलों को दून की माटी खूब रास आ रही है। यूरोपीय परिवेश में रचे-बसे जिस खूबसूरत कैलालिलि फूल के हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में व्यावसायिक उत्पादन के प्रयास रंग नहीं ला पाये, वही अब राज्य की शान बनने जा रहा है। ऐसा संभव हो पाया पुष्पोत्पादक राजेश चौधरी के प्रयासों से। यूरोपीय पुष्प कैलालिलि (जैंटेडेशिया) की न सिर्फ यूरोप, बल्कि विश्र्व के अन्य देशों में भी जबर्दस्त डिमांड है। दून की सरजमीं पर इस फूल ने पुष्पोत्पादक अशोक चौधरी के प्रयासों से दस्तक दी। दैनिक जागरण से भेंट में श्री चौधरी ने बताया कि कैलालिलि बेहद खूबसूरत है, लेकिन राज्य में कहीं नजर नहीं आता था। श्री चौधरी के अनुसार उन्होंने इसके लिए किशनपुर में दो साल पूर्व पॉलीहाउस में इस फूल के पौधे लगाए। कोशिशें रंग लाईं और दून में यह खूबसूरत फूल महक उठा। मार्केटिंग के लिए इसकी पैकिंग काफी कठिन होने के मद्देनजर ऐसी तकनीक भी ढूंढ ली, जिससे फूल सुरक्षित रहे। वह दिल्ली में इसकी मार्केटिंग करते हैं। बाजार में कैलालिलि के एक फूल की कीमत 80 रुपए के करीब है। आकर्षण का केंद्र स्पि्रंग ऑफ कलर्स : पुष्प प्रदर्शनी में इस मर्तबा पहली बार कैलालिलि को प्रदर्शित किया गया। इस खूबसूरत फूल ने न केवल पुष्पप्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि व्यावसायिक श्रेणी में श्रेष्ठता भी हासिल की।

बदरी-केदार की भूमि मे मुस्कराई देवियां

देहरादून यत्र नार्यस्तु पूजयंते, रमंते तत्र देवता यानि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां स्वयं देवता निवास करते हैं। यह बात देवभूमि के चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों पर खरी उतरती है। दूषित हवाओं ने स्वच्छ पहाड़ों को भी मैला करना शुरू कर दिया है। महिलाओं पर अत्याचार और उत्पीड़न के मामले में पहाड़ी जिले भी मैदानों से होड़ लेते दिखायी दे रहे हैं। ऐसे में ये दो जिले पहाड़ की परंपराओं को जीवित रख महिलाओं का सम्मान बरकरार रखे हुए हैं। आमतौर पर शांत माने जाने वाले पहाड़ों पर अपराधों की दर न्यूनतम ही थी, लेकिन बीते कुछ वर्षो में यहां भी अपराधों की संख्या बढ़ने लगी है। विशेषकर महिला उत्पीड़न के मामलों में खासा इजाफा हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल इनमें सबसे आगे हैं। हां, चमोली और रुद्रप्रयाग के बारे में कहा जा सकता है कि यहां औरत का सम्मान बचा हुआ है। सवा तीन सालों के आंकड़ों को सामने रखें तो चमोली में महिला हत्या की कोई घटना नहीं हुई, जबकि रुद्रप्रयाग में यह संख्या दो रही। इसी प्रकार बलात्कार की चमोली में पांच, रुद्रप्रयाग में दो, लज्जाभंग की चमोली में चार और रुद्रप्रयाग में दो, अपहरण की चमोली में दो, रुद्रप्रयाग में कोई नहीं, छेड़खानी की रुद्रप्रयाग में एक, दहेज हत्या की चमोली में चार, रुद्रप्रयाग में दो, दहेज उत्पीड़न की चमोली में पांच और रुद्रप्रयाग में केवल तीन घटनाएं हुईं। चमोली और रुद्रप्रयाग में महिलाओं के साथ हुए अपराध के इन आंकड़ों की तुलना अगर मैदानी हिस्सों वाले जिलों के साथ करें तो अंतर जमीन आसमान का नजर आएगा। जबकि, पहाड़ के अन्य जिलों में भी महिलाओं के लिए स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है। अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस मुख्यालय के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक 2006 में अलग-अलग धाराओं में महिलाओं के साथ होने वाले कुल 1077 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसकी संख्या 2007 में 1136 हुई और 2008 में बढ़कर 1304 हो गई। जबकि, इस वर्ष के शुरुआती डेढ़ महीनों में ही इनकी संख्या 117 हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चमोली और रुद्रप्रयाग में अभी महिलाओं का पुराना रुतबा बरकरार है। आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में उनकी प्रमुख भूमिका बनी रहने के चलते उनके साथ होने वाले अपराधों की संख्या कम है।

