Monday, 12 January 2009

केंद्रीय कमेटी का भागीरथी दौरा

देहरादून: लगातार कई बैठकों के बाद भागीरथी नदी में जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर केंद्रीय कमेटी किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच पाई है। इसी पर निर्णय लेने से पहले कमेटी के सदस्य भागीरथी का मौका मुआयना करने निकले हैं। भागीरथी नदी पर निर्माणाधीन पाला मनेरी और भैरोंघाटी जल विद्युत परियोजनाओं को उत्तराखंड सरकार ने आंदोलन के दबाव में स्थगित कर दिया था, जबकि इसी नदी पर केंद्रीय एजेंसी एनटीपीसी द्वारा निर्माणाधीन लोहारी नागपाला परियोजना पर कार्य निरंतर चल रहा है। इसके बावजूद पर्यावरणविदों के दबाव में केंद्र सरकार ने एक कमेटी का गठन किया, जिसे तय करना है कि परियोजना के लिए सुरंग में पानी लेने के बाद मूल नदी में लीन पीरियड में कितना पानी छोड़ा जाए। इसी बिंदु पर केंद्रीय कमेटी लगातार चर्चा करती रही है। सभी बैठकों में यह चर्चा का केंद्र बिंदु रहा है। इसके बावजूद कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। निर्णय लेने में हो रही देरी की वजह से उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थगित की गई जल विद्युत निगम की निर्माणाधीन दो परियोजनाओं पाला मनेरी और भैरोंघाटी का कार्य ठप पड़ा हुआ है। इन दोनों परियोजनाओं पर उत्तराखंड का सौ करोड़ रुपये से अधिक व्यय हो चुका है। जल विद्युत परियोजना निर्माण के लिए जाड़ों का यही सीजन मुफीद होता है। जिसका अधिकांश समय गुजर चुका है। इससे अब यह लगभग तय हो गया है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम की ये दोनों परियोजनाएं एक साल पिछड़ जाएंगी। जिससे एक तरफ परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी, दूसरी तरफ राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य भी पिछड़ जाएंगे। केंद्रीय कमेटी में उत्तराखंड जल विद्युत निगम के चेयरमैन योगेंद्र प्रसाद भी शामिल हैं। रविवार को दिल्ली से आए केंद्रीय कमेटी के दल के साथ योगेंद्र प्रसाद भागीरथी के दौरे पर निकले। माना जा रहा है कि इस बार यह कमेटी कोई अंतिम निर्णय ले लेगी। क्योंकि कमेटी इस बात पर पहले ही निर्णय ले चुकी है कि भागीरथी पर किसी भी परियोजना को रोका नहीं जाएगा। राष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सभी परियोजनाएं जारी रखी जाएंगी। अब यह टीम मौके पर जाकर देखेगी कि मूल धारा में कितना पानी छोड़ा जाना उचित होगा, ताकि भागीरथी नदी का पारिस्थितिक संतुलन कायम रह सके।

आहत कलाकार सरकार पर भड़के

12 jan09- देहरादून: उत्तराखंड फिल्म एंड आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (उफ्वा)का कहना है कि प्रदेश का संस्कृति विभाग लोक संस्कृित शोषक विभाग बना हुआ है। रविवार को परेड ग्राउंड स्थित हिंदी भवन में उफ्वा के पहले प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन संपन्न होने के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर कलाकारों के प्रति बेरुखी का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि लोक संस्कृति , लोक कलाकार और लोक विद्या संरक्षण के नाम पर बना संस्कृति विभाग प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण इनका संरक्षण करने की बजाय कलाकारों के शोषण में जुटा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के फिल्म व लोक कलाकार बड़े समय से उद्वेलित हैं। प्रदेश की फिल्म व सांस्कृतिक नीति घोषित करने और लोक बोलियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर 12 सितंबर 2007 को विधासभा पर धरना भी दे चुके हैं।

दिल्ली में दिखेगे राज्य के उत्पाद

12,jan 09-मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने कहा है कि पर्वतीय क्षेत्र के पारंपरिक व्यवसाय ऊन उत्पादन और अन्य स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक रूप देने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। दिल्ली में बनने वाले उत्तराखंड निवास में यहां के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए शो-रूम बनाया जाएगा। इस शो-रूम सहित दिल्ली स्थित उत्तराखंड के अन्य कार्यालयों में भी राज्य के उत्पादों को नमूने के तौर पर प्रदर्शन व प्रचार के लिए रखा जाएगा। श्री खंडूरी, रविवार को परेड ग्राउंड में नेशनल हैंडलूम एक्सपो में आयोजित राज्य स्तरीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने राज्य को उपहार में संसाधन दिए हैं और यहां इस क्षेत्र की दक्ष प्रतिभाएं भी हैं, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक दौर में यहां के ऊनी उत्पाद काफी प्रसिद्ध थे और दूर-दूर से इनकी मांग आती थी। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी हम ऊन उत्पाद में विशेष स्थान हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने ऊन उत्पादन व अन्य उत्पादों को व्यावसायिक स्वरूप देने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए। उन्होंने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिल्पियों को यातायात व विपणन की व्यवस्था सुलभ कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। अध्यक्षता करते हुए राजपुर क्षेत्र के विधायक गणेश जोशी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए मार्केटिंग की पुख्ता व्यवस्था की जानी आवश्यक है। अपर सचिव उद्योग हेमलता ढौंडियाल ने एक्सपो के बारे में जानकारी दी। समारोह का संचालन अपर निदेशक उद्योग सुधीर चंद्र नौटियाल ने किया। समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों वर्ष 2006 एवं 2007 के राज्य स्तरीय हथकरघा व हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए गए। हथकरघा के लिए पूजा चौहान (टिहरी) व संतरामी (रौन गुदियार गांव उत्तरकाशी) को प्रथम और विन्या देवी (भाटुका सौड़ उत्तरकाशी) व प्रेम सिंह धर्मसत्तू (भराड़ी बागेश्र्वर) को द्वितीय पुरस्कार मिला। हस्तशिल्प के लिए सुरेश राम (आगर पिथौरागढ़) व सुश्री जानकी जोशी (सौड़ अल्मोड़ा) को प्रथम और पुष्कर राम (उमरगडा पिथौरागढ़) व सुश्री राधा अग्रवाल (लाला बाजार अल्मोड़ा) को द्वितीय पुरस्कार मिला। हस्तशिल्प में तृतीय पुरस्कार के लिए चयनित खजानी गुसांई (टिहरी) व गंगा खाम्पा (कसार देवी अल्मोड़ा) समारोह में उपस्थित नहीं हो पाई। इस मौके पर बहुद्देश्यीय वित्त विकास निगम के अध्यक्ष नरेंद्रस्वरूप मित्तल, भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बीडी रतूड़ी, जीएमवीएन के अध्यक्ष उमेश अग्रवाल आदि मौजूद थे।

उत्तराखंड में बाजार तलाश रहा हिमाचल

देहरादून: हथकरघा व हस्तशिल्प के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाला हिमाचल प्रदेश अपने उत्पादों के लिए अब उत्तराखंड में भी बाजार तलाश रहा है। पड़ोसी राज्य यूं तो लंबे समय से कई राज्यों में अपने उत्पादों का विपणन कर रहा है, लेकिन उसकी उम्मीदों को खास तौर पर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की धरती पर ही पंख लगे। यूपी व एमपी में मिल रहे अच्छे अनुभव के बीच हिमाचली हथकरघा उद्योग की नजर उत्तराखंड के बाजार पर है। यही कारण है कि हिमाचल के उपक्रम राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास सहकारी संघ ने भी देवभूमि का रुख किया है। हिमाचल में हथकरघा उद्योग की प्रगति का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि उसका अपना सरकारी उपक्रम राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास सहकारी संघ ही हैंडलूम में सालाना दो करोड़ से अधिक का व्यवसाय कर रहा है। संघ के तहत 290 सहकारी समितियां संचालित हैं। प्रत्येक समिति में 50 से अधिक सदस्य जुड़े हैं। जाहिर है पड़ोसी राज्य में उसके इस उपक्रम के जरिए 15 हजार से अधिक बुनकरों को सीधे रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण बुनकरों द्वारा तैयार हथकरघा उत्पादों का विपणन संघ स्वयं करता है, जिसके लिए कई वर्षो से आगरा, सोलन, भोपाल, शिमला, डलहौजी, ग्वालियर, नोएडा, जयपुर जैसे कई शहरों में प्रदर्शनी लगाई जा रही हैं। संघ के प्रदर्शनी प्रबंधक राकेश शर्मा बताते हैं कि संघ को सबसे ज्यादा व्यवसाय उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से मिलता रहा है।उत्तराखंड में हथकरघा उत्पादों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है, लिहाजा संघ को यहां भी बेहतर व्यवसाय की उम्मीद है। यही कारण है, कि संघ ने एक ही सीजन में यहां तीन प्रदर्शनियों का आयोजन किया।

