Wednesday, 18 February 2009

घिल्डियाल दून पहुंचे गोस्वामी ऊधमसिंह नगर के एसएसपी

18 feb- देहरादून, शासन ने तीन आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इनमें डीआईजी, एसएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन ने ऊधमसिंह नगर के एसएसपी का कार्यभार देख रहे डीआईजी दीपक ज्योति घिल्डियाल को डीआईजी अभिसूचना-सुरक्षा, अभिसूचना मुख्यालय नियुक्त किया है। हाल ही में दीपक ज्योति घिल्डियाल को एसएसपी से डीआईजी रैंक में प्रोन्नत किया था। इसके बाद से ही उन्हें ऊधमसिंह नगर से हटाने की चर्चाएं हो रही थीं। श्री घिल्डियाल के स्थान पर एसपी चमोली जीएन गोस्वामी को एसएसपी ऊधमसिंह नगर के पद पर तैनात किया गया, जबकि 40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार की सेनानायक विम्मी सचदेवा को एसपी चमोली का पदभार सौंपा गया है। सेनानायक 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार के कार्यभार अग्रिम आदेशों तक उपसेनानायक को संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

रामनगर पालिकाध्यक्ष की बर्खास्तगी तय

18 feb- देहरादून: रामनगर के पालिकाध्यक्ष मोहम्मद अकरम का हटना लगभग तय हो गया है। विधि विभाग की राय में पालिकाध्यक्ष को अब और पक्ष रखने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। अकरम पर पालिका की भूमि पर अतिक्रमण का आरोप है। साथ ही यह भी आरोप है कि निकाय चुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपने हलफनामे में इस तथ्य को छिपाया। विपक्षी द्वारा इस संबंध में की गई शिकायत पर जिलाधिकारी नैनीताल ने मामले की जांच कराई और आरोप सत्य पाए गए। डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। शहरी विकास विभाग ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय लेने पहले विधि विभाग से सलाह ली। सूत्रों के अनुसार विधि विभाग का कहना है कि जांच के दौरान आरोपी को पर्याप्त तौर पर सुना जा चुका है। अब उसे फिर से सुनवाई का मौका देने की जरूरत नहीं है। विधि विभाग की सलाह मिलने के बाद अब यह माना जा रहा है कि अकरम का पालिकाध्यक्ष पद से हटना लगभग तय है। पालिका एक्ट की धारा 40 के तहत उन्हें जल्द पद से बर्खास्त किया जा सकता है।

राज्य की आबकारी नीति तैयार

18 feb- , देहरादून राज्य की आबकारी नीति अनुमोदन को कैबिनेट में पेश करने की तैयारी है। आलम यह है कि गोपनीय रखने के नाम पर इस नीति को गोपन विभाग से भी दूर रखा जा रहा है। ऐसे में एक अहम सवाल यह खड़ा हो रहा है कि लागू होने से डेढ़ माह पहले ही उजागर होने के निहितार्थ क्या हैं। पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू नहीं हो रही है। इन सालों में हर बार नई आबकारी नीति दो माह से भी अधिक देरी से लागू हो सकी। मजेदार बात यह है कि इस बार करीब डेढ़ माह पहले ही नई आबकारी नीति तैयार कर ली गई है। अब इसे कैबिनेट की मंजूरी को पेश किया जाना है। आबकारी नीति पर इतनी जल्दी क्यों, इस सवाल का जवाब देने को कोई तैयार नहीं है। आबकारी मंत्री मदन कौशिक कहते हैं कि कैबिनेट में आने के बाद आबकारी नीति को गोपनीय रखने की आवश्यकता नहीं है। यह नीति अपने निर्धारित समय पहली अप्रैल से लागू कर दी जाएगी। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि उन्हें यह पता नहीं है कि बुधवार को होने वाली कैबिनेट में आबकारी नीति लाई जा रही है। आबकारी सचिव रणवीर सिंह कहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसे कैबिनेट में पेश करने के संबंध में भी वे कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार अब यह मामला 18 फरवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में रखा जाने वाला है। इस नीति को इस कदर गोपनीय रखा जा रहा कि कैबिनेट के अन्य मामलों की तरह इसे गोपन विभाग को भी नहीं भेजा गया है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि एक अप्रैल से लागू होने वाली इस आबकारी नीति के डेढ़ माह पहले ही सार्वजनिक होने के नतीजे क्या होंगे।
देहरादून, : दून विश्वविद्यालय को संस्कार व मूल्यपरक शिक्षा का माडल बनने का प्रयास करना चाहिए। मंगलवार को दून विवि के पुस्तकालय भवन का शिलान्यास करते हुए मुख्य मंत्री रिटायर्ड मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने ये विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून स्कूली शिक्षा के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। उन्हें आशा है कि दून विवि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देहरादून को यही मुकाम दिलाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दून विवि के कुलपति व सभी शिक्षक विवि को देवभूमि के संस्कारों के अनुरूप संस्कारित शिक्षा का केंद्र तो बनाएंगे ही, यहां के विद्यार्थी भी महज डिग्रियां पाने वाले न होकर बाजार और नए जमाने की जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम होंगे। कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि दून विश्वविद्यालय को दूसरे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की नकल न कर अपनी विशिष्ट पहचान तो बनानी ही होगी। आधुनिक व प्राचीन शिक्षा के सामंजस्य के ज्ञान का केंद्र भी बनना होगा। दून विवि के कुलपति प्रोफेसर गिरजेश पंत ने कहा कि 1533 लाख रुपये की लागत से बन रहे छह मंजिला पुस्तकालय में पांच लाख पुस्तकें व 1000 शोध पत्रिकाएं रखी जाएंगी। उन्होंने प्रदेश के बुद्धिजीवियों से पुस्तकालय के लिए पुस्तकें, पांडुलिपियां आदि दान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सहसपुर परिसर में जैव विविधता पर और अन्य वैज्ञानिक शोध के लिए लैबोरेटरियों की स्थापना की जाएगी। इसके पहले मुख्य मंत्री ने केदारपुरम में 788.38 वर्ग मीटर में 97.48 लाख रुपये की लागत से बने 30 शिशु क्षमता वाले राजकीय शिशु गृह और 850.90 लाख रुपये की लागत से बने 9504 वर्गमीटर के टाइप-4 के 72 शासकीय आवासों का लोकार्पण भी किया। इस मौके पर राजपुर विधायक गणेश जोशी, युवा कल्याणपरिषद के उपाध्यक्ष रवींद्र जुगराण, विवि के कार्यवाहक रजिस्ट्रार रमेश चंद्र अग्रवाल, स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन के प्रो. प्रदीप चक्रवर्ती, नयनदीप समेत अनेक अधिकारी, कर्मचारी स्थानीय भाजपा नेता और स्थानीय जनता मौजूद रही।

उत्तराखंड लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से 55 लाख रुपये कैश, 2.50 लाख कीमत के जेवरात बरामद

18 feb-लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के घर विजिलेंस का छापा 2 55 लाख कैश, 12 लाख के बैंक डिपाजिट व 2.50 लाख के जेवर भी बरामद देहरादून: विजिलेंस टीम ने उत्तराखंड लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के देहरादून स्थित आवास पर छापा मार कर 55 लाख रुपये कैश, 2.50 लाख कीमत के जेवरात बरामद किए हैं। अभियंता के नाम पर 12 लाख के बैंक डिपाजिट समेत करीब ढाई करोड़ की संपत्ति का अभी तक खुलासा हो चुका है। छानबीन के बाद यह आंकड़ा बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। आरोपी अभियंता वर्तमान में चमोली जनपद के गोपेश्वर में तैनात है। विजिलेंस की टीम ने आज अभियंता के गोपेश्वर स्थित आवास पर भी छापा मारा। अभियंता से पूछताछ कर अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। एसपी विजिलेंस वी मुरुगेशन के अनुसार शासन से इस अभियंता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जांच विभाग को आई थी, इसी के तहत मंगलवार को अभियंता के आवास पर छापे की कार्रवाई की गई। मंगलवार को विजिलेंस की टीम ने एसपी वी. मुरुगेशन के नेतृत्व में लघु सिंचाई विभाग गोपेश्र्वर में तैनात अधिशासी अभियंता रविंद्र प्रसाद के आवास (13ए- विजय पार्क, दून) पर छापा मारा। एसपी के मुताबिक रविंद्र के खिलाफ शासन की ओर से अगस्त-08 में विजिलेंस में आय से अधिक संपत्ति रखने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। छापे के दौरान अभियंता के घर में गद्दे के नीचे 55 लाख पचास हजार कैश (पांच-पांच सौ के नोटों की 111 गड्डियां) मिला। यह देखकर विजिलेंस टीम भौचक्की रह गई। आलमारियों और संदूकों में टीम को करीब 2.50 लाख के जेवरात, बैंकों में 12 लाख के फिक्स डिपाजिट और घर से एक नई मारुति जेन कार मिली।