ताज न सज सका हो, लेकिन दूनवासियों के दिलों का तो वह सरताज

देहरादून, : आंखों में उम्मीद के दीए और भगवान के सामने जुड़े हुए हाथ, ये बताने के लिए काफी थे कि इस बार इंडियन आइडल के तौर पर देश भर में धूम मचाने वाली आवाज उत्तराखंड के बेटे की हो। बात हो रही है, इंडियन आइडल में फ‌र्स्ट रनर अप कपिल थापा के गांव की, जहां देर रात तक कपिल की कामयाबी का जश्न मनाया जाता रहा। रविवार को कपिल के सर भले ही इंडियन आइडल का ताज न सज सका हो, लेकिन दूनवासियों के दिलों का तो वह सरताज बन चुका है। इंडियन आइडल में टाप टू में पहंुचने वाले पहले उत्तराखंडी के तौर पर उसकी कामयाबी पर हर किसी को फख्र है। इंडियन आइडल सीजन 4 की शुरुआत से ही दूनवासियों की निगाहें इस पर लगी हुई थीं। इसकी वजह थी दून से प्रियंका नेगी और कपिल थापा की शो में भागीदारी। प्रियंका की चुनौती तो काफी पहले ही खत्म हो गई थी, लेकिन कपिल ने उत्तराखंड के लिए आस जगाए रखी थी। कपिल के टाप थ्री में पहंुचने के बाद तो हर कोई उसी को इंडियन आइडल के तौर पर देखना चाहता था। रविवार को शो का फाइनल राउंड शुरू होते ही दूनवासी अपने टीवी सेटों से चिपके रहे। दून स्थित कपिल के गांव नयागांव हाथीबड़कला में तो जश्न का माहौल रहा। शाम से ही सभी लोग गांव के एक मैदान में इकट्ठा होने लगे थे। यहां एक बड़ा टीवी स्क्रीन लगाया गया था। गांववाले ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते-थिरकते कपिल की कामयाबी की दुआ मांग रहे थे। ठीक साढ़े ग्यारह बजे जैसे ही नए इंडियन आइडल की घोषणा की गई, कुछ पल के लिए मौके पर मायूसी छा गई। वजह, कपिल दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन गांववालों ने इसे भी बड़ी कामयाबी के तौर पर लिया और ढोल नगाड़ों के साथ निकल पड़े शहर की ओर। इस दौरान कपिल की कामयाबी पर नारेबाजी करते लोग प्रमुख मार्गो से गुजरते हुए घंटाघर पहुंचे। यहां उन्होंने जमकर आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी।

भूगोल बदला, तो बदलेगा इतिहास!