बेगानेपन में बाहर हो गई फूलों की घाटी

उत्तराखंडअपनों की अनदेखी ही फूलों की घाटी को भारी पड़ गई। इसी बेगानेपन का नतीजा रहा कि देश विदेश में मशहूर उत्तराखंड की यह घाटी दुनिया के सात प्राकृतिक आश्चर्यों की दौड़ में टिकी न रह सकी। न्यू सेवन नेचुरल वंडर्स प्रतियोगिता में यह वैली दूसरे राउंड में जगह नहीं बना पाई। हालांकि भारत की उम्मीद अभी पूरी तरह से टूटी नहीं है। असम का काजीरंगा नेशनल पार्क प्रतियोगिता के दूसरे राउंड में जगह बनाने में सफल रहा। दुनिया के सात प्राकृतिक आश्चर्यो के चयन के लिए पुर्तगाल की संस्था न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन यह ऑन लाइन प्रतियोगिता करा रही है। इसमें लोगों को एसएमएस या ई-मेल के जरिए अपने पसंदीदा नाम को वोट देना होता है। पिछले साल ताज महल की वजह से न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन की प्रतियोगिता देश में काफी चर्चित रही थी। फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट न्यू सेवन वंडर्स डॉट कॉम के मुताबिक भारत के राष्ट्रीय प्रतिभागियों में काजीरंगा पार्क और बहुराष्ट्रीय प्रतिभागियों में गंगा नदी, पांगोंग झील ने पहला राउंड पार कर लिया है। ये प्राकृतिक अजूबे 261 नामित आश्चर्यो में शामिल हैं। प्रतियोगिता में 441 नाम आए थे। इनमें से 40 फीसदी यानी 180 नाम पहले राउंड में ही बाहर हो गए। शुरू में फूलों की घाटी दुनिया की 90 आश्चर्यो में शामिल थी मगर दिसंबर में वह 120वें स्थान पर चली गई। दरअसल किसी आधिकारिक ग्रुप ने उसे सपोर्ट ही नहींकिया। इससे वह वोटों में पिछड़ गई। दूसरे चरण में 77 टाप आश्चर्यो के चुनाव के लिए वोटिंग सात जुलाई 2009 तक चलेगी। इनमें से 21 आधिकारिक प्राकृतिक आश्चर्य चुने जाएंगे। जिनकी न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन का विशेषज्ञ पैनल 21 जुलाई को घोषणा करेगा। तीसरे और फाइनल राउंड के लिए वोटिंग दो साल यानी 2011 तक चलेगी।

Sunday, 11 January 2009

लंदन पहुंचा पहाड़ के अमन का कमाल

१० जनवरी ०९- कई वेव पेज डिजाइन कर चुका हैं अमन बिल गेट्स ने नाम दिया द-एनिमेटर द एनिमेटर के नाम से मशहूर देहरादून के नन्हें जीनियस अमन की आवाज लँदन तक जा पहुंची हैं । देहरादून कालेज आफ इंटरएकिटव आट्स का यह महज साठे आठ साल का प्रवक्ता अपनी उम्र से दुगने बीएसी लेवल के छात्रो को एनिमेशन के गुर सिखा रहा हैं लंदन की एजेंसी ने अमन की इस खूबी पर खबर प्रकाशित की हैं । गिनीज बुक आंफ वल्ड रिकाड्स के लिए उसका नाम भेजा गया हैं । अगर अप्रूवल मिला तो वह दुनिया का सबसे कम उम्र का प्रवक्ता बन जाएगा ।चुक्खूवाला में एक छोटे से स्कूटर मैकेनिक रहमान के घर २६ जुलाई २००० में जन्मे सेंट थामस के कक्षा ४ के छात्र अमन को अपने भाई से यह शौक जागा । और पिता ने उसके लिए सेकंड कंप्यूटर खरीदा था लेकिन उस पर कब्जा जमाया अमन ने ।अमन ने उस पर अंगुलियों का वह जादू जगाया कि बड़े -बड़े कायल हो गए । पुत्र की धुन ने पिता को भी उत्साहित कर दिया ।हिल्टान सेंटर में अपनी मेधा से वह स्पीड पकड़ी कि अच्छों-अच्छों की पकड़ से बाहर हो गया । अब तक वह डाटा लाँजिसिटक्स,आजीविका सुधार परियोजना आदि के लिए वेब पेज भी डिजाइन कर चुका है । वह बिल गेट्स से काफी प्रभावित है । अमन के सम्मान- उत्तरांचल राज्य अल्पसंख्यक आयोग की तरफ से -बाल गौरव सम्मान (१५ अगस्त २००६) प्रतिष्ठ सामाजिक संस्था नेशियो की तरफ से अनमोल रत्न अवा़र्ड
ऱाष्ट्रपति भी हुई कायल- ऱाष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ,राहुल गाधी सहित कई हस्तियों से मुलाकात कर अमन ने उन्हें भी अपनी प्रतिभा का कायल कर दिया । बिल गेट्स से तो अमन ने बाद में भी बात ती , अमन के नाम से ही वह पहचान जाते हैं कि यह दून के नन्हे एनिमेटर का फोन है। सचिन से मिलकर बहुत खुश हुआ था अमन सचिन कुछ ही दिनों पहले परिवार के साथ मसूरी आए थे तो उस समय ही सचिन से अमन की मुलाकात हुई थी।

Saturday, 10 January 2009

आपदा राहत निधि को सौ करोड़

10 jan 09-देहरादून : इस वर्ष आपदा राहत निधि के अंतर्गत सभी जनपदों के लिए 100.67 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रमुख सचिव (आपदा प्रबंधन) सुभाष कुमार ने बताया कि इसमें से 75 प्रतिशत धनराशि केंद्र सहायतित मद में मिली है। जनपदों को इसमें से 25.47 करोड़ की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। अब 39.88 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। आपदा के समय पीडि़तों को तत्काल सहायता उपलब्ध करने के लिए जनपदों को आवश्यक धनराशि दी गई है। अवशेष धनराशि का आवंटन जनपदों की मांग के अनुरूप कर दिया जाएगा। सेनानी के निधन पर शोक जताया देहरादून: राज्यपाल बीएल जोशी और मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने जनपद पौड़ी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मातबर सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। राज्यपाल ने कहा कि आजादी के आंदोलन में उनकी भूमिका युवाओं के लिए सदैव ही प्रेरणा की स्रोत रहेगी। सीएम ने कहा कि उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उप्र व उत्तराखंड सरकार से जवाब तलब नैनीताल: जमरानी बांध निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने उप्र एवं उत्तराखंड सरकार को दो माह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। जन सेवा कल्याण समिति के संयोजक ललित जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि विगत 33 वर्षो से जमरानी बांध निर्माण का मामला सरकार के पास लंबित है। राजनीति के चलते अभी तक जमरानी बांध के निर्माण कार्य में तेजी नहीं लायी गई है। मुख्य न्यायाधीश वीके गुप्ता व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई के बाद उप्र सरकार व उत्तराखण्ड सरकार को दो माह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। योगा महोत्सव ऋषिकेश में आयोजित होगा हल्द्वानी : सैफ खेलों के स्थगित होने के बाद राज्य सरकार अब योगा महोत्सव आयोजित करने जा रही है। यह मार्च में ऋषिकेश में होगा। साथ ही सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी समस्या रहित बनाने में जुटी

हाईकोर्ट ने किया महिला अभ्यर्थी का चयन रद्द

10.1.9-, नैनीताल: लोकसेवा आयोग द्वारा घोषित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के अंतिम परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने एक चयनित महिला अभ्यर्थी का चयन रद्द कर दिया है। खंडपीठ ने उक्त महिला अभ्यर्थी के स्थान पर याचिकाकर्ता विनोद कुमार वर्मन को नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश राज्य सरकार व आयोग को दिए हैं। उक्त परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी विनोद कुमार वर्मन द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिविजन) के 33 पदों के लिए विभिन्न चरणों में आयोजित परीक्षा का अंतिम परिणाम 2 अक्टूबर 08 को घोषित किया गया। घोषित परिणाम में याचिका कर्ता का नाम नहीं था। याचिका कर्ता के अनुसार आयोग व राज्य सरकार द्वारा महिला वर्ग हेतु शासनादेशों के अनुसार 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाना था जो कि घोषित सीटों के अनुरूप महिला अभ्यर्थियों के लिए 2 सीट से अधिक नहीं हो सकता, लेकिन दो स्थान पर तीन महिला अभ्यर्थियों का चयन कर दिया गया। याची का कहना था कि चयनित तीसरी महिला अभ्यर्थी शिवानी नाहर से वह स्वयं मेरिट लिस्ट में ऊपर हैं, इसलिए उसका चयन होना चाहिए था। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके गुप्ता व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने याचिका कर्ता को तीसरी चयनित महिला अभ्यर्थी शिवानी नाहर के स्थान पर नियुक्ति देने के निर्देश राज्य सरकार व आयोग को दिए हैं।

घर पहुंचे खिलाडि़यों का स्वागत

10 jan 09- गोपेश्र्वर, दिसंबर अंतिम सप्ताह से जनवरी प्रथम सप्ताह तक चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय अंडर 14 ग‌र्ल्स फुटबाल चैम्पियनशिप खेलकर जनपद वापसी पर खिलाडि़यों का भव्य स्वागत किया गया। उत्तराखण्ड फुटबाल टीम की मैनेजर मनीषा भण्डारी ने बताया कि सूबे की टीम के खिलाडि़यों के शानदार प्रदर्शन के बलबूते पूरे भारत में उत्तराखण्ड टीम का आठवां स्थान रहा। उत्तराखण्ड फुटबाल टीम में जनपद चमोली से सबसे ज्यादा 10 खिलाडि़यों का चयन प्रदेश की टीम में होने पर जिला फुटबाल संघ के अध्यक्ष बद्री भट्ट ने खुशी जताते हुए जिला फुटबाल संघ की एक बड़ी उपलब्धि बताया। श्री भट्ट ने यह भी बताया कि अभी तक जनपद से 17 बालिकायें व 7 बालक जिला फुटबाल संघ की ओर से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। चेन्नई में आयोजित चैम्पियनशिप में प्रतिभाग करने वाली खिलाडि़यों में गोपेश्र्वर से विभूति, प्रीति राणा, वन्दना, सुमन त्रिपाठी, प्रियंका रावत, सरोज, गैरसैंण से सपना, साक्षी, मीना, आशा, पौड़ी से मधु, बीना, हेमा पंत, सुमन, देहरादून से रक्षा पंवार, नैनीताल से मनीषा जोशी सम्मिलित हुये। श्री भट्ट ने चमोली से 10 खिलाडि़यों के चयन के लिए राबाइंका गोपेश्र्वर की व्यायाम शिक्षिका कुसुमलता के सहयोग को भी सराहा। प्रदेश टीम के फुटबाल कोच एम खान ने चेन्नई से लौटने पर बताया कि प्रदेश से हेमा पंत व रक्षा पंवार का चयन इण्डिया कैम्प के लिए हुआ है,जो प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