कुमाऊं मंडल की विधानसभा सीट रामनगर अब पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट का हिस्सा

18 feb- देहरादून सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है मगर है यह बिल्कुल सच, अब पौड़ी (गढ़वाल) से दिल्ली तक का सफर तय करने के लिए वाया रामनगर (कुमाऊं) रूट लेना पड़ेगा। अलबत्ता, यह लांग रूट जन सामान्य के लिए नहीं बल्कि केवल उन्हीं के लिए है जो पार्लियामेंट तक पहंुचना चाहते हैं। दरअसल, लोकसभा व राज्य विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से यह दिलचस्प स्थिति पैदा हुई है क्योंकि कुमाऊं मंडल की विधानसभा सीट रामनगर अब पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट का हिस्सा बन गई है। नौ नवंबर 2000 को अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में पहली बार सत्तर विधानसभा सीटों के निर्धारण के लिए परिसीमन हुआ था और लगभग छह साल के छोटे से वक्फे में एक दफा फिर उत्तराखंड को परिसीमन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। नतीजतन छह-साढ़े छह साल पहले जो लोकसभा व विधानसभा क्षेत्र बने, अब उनका नए सिरे से निर्धारण हो गया है। नवीनतम परिसीमन, जिसके आधार पर आगामी लोकसभा चुनाव होने हैं, में उत्तराखंड में लोकसभा व विधानसभा सीटों के गणित में खासा दिलचस्प बदलाव हो गया है, जबकि कई विसंगतियां अब खत्म हो गई हैं। यहां बात करें पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट की। राज्य के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के परंपरागत चुनाव क्षेत्र के रूप में पहचान बनाने वाली इस सीट में भी अब राज्य की सभी अन्य चारों लोकसभा सीटों की तरह 14-14 विधानसभा सीटें हो गई हैं लेकिन मौजूदा व नए परिसीमन में यह फर्क आ गया है कि कई नई सीटें इसमें जुड़ गई हैं तो कई पुरानी सीटें अन्य में शिफ्ट हो गई हैं। इस लोकसभा सीट में लाजिमी तौर पर गढ़वाल मंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों की 13 ही सीटें हैं, बस एक अपवाद है तो कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले की रामनगर सीट। अभी तक यह विधानसभा सीट नैनीताल लोकसभा सीट का ही हिस्सा थी। अब रामनगर सीट के पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट के अंतर्गत आ जाने से चुनावी प्रत्याशियों के समक्ष यह नई चुनौती आ गई है कि उनकी स्वीकार्यता गढ़वाल के साथ ही कुमाऊं मंडल में भी हो। अलबत्ता कुछ राहत की बात यह जरूर है कि रामनगर विधानसभा सीट गढ़वाल मंडल की सीमा से बिल्कुल सटी हुई है जिससे प्रत्याशियों को शायद ज्यादा दिक्कत पेश न आए। वैसे जिस तरह का दुरुह विषम भूगोल पहाड़ की लोकसभा सीटों का है, वह भी स्वयं में किसी चुनौती से कम नहीं। यानी कम से कम पौड़ी लोकसभा सीट के दावेदारों के लिए तो यह तय ही है कि उन्हें दिल्ली पहंुचने के लिए वाया रामनगर ही चलना होगा।

अब सुगम होंगे बदरीनाथ के दर्शन

१८feb-

रुद्रप्रयाग शहर के नीचे ९०० मीटर लंबी टनल बनाने का प्रस्तावभवन रहेंगे सुरक्षित, भूमि अधिग्रहण का झांझाट भी नही

रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग में लगने वाले घंटों के जाम से हमेशा के लिए मु1ित मिल सकती है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने केदारनाथ और बदरीनाथ बाईपास के लिए पहाड़ का सीना चीरकर ९०० मीटर लंबी सुरंग बनाने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अब केंद्र सरकार को भेजा रहा है। यदि मंजूरी मिली तो रुद्रप्रयाग शहर के नीचे से यह सुरंग गुजरेगी और इससे तीर्थयात्रियों की यात्रा और सुगम हो जाएगी। सुरंग के लिए ६६-आरसीसी ने मैप तैयारइस सुरंग के लिए ६६-आरसीसी ने मैप तैयार किया है। सर्वेक्षण के लिए कंसलटेंसी एजेंसियों की मदद ली जा रही है। बीआरओ की नजर में यह एकदम सुरक्षित है। फिलहाल बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को कई जगह लंबे जाम का सामना करना पड़ता है। जिसमें तीन से चार घंटे का समय बर्बाद हो जाता है। इस सुरंग के बनने से बदरीनाथ जाने वालों के लिए १० किलोमीटर की दूरी भी कम हो जाएगी। सीजन में छह लाख तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं। दूसरे विकल्प मार्ग की गुंजाइश भी नहींरुद्रप्रयाग शहर की बनावट, बसावट और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूसरे विकल्प मार्ग की गुंजाइश भी नहीं है। सुरंग वाले मोटर मार्ग के निर्माण से आवासीय भवन भी सुरक्षित रहेंगे और भूमि अधिग्रहण का झांझाट भी नहीं रहेगा। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा जाना है। लेकिन इस क्षेत्र में सड़कें, नदी और पहाड़ से सटे भवन हैं। इन्हें हटाना मुश्किल और खर्चीला था। इसलिए प्रस्ताव तैयार किया गया कि केदारनाथ नेशनल हाइवे को पहाड़ी के अंदर से सुरंग द्वारा रुद्रप्रयाग-पोखरी मोटर मार्ग से जोड़ा जाएगा। इसके बाद यह मार्ग बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाएगा। इसके लिए यहां अलकनंदा नदी के ऊपर एक और पुल का निर्माण किया जाएगा, ताकि यात्राकाल में वाहन नगर से सीधे बाहर निकल जाएं। प्रति मीटर पैच पर २५ लाख का खर्च६६ आरसीसी के कमान अधिकारी केके सिंह के मुताबिक सुरंग के प्रति एक मीटर पैच पर लगभग २५ लाख रुपये खर्च आएगा। सुरंग निर्माण में लगभग साढ़े २२ करोड़ रुपये खर्च होंगे। वि8ाीय वर्ष २००९-१० में यह प्रस्ताव पास होने की उ6मीद है। रोहतांग टनल भी ऐसी ही-रोहतांग टनल मनाली और लाहौल घाटी के बीच रोहतांग दर्रे के नीचे से बनेगी। - कुल ८.९ किमी लंबी इस टनल की अनुमानित लागत १७०० करोड़ रुपये हो गई है। - इसके बनने से मनाली और लाहौल स्पीति के मु2यालय केलांग की दूरी करीब ५० किलोमीटर कम हो जाएगी। - इस टनल के निर्माण से लाहौल और पांगी घाटी के बाशिंदे लगभग पूरा साल शेष विश्व से जुड़े रहेंगे।