2.3.9

देहरादून मौजूदा समय में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों में से एकमात्र पूर्ण मैदानी विधानसभा सीटों वाली लोकसभा सीट हरिद्वार को भी नए परिसीमन ने पहाड़ से जोड़ दिया है। फिलहाल सबसे कम विधानसभा सीटों को समेटे इस लोकसभा सीट में अब देहरादून जिले की तीन विधानसभा सीटें जुड़ जाने से इसका राजनैतिक भूगोल खासा दिलचस्प बन गया है। यह सवाल भी शिद्दत से उठ खड़ा हुआ है कि बदला हुआ भूगोल क्या इस लोकसभा सीट के इतिहास को भी बदल डालेगा। अब लाजिमी तौर पर नए परिसीमन के बाद इस सीट से वही चुनावी गंगा पार कर पाएगा जिसके पैर मैदान में तो मजबूती से जमें ही, पहाड़ में भी न रपटें। मौजूदा समय में हरिद्वार लोकसभा सीट के तहत जो नौ विधानसभा सीटें हैं वे अकेले हरिद्वार जिले में ही हैं। इस लिहाज से यह लोकसभा सीट अनूठी कही जा सकती है कि जहां राज्य के बारह जिलों में चार लोकसभा सीटें फैली हैं, वहीं एक हरिद्वार जिले में ही पूरी लोकसभा सीट विस्तृत है। नए परिसीमन में हरिद्वार जिला इस दृष्टिकोण से फायदे में रहा कि यहां दो विधानसभा सीटों की बढ़ोतरी हो गई और अब यहां नौ की बजाए ग्यारह विधानसभा सीटें हो जाएंगी। जिले की विधानसभा सीटों में वृद्धि की यह स्थिति यहां जनाधार रखने वाले दलों के लिए सूबे की सियासत के लिहाज से नि:संदेह फायदे का सौदा बनेगी लेकिन नए परिसीमन के बाद प्रत्येक लोकसभा सीट में 14-14 विधानसभा सीटों के बटवारे ने लोकसभा चुनाव में इन दलों के समक्ष मुश्किलें भी पैदा कर दी हैं। यह इसलिए क्योंकि अब इस मैदानी लोकसभा सीट में तीन सीटें पहाड़ की जुड़ रही हैं और इस वजह से इस सीट के तमाम राजनैतिक व जातीय समीकरण उलटफेर के शिकार हो जाएंगे। दरअसल, नए परिसीमन के हिसाब से हरिद्वार की ग्यारह सीटें तो जिले में ही विस्तृत हैं जबकि जो तीन नई सीटें इस लोकसभा सीट में शामिल हुई हैं वे देहरादून जिले की हैं। ये सीटें हैं धरमपुर, डोईवाला और ऋषिकेश। इस तीनों सीटों के हरिद्वार लोकसभा सीट में जुड़ने का सीधा मतलब है इस सीट के मौजूदा भूगोल में खासा परिवर्तन। वर्तमान लोकसभा में इन तीनों विधानसभा सीटों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र टिहरी लोकसभा का हिस्सा है, यानी पूर्ण पर्वतीय टिहरी लोकसभा सीट के इस क्षेत्र के मतदाता नए परिसीमन में अब तक पूर्ण मैदानी लोकसभा सीट हरिद्वार का सांसद चुनने के लिए वोट डालेंगे। स्वाभाविक रूप से टिहरी जैसी पहाड़ी और हरिद्वार जैसी मैदानी लोकसभा सीटों के मतदाताओं मिजाज में तो फर्क होगा ही और यही फर्क परिसीमन में बाद उभरी हरिद्वार लोकसभा सीट की नई तस्वीर को दिलचस्प बना रहा है।