राजधानी में साकार होगा पंजाब का लोकजीवन

देहरादून, : यह पहला मौका है, जब लोहिड़ी पर्व पर 11 जनवरी को राजधानी देहरादून में पंजाब का लोकजीवन साकार हो उठेगा। इस पावन मौके पर होने वाला अपनी तरह का यह अनूठा आयोजन है। इसमें साज के साथ-साथ कलाकारों का समूह भी पंजाब से आएगा और इसके आयोजन का खर्चा भी पंजाब सरकार ही वहन करेगी। इसमें उत्तराखंड भाईचारा सभा सहयोगी की भूमिका में मौजूद रहेगी। उत्तराखंड लोहिड़ी सेलिबे्रशन कमेटी की ओर से राजपुर रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भाईचारा सभा के को-आर्डिनेटर हरकिरण सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार के भाषा विभाग के तत्वावधान में उत्तराखंड में पहली बार होने वाले इस सांस्कृतिक आयोजन को 27वां सर्वभारती साहित्यिक समागम नाम दिया गया है। आयोजन स्थल गुरुद्वारा रेसकोर्स के मैदान को बनाया गया है। उन्होंने बताया कि समारोह में चार चांद लगाने पंजाब से कलाकारों का 80-सदस्यीय जत्था राजधानी पहुंच रहा है। इन कलाकारों द्वारा समारोह में गिद्दा, भंगड़ा, जागो समेत हास्य प्रहसन की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

प्रो. पुरोहित अंतर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य

10 jan 09-देहरादून: राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, उत्तराखंड चैप्टर के अध्यक्ष पद्मश्री एएन पुरोहित को द माउंटेन इंस्टीट्यूट वांशिंगटन ने एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सलाहाकार समिति का सदस्य मनोनीत किया है। राष्ट्रीय विज्ञान समिति के सचिव डा. जीएस रावत ने जानकारी दी कि वैज्ञानिक प्रो. एएन पुरोहित को गुरुवार को सलाहाकार समिति का सदस्य मनोनीत किया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में बोर्ड के अध्यक्ष डा. डेविड स्लोआन ने वाशिंगटन में घोषणा की। श्री रावत ने बताया कि द माउंटेन इंस्टीट्यूट एशिया महाद्वीप के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण, जैव विविधतता संरक्षण, जलवायु संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, आर्थिक विकास आदि विषयों पर शोध कार्य कर विकास की योजना व नीति तैयार करती है। प्रो. पुरोहित के मनोनयन पर प्रदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एंव प्रबुद्धजनों ने हर्ष जताया और उन्हें बधाई दी।

उत्तराखंड में सूखे के हालात

10 jan09-: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में एक बार फिर रबी की फसल पर मौसम की मार पड़ने वाली है। पहले ही वर्षा न होने से फसल चौपट होने के कगार पर थी और अब रही-सही कसर पाले ने पूरी कर दी है। सूखे की तरफ इशारा कर रहे हालात को देखते हुए कृषि निदेशालय प्रदेश के सभी जनपदों से सूचना तलब कर रहा है। बीती बरसात के ठीक-ठाक गुजरने से खेती -किसानी से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि इस मर्तबा बारिश के लिहाज से सर्दी अनुकूल रहेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूरी सर्दी करीब -करीब बिन बरसात ही बीतने वाली है। हालांकि, नए साल की शुरुआत में मौसम के करवट बदलने पर किसानों में आशा का संचार हुआ, मगर बादलों के अपेक्षानुकूल न बरसने से उनकी उम्मीदें धरी की धरी रह गई। खासकर, पर्वतीय क्षेत्रों में जहां कृषि पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर है। रबी की फसल को ही लें तो सूबे में इसका रकबा करीब चार लाख हेक्टेयर है और इसमें भी करीब सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र की खेती वर्षा आधारित है। लेकिन, इस सीजन में बारिश न होने से वर्षा आधारित खेती को बड़ा झटका लगा है। रही-सही कसर पूरी कर दी है पाले ने। पर्वतीय क्षेत्रों में पाले के कारण गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। इस सबके चलते किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें हैं। यह सब हालात प्रदेश में सूखे की तरफ इशारा कर रहे हैं, जिससे कृषि विभाग के माथों पर भी बल आ गए हैं। कृषि निदेशक मदनलाल ने माना कि वर्षा न होने और अब पाले के कारण वर्षा आधारित खेती को नुकसान पहंुच रहा है। इसे देखते हुए सभी जिलों से सूचना मांगी गई है, ताकि स्थिति से निबटने को कदम उठाए जा सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसानों को रबी की फसल में सिंचाई करने को कहा गया है। बर्फवारी से सेब को मिलेगा फायदा नए साल की शुरुआत में प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और हल्की-फुल्की वर्षा से भले ही असिंचित खेती को कोई फायदा न पहंुचा हो, लेकिन इससे सेब उत्पादकों के चेहरों पर रौनक है। सेब के लिए बर्फबारी को बेहद मुफीद माना जा रहा है। नजर नहीं आ रहे राहत के आसार मौसम से अभी भी बहुत राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग के निदेशक डा.आनंद शर्मा का कहना है कि इस सीजन में अभी तक अपेक्षानुरूप वर्षा नहीं हुई है। अगले चौबीस घंटों के मौसम के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते एक सिस्टम बन रहा है और इससे अगले चौबीस घंटों में साढ़े सात हजार फुट से अधिक ऊंचाई पर हल्की बर्फवारी व वर्षा की संभावना है। अन्य क्षेत्रों में बूंदा-बांदी हो सकती है।

सरकार का हाथ तंग, नहीं बजट को धन

सरकार का हाथ तंग, नहीं बजट को धन 10 jan09-देहरादून सरकार का हाथ इस समय बेहद तंग है। आलम यह है कि विकास कायरें के लिए सरकार के पास धन नहीं है। ऐसे में आगामी वित्तीय वर्ष 09-10 के सालाना बजट में कटौती तय मानी जा रहा है। अब खुले बाजार से ऋण लेकर बजट को किसी तरह पिछले साल के आकार तक बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आज सचिवालय में अफसरों ने वित्तीय वर्ष 09-10 के वार्षिक बजट पर विचार किया। सूबे के अपने वित्तीय स्रोतों की हालत देख हर विभाग के प्रस्तावित बजट में कैंची चलती रही। आलम यह है कि कर्मियों को वेतन, पेंशन और एरियर देने के बाद राज्य के लिए अपने स्रोतों से 3100 करोड़ जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। खास बात यह है कि राज्य को इस बार दोहरी मार पड़ रही है। एक तो छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद वेतन, पेंशन और एरियर पर 1700 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर आगामी बजट के सपोर्ट को केंद्रीय वित्त आयोग से सहयोग भी नहीं मिल रहा है। इसकी वजह बारहवें वित्त आयोग का कार्यकाल पूरा होना है। चालू वित्त वर्ष के बजट में राजकोषीय घाटे की प्रतिपूर्ति के लिए बारहवें वित्त आयोग से अच्छा खासा वित्तीय सहयोग मिला है। तेरहवें वित्त आयोग का अभी पूरी तरह गठन भी नहीं हो पाया है। ऐसे में माना यह जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष के 4775 करोड़ के बजट के मुकाबले ये अगले साल संसाधन करीब 35 प्रतिशत कम होंगे। चालू वर्ष के बजट में 490 करोड़ निकाय और सार्वजनिक उपक्रमों के हिस्से से जोड़े गए थे। इसे उपयोग में ला पाना संभव नहीं बना। इस तरह चालू वित्तीय वर्ष का वास्तविक बजट 4285 करोड़ का ही है। अब अगले वर्ष 09-10 के बजट का आकार इस स्तर तक भी लाने में अफसरों का पसीना छूट रहा है। सूत्रों ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य के अपने स्रोतों से 3100 करोड़ की ही व्यवस्था हो पाएगी। इसे चालू वर्ष के 4285 करोड़ के बराबर लाने को भी करीब 1200 करोड़ रुपये कम पड़ेंगे। अगर ऐसा किया जाता है तो अगले साल सरकार को करीब 1200 करोड़ मार्केट बोरोविंग (बाजार ऋण) से जुटाने पड़ेंगे। मंदी को देखते हुए केंद्र सरकार भी राज्यों को बाजार से अतिरिक्त ऋण खुली छूट दे रही है। जाहिर है कि बाजार से ऊंची ब्याज दरों में लिया गया ऋण विकास कार्यो में लगाना राज्य को खासा महंगा साबित होगा।