की सडक़ों पर दौड़ी लखटकिया

17 feb- नैनीताल: टाटा मोटर्स की बहुचर्चित लखटकिया नैनो कार मंगलवार को नैनीताल की माल रोड पर दौड़ी। इन्हें लांग ड्राइव ट्रायल के लिए यहां लाया गया था। कम्पनी के इंजीनियर भी इनमें साथ चल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक पर्वतीय व मैदानी भागों में लंबी दूरी के ट्रायल के लिए दो नैनो कारें साथ-साथ पूना से नैनीताल पहुंची थीं। यह कार दिल्ली होते हुए सिडकुल स्थित टाटा कंपनी में भी पहुंची। कंपनी में दोनों गाडिय़ों की जांच की गई। उसके बाद दोनों कारें नैनीताल को रवाना हुईं। यहां मनु महारानी में ठहरने के उपरांत टाटा कम्पनी की यह बहुचर्चित कार माल रोड होते हुए रानीखेत की ओर रवाना हुई। ट्रायल पर निकली टाटा की लखटकिया को नैनीताल की सडक़ों पर नगरवासी बेहद उत्सुकता से निहारने लगे। इनमें एक सिल्वर कलर व दूसरी ह्वïाइट कलर की नैनो कार शामिल थी। जानकारी के मुताबिक यह दोनों कारें रानीखेत से वापस पूना को लौट जाएंगी। नैनीताल पहुंची टाटा के सपनों की लखटकिया नैनो। लांग ड्राइव पर पूना से चली यह कार दिल्ली होते हुए मंगलवार को सरोवर नगरी पहुंची। इसके बाद यह रानीखेत की वादियों की सैर पर निकल

Tuesday, 17 February 2009

पुन: जांच से आंदोलनकारियों में पुन: जांच से आंदोलनकारियों में आक्रोश

१७ feb---डीएम के आदेश के खिलाफ उक्रांद के नेतृत्व में संगठनों ने किया धरना-प्रदर्शनवर्ष-२००५ के बाद के चिक्षित आंदोलनकारियों की दुबारा जांच का विरोध देहरादून, जिला प्रशासन ने वर्ष-२००५ से अब तक चिक्षित उ8ाराखंड आंदोलनकारियों की सूची पुन: जांच के लिए एलआईयू को भेज दी है। इससे आंदोलनकारियों में आक्रोश है। उ8ाराखंड क्रांति दल की अगुवाई में आंदोलनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोरचा खोलते हुए धरना दिया और प्रदर्शन किया। उक्रांद की पहल पर दल के कार्यकर्ताओं के साथ ही राज्य आंदोलनकारी मंच, कौशल्या डबराल संघर्ष वाहिनी और उ8ाराखंड संघर्ष मोर्चा से जुड़े आंदोलनकारी पूर्वाक्ष कल1ट्रेट स्थित शहीद स्मारक परिसर में एकत्र हुए और वहां धरना दिया। दुपहर तक आयोजित धरने के दौरान हुई सभा में व1ताओं ने कहा कि सरकार ने पांच मानकों के आधार पर आंदोलनकारियों की चिक्षीकरण प्रक्रिया पूरी करने का शासनादेश जारी किया है। इस शासनादेश को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने २० जुलाई २००५ से अब तक चिक्षित तमाम आंदोलनकारियों की सूची जांच के लिए एलआईयू को भेज दी, जबकि इन आंदोलनकारियों की सूचियां या तो सार्वजनिक हो चुकी थीं, या लंबित थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि दोबारा जांच को भेजी गईं पत्रावलियां जल्द ही वापस न मंगाई गईं, तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। सभा के पश्चात आंदोलनकारी जुलूस की श1ल में जिलाधिकारी कार्यालय तक गए और अपर जिलाधिकारी के माध्यम से मु2यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस तरह के कृत्यों से प्रशासन आंदोलनकारियों को अपमानित कर रहा है। ज्ञापन में १९७९ के बाद के सभी आंदोलनकारियों को शामिल करते हुए चिक्षीकरण होना चाहिए। आंदोलनकारियों को स6मान पत्र, पेंशन आदि की प्रक्रिया भी तत्काल पूरी करने की मांग ज्ञापन में उठाई गई है। उक्रांद नेता लताफत हुसैन के नेतृत्व में किए गए धरना-प्रदर्शन में जयप्रकाश उपाध्याय, सतीश थपलियाल, नारायण सिंह रावत, वाहिद खान, वेदानंद कोठारी, आंदोलनकारी मंच के प्रदीप कुकरेती, प्रभात डंडरियाल, अभय कुकरेती, वाहिनी की सुशीला ध्यानी, सतेश्वरी अमोली, गीता नेगी, सरोज रावत, संघर्ष मोर्चा के राजीव कोठारी, अमर सिंह रटोलिया, जनता दल-एस के नवनीत गुसाईं आदि ने शिरकत की।

पंतनगर एयरपोर्ट से विमान सेवा को हरी झांडी

17 feb-

देहरादून। केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली-पंतनगर की नियमित हवाई सेवा को हरी झांडी दे दी है। सब कुछ ठीक रहा तो २९ मार्च को पंतनगर एयरपोर्ट से किंगफिशर का विमान पहली उड़ान भरेगा। फिलहाल यह व्यवस्था गर्मियों तक के लिए है।पंतनगर से रेग्यूलर 3लाइट की मांग काफी समय से चल रही थी। पंतनगर के आसपास कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। पर्यटन विकास की संभावनाओं के मद्देनजर यहां से विमान सेवा शुरू करने की पहल क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद ने भी की थी। डायरे1टर जनरल सिविल एविएशन की ओर से २८ जनवरी को गर्मियों के लिए जारी घरेलू हवाई सेवा शेड्यूल में पंतनगर एयरपोर्ट का भी नाम शामिल है। यहां दिल्ली से प्रतिदिन किंगफिशर का विमान आएगा और जाएगा। इस संबंध में ९ फरवरी को एयरपोर्ट सि1योरिटी कमेटी (एपीएससीएम) की मीटिंग भी हो चुकी है। यह विमान सेवा फिलहाल २९ मार्च से २४ अ1तूबर तक के लिए है। एयरपोर्ट अथार्टी एडवाइजरी कमेटी, उ8ाराखंड-उ8ारप्रदेश के सदस्य सुरेश गंगवार का कहना है कि इस विमान सेवा से ऊधमसिंह नगर, रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर, बाजपुर के साथ ही हल्द्वानी, नैनीताल तक के लोग लाभांवित होंगे। पंतनगर के आसपास कई पर्यटन और नानकम8ाा, रीठा साहब जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भी हैं। जहां देश-विदेश के सैलानी आते हैं। पंतनगर-दिल्ली के साथ ही पंतनगर-अमृतसर के बीच नियमित विमान सेवा शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मास्टर 4लास्टर के पैरों पर चमकेंगे मसूरी के जुते