Sunday, 1 March 2009

कुमाऊंनी होली का अनूठा अंदाज

हल्द्वानी शास्त्रीय रागों में गायी जाने वाली कुमाऊंनी होली का अंदाज अनूठा है। खड़ी व बैठकी होली का मनमोहक नजारा देखते ही बनता है। राधा-कृष्ण की प्रेम लीला से जुड़े स्वर लय के साथ गाये जाने वाले इन गीतों पर होल्यार खूब झूमते हैं। भारत में कुमाऊंनी होली का अपना अलग ही महत्व है। वसंत पंचमी से ही होली की शुरुआत हो जाती है। क्षेत्र विशेष में कहीं तीन चरणों में तो कहीं पांच चरणों में होली का आयोजन होता है। सबसे पहले भजन के रूप में देवी-देवताओं का वर्णन व ध्यान से संबंधित गायन होता है। वसंत में ऋतुओं का वर्णन होता है। इसके साथ ही शिवरात्रि पर शिव गीतों को गाया जाता है तो इसके बाद श्रृंगार से संबंधित गीत गाये जाते हैं। फिर रंग-गुलाल के साथ होली का आनंद चरम पर पहुंच जाता है। सफेद रंग का कुर्ता, पायजामा व टोपी के साथ रंगों में मदमस्त होकर घर-घर जाकर होली का गायन किया जाता है। भाषाविद् प्रो. डीडी शर्मा का कहना है कि कुमाऊंनी होली प्राचीन परंपरा से चली आ रही है। इसमें वसन्तोत्सव, प्रहलाद गाथा, जातीय संघर्ष व जनजातीय उत्सवों के विभिन्न तत्वों का सम्मिश्रण होता है। कई वर्षो से कुमाऊं में तीन चरणों में होली होती है। पहले दो चरण बैठकी होली और तीसरा चरण खड़ी होली का होता है। संगीतज्ञ व कुमाऊंनी होली पर शोध करने वाले डा. पंकज उप्रेती का कहना है कि कुमाऊं में होली विशिष्ट पहचान रखती है। यहां पर गंगोली, काली कुमाऊं, सतराली आदि इलाकों की होली महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र में महिला होली का भी विशेष प्रचलन है। महिलायें अलग से टोली बनाकर होली गाती और नृत्य करती हैं। वरिष्ठ पत्रकार आनंद बल्लभ उप्रेती का कहना है कि राज दरबारों से ही होली की परंपरा मिलती है। दूसरे गांव वालों द्वारा चीर झपटने की परंपरायें भी हैं। चीर बनाने की विशेष परंपरा हल्द्वानी: खड़ी होली का प्रारंभ एकादशी से होता है। इससे पूर्व ही देवस्थल या किसी सार्वजनिक स्थान पर बांस या चीड़ की लकड़ी को आरोपित किया जाता है। इस पर अबीर-गुलाल से रंजित वस्त्र खंडों को बांधा जाता है। साथ ही इसकी पूजा भी की जाती है। पुरोहित मंत्रोच्चारण के साथ इसे स्थापित करते हैं। इसके बाद इसे घर-घर घुमाया जाता है और पूजा की जाती है। इसके बाद अंतिम दिन चीर का दहन किया जाता है। इससे पहले चीर की छीना-झपटी होती है। इस चीर के धागों को कमीज पर बांधना शुभ माना जाता है।

दो विधेयक पारित, पैरा मेडिकल विधेयक पेश

देहरादून: सदन ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम 1979 संशोधन विधेयक 2009 को पारित कर दिया। अब डीटीएच कर के दायरे में आ गया है। सरकार ने उत्तराखंड पैरा चिकित्सा परिषद विधेयक को भी सदन में पेश किया है। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने इसे महत्वपूर्ण बताते हुए सदन से इसे सर्वसम्मति से पारित करने का अनुरोध किया। सदन ने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों तथा भूतपूर्व सैनिकों के आरक्षण विधेयक को भी सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अभी तक उत्तराखंड में विकलांगों के आरक्षण का लाभ दूसरे राज्यों के विकलांग भी उठा रहे थे। अब उसका दायरा राज्य के अंदर ही कर दिया गया है। सदन में उत्तरकाशी के रवांई, चमोली के जोशीमठ, टिहरी के जौनपुर और पिथौरागढ़ के मुनस्यारी तथा धारचूला के संपूर्ण क्षेत्र को जनजाति क्षेत्र घोषित करने संबंधी संकल्प भी पारित किया गया। सदन ने बंगाली समुदाय के नमोशुद्र, पौंड और माझी जाति को उत्तराखंड की अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने की संस्तुति भी कर दी।