फिर ताकत दिलाई याद भाजपा दिग्गज पहुंचे कार्यकर्ताओं के दरबार

10 jan 09-
हल्द्वानी: भाजपा लोकसभा चुनाव में जुट गयी है। इसका अहसास पार्टी नेतृत्व ने गतिविधियों से भी करा दिया है। लेकिन इस कवायद का केन्द्र कार्यकर्ता ही रहा। बार-बार उन्हें समर्पण का पाठ पढ़ाया गया और पार्टी का आधार से लेकर मार्गदर्शक तक बता दिया गया। पूरी प्रक्रिया के बाद लोकसभा चुनाव का सारथी भी कार्यकर्ता को बना दिया गया। हालांकि भाजपा को कार्यकर्ता आधारित पार्टी माना जाता है,लेकिन पार्टी के सत्तासीन होने के बाद से इस व्यवस्था पर ग्रहण लग गया था। कार्यकर्ताओं ने ही अपनी सरकार के विरोध में झंडा बुलंद कर दिया। पार्टी की बंद कमरों में हुई बैठकों में इस तरह की शिकवे-शिकायत भी की गयी। वैसे इसे दूर करने के लिए मुख्यमंत्री श्री खंडूरी ने भी भरसक प्रयास किये,उनके जितने भी दौरे हुए,सभी में कार्यकर्ताओं से मिलने का समय अलग रखा गया। इन सबके विपरीत बीते दिनों रुड़की में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं पर ही भरोसा जताया और वहीं यह निर्णय लिया गया है,सत्ता खुद कार्यकर्ता के पास जायेगी। इसकी शुरूआत गुरुवार को हल्द्वानी से की गयी। यहां सत्ता के मुखिया बंद कमरे में कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए,नाम क्या है, समस्या क्या है,पार्टी कैसे मजबूत होगी। चुनाव में क्या मुद्दे रहने चाहिए। जैसे तमाम सवाल हुए। कार्यकर्ताओं को समर्पण का पाठ पढ़ाया गया। पार्टी के संविधान में दर्ज कार्यकर्ताओं की भूमिका का जिक्र किया गया। बाद में बात यह ही रही,कि लोकसभा चुनाव आ रहा है। इसे कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर ही जीता जा सकता है। इसलिए अभी से कार्यकर्ता पार्टी व सरकार की नीतियों के प्रचार-प्रसार में जुट जाये। इसके अलावा नागपाल होटल में चल रही विधानसभा क्षेत्र संयोजक व सहायकों की बैठक में भी इसपर अधिक फोकस रहा,कि कार्यकर्ता आपसी मतभेद भूलकर चुनाव की तैयारियों में जुट जायें। इसमें पार्टी नेताओं ने उन्हें (कार्यकर्ताओं) पार्टी का आधार बताने के साथ ही मार्गदर्शक तक बता दिया। कुल मिलाकर कार्यकर्ताओं का पार्टी को कितना सहारा मिलता है, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। फिलहाल पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव कार्यकर्ताओं के भरोसे ही लड़ने का फैसला कर लिया है।

अब मरीजों के द्वार पहुंचेगी मोबाइल चिकित्सा

10 jan 09-भीमताल: जिले के दूरदराज पर्वतीय ग्रामीण अंचलों के निर्धन ग्रामीणों को छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए अब बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिले के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य को लेकर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग व बिड़ला इंस्टीटयूट आफ साइंटफिक रिसर्च सेंटर भीमताल के संयुक्त प्रयासों से शीघ्र ही उत्तराखंड मोबाइल हास्पिटल चिकित्सा सेवा शुरू होने जा रही है। बिड़ला संस्थान की ओर से योजना क्रियान्वयन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सहमति जताते हुए गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो शासन से हरी झंडी मिलते ही फरवरी माह में इसका शुभारम्भ कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य को लेकर प्रदेश के 6 पर्वतीय जिलों में केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के उपक्रम सूचना पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टाइफैक) व बिड़ला इंस्टीटयूट आफ साइंटफिक रिसर्च सेंटर के संयुक्त प्रयास से अक्टूबर 2002 से अक्टूबर 07 तक उत्तराखंड मोबाइल हास्पिटल चिकित्सा सेवा चलाई गई। योजना की सफलता को देखते हुए इसकी समयावधि बढ़ाकर पहले मार्च 08 व उसके बाद में मई तक कर दी गई। तब से आज तक योजना दोबारा शुरू नहीं हो पाई है। बिड़ला इंस्टीटयूट के प्रशासनिक अधिकारी व मोबाइल हास्पिटल के संयोजक जीडी पलडि़या ने बताया कि योजना संचालन को लेकर संस्थान व स्वास्थ्य विभाग सहमत हो चुके हैं। शीघ्र ही सरकार से हरी झंडी मिलने की सम्भावना है। उन्होंने बताया कि पूर्व में 5-6 साल तक लगातार चल चुके वाहन को दोबारा आधुनिक रूप में तैयार किया जा रहा है। इस वैन में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, इसीजी, पैथोलाजी लैब आदि सभी जरूरी सुविधाएं रहेंगी। विशेषकर महिला टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच, कापर-टी आदि महिलाओं से सम्बंधित सभी बीमारियों की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्थलों का चयन कर माह में दो बार शिविर लगाया जाएगा। भाजपा जिला मंत्री प्रदीप पाठक व ग्रामीण मंडल महामंत्री दिनेश सांगुड़ी ने बताया कि योजना को शीघ्र शुरू कराने के लिए वह मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी को भी इस योजना से अवगत कराएंगे।

संस्कृति से रूबरू कराते हैं सांस्कृतिक मेले

10 jan 09-हल्द्वानी: छह दिवसीय उत्तरायणी मेले का शुभारम्भ गुरुवार को हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बलवन्त सिंह चुफाल ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक मेले अपनी संस्कृति से रूबरू कराते हैं। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में आयोजित मेले का उद्घाटन संस्थापक अध्यक्ष श्री चुफाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। संस्था के अध्यक्ष डा. चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि मेले के आकर्षण में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। मेला संयोजक पूरनचंद्र भंडारी ने कहा कि 25-30 दुकानों शुरु हुए इस मेले ने भव्य रूप ले लिया है। इस बार लगभग 150 दुकानें मेले में सजी है। इससे पूर्व कल्पना भंडारी, विमला सांगुड़ी, अनीता रैकुनी, मंजू पांडे, पुष्पा तिवारी, पुष्पा सम्भव, नीमा भट्ट ने शगुन आखर गाकर मेले को परंपरागत स्वरूप प्रदान किया। साथ ही पं. कैलाश भट्ट के निर्देशन में ब्राह्मणों ने स्वस्तिवाचन का पाठ किया। इस अवसर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमन्त बगड़वाल, गजराज बिष्ट, एनबी गुणवन्त, जितेंद्र मेहता, हुकुमसिंह कुंवर, केदरासिंह रावत,मंगतराम गुप्ता, रेनू तोमर, चमन लाल, ठाकुरदास सिंह, रत्ना श्रीवास्तव, दया सनवाल, निर्मला जोशी आदि उपस्थित थे।

ओखलकांडा में स्थापित होगा गो मूत्र शोधन केंद्र

10 jan 09-हल्द्वानी : प्रदेश में अल्मोड़ा के बाद जनपद नैनीताल में भी दूसरा गो मूत्र शोधन केंद्र जल्द अस्तित्व में आ जाएगा। दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ द्वारा ओखलकांडा ब्लाक के खनस्यू गांव में शोधन केन्द्र बनाने का कार्य शुरु कर दिया है। जो जनवरी अंतिम सप्ताह तक बनकर तैयार हो जाएगा। यहां से तैयार होने वाले गो अर्क को पतंजलि योग पीठ खरीदेगा। खनस्यू में बन रहे गो मूत्र शोधन केंद्र के लिए मशीन के सभी कल पुर्जे मंगा लिये गये हैं। इस गोमूत्र शोधन केन्द्र में सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों की प्रजाति की गाय का मूत्र ही एकत्र किया जायेगा। गोमूत्र केवल उन दुग्ध उत्पादकों से ही लिया जायेगा जो दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ समिति के सदस्य है। डेरी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह गोमूत्र पांच रुपये लीटर पशुपालकों से खरीदा जायेगा। इस मूत्र को मशीन में प्रोसेस कर अर्क के रूप में पतंजलि योग पीठ को 25 रुपये लीटर में बेचा जायेगा। डेरी विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि संयंत्र के कल पुर्जो को असेम्बल करने का काम शुरू कर दिया जायेगा। दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के महाप्रबंधक डा. मोहन चंद्र ने बताया कि शोधन केंद्र स्थापित करने में करीब तीन लाख रूपए से अधिक खर्च होगा। अर्क सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों के प्रजाति वाले गाय का मूत्र से ही तैयार होगा। उन्होंने बताया कि इस गोमूत्र शोधन केन्द्र के लिए तकरीबन सभी काम हो गये हैं, सिर्फ एसेम्बल करने का काम बाकी है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों से पांच रुपये लीटर गोमूत्र खरीद कर अर्क बनाने का काम फरवरी तक शुरू कर दिया जायेगा।

उत्तराखंड आंदोलन के लिए प्रताड़ना झेलने वालों की मुराद हुई पूरी

सम्मान : जेल न जाने वाले भी आन्दोलनकारी

23दिसंबर 08 का शासनादेश जारी

सरकार ने तय किये पांच मानक , शासनादेश भी जारी

उत्तराखंड राज्य स्थापना के लिए सँघषॆ करने वालों की मुराद मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने पूरी कर दी हैं आंदोलनकारीयों को चिन्हित करने को अब नये मानक तय कर दिए गए हैं । अब जेल न जाने वालों को भी आंदोलनकारी का सम्मान मिल सकेगा ।राज्य निमाण आंदोलन में लोगों ने तमाम तरह की प्रताड़नाए झेली । इस आँदोलन की एक खास बात यह रही कि तमाम लोग सीधे तौर पर इससे जुडे रहे तो तमाम लोगों ने दूर रहकर इसे गति प्रदान की । मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुभाष कुमार ने इसकी पुष्टि की हैं उन्होने बताया कि नये शासनादेश में पांच मानक तय किये गये हैं

१-भले ही कोई जेल न गया हो पर अगर एल आईयू की आंदोलन से जुड़ी किसी भी रिपोटॆ मे उसका नाम शामिल हैं तो उसे आंदोलनकारी माना जाएगा ।

२- इसी प्रकार आंदोलन में चोट लगने के बाद कराए गए मेडिकल का प्रमाणपत्र भी इस सूची में नाम शामिल कराने के लिए पयाप्त हैं

३-किसी भी थाने मे दजॆ एफ आई आऱ में किसी का भी नाम शामिल हों उसे आंदोलनकारी माना जाएगा ।

४-अगर किसी को गिरफ्तार किया गया हैं और अदालत ने उस तत्काल रिहा कर दिया हो उसे आंदोलनकारी माना जाएगा

५-अगर जिलाधिकारी किसी साक्ष्य से संतुष्ठ हो तो उसे उसे आंदोलनकारी माना जाएगा । ख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को इस बारे में निदेश जारी कर दिये है ।यदि आप या आपका कोई परचित इस मानक में आता हैं तो इसकी सूचना संबधित जिलाधिकारियों को देकर आँदोलनकारियों की सुची में अपना नाम दजॆ कराये । इससे यदि आप राज्य में सरकारी नौकरी एंव सम्मान के भागीदार बन जाएगें । उत्तराखंड में के लिए आँदोलनकारियों विशेष आऱक्षण की सुविधा हैं यदि कोई जानकारी प्राप्त करनी हो तो हमेशा आपके साथ -राकेश जुयाल -09412346262

Friday, 9 January 2009

अब नोडल कार्यालय को भी देहरादून ले जाने की तैयारी!