17 feb-

किशन शू मेकर को दिया था आर्डर, पत्नी व बच्चों ने भी बनाए जुतेसात नंबर का कैमल-सावर कलर का जुता बनवाया सचिन तेंदुलकर ने मसूरी। मास्टर 4लास्टर सचिन तेंंदुलकर को पहाड़ों की रानी मसूरी की आबोहवा ही नहीं, बल्कि यहां के जुते भी बेहद पंसद हैं। यही वजह है कि मसूरी प्रवास के दैरान उन्होंने न सिर्फ अपने लिए, बल्कि पत्नी अंजली समेत दोनों बच्चों के लिए 5ाी जुते बनाने का ऑर्डर मशहूर किशन शू मेकर को दिया। सचिन से मिले ऑर्डर से बेहद खुश दुकानदार ने सचिन के लिए सात नंबर का कैमल-सावर कलर का जुता तैयार कर उन्हें सौंप भी दिया है।मसूरी को जो लोक सिर्फ सुंदर और शांत वादियों के लिए ही जानते हैं। उन्हें हम बताते चलें कि यहां के जुते भी बड़ी-बड़ी सेलिब्रेटिस को आकर्षित करती है। तभी तो मास्टर 4लास्टर सचिन तेंदुलकर जैसी स2िशयत के पैरों पर भी मसूरी में बने जुते चमकते हैं। सचिन ने सिंदबर में मसूरी प्रवास के दौरान मलिंगार स्थित किशन शू मेकर की दुकान से अपने लिए कैमल-सावर कलर का जुता आर्डर किया। सचिन की पत्नी अंजली, बेटे अर्जून पुत्री सारा को भी किशन शू मेकर के यहां बने जुते बेहद पंसद आए। सो, सचिन ने उनके लिए भी जुते बनाने का ऑर्डर दे दिया। बताया जाता है कि आते-जाते समय सचिन की निगाह मलिंगार स्थित जुते की दुकान पर पड़ी। प्रशंसकों से बचने के लिए सचिन ने दुकान में उतरना तो ठीक नहीं समझाा, लेकिन अपने मित्र संजय नारंग के पास जरूर इस दुकान का जिक्र किया। नारंग ने भी शू मेकर किशन मुरेना को २८ दिसंबर को बोथवैल बैंक कॉटेज नाप लेने के लिए बुला लिया। मुरेना ने सचिन को काफी डिजाइन दिखाए। जिसमें से उन्होंने कैमल-सावर कलर का जुता पंसद किया। सचिन की पत्नी और दोनों बच्चों ने भी लगे हाथ जुते और सैंडल बनाने का आर्डर दे दिया। किशन ने चार दिन में जुते तैयार कर ३१ दिसंबर को सचिन को सौंप भी दिए। सचिन से जुते बनाने का ऑर्डर मिलने से बेहद खुश किशन मुरेना बताते हैं कि उनके द्वारा तैयार जुते सचिन ने पंसद किए, यह उसके लिए शौभाग्य की बात है। मनपंसद के जुते तैयार करने के लिए सचिन और उनकी पत्नी अंजली ने किशन की जमकर तारीफ भी की। किशन पहले भी कई सेलिब्रेटिस के लिए जुते तैयार कर चुका है।

एनटीटी प्रशिक्षितों का हंगामा

देहरादून, : सालों से विधानसभा के निकट धरनारत एनटीटी प्रशिक्षितों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सोमवार को सचिवालय कूच के दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया। आक्रोशित एनटीटी प्रशिक्षितों ने इस दौरान सचिवालय गेट पर लगी बैरिकेडिंग को तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास किया। पुलिस ने किसी तरह उन पर काबू पाया। बाद में एनटीटी प्रशिक्षितों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। एनटीटी द्विवर्षीय प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के बैनर तले एनटीटी प्रशिक्षित गांधी पार्क में एकत्र हुए जहां से वह रैली की शक्ल में सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही सचिवालय गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आक्रोशित प्रशिक्षितों की सचिवालय में प्रवेश को लेकर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और प्रशिक्षित बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। बामुश्किल पुलिस एनटीटी प्रशिक्षितों को काबू करने में कामयाब हुई। उधर एनटीटी प्रशिक्षितों के हंगामे की सूचना पर जिलाधिकारी अमित सिंह नेगी मौके पर पहुंुचे और आक्रोशित प्रशिक्षितों को शांत कराया। इस मौके पर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद एनटीटी प्रशिक्षितों ने सचिवालय गेट पर धरना शुरू किया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से वे मांगों को लेकर आंदोलित हैं, लेकिन उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि 18 फरवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे 19 फरवरी को भाजपा कार्यालय पर सामूहिक आत्मदाह करेंगे। प्रदर्शनकारियों में योगिता जोशी, जसविंदर कौर, रेनू बिष्ट, मधु गोस्वामी, सुमन बहुगुणा, नर्मदा, आशा थापा, पूजा रांगड़, अर्चना व रीता शामिल थे।

आओ बसाएं छोटी सी दुनिया

हरिद्वार: कुदरत की मार से कद में छोटे रह गए रमेश चंद्र व पूनम ने कभी परिवार बसाने की कल्पना भी नहीं की थी। किस्मत को खुद से रूठा हुआ मानकर दोनों अपनी जिंदगी बिता रहे थे। उनकी किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि दोनों पूरे धूमधाम से सात जन्मों के बंधन में बंध गए। तीर्थनगरी में रविवार की रात हुई दोनों की शादी काफी चर्चित रही। जैन धर्मशाला में रविवार को शादी के लिये सजा शामियाना अपने आप में खास था। हालांकि यहां पर खाने पीने के इंतजाम सहित घरातियों की मेहमान नवाजी से लेकर बारातियों के हुल्लड़ तक सब कुछ सामान्य था। कुछ खास यह था कि साढ़े तीन फुट के देहरादून निवासी दूल्हे रमेश (26 वर्ष) और इतने ही छोटे कद की ज्वालापुर मोहल्ला कड़च्छ निवासी 21 वर्षीय दुल्हन पूनम। इनकी वजह से यह शादी यादगार बन गई। शादी की आस छोड़ चुके दोनों के चेहरों के भाव बता रहे थे कि उनके मन की मुराद पूरी हो गई है। दुल्हन के पिता प्रेम सिंह राठौर और मां बाला रह रहकर बेटी और दामाद की बलाएं ले रहे थे। देहरादून के सुभाषनगर की आदर्श कॉलोनी से पहुंची इस बारात के स्वागत से विदाई तक की हर रस्म दूल्हा-दुल्हन के छोटे कद के कारण कई रोचक प्रसंगों के साथ पूरी हुई। देहरादून में टाइटन कंपनी में काम करने वाले रमेश ने बताया कि पूनम जैसी दुल्हन पाने की उसने कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन उसके दिल में जो चाह थी, वह आज पूरी हो गई। पूनम ने बताया कि मनपसंद और उसके कंधे से कंधा मिलाकर चल सकने वाला जीवन साथी पाने के लिये उसने तीन साल पहले नीलकंठ मंदिर जाकर मन्नत मांगी और अनेक व्रत किये।

रुद्रपुर परगना से जुड़ेगी गदरपुर तहसील

, दिनेशपुर: मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने गदरपुर तहसील को रुद्रपुर परगना से जोड़ने, मिनी स्टेडियम निर्माण तथा राजकीय इंटर कालेज का नाम स्व.चितरंजन राहा के नाम पर रखने की घोषणा की। उन्होंने खटीमा के पुरानी तहसील परिसर में शहीद स्मारक बनाने के साथ ही बाजपुर व काशीपुर में करोड़ों रुपये के मार्गाे के निर्माण की स्वीकृति भी दी। श्री खंडूड़ी ने सोमवार को आईटीआई प्रांगण में आयोजित समारोह में 45.95 करोड़ की नौ योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया, उनके अनुरूप उत्तराखंड बनाना हम सब का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि प्रदेश में उसके कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था। लोग त्रस्त हो चुके थे। इसलिए उन्होंने राज्य की सत्ता भाजपा को सौंपी। श्री खंडूड़ी ने केंद्र सरकार पर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज हालात यह है कि पाक आतंकवादी मुंबई में आते हैं और हाहाकार फैलाकर चले जाते हैं। संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु को केवल मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के तहत फांसी नहीं दी जा रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गदरपुर तहसील को बाजपुर के बजाय रुद्रपुर परगने में शामिल करने, मिनी स्टेडियम, दिनेशपुर नगर पंचायत में धन की कमी न होने देने, अस्पताल का आवश्यकतानुसार उच्चीकरण करने, राजकीय इंटर कालेज का नाम स्व.चितरंजन राहा के नाम पर करने की घोषणा की