राज्य आंदोलनकारियों की परिकल्पना होगी साकार

28.2.9- देहरादून, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता सदन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने कहा कि उनकी सरकार आंदोलनकारियों की परिकल्पना का राज्य बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पक्ष-विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। सरकार यथासंभव अपनी कमियां दूर करने का प्रयास करेगी। यूं भी कांग्रेस छोटे राज्यों की हिमायती नहीं रही। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तथा अगले वर्ष की शुरुआत तक औली में अंतर्राष्ट्रीय शीलकालीन खेल आयोजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योगों के पलायन संबंधी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पैकेज की सीमा 2013 तक नहीं बढ़ा रही है। ऐसे में नए उद्योग आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में कंप्यूटरों के जंक खाने पर चिंता जताई। उन्होंने श्रीनगर मेडिकल कालेज की हालत ठीक करने संबंधी प्रयासों की जानकारी दी। आबकारी नीति के बारे में उन्होंने कहा कि रेवन्यू बढ़ाना सरकार का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने नई ऊर्जा नीति के बारे में बताया। श्री खंडूड़ी ने कहा कि 1.74 लाख लोगों को एक साल में पेंशन का लाभ दिया गया है। राजधानी के सवाल पर उन्होंने कहा कि आठ साल में हम इसका हल नहीं निकाल पाए हैं। इसका जब भी समाधान होगा, सभी से पूछा जाएगा। आईआईएम के बारे में पर्वतीय राज्य के लिए जमीन का मानक कम करने का अनुरोध किया गया है और पांच स्थान सुझाए गए हैं। इस पर केंद्र को निर्णय लेना है। नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य का विकास टुकड़ों में हो रहा है, जो अत्यधिक महंगा पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पर्वतीय राज्य के विकास के लिए एक समेकित मास्टर प्लान बनाने का अनुरोध किया। इससे पहले धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रेमचंद्र अग्रवाल, आशा नौटियाल, चौ.यशवीर सिंह, गणेश जोशी, अनिल नौटियाल, मनोज तिवारी, निजामुद्दीन, मुन्ना सिंह चौहान, प्रीतम सिंह और केदार सिंह फोनिया ने विचार व्यक्त किए। सदन में विपक्ष के संशोधनों को अस्वीकार करते हुए राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ।

पूरा होगा अपने घर का सपना

हल्द्वानी जिन लोगों के पास रहने के लिए छत नहीं है और वे अनुसूचित जाति-जनजाति से ताल्लुक रखते हैं तो उनके लिए अच्छी खबर यह है कि समाज कल्याण विभाग घर बनाने के लिए उन्हें धन मुहैया कराएगा। पहाड़ में घर बनाने के इच्छुक लोगों को 38 हजार 500 और मैदान के लिए 35 हजार रुपये मिलेंगे। योजना को शीघ्र अमलीजामा पहनाने के लिए शासन ने प्रथम चरण के लिए हाथ के हाथ पांच करोड़ रुपये भी आवंटित कर दिए हैं।

हल्द्वानी से अपहृत बच्चा बिहार के बेतिया में मिला

हल्द्वानी: शहर से अपहृत बच्चे को पुलिस ने तेरहवें दिन बिहार के बेतिया जिले से बरामद कर लिया। उसका अपहरण पांच लाख की फिरौती के लिए किया गया था। पुलिस ने तीन अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। गिरोह का मास्टर माइंड हल्द्वानी में मजदूरी कर चुका है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपम सेठ ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कि 15 फरवरी को लोहरियासाल तल्ला निवासी ठेकेदार शम्भू शाह के साढ़े पांच वर्षीय पुत्र विक्की का घर से अपहरण कर लिया गया था। 16 फरवरी को कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज हुई। इसकी जांच के लिए सीओ देवेंद्र पिंचा व कोतवाल केएस असवाल के नेतृत्व में एसओजी व पुलिस टीमें लगाई गई। पुलिस ने ठेकेदार शम्भू को साथ लेकर खोजबीन शुरू की। इसके लिए यूपी व प्रदेश के अन्य जनपदों में पोस्टर आदि लगाए गए। इधर, ठेकेदार के मोबाइल पर कॉल कर अपहरणकर्ता पांच लाख की फिरौती मांगने लगे।

आंदोलनकारियों के सपने होंगे साकार

28,2,9- देहरादून, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता सदन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने कहा कि उनकी सरकार आंदोलनकारियों की परिकल्पना का राज्य बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पक्ष-विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। सरकार यथासंभव अपनी कमियां दूर करने का प्रयास करेगी। यूं भी कांग्रेस छोटे राज्यों की हिमायती नहीं रही। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तथा अगले वर्ष की शुरुआत तक औली में अंतर्राष्ट्रीय शीलकालीन खेल आयोजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योगों के पलायन संबंधी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पैकेज की सीमा 2013 तक नहीं बढ़ा रही है। ऐसे में नए उद्योग आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में कंप्यूटरों के जंक खाने पर चिंता जताई। उन्होंने श्रीनगर मेडिकल कालेज की हालत ठीक करने संबंधी प्रयासों की जानकारी दी। आबकारी नीति के बारे में उन्होंने कहा कि रेवन्यू बढ़ाना सरकार का उद्देश्य नहीं है।