9Jan 09श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद श्रीनगर से कई कार्यालय हटाए जा चुके हैं। वर्ष 2001 में यहां से हटाकर हल्द्वानी भेजा गया दुग्ध कार्यालय उन्हीं में से एक था। हल्द्वानी गए दुग्ध निदेशालय के स्थान पर श्रीनगर में डेयरी विकास नोडल कार्यालय खोला गया। इसमें उपनिदेशक स्तर के अधिकारी की तैनाती की गयी। गढ़वाल मंडल के जिलों में दुग्ध विकास को सुनिश्चित करने का जिम्मा इस नोडल कार्यालय पर है। अब एक बार फिर से दुग्ध विकास के नोडल कार्यालय को भी देहरादून ले जाने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार नोडल कार्यालय को देहरादून ले जाने की तैयारियां अंतिम चरण में है। हालांकि प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इससे पहले भी कई बार इस कार्यालय के श्रीनगर से न हटाने की बात कह चुके हैं। बावजूद इसके दुग्ध विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत ने दुग्ध विकास मंत्री के आदेश को भी रद्दी की टोकरी में डालने की योजना बना ली। श्रीनगर की जनता ने मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी से मांग करते हुए कहा है कि गढ़वाल सांसद रहते हुए उन्होंने ही इस कार्यालय को श्रीनगर में खुलवाया था और अब इसे देहरादून ले जाने के विभागीय षड्यंत्र को वह रोकने का आदेश दें।

9 jan 09-देहरादून: पणजी (गोवा) में हुई 23वीं राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह ने स्वर्ण और विकास चौहान ने कांस्य पदक जीतकर पुलिस का नाम रोशन किया है। उत्तराखंड स्टेट ताइक्वांडो-डू फेडरेशन के महासचिव नीरज वर्मा ने यह जानकारी दी। प्रतियोगिता में 26 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता के विभिन्न भार वर्गो में भूपेंद्र सिंह ने सूबे को स्वर्ण और विकास चौहान ने कांस्य पदक हासिल कर 9सूबे को सफलता दिलाई।

9jan09-उत्तरकाशी में नंदा देवी किशोरी योजना की वर्षगांठ?पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देतीं किशोरियां।

पूर्व सांसद बलराज पासी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह के बीच वर्चस्व

देहरादून : भाजपा ने नैनीताल संसदीय सीट से कांग्रेस का वर्चस्व समाप्त करने की दिशा में कवायद शुरू कर दी है। इस सीट से टिकट हासिल करने का मुकाबला अब ही सिमट गया है। भाजपाई रणनीतिकार इस सीट पर जीत के लिहाज से इन दोनों ही नेताओं का कद आंक रहे हैं। पूर्व मुख्य मंत्री एनडी तिवारी की वजह से नैनीताल सीट को कांग्रेस का माना जाता रहा है। 1991 में राम लहर में बलराज पासी और फिर 1998 में इला पंत ने एनडी को हराया पर इसके बाद व उसके पहले के सभी चुनावों इस सीट पर कांग्रेस का ही परचम लहराता रहा। एनडी या तो खुद या फिर जिसे चाहा उसे कांग्रेस से लोकसभा पहुंचाते रहे। इस बार हालात कुछ बदले से दिख रहे हैं। एनडी इस समय सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। अगर वे मैदान में नहीं आते हैं तो भाजपा के पास इस सीट को जीतने का मौका हो सकता है। पार्टी स्थित सूत्रों ने बताया कि शुरुआती दौर में इस सीट के लिए बने पैनल में योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष केसी पंत और पूर्व सांसद बलराज पासी के नाम शामिल थे। श्री पंत की इच्छा खुद की बजाय अपने पुत्र सुनील को चुनाव लड़वाने की थी। बताया जा रहा है कि प्रदेश भाजपा सुनील के नाम पर सहमत नहीं दिख रही थी। ऐसे में पासी का नाम खासा चर्चा में था। सूत्रों ने बताया कि अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत ने खुद भी इस सीट से दावेदारी ठोक दी है। उनका तर्क है कि अल्मोड़ा सीट आरक्षित होने के बाद से उनके लिए कोई सीट नहीं बची है। फिर राज्य सभा में भी उन्हें नहीं भेजा गया। अब इस दावेदारी के बाद भाजपा के रणनीतिकार बचदा और पासी का कद आंकने की कवायद में हैं। देखा जा रहा है कि एनडी के न आने की स्थिति में सपा और बसपा प्रत्याशियों के मैदान में रहते दोनों में कौन ज्यादा ताकतवर साबित हो सकता है। दोनों दावेदारों को ध्यान में रख नैनीताल सीट के मतदाताओं के संभावित रुख को भी देखा जा रहा है। पार्टी की सोच है कि नैनीताल सीट के मतदाताओं का मिजाज पर्वतीय मतदाताओं से खासा भिन्न हैं। इस सीट के जातीय समीकरणों का गुणा-भाग लगाने के साथ ही यह देखा जा रहा है कि किस दावेदार का मिजाज मतदाताओं की कसौटी पर खरा उतरने वाला है। माना जा रहा है कि भाजपा इस सीट पर प्रत्याशी जल्द घोषित करेगी, ताकि उसे जमीन पर काम करने का पूरा मौका मिल सके।

शिल्पियों की संजीवनी हिमाद्रि

देहरादून: उत्तराखंडी शिल्पियों का कौशल धीरे-धीरे देशभर में पहचान पाने लगा है और यह संभव हो पाया उद्योग विभाग के प्रयासों से। यूं तो हस्तशिल्प यहां पहले भी मौजूद था, लेकिन उत्पादों के बाजार की जरूरतों के मुताबिक न होने से यह आर्थिकी का मजबूत जरिया नहीं बन पाया। समय के साथ हालात बदले और अब बाजार भी हैं तो स्थानीय उत्पादों की डिमांड भी। उत्तराखंड में हस्त कौशल की कभी कमी नहीं रही, लेकिन पहले लोग अपनी जरूरत के हिसाब से उत्पाद तैयार करते थे। बिक्री की बात थी नहीं, ज्यादा हुआ तो आसपास के गांवों में अन्न, नमक आदि के बदले हस्त निर्मित इन उत्पादों संटवारा (विनिमय) कर लिया जाता था। लेकिन, धीरे-धीरे इन कारीगरों को भी अहसास होने लगा कि स्वयं के लिए कुछ उत्पाद तैयार कर लेने भर से काम नहीं चलने वाला। उन्होंने इसके लिए स्थानीय स्तर पर बाजार तलाशने शुरू किए, किंतु यह प्रयास लोगों की सीमित जरूरतों और उत्पादन लागत के बिक्री मूल्य से अधिक होने के कारण कारगर साबित नहीं हो पाया। पृथक राज्य के अस्तित्व में आने के बाद जो अच्छी बात हुई, वह थी इन अभावग्रस्त कारीगरों की ओर सरकार की नजरें इनायत होना। हालांकि, प्रयास उतने नहीं हुए, जितने होने चाहिए थे, लेकिन जो कुछ हुए उनसे हस्तशिल्पियों में चेतना जागी कि वह भी अपने उत्पादों से स्वयं के साथ ही प्रदेश की आर्थिकी संवार सकते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि उत्तराखंडी उत्पाद प्रतिस्पद्र्धा से होड़ में शामिल हो गए। पिछले कुछ वर्षो में उत्तराखंडी हस्तशिल्प उत्पादों ने देश के अन्य प्रांतों से होड़ लेते हुए लोगों के बीच खासी पैठ बनाई है। इस सबमें अहम् भूमिका निभा रहे हैं हिमाद्रि शोरूम, जो उद्योग विभाग के प्रयासों से अस्तित्व में आए हैं। उद्योग विभाग के अपर निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल ने बताया कि स्थानीय शिल्पियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विभाग ने बद्रीनाथ, श्रीनगर, उत्तरकाशी, हरिद्वार व काशीपुर के अलावा राजधानी दिल्ली में भी तीन हिमाद्रि शोरूम स्थापित किए हैं। इन शोरूमों में उत्पादों की बिक्री का जिम्मा शिल्पियों का नहीं, बल्कि विभागीय कर्मी का होता है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा उत्पादों की कुल बिक्री में से 10 फीसदी शुल्क काटकर शेष राशि का चेक उत्पादकों को दे दिया जाता है। श्री नौटियाल ने बताया कि विभाग द्वारा जल्द ही चमोली व अल्मोड़ा में भी हिमाद्रि शोरूम स्थापित किए जाएंगे।