Monday, 16 February 2009

मिस करती हूं पहाड़ को

16feb- देहरादून: मेरा बचपन दून की वादियों में ही गुजरा है। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसे पाने में कहीं न कहीं दून का जुड़ाव भी रहा है। मेरा ननिहाल दून में है और मैंने स्कूली पढ़ाई भी यहीं पूरी की है, इसलिए दून में बिताए पलों को मैंने अपनी यादों में सहेज कर रखा है। मुझे उत्तराखंडी होने पर गर्व है। मिस इंडिया व‌र्ल्ड वाइड में फ‌र्स्ट रनर अप सुरभि मिश्रा ने खिताब हासिल करने के बाद जागरण से बातचीत के दौरान कुछ इस तरह अपनी बात रखी। रविवार को सोनी टीवी पर मिस इंडिया व‌र्ल्ड वाइड प्रतियोगिता का प्रसारण देखने को दूनवासी बेताब रहे, वजह कि कांटेस्ट में दून की बेटी भी पार्टिसिपेट कर रही थी। शाम को जैसे ही कांटेस्ट के रिजल्ट घोषित किए गए, उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। सुरभि मिश्रा प्रतियोगिता में फ‌र्स्ट रनर अप के खिताब से नवाजी गई। इसके लिए उन्होंने परिवार से मिले सहयोग और सहयोगियों का आभार जताया। सुरभि के पिता एसडी मिश्रा मूलत: दून के रहने वाले हैं और अभी कर्नल के पद पर मेरठ में नियुक्त हैं, जबकि माता शिवानी मिश्रा गृहणी हैं। सुरभि ने बताया कि वह अभी पुणे के फग्र्यूसन कालेज से स्नातक कर रही हैं। माडलिंग चुनने के बारे में उन्होंने बताया कि जेट एयरवेज में एयर होस्टेस के तौर पर काम करने के दौरान ही उन्होंने इस बारे में सोचा। भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो पढ़ाई पूरी करनी है, इसके बाद प्रतियोगिता के दौरान मिले एक साल के कांट्रेक्ट को पूरा करने है।

स्टेट कोटे की सीटों के लिए भी होगी काउंसिलिंगश्रीनगर।

गढ़वाल विवि से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों में स्टेट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए विवि प्रशासन ने इस वर्ष से काउंसिलिंग शुरू करने का मन बना लिया है। इसके उपरांत मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए निजी बीएड कॉलेज स्वतंत्र होंगे। काउंसिलिंग के लिए विवि प्रशासन 25 या फिर 28 फरवरी तक कट ऑफ मेरिट लिस्ट जारी कर सकता है। इस वर्ष विवि से संबद्व निजी बीएड कॉलेजों की सं2या 4० से घटकर 21 तक पहुंच गई है।इस वर्ष पहली बार गढ़वाल विवि प्रशासन से संबद्ध सात राजकीय महाविद्यालय व पौड़ी परिसर में स्ववि8ा पोषित बीएड पाठ्यक्रम में स्टेट कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू की थी। काउंसिलिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी व्यवस्था मनाते हुए विवि प्रशासन ने अब इसी वर्ष से निजी बीएड कॉलेजों में स्टेट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग करने का मन बना लिया है। 1योंकि प्रति वर्ष विवि प्रशासन पर बीएड में प्रवेश के लिए कई तरह के आरोप लगते रहे। विवि के कुलसचिव एचबी थपलियाल ने बताया कि निजी बीएड कॉलेजों में स्टेट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए 25 फरवरी के बाद कट ऑफ मेरिट लिस्ट जारी कर दी जाएगी। गत वर्ष बीएड प्रवेश में विवि से संबद्ध18 निजी बीएड कॉलेजों में कट ऑफ मेरिट से कम अंक पर प्रवेश देने की जांच रिपोर्ट आने के बाद विवि प्रशासन इस वर्ष उ1त कॉलेजों की संबद्धता विस्तारण पर रोक लगाने का फैसला लिया है। जिसके चलते अब निजी बीएड कॉलेजों की सं2या घटकर 21 हो गई है।

बुजुर्ग आंदोलनकारियों को मिलेगी पेंशन

चुनाव से पहले होगा ऐलानमु2यमंत्री दरबार में पहुंची फाइल देहरादून,

उ8ाराखंड राज्य के गठन की खातिर खुद को दांव पर लगाते हुए जेल और लाठी से घबराए बगैर संघर्ष करने वाले अश1त या बुजुर्ग हो चुके आंदोलनकारियों को सरकार नवाजने वाली है। उन्हें पेंशन दी जाएगी। संभवत: इसका ऐलान लोकसभा चुनाव से पहले हो जाएगा। प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों को पहले ही सरकारी नौकरी दे चुकी है। जो लोग खुद नौकरी कर सकते थे वे नौकरी में चले गए और जिनके लिए उम्र अधिक हो जाने के कारण यह मुमकिन नहीं था, उनके आश्रित नौकरी कर रहे हैं। इसके बावजूद ऐसे लोगों की तादाद भी काफी है, जो न तो नौकरी कर सकते हैं न ही उनके आश्रित ही हैं। हालांकि, इनकी ठीक-ठीक तादाद के बारे में जानकारी नहीं है। सरकार ने जिलाधिकारियों को उनकी पहचान कर रिपोर्ट देने की हिदायत दी हुई है। ऐसे लोगों पर सरकार की जल्द ही नजरें इनायत होने वाली है। शासन सूत्रों के अनुसार सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर फैसला कर लिया है कि ऐसे आंदोलनकारियों को उनके संघर्ष का स6मान करते हुए ताउम्र पेंशन दी जाएगी। पेंशन की राशि कितनी होगी, यह तय होना है लेकिन एक आला अफसर के अनुसार यह फैसला पूरी तरह मु2यमंत्री के हाथ में है। लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले ही सरकार इसे लागू करने की कोशिश में है। सूत्रों के अनुसार पेंशन देने संबंधी प्रस्ताव मु2यमंत्री सचिवालय में पहुंच चुकी है। आंदोलनकारियों का चयन करने के लिए सरकार ने पहले ही मानक बना लिए हैं। आंदोलनकारी खुद के जेल जाने, आंदोलन में घायल होने के कारण अस्पताल में भरती होने या इलाज कराने, पुलिस की दैनिक डायरी में नाम शामिल होने या एलआईयू रिपोर्ट में खुद के आंदोलनकारी होने और कचहरी में अभिलेखों में खुद का नाम बतौर आंदोलनकारी शुमार होने का सुबूत दे देते हैं, तो सरकार के ऐलानों का फायदा ले सकेंगे। राज्य आंदोलनकारी स6मान परिषद की अध्यक्ष सुशीला बलूनी के मुताबिक परिषद के पास अभी आंदोलनकारियों की पूरी सूची नहीं पहुंची है। इसके पहुंचने के बाद ही मालूम चल सकेगा कि नौकरी न कर पाने वाले आंदोलनकारियों की तादाद कितनी है।

केंद्र ने देश की सुरक्षा से किया खिलवाड़

अल्मोड़ा: यूपीए सरकार के साढ़े चार वर्षो के कार्यकाल में देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है। भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं समाप्त हो गयी हैं। देश का सम्मान अपमानित हुआ है। आम आदमी महंगाई से त्रस्त है। स्थिति यह है कि दाल सोने की कीमत पर चली गई है। यह बात मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कही। इससे पूर्व मुख्यमंत्री श्री खंडूरी ने अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व चम्पावत में 126.92 करोड़ के विकास कार्याें का लोकार्पण किया। बातचीत के दौरान सीएल ने कहा कि एनडीए सरकार के दौर में अटल बिहारी वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण कर पूरे विश्र्व को जता दिया कि भारत किसी से कम नहीं है और न ही किसी से डरता है। पूरे विश्र्व में जो स्वाभिमान अटल बिहारी के नेतृत्व में भारत को मिला था, उस सारे स्वाभिमान को यूपीए सरकार ने धरातल पर ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री ने आडवाणी मिशन-2009 को सफल बनाने की बात करते हुए कहा कि यह निश्चित है कि केन्द्र में आने वाली सरकार एनडीए की बनेगी और प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी होंगे। चुनावी मुद्दे देश की सुरक्षा व महंगाई होगी। राम मंदिर के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह भारत की संस्कृति से जुड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान अल्मोड़ा में रामगंगा नदी पर झूला पुल के निर्माण समेत 63.92 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही पिथौरागढ़ में 23 करोड़ व चम्पावत में 40 करोड़ के विकास कार्याे का शिलान्यास किया।