शिक्षा मित्रों का आंदोलन समाप्त

9jan 09-वरिष्ठता क्रम में बीटीसी प्रशिक्षण प्रदान करने का आश्वासन मिलने के बाद शिक्षा मित्रों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। इस संबंध में शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस ने शिक्षा सचिव का पत्र शिक्षा मित्रों को सौंपा। पत्र मिलने के बाद शिक्षा मित्रों ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। शिक्षा मित्र विधानसभा के समक्ष पिछले तीस दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। शुक्रवार से शिक्षा मित्र कार्य पर लौट जाएंगे। गुरुवार को शिक्षा सचिव का पत्र लेकर शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस और आपदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला विधानसभा के समीप स्थित धरना स्थल पहुंचे। शिक्षा निदेशक ने धरने पर बैठे शिक्षा मित्रों को पत्र पढ़कर सुनाया और पत्र शिक्षा मित्र महासंघ को सौंप दिया। पत्र में शिक्षा मित्रों को शैक्षिक योग्यताओं के अनुरूप वरिष्ठता क्रम में बीटीसी प्रशिक्षण प्रदान करने संबंधी प्रस्ताव तैयार कर उच्च स्तरीय अनुमोदन को भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है। इसके साथ ही जो शिक्षा मित्र बीटीसी प्रशिक्षण के लिए निर्धारित शैक्षिक अर्हता पूरी नहीं करते उन्हें इसके लिए समय दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही पिछले तीस दिनों से हड़ताल कर रहे किसी भी शिक्षा मित्र के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन भी दिया गया है। पत्र मिलने के बाद शिक्षा मित्र महासंघ के अध्यक्ष गुलाब चंद रमोला ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। महासंघ के प्रवक्ता रविंद्र खाती ने बताया कि शुक्रवार से सभी शिक्षा मित्र अपने-अपने स्कूलों में कार्य पर लौट जाएंगे। इस अवसर पर ललित द्विवेदी, रमेश रावत, तारा, संगीता चौहान, मंगत सिंह नेगी आदि शिक्षा मित्र उपस्थित थे।

दिल्ली की तजॆ पर दून बस स्टापेज

9 jan 09-देहरादून: दून की यातायात व्यवस्था सुधरे या नहीं, बस स्टापेज की दशा जरूर बदलने वाली है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ महीनों में दून के बदहाल बस स्टापेज दिल्ली की तर्ज पर चमकते-दमकते नजर आएंगे। नगर निगम की योजना के मुताबिक इन स्टापेज पर सवारी बस या विक्रम का इंतजार ही नहीं करेंगी, बल्कि यहां जनसुविधाएं और विभिन्न उत्पादों के स्टॉल्स का भी मजा लिया जा सकेगा। निगम इस योजना को जल्द परवान चढ़ाना चाहता है और इसके लिए बाकायदा स्पॉन्सर्स से बातचीत भी शुरू कर दी गई है। हालांकि योजना पहले चरण में ही है। राजधानी में विभिन्न सड़कों पर करीब साठ बस स्टापेज हैं, लेकिन अधिकांश बदतर हालात में हैं। यहां न तो यात्रियों के लिए ठीक से बैठने की सुविधाएं मौजूद हैं और ना ही जनसुविधाएं। कई स्टापेज पर तो गंदगी का अंबार लगा रहता है। चुनावी पोस्टरों और विभिन्न कंपनियों व संस्थानों के इश्तिहारों से अटे पड़े इन स्टापेज की ओर कोई झांकना तक पसंद नहीं करता। आलम यह है कि न तो यात्री यहां इंतजार करते हैं और ना ही विक्रम या बसें यहां पर रुकती हैं। निगम की नई योजना कामयाब रही तो शहर के सभी स्टापेज चकाचक नजर आएंगे। जानकारी के मुताबिक निगम स्टापेज के कायाकल्प को तैयार है। इसके तहत स्टापेज निर्माण के लिए विभिन्न कंपनियों को स्पॉन्सर बनाने की योजना है। स्टापेज पर उक्त कंपनी का विज्ञापन प्रचारित किया जाएगा, साथ ही उत्पादों की बिक्री के लिए वहां स्टॉल भी लगाया जाएगा। स्टापेज की देखरेख की जिम्मेदारी प्रायोजक कंपनी की होगी। इस बाबत मेयर विनोद चमोली ने बताया कि अभी योजना प्रारंभिक चरण में है। स्टापेज की स्पॉन्सरशिप के लिए बात चल रही है। कुछ कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। मंदी के कारण अभी बात आगे नहीं बढ़ पाई है। निगम दूनवासियों को उच्चस्तरीय सुविधाएं देने को संकल्पबद्ध है और जल्द ही इस योजना को मूर्त रूप दिया जाएगा।

अल्मोड़ा में बनेगा उत्तराखण्ड का पहला रूडसेट भवन

9 jan 09-अल्मोड़ा: महात्मा गांधी ग्रामीण विकास एवं स्वनियोजित प्रशिक्षण संस्थान रूडसेट भवन निर्माण के लिए केन्द्र ने एक करोड़ रुपए की धनराशि देने का फैसला किया है। इस संस्था का हवालबाग में उत्तराखण्ड का पहला भवन बनेगा। अल्मोड़ा में संस्थान के संचालन का दायित्व स्टेट बैंक को दिया गया है। संस्थान का उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल उद्यमी बनाने के साथ ही साथ आत्मनिर्भर बनाना है। एसबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय प्रबंधक डा.बीएस भोज को संस्थान का निदेशक नियुक्त किया गया है। एसबीआई के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप तिवारी ने बताया कि अब तक गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 80 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा फील्ड ट्रेनिंग व अनुभव के लिए 14 महिलाओं के एक समूह को पंतनगर का भ्रमण कराया जा चुका है। इस संस्थान के संचालन में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, प्रदेश सरकार और नाबार्ड सहभागी रहेंगे। ट्रेनिंग सेंटर में जो भी उत्पाद प्रशिक्षु बनाएंगे उसके विपणन के लिए सरकार ने जिम्मेदारी ली है।

घोषणा नहीं कार्य में विश्र्वास रखती है भाजपा:

बिष्टलालकुआं: भाजपा सरकार विकास की घोषणाएं ही नहीं करती अपितु वह इन पर अमल भी करती है। नगर वासियों के लिये स्वीकृत कई विकास योजनाओं पर इस वर्ष कार्य तो शुरू होगा ही साथ ही वर्षो पुरानी टीपी नगर एवं भूमि के नियमतीकरण की मांग भी शीघ्र पूरी होगी। नगर में कई योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण समारोह में धारी के विधायक गोविन्द सिंह बिष्ट ने उक्त बातें कही। श्री बिष्ट ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में भूमि के नियमतीकरण का कार्य शुरू हुआ लेकिन शुल्क ज्यादा होने के कारण लोगों को इसके हक के लिए काफी कीमत चुकानी पड़ती।

छात्रसंघ ने भी किया योग प्रशिक्षितों का समर्थन

9 jan08- नैनीताल: नियुक्ति की एक सूत्रीय मांग के समर्थन में गुरुवार को योग प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन के बैनर तले योग प्रशिक्षितों का धरना जारी रहा। इस दौरान छात्रसंघ पदाधिकारियों ने भी धरना देकर मांग का समर्थन किया। धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने आंदोलन की सुध न लिए जाने पर शासन-प्रशासन के प्रति रोष जाहिर किया। वक्ताओं का कहना था कि सीबीएसई के नए पाठयक्रम में योग को शामिल करने के बाद भी योग प्रशिक्षितों की उपेक्षा समझ से परे

मूलभूत जरुरतों को भी तरस रहा शहर

9 jan09-हल्द्वानी स्वच्छ, सुंदर व स्वस्थ शहर का सपना तो पूर्व पालिकाध्यक्षों ने भी देखा था, लेकिन शहर अब भी मूलभूत आवश्यकताओं से ही महरुम है। बिजली, पानी, सड़क, पुस्तकालय, आडिटोरियम, सीवर ट्रीटमेंट प्लान, टंचिंग ग्राउंड तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पूर्व पालिकाध्यक्ष महानगर बनने से पहले योजनाबद्ध तरीके से शहर का विकास किये जाने की बात करते हैं। उनका कहना है कि अगर 25 साल बाद को ध्यान में रखते हुये योजनायें नहीं बनायी गयी तो शहर अव्यवस्थित हो जाएगा। पूर्व पालिकाध्यक्ष व विधानपरिषद सदस्य नवीन तिवारी का कहना है कि शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है। गांवों ने अब कालोनियों की शक्ल ले ली है। यहां पर कॉम्पलेक्स व अपार्टमेंट तक बन गये हैं। लेकिन अभी भी शहर में स्वच्छ जल पीने को उपलब्ध नहीं है। हजारों जानें ले चुकी नहरों को भूमिगत करने का मामला धरातल तक नहीं आ पा रहा। सड़कों का चौड़ीकरण कर डिवाइडर बनाने और बीच में बिजली के खंभे लगाये जाने चाहिये। शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिये मंगलपड़ाव से कोतवाली तक ओवरब्रिज बनाना होगा। पूर्व पालिकाध्यक्ष सुषमा बेलवाल का कहना है कि शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से किये जाने की आवश्यकता है। महानगर की ओर बढ़ते शहर के लिये सड़कें भी चौड़ी होनी चाहिये। स्वच्छता को ध्यान रखते हुये कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था होनी चाहिये। पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड़वाल का कहना है कि शहर की सड़कों के किनारे छोटे-छोटे हरे-भरे पेड़ लगाने और हाईटेक पुस्तकालय बनाने का सपना था। सड़क को दुबारा न खोदना पड़े इसके लिये पहले ही पाइप लाइन व सीवर लाइन डाली जाय। शहर खूबसूरत बने इसके लिये डीके पार्क व रामलीला मैदान के नीचे पार्किंग और स्टेडियम बनाने की आवश्यकता है। एचएन इंटर कालेज के प्रबंधक महेश चन्द्र बेलवाल का कहना है कि शहर का विकास केवल बयानबाजी से नहीं हो सकता है। शहर में कूड़ा निस्तारण के लिये कोई जगह नहीं है। टंचिंग ग्राउंड की जगह पर शनि बाजार बन गया। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। अगर मल निस्तारण नहीं होगा, पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं होगी तो महानगर अव्यवस्थित, अनियंत्रित व अनियोजित हो जाएगा। उनका कहना है कि शहर के विकास में व्यक्तिगत हित आड़े आ जाता है।

हैप्पी-बर्थडे तुम जियो हजारों साल 57वर्ष के हो गए यशपाल,

9 jan09- हल्द्वानी: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष यशपाल आर्य गुरुवार को 57वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन को कांग्रेसियों ने पूरे जोश- खरोश के साथ मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उनकी दीर्घायु की कामना के लिए जगह-जगह गरीबों, कुष्ठ रोगियों और मरीजों को जहां कंबल व फलों का वितरण किया, तो श्री आर्य के आवास पर बधाई देने वालों का सुबह से ही तांता लगा रहा। श्री आर्य ने अपना 57 वां जन्मदिन छड़ैल सुयाल स्थित आवास पर सादगी से मनाया। आवास परिसर के बाहर स्थित मंदिर पर उन्होंने पत्नी पुष्पा आर्य, पुत्र संजीव आर्य, पुत्रवधू रेखा आर्य के साथ हवन-पूजन किया।

दमुवाढुंगा को राजस्व ग्राम की कवायद

9,jan09-: दमुवाढुंगा खाम जवाहर ज्योति को राजस्व ग्राम बनाए जाने की नए सिरे से कवायद शुरु हो गई है। ग्रामीणों की वर्षो से चली आ रही इस मांग पर शासन की मंजूरी के बाद स्थलीय निरीक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों से समस्त अभिलेखों के सत्यापन की पहल तेज कर दी है। गुरुवार को जेडीएम पब्लिक स्कूल जवाहर ज्योति में वन एवं परिवहन मंत्री बंशीधर भगत की अध्यक्षता में बैठक हुई। श्री भगत ने कहा कि ग्रामवासियों की लंबे समय से दमुवाढुंगा को राजस्व ग्राम घोषित करनी की मांग चली आ रही थी। जिसको सरकार के समक्ष रखा गया। उन्होंने सर्वे टीम को पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। इसमें संयुक्त सर्वे टीम द्वारा प्रथम चरण में ग्रामीणों से अभिलेख प्रस्तुत करने का कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। 11 से 19 जनवरी तक जमरानी कालोनी स्थित अतिथि गृह में लोगों को परिवार की सूची, मुखिया का फोटो, राशन कार्ड, पहचान पत्र, बिजली एवं पानी के बिल, परिवार रजिस्टर की नकल आदि अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। ग्राम प्रधान महेश जोशी ने ग्राम वासियों से प्रतिदिन प्रात: 10 से सायं पांच बजे तक बसावट की पुष्टि में सहयोग को कहा। वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त सर्वे टीम 20 जनवरी से गांव का स्थलीय निरीक्षण एवं पुष्टि करेगी। बैठक में एसडीएम प्रताप सिंह साह, तहसीलदार प्रत्यूष सिंह, ब्लाक प्रमुख शांति भट्ट, एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट, नायब तहसीलदार शिव बलीकरन, डिप्टी रेंजर सेवा राम, देवीदयाल उपाध्याय, चंद्र प्रकाश, पुरुषोत्तम भट्ट, महेशानंद, विद्या देवी, रमेश चंद्र, कमला, पुष्पा मेहता, मुन्नी वाणी, राजेंद्र सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।

वन माफियाओं की गिरफ्त में तराई

9,jan09-हल्द्वानी तराई धीरे-धीरे वन माफियाओं की गिरफ्त में पहंुचती जा रही है। जंगलों अमूल्य धरोहर इन माफियाओं ने ठिकाने लगा दी है। इस सच्चाई को खुद तराई केंद्रीय वन प्रभाग की रिपोर्ट बयां कर रही है। माफियाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से संपर्क साधा है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में मुख्य रुप से हल्द्वानी,रुद्रपुर, बाजपुर, बरहैनी, कालाढंुगी का वन क्षेत्र पड़ता है। चूंकि इनकी जंगलों की सीमाएं उत्तर प्रदेश के जंगलों से सटी हुई हैं। जिससे बाहरी राज्यों के वन तस्कर भी उत्तराखण्ड की वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट पर नजर डालें तो वर्ष 2008-09 में लकड़ी चोरी के आंकड़े तो मात्र चार लाख की लकड़ी चोरी को दर्शा रहे हैं। लेकिन लकड़ी चोरी के तमाम ऐसे मामले हैं जो विभाग की नजर में नहीं आ पा रहे हैं। इस तरह करोड़ों की लकड़ी को ये माफिया ठिकाने लगा रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से दिसंबर तक लकड़ी चोरी के 149 मामले दर्ज किये गये। इनमें चार लाख से ज्यादा की कीमत की लकड़ी काटी जा चुकी है। जबकि वर्ष 2007-08 में लकड़ी चोरी के 212 मामले दर्ज किये गये। जिनमें पांच लाख सैंतीस हजार कीमत के 230 पेड़ काटे गये।

9 jan08-हल्द्वानी में मोहर्रम के अवसर पर निकाला गया ताजियों का जुलुस, एवं इसमें शामिल जन समूह।

Wednesday, 7 January 2009

महिलाएं बनेंगी गो-अर्क कारोबार की लीडर

7 jan अब उत्तराखंड में महिलाएं गो अर्क के माइक्रो कारोबार की लीडर बनेंगी। यह सूबे में सौ केंद्रों का उत्पादन नेटवर्क होगा। खास बात कि गरीबी उन्मूलन की दिशा में यह देश में अपनी तरह का अनूठा प्रयोग है। इस पहल से हिमालयी क्षेत्र की सदियों से गुरबत की जंजीर में जकड़ीं हजारों महिलाओं को आर्थिक आजादी मिल सकेगी। पशु वैज्ञानिकों ने शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि देसी गाय के दूध ही नहीं, मूत्र व गोबर में भी कई औषधीय गुण हैं। गो मूत्र के अर्क से अनेक तरह की दवाई, औषधीय महत्व के शैंपू, साबुन, क्रीम तथा गोबर से फिनाइल आदि बन सकते हैं। इन उत्पादों का बाजार है और मांग के अनुपात में देसी गायों की संख्या कम होने से कच्चे माल के रूप में गो मूत्र या अर्क की आपूर्ति कम है, जबकि पर्वतीय जिलों में देसी गाय अधिक संख्या में उपलब्ध हैं। सूबे में फिलहाल प्रयोग के तौर पर छह गो अर्क शोधन संयंत्र सरकारी क्षेत्र में चलाए जा रहे हैं, जिनके परिणाम सफल रहे हैं। सरकार की योजना अब सौ नए संयंत्रों को निजी क्षेत्र में महिलाओं को सौंपने की है। पर्वतीय क्षेत्र में दूध के कारोबार में महिलाएं ही अधिक संख्या में जुड़ी हैं। गो मूत्र से बने अर्क की कीमत 25 रुपये प्रति लीटर तक मिलना तय है। महिला स्वयं सहायता समूहों की सोसाइटी बनाकर उन्हें संयंत्र सौंपे जाएंगे। इसके बाद सबको उत्पादन, संग्रह व आपूर्ति के संगठित प्रादेशिक कारोबारी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जागरण को जानकारी दी कि गो मूत्र शोधन कर रोजाना 15 से 25 लीटर अर्क बनाने वाली छोटी क्षमता के संयंत्र की एक इकाई स्थापित करने पर करीब ढाई-तीन लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना सूबे के सौ न्याय पंचायतों में सौ संयंत्र स्थापित करने की है। इसके लिए रकम का प्रबंध हो चुका है। कृषि निदेशालय और उत्तराखंड लाइव स्टाक डेवलपमेंट बोर्ड को स्थल व जिला दुग्ध संघों को चिह्नित कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है।

लोकभाषा व लोकसंस्कृति की उपेक्षा की

7jan उत्तराखंड के पृथक अस्तित्व में आने के बाद यहां और कुछ भले ही न हुआ हो, मगर आंदोलनों की एक श्रृंखला-सी चल पड़ी है। जिस संगठन या संस्था को देखिए, वही आंदोलन पर उतारू नजर आते हंै। ले-देकर रंगमंच व आंचलिक फिल्मों से जुड़े कलाकार बचे हुए थे, लगता है अब उनके भी सब्र का बांध टूट गया है। उन्होंने भी नए वर्ष में जोरदार संघर्ष का मन बनाया है। इसके लिए प्रदेश के साथ ही देश के विभिन्न महानगरों में रोजगार के लिए प्रवास कर रहे सभी कलाकार 11 जनवरी को राजधानी में एकत्र होकर आंदोलन की रणनीति पर विचार करेंगे। मुद्दा इनका भी सरकारों की बेरुखी से जुड़ा हुआ ही है, लेकिन यह बेरुखी सिर्फ कलाकारों के प्रति न होकर लोकभाषा व लोकसंस्कृति की भी है। कलाकारों ने उत्तराखंड फिल्म आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले 11 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने का निश्चय किया है। इस आंदोलन में प्रदेश के साथ ही दिल्ली, मुंबई, पंजाब आदि राज्यों में प्रवास कर रहे कलाकार भी भागीदारी करेंगे। जाने-माने संगीतकार एवं एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र चौहान (दिल्ली), महासचिव प्रदीप भंडारी (मसूरी), प्रह्लाद मेहरा (हल्द्वानी), रमेश गोस्वामी (चौखुटिया) आदि बताते हैं कि प्रदेश की फिल्म एवं सांस्कृतिक नीति घोषित करने और स्थानीय भाषाओं को स्कूली पाठयक्रम में शामिल करने की मांग को लेकर कलाकारों ने 12 सितंबर 2007 को विधानसभा पर धरना तक दिया था, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। उनका आरोप है कि लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के नाम पर संस्कृति विभाग के पास चुनिंदा ट्रेडमार्क गु्रप हैं, जिनसे इतर उसकी दृष्टि ही नहीं जाती। जबकि, देखा जाए तो यही उपेक्षित कलाकार लोकभाषा, लोक संस्कृति व लोकविधाओं को बचाने का जिम्मा उठाए हुए हैं।