एचएमटी कारखाने की बदहाली को प्रबंधन दोषी

,हल्द्वानी: श्रमिक संघ के वार्षिक अधिवेशन में शनिवार को एचएमटी घड़ी कारखाने की बदहाली के लिए प्रबंधन को दोषी ठहराया गया और इसे बचाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान हुए वार्षिक चुनाव में केएन सांगुड़ी को अध्यक्ष चुना गया। सेंट जीसस पब्लिक स्कूल रानीबाग के मैदान में हुए अधिवेशन को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष केवलानंद सांगुड़ी ने कहा कि एचएमटी को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने दिया जायेगा। कर्मचारी नेता केएन सांगुड़ी ने एचएमटी कारखाने की दयनीय हालत के लिए उच्च प्रबंधन एवं तथाकथित कुछ संगठनों को दोषी ठहराया। सांगुड़ी ने प्रबंधन को धृतराष्ट्र तक की संज्ञा दे डाली। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हरीश चंद्र पांडे ने भी संबोधित किया। कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह कड़ाकोटी ने वर्षभर का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। सभी सदस्यों ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। अधिवेशन में वर्ष 2009-10 के लिए वार्षिक चुनाव हुआ। इसमें केएन सांगुड़ी अध्यक्ष, नारायण राम आर्य व संजीव शुक्ला उपाध्यक्ष, नरेंद्र सिंह कड़ाकोटी मंत्री, शंकर दत्त तिवाड़ी व केआर गयाल संयुक्त मंत्री, हरगोविंद कुठलाकोटी कोषाध्यक्ष व केएस रावत संगठन मंत्री चुने गए। अधिवेशन में हरीश चंद्र, भगवत कोटलिया, देवेंद्र सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, नंदाबल्लभ डंगवाल, लक्ष्मण सिंह, महिपाल सिंह, राम सिंह, मदन सिंह, उमेश चंद्र, मोहन सिंह नेगी आदि मौजूद थे।

गोमूत्र व गोबर से धनवान बनेगा उत्तराखंड

नैनीताल: पशु कल्याण बोर्ड की उपाध्यक्ष शांति मेहरा के अनुसार राज्य में गौमूत्र व गोबर को आय का जरिया बनाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊं में शीघ्र ही गौ अनुसंधान केंद्र अस्तित्व में आ जाएगा। पशु कल्याण बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं का निर्माण कराया जाएगा। रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्रीमती मेहरा ने बताया कि राज्य सरकार गौमूत्र को रोजगार का माध्यम बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। गैर सरकारी संगठनों को शासन के तय नियमानुसार गौशालाओं के निर्माण के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। बाजपुर में राधे-कृष्ण गौसेवा सदन को 5 लाख रुपए प्रदान किये गए हैं। हर जिले में गौमूत्र एकत्रीकरण के लिए सेंटर बनाए जाने की कार्ययोजना बन चुकी है। उन्होंने कहा कि देहरादून के अलावा कुमाऊं में भी हाइटेक गौमूत्र अनुसंधान केंद्र खोला जाएगा। इसके लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि गौवंश वध कानून को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गौमूत्र, गोबर आदि को आजीविका से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने माना कि निकायों के अधीन होने के कारण कई खोड़ों में क्षमता से अधिक आवारा गायें रखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठनों को भी गौ संरक्षण के सरकारी प्रयासों में शामिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि नागपुर की तर्ज पर शीघ्र राज्य में भी गौमूत्र व गोबर से दवाइयों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

कुमाऊं विवि में वेतन के लाले

नैनीताल: कुमाऊं विश्र्वविद्यालय अपने गौरवशाली इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। शासन की उपेक्षा, विवि प्रशासन की अदूरदर्शिता के कारण यह शिक्षण संस्थान समस्याओं के साथ ही विवादों का पर्याय बन गया है। इसी विवि के साथ स्थापित गढ़वाल विवि जहां केंद्रीय दर्जा प्राप्त कर उत्सव मना रहा है, वहीं इस संस्थान में प्राध्यापकों व कर्मचारियों को वेतन के लिए हर बार शासन का मुंह देखना मजबूरी बन गया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थापित कुमाऊं विवि के सितारे वर्तमान में गर्दिश में हैं। विवि के तीनों परिसर डीएसबी, अल्मोड़ा व भीमताल प्राध्यापकों व कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। शासन की उपेक्षा ने विवि की माली हालत को सोचनीय बना दिया है। विवि परिसरों व संबद्ध महाविद्यालयों में सवा लाख से अधिक पंजीकृत छात्र हैं। विवि का वार्षिक बजट 22 करोड़ निर्धारित है। राज्य गठन के बाद सरकार द्वारा हर विवि को 11 करोड़ प्रतिवर्ष प्रदान करने का प्रावधान था, जो अब बढ़ने के बजाय घटकर 7 करोड़ हो गया है। शासन की उपेक्षा के कारण विवि भयंकर मंदी के दौर से गुजर रहा है। प्राध्यापकों व कर्मचारियों को वेतन देने में हर माह विवि प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। इस बीच प्राध्यापकों व कर्मचारी आंदोलनों से विद्यार्थियों का पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है। विवि प्रशासन व शासन के नकारात्मक रवैये के कारण यहां अध्ययनरत छात्र अन्यत्र प्रवेश ले चुके हैं, अथवा दूसरे संस्थान में जाने की तैयारी कर रही हैं। बहरहाल विख्यात भूगर्भ शास्त्री प्रो.खड़ग सिंह वल्दिया, भटनागर अवार्ड विजेता प्रो.जेएस सिंह जैसी महान हस्तियों को उदीयमान करने वाला सितारा खुद की चमक के लिए हाथ फैला रहा है।

बाघों को कैद करेगा पिंजरा

भीमताल: नगर से लगे पांडेगांव क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आतंक का पर्याय बन चुके बाघों से निजात दिलाने को वन विभाग शीघ्र ही गांव में पिंजरा लगाकर बाघों को कैद करेगा। ऐसा निर्णय रविवार को वन विभाग व ग्राम सभा की बैठक में लिया गया। साथ ही वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को सुबह व शाम के समय क्षेत्र में अकेले नहीं जाने की भी हिदायत दी है। बैठक में क्षेत्रीय विधायक खड़क सिंह बोहरा भी मौजूद रहे। बैठक में सबसे पहले वन विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों से राय मांगी गई। इस पर सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर किसी भी तरह बाघों को पकड़ने की मांग की। सभा में प्रधान जीवन पलडि़या व क्षेत्र पंचायत सदस्य व कनिष्ठ प्रमुख रामपाल सिंह गंगोला ने अब तक दो लोगों को घायल कर चुके तथा गांव के कई मवेशियों को अपना शिकार बना चुके बाघों के आदमखोर होने की पूरी सम्भावना बनी हुई है। वर्तमान में वह दिन के समय भी आबादी क्षेत्र में घूमने लगे हैं। लिहाजा इन्हें पकड़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इसके अलावा उन्होंने घायलों को शीघ्र मुआवजा देने की भी मांग की। इस पर वन क्षेत्राधिकारी एमसी पंत ने कहा कि दो-तीन दिन के भीतर गांव से लगे वन क्षेत्र में पिंजरा लगा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी। इस बीच बैठक में पहुंचे विधायक खड़क सिंह बोहरा ने वन विभाग से बाघ को शीघ्र पकड़कर ग्रामीणों को इससे निजात दिलाने की मांग की। इस बीच वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगाने को क्षेत्र का जायजा भी लिया।

शंकर बाबा बने ज्योतिर्मठ के दंडी स्वामी

हल्द्वानी: देश के प्रसिद्ध चार मठों में से एक ज्योतिर्मठ में 265 वर्ष बाद नई परंपरा की शुरुआत हुई है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने तीन गिरीनामा के संन्यासियों को दंडी स्वामी बनाया है। इसमें सिद्धेश्वर महादेव मंदिर नान्तिन बाबा आश्रम हल्द्वानी के शंकर बाबा भी शामिल हैं। निलियम कालोनी स्थित नान्तिन बाबा आश्रम के शंकर बाबा अब दंडी स्वामी के रूप में शंकरानंद गिरी के नाम से जाने जायेंगे। इसके अलावा जूना अखाड़ा के पूर्व सचिव योगेश्वरानंद गिरी और ब्रहानंद को भी दंड धारण कराया गया है। ज्योतिर्मठ से शनिवार की रात लौटे शंकरानंद गिरी ने जागरण को बताया कि आदि शंकराचार्य ने भारत के उत्तर में ज्योतिर्मठ, पूरब में गोवर्धन मठ, दक्षिण में श्रेयंगेरी मठ व पश्चिम में शारदा मठ की स्थापना की थी। इसमें उनके चार शिष्यों में सबसे बड़े शिष्य त्रोटकाचार्य थे। इन्ही की अध्यक्षता में दसनामी संन्यासी बनाये गये। उन्होंने बताया कि 200 वर्ष पहले ज्योतिर्मठ में गिरी संन्यासी ही शंकराचार्य होते थे। 100 वर्षो तक ऐसी ही व्यवस्था चलती रही। इसके बाद 165 वर्ष तक ज्योतिर्मठ की गद्दी बिना शंकराचार्य के चलती रही। गिरीनामा में इस पद के योग्य न मिलने पर जूना अखाड़ा के दसनामी संन्यासियों ने श्रृंगी पीठ के सरस्वती नाम को इस गद्दी पर विराजमान कर दिया।

जलविद्युत परियोजनाओं को बाहरी कंपनियों की भरमार

, देहरादून: उत्तराखंड की नई ऊर्जा नीति के तहत स्वचिह्नित बिजली परियोजनाओं के लिए 274 कंपनियों ने आवेदन किया है। इनमें 189 कंपनियां राज्य के बाहर की और 85 कंपनियां ऐसी हैं जिनके पते उत्तराखंड के हैं। 25 मेगावाट तक की बिजली परियोजनाओं के लिए दिसंबर तक आवेदन मांगे गए थे। देश भर की 274 कंपनियां इसके लिए आगे आई। इनमें अधिकांश कंपनियों ने एक से तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है। जल विद्युत निगम द्वारा जारी की गई सूची से पता चलता है कि देश भर से बड़ी-बड़ी कंपनियों ने उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए रुचि दिखाई है। चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ समेत कई शहरों से लोग बिजली परियोजनाओं के लिए आगे आए हैं। यहां तक कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश के भी बड़ी संख्या में आवेदक उत्तराखंड में रुचि दिखा रहे हैं। फिलहाल जल विद्युत निगम यूडेक के सहयोग से नदी-घाटी के स्तर पर आवेदकों की सूची बनाने में लगे हुए हैं। परियोजनाओं का आवंटन कब तक होगा, इस संबंध में ऊर्जा सचिव पीके सारंगी कहते हैं कि अभी आवंटन में कुछ महीनों का समय लग जाएगा। इस संबंध में जल विद्युत निगम के चेयरमैन योगेंद्र प्रसाद का कहना है कि नदी घाटी के स्तर पर सूची बन जाने के बाद प्रत्येक परियोजना का स्थलीय निरीक्षण करना आवश्यक होगा, क्योंकि एक ही चिह्नित परियोजना के लिए कई आवेदन आए हैं। मौके पर निरीक्षण किए बिना आवेदकों के दावों का परीक्षण नहीं किया जा सकता है। 850 से अधिक परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर निपटारा करना आसान काम नहीं होगा। हालांकि अधिकारी कुछ महीनों में आवंटन होने का दावा कर रहे हों, लेकिन परिस्थितियां बता रही हैं, कि आवंटन में एक साल भी लग सकता है।

मुनस्यारी में भूकंप के झटके

मुनस्यारी: शनिवार की रात मुनस्यारी में भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। इससे दहशत फैल गयी और लोग हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद घरों से बाहर निकल आये। ये झटके रात्रि 9:56 के आसपास महसूस किये गये। भूकंप से किसी तरह के जान-माल की क्षति की सूचना नहीं है। धारचूला और मुनस्यारी में लगातार आ रहे भूकंपों से लोग भयभीत हैं।

प्रशिक्षित बेरोजगारों पर लाठीचार्ज

16 feb- पिथौरागढ़: मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी का विरोध करने जा रहे विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों पर रविवार को पुलिस ने जमकर लाठियां बरसायीं, जिससे एक युवती समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गये। पुलिस ने 19 प्रशिक्षित बेरोजगारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कार्रवाई से भड़के प्रशिक्षितों ने मुख्यमंत्री की सभा के दौरान जमकर नारेबाजी की और उनके जाने के बाद नगर में जुलूस निकालकर पुतला फूंका। विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत प्रशिक्षित बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री के दौरे का विरोध करने की घोषणा की थी। इसके लिए वे सुबह से ही नगर के गांधी चौक में इकट्ठा हो गये। विरोध की घोषणा को देखते हुए पुलिस ने गांधी चौक को चारों ओर से घेर लिया। जैसे ही मुख्यमंत्री खंडूड़ी सभा स्थल देव सिंह मैदान पहुंचे, बेरोजगार नारेबाजी करते हुए आयोजन स्थल की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बेरोजगार उससे उलझ गये। तमाम कोशिशों के बावजूद स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। हालत यह हो गई कि जो भी सामने पड़ा, उस पर पुलिस की लाठियां बरसीं। पुलिस की इस कार्रवाई में किरन जोशी, सुबोध बिष्ट, ललित मोहन भट्ट, ललित टम्टा, हरीश भट्ट, ऋषेन्द्र महर, खीमराज जोशी सहित आधा दर्जन लोग घायल हो गये। पुलिस ने 19 प्रशिक्षित बेरोजगारों को गिरफ्तार कर लिया।

पर्यटन नियमावली बनायेगा उत्तराखंड

हल्द्वानी नैनीताल में दो पर्यटक छात्राओं की मौत से सरकार ने भी सबक लिया है। प्रदेश सरकार अपनी पर्यटन नियमावली बनाने जा रही है। इसका खाका तैयार हो गया है। इसमें मिनी रिसॉर्ट, रिवर राफ्टिंग, गाइड तथा टूर व ट्रेवल एजेंट सीधे सरकार के अधीन रखने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में यह अधिकार केन्द्र के पास है। लोकसभा चुनाव से पहले नियमावली को कैबिनेट से पास करा लिया जायेगा। पर्यटन राज्य उत्तराखंड में फिलहाल प्रदेश का सराय एक्ट लागू है। होटल और रिसॉर्ट का पंजीकरण इसी के तहत होता है, लेकिन इसमें कमरों की संख्या निर्धारित है। इससे कम कमरे वाले रिसॉर्ट का पंजीकरण केन्द्र सरकार करती है। इन्हें मिनी रिसॉर्ट अथवा मिनी गेस्ट हाउस बोला जाता है। ऐसे रिसॉर्ट में लाखों का पर्यटन कारोबार किया जाता है। इसके अलावा रिवर राफ्टिंग के लिहाज से भी उत्तराखंड महत्वपूर्ण है। पर्यटकों को राह दिखाने के लिए सैकड़ों की संख्या में गाइड भी यहां कार्यरत हैं। साथ ही टूर एवं ट्रेवल एजेंटों की संख्या भी काफी है। वर्तमान में इनका पंजीकरण केन्द्रीय पर्यटन विभाग करता है। इससे राज्य सरकार को इनकी संख्या की जानकारी नहीं हो पाती है,

Sunday, 15 February 2009

पहाड़ में अमर हैं कई प्रेम गाथाएं

पंवाड़ा औऱ लोक गीतों में खासी जगह मिली है प्रदेश की प्रेम कथाओँ को प्रेम दीवानों के लिए मिजॉ गालिब ने यूं ही नही फरमाया-बात अपने पहाड़ की करे तो प्यार करने वालों की गाथाएं यहां भी बिखरी पड़ी हैं । जनमानस में अमर हैं फिर चाहे वो जीतू-बगड्वाल-भरणा का प्रेम-प्रंसग हो ,राजुली-मालुशाही,सरुली-गढसुम्याल या फिर रामी-रामी का पति प्रेम आज भी मिसाल है। हर तरफ वेलेंटाइन वीक के बहाने नौजवानों पर प्यार का खुमार चढा़ है । प्यार ,तो त्याग ,समपॅण ,प्रेरणा, और दूसरे के लिए सवॅस्व न्यौछावर कर देने की भावना है प्यार । यही नजीर आज भी पेश कर रही हैं लोक मानस में रची-बसी अमर प्रेम गाथांए ।इन गाथाओं में न गुलाब की कलियों का योगदान था,न चाकलेट -टैडी और न आई लव.... जैसे शब्दों का फिर भी यह गाथांए आज तक पहाड़ो मे गूज रही हैं जिंदगी कू सुख पाई प्यारी तेरी आंख्यूं मां...... जैसे लोक प्रेमगीत गाथाओं को सुर देने वाले गायक प्रीतम भरतवाण कहते हैं कि पहाड़ की खास लोक गायन शैली पंवाड़ा प्रेम-प्रसंगों को सजियों से लोगों के बीच रखती आई है ।माछी-पाणि सी ज्यू तेरु-मेरु हो, बिना तेरा नी रयैजू- नी रयैंदू त्वै बिना........,जैसे लोकप्रिय नरेंद्र सिंह नेगी कहते हैं वेलेंटाइन डे सरीखा एक दिनी प्यार तो सिफॅ उनके लिए है ,जो जिंदगी से थके हारे हैं । वनॉ ,प्यार के लिए किसी खास दिन की जरुरत नही होती। पहाड़ को लोक गाथाओं में रचे-बसे प्रेम प्रसंग, देश -दुनिया की प्रसिद्द प्रेम गाथाओं की तरह गूंज रहे हैं और यही साबित करते हैं। मुहब्बत की कुछ चचित प्रेम - गाथाएं राजुली-मालुशाही-महज पांच दिन की उम्र में मालूशाही की राजुली से मंगनी हो गई थी राजुली उस वक्त मां के गभॅ में थी बाद में राजुली को जबरन कोई और ले गया । उसे वापस पाने के लिए मालुशाही को जोगी बनकर तंत्र विधा सीखनी पड़ी और तंत्र के सहारे उसे पा सका । गढ़- कुमाऊं के मध्य यह गाथा बहुत प्रसिद्द है। जीतू-बगड्वाल-भरणा-भरणा के लिए खैट पवॅत पर बांसुरी बजा रहे जीतु पर आछऱइयां मोहित हो गई औऱ उसका हरण कर लिया । टिहरी जिले की यह प्रेम कथा पूरे उत्तराखंड मे प्रसिद्द हैं। सरुली-गढसुम्याल- सात भड़ भाइयों की बहन सरुली रौतेला वंश के सुम्याल की बांसुरी पर मोहित हो जाती है । इन दोनो का प्रेम प्रसंग कुमाऊं क्षेत्र मे काफी प्रसिद्द है। रामी-रामी का पति प्रेम आज भी मिसाल है। १२ वषॅ तक पति के लौटने का इंतजार करते हुए उसने अपने यौवन का त्याग किया । पति ने जोगी बनकर परीक्षा ली,तो रामी का प्रेम पूवॅवत पाया । वयोवृद लोकगायक जीत सिह नेगी पति-पत्नी प्रेम की इस अनूठी गाथा को १९५६ में गीत- नाटिका के रुप में ढालकर औऱ लोकप्रियता दिलाई।

Saturday, 14 February 2009

बेतालघाट व रामगढ़ को मिले 10.73 करोड़

भवाली: सड़क शिक्षा समेत कई मूलभूत जरूरतों की कमी से जूझ रहे विकास खंड बेतालघाट व रामगढ़ क्षेत्र को 10.73 करोड़ रुपये मिल गए हैं। क्षेत्रीय विधायक यशपाल आर्य ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सड़क मार्गो से लेकर स्कूल व कालेजों के विकास में यह धनराशि खर्च की जायेगी। विधायक श्री आर्य ने बताया है कि विकासखंड बेतालघाट के सुदूरवर्ती पांच तथा रामगढ़ के एक गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 10.73 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत कर दी है। स्वीकृत धनराशि से बेतालघाट के ग्राम जैना से चन्द्रकोट-धूरा तक स्वीकृत पांच किमी मार्ग हेतु 1.75 करोड़, ग्राम औजी कुलो से बेतालघाट तक डेढ़ किमी मार्ग निर्माण के लिए 52.50 लाख व ग्राम सिरोड़ी से डाडर तक चार किमी मोटर मार्ग निर्माण कराया जायेगा। साथ ही इसी मार्ग पर पुल निर्माण के लिए 4.38 करोड़ रुपए, ग्राम हरचनैली से तिवारीगांव झुलापुल साढ़े तीन किमी मार्ग निर्माण हेतु एक करोड़ 22 लाख 50 हजार, घोडि़या हल्सों मार्ग के 4 किमी विस्तारीकण हेतु एक करोड़ 40 लाख के साथ ही रामगढ़ के प्यूड़ा इंटर कालेज से ग्राम कूल बिरखन तक 3 किमी लिंक मार्ग के लिए एक करोड़ 5 लाख रुपए स्वीकृत किये हैं। बेतालघाट के घोडि़या हल्सों मार्ग के डामरीकरण के लिए भी 40 लाख रुपए की स्वीकृत दी गई है। उल्लेखनीय है मोटर मार्ग सुविधा से वंचित उक्त ग्रामों के ग्रामीण लंबे समय से मोटर मार्ग बनाने की मांग कर रहे थे। श्री आर्या का कहना है कि शीघ्र ही इन मार्गो के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू करा दी जायेगी।

बीएड: मैनेजमेंट कोटे में एडमीशन बना चुनौती

भीमताल: विवि ने मैनेजमेंट कोटे लिए जो कट आफ लिस्ट निकाली है वह मंडल के 13 निजी कालेजों में प्रवेश से 7 गुना अधिक है। ऐसे में निजी कालेजों के लिए एडमीशन करना सिरदर्द साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि कुमाऊं मंडल के 13 निजी बीएड कालेजों में इन दिनों बीएड प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। कुमाऊं विश्र्व विद्यालय प्रशासन द्वारा 50 फीसदी सीटें स्टेट कोटे से भरने के बाद शेष 50 फीसदी मैनेजमेंट कोटे के लिए छोड़ी हैं। मैनेजमेंट कोटे में प्रवेश के लिए अलग-अलग वर्गाें में कट आफ मेरिट लिस्ट निकाली गई है। मैनेजमेंट कोटे पर मंडल भर के 13 कालेजों में 680 विद्यार्थियों का एडमीशन होना है। लेकिन मेरिट लिस्ट के आधार पर 4750 से अधिक अभ्यर्थी बीएड में प्रवेश के लिए अर्ह माने गए हैं। ऐसे में सभी कालेजों में सैकड़ों आवेदन जमा हो चुके हैं। जेएन कौल इंस्टीटयूट आफ एजूकेशन के प्राचार्य डा. एलएम जोशी ने बताया कि उनके यहां बीएड में प्रवेश के लिए करीब 800 सौ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। जबकि अभी दो दिन शेष हैं। उन्होंने बताया कि यहां मैनेजमेंट के लिए