दिल्ली मे मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी

7 jan -मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग सुरक्षा बल बनाए जाने की पैरवी की है। उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रारूप पर कहा कि इससे पुलिस के अधिकारों का अतिक्रमण ही नहीं होगा, बल्कि संस्था के केंद्र सरकार के अंग के रूप में कार्य करने से इसके राजनीतिक दुरुपयोग की अधिक संभावना रहेगी। आंतरिक सुरक्षा पर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने राज्य की चिंताओं व जरूरतों को बखूबी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्यों के लिए अलग सुरक्षा बल की आवश्यकता है। सीमा पार से घुसपैठ व जाली नोटों की तस्करी को रोकने के लिए पर्वतीय सुरक्षा बल का गठन किया जाना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर शत-प्रतिशत सहायता दी जाए। उत्तराखंड के लिए यह अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की 275 किलोमीटर सीमा नेपाल तथा 300 किलोमीटर की सीमा चीन से लगी है। दूसरे देशों की सीमा से सटे राज्यों में सामरिक महत्व को देखते हुए सड़कों का निर्माण तथा वन भूमि हस्तांतरण समेत अन्य मसलों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। केंद्र व राज्यों के मध्य खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए संस्थात्मक तंत्र की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए एक योजना केंद्र सरकार को भेजी गई है, लेकिन इस पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। पुलिस आधुनिकीकरण की धनराशि में भी कटौती कर दी गई है। राज्य में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश के लिए विकास योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। कमांडो टीम के गठन का वित्तीय बोझ उठाने की स्थिति में सरकार नहीं है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि इसमें पुलिस अधिकारी के समक्ष दिए साक्ष्य को अमान्य किया गया है। इससे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में बाधा उत्पन्न होगी। उन्होंने एजेंसी के प्रारूप को प्रजातांत्रिक व संघीय प्रणाली के खिलाफ बताया।

अपने ही कर रहे हैं पाक दामन तो तार-तार

7 jan राज्य स्थापना के बाद उत्तराखंड की पुलिस को नाम दिया गया था-मित्र पुलिस। सोच थी कि आम जनता से पुलिस मित्रवत् व्यवहार करेगी। देवभूमि की पुलिस से यहां के सीधे-सच्चे लोगों को बड़ी आकांक्षाएं थीं, लेकिन जिस हिसाब से राज्य की पुलिस बेकसूर लोगों का अनावश्यक उत्पीड़न कर रही है, उससे लगता है इन आकांक्षाओं पर तुषारापात हो रहा है। पुलिस की दिन-ब-दिन खराब होती छवि से लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि पुलिस उत्पीड़न का शिकार होने वाले आम लोग आखिर किससे और कैसे शिकायत करें। जब खाकी वर्दीधारी ही लूट पर उतारू हों तो लुटेरों पर इल्जाम लगाने किसके पास जाएं। सत्यापन के नाम पर छात्र के कमरे में गए और बाद में उसे और उसकी मित्र को ब्लैकमेल करने वाले सिपाहियों की करतूत ने एक बार फिर से पुलिस का चेहरा बेनकाब कर दिया है। पिछले दिनों चलाए गए अभियानों के दौरान लगातार प्रचार करती रही कि किसी भी तरह की संदिग्ध घटना के बारे में तुरंत पुलिस को सूचना दें। कोई आपको तंग करे तो तुरंत शिकायत करें, लेकिन जब घर आने वाले सिपाही की गतिविधियां ही संदिग्ध हों, तब क्या करे। अजनबी के दरवाजे पर आने पर कोई भी दस बातें पूछे बगैर उसे भीतर नहीं घुसने देता, जबकि खाकी वर्दी को देखकर इस तरह का संदेह नहीं किया जाता। पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था एमए गणपति ने उक्त दोनों सिपाहियों के खिलाफ कानूनी व विभागीय कार्रवाई की बात कही है। इसके अलावा वे सत्यापन अभियान के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा किसी भी प्रकार का उत्पीड़न किए जाने की शिकायत सीधे एसएसपी, पुलिस मुख्यालय या उत्तराखंड पुलिस की वेबसाइट पर करने की बात भी कहते हैं, लेकिन सवाल यह है कि जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, ऐसे में शिकायत करने की हिम्मत आखिर कौन कर पाएगा।

मुंबई में चल रहा हैं उत्तराखंड कौथिग

नंदा राजजात नें मुंबई में मचाई धूम ६ जनवरी - मुंबई में चल रहे उत्तराखंड कौथिग में उत्तराखंड प्रवासियों की भीड़ ने पयॆटन विभाग को काफी उत्साहित किया हैं यहां लोग कायॆक्रम के अलावा पहाड़ी भोज को काफी पसंद कर रहे हैं मंडुवे की रोटी ,झंगोरे की खीर तीन दिन तक चलने वाले इस कायॆक्रम में लोगों को नरेन्द्र सिंह नेगी को सुनने की काफी इच्छा हैं

औली के इलाकों में हुई जमकर बर्फबारी

6 jan -फरवरी 2009 में होने वाले होने वाले सैफ विंटर गेम्स को लेकर कुदरत ने रजामंदी दे दी है. शुक्रवार व शनिवार को औली व आसपास के इलाकों में हुई जमकर बर्फबारी ने बर्फ की कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है. इतना ही नहीं मौसम विभाग इस इलाके में अभी और बर्फबारी की पुष्टि कर रहा है. ऐसा हुआ तो सैफ विंटर गेम्स के लिए कृत्रिम बर्फ जुटाने में लगे शासन की परेशानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. सैफ विंटर गेम्स समय पर हों, इसके लिए गेंद अब पूरी तरह से शासन के पाले में खिसक चुकी है. तैयारियों को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब अब शासन व सैफ विंटर गेम्स फेडरेशन के सदस्यों को ही देने हैं. सफेद हुई चोटियां शुक्रवार की शाम पहाड़ के लिए उमंग का संदेश लेकर आई. हल्की बारिश के बाद सात हजार फुट की चोटियां तक बर्फ की चादर से सफेद हो गई. उत्तरकाशी के हरकीदून, शनिवार को चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग जनपदों में सुरकंडा, केदारघाटी, त्रिजुगीनारायण, हरकीदून, तुंगनाथ, गौरीकुंड, बदरीनाथ, हेमकुंड, औली, वेदनी, चोपता, रुद्रनाथ की पहाड़ियों पर खूब बर्फ गिरी. बढ़ गई उम्मीदें एक सप्ताह पूर्व ही दून व औली का दौरा करने वाले विंटर गेम फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष एसएस पांगती के मुताबिक देहरादून में आइस स्केटिंग रिंग को समय पर तैयार कराने की कोशिश की जा रही है, जो जनवरी मध्य तक पूरा हो जाएगा. इसके अलावा औली में हुई बर्फबारी ने राह काफी आसान कर दी है.

एक्सपो में दिख रही है पहाड़ी छटा

6 jan 09 परेड ग्राउंड में चल रहे नेशनल हैंडलूम एक्सपो में चले आइए। यहां आपके लिए उत्तराखंड में बनने वाली खास गरम ऊन के हाथ से बने स्वेटर, मफलर, टोपी व दस्ताने ही नहीं कंबल, शॉल, स्टॉल, चादरें व अन्य घरेलू सामान भी वाजिब दामों पर उपलब्ध है। हैंडलूम एक्सपो में ऋषिकेश से लेकर उत्तरकाशी तक के तमाम हैंडलूम उत्पाद मिल रहे हैं। पहाड़ में बने ऊनी वस्त्रों के साथ ही यहां काशीपुर, मंगलौर व उधमसिंहनगर की मशहूर सूती, रेशमी व ऊनी चादरें, कंबल, दरियां, गलीचे, पर्दे, वॉल हैंगिंग व अन्य सजावटी सामान मिल रहा है। उत्तराखंड हैंडलूम की हर वैरायटी एक्सपो में उपलब्ध है। एक्सपो में उत्तराखंड की पारंपरिक डिजाइन न्के वस्त्र मिल रहे हैं। यहां ऊंचाई वाले स्थानों पर पाई जाने वाली ऑस्ट्रेलियन भेड़ की ऊन से बने लेडिज, जेंटस व बच्चों के स्वेटर, दस्ताने, टोपी के साथ ही मंगलौर (हरिद्वार) के जायकटि डिजाइन की गरम चादरें व दरियां उपलब्ध हैं। सर्दियों में आने वाले ठंडे पसीने को सोखकर शरीर को कई बीमारियों से बचाती है। यह सारा सामान हाथ से बनाया जाता है। इसमें केवल नेचुरल रंगों का प्रयोग होता है क्योंकि डाई करने से ऊन की गरमाहट कम हो जाती है। इसी कारण यह केवल सफेद, काले व स्लेटी रंगों में ही उपलब्ध हंै। एक्सपो में उत्तरकाशी के दुमकर कंबल, कौसानी शॉल, अल्मोड़ा टवीट कोट का कपड़ा और जायकटि डिजाइन जैसे उत्तराखंड के पारंपरिक डिजाइन के वस्त्र मिल रहे हैं। एक्सपो में भीमतल्ला चमोली की जयनंद उत्थान समिति की मंदिरों के डिजाइन वाली वॉल हैंगिंग भी आकर्षण का केंद्र हैं। इन वॉल हैंगिंग में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री सहित राज्य के कई प्रसिद्ध मंदिरों के डिजाइन बने हैं। यह सारा सामान 50 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध है। मेला प्रभारी केसी चमोली ने बताया कि राज्य के हैंडलूम उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक्सपो में उत्तराखंड के सभी प्रकार के पारंपरिक ऊनी व सूती वस्त्रों को प्रदर्शित किया गया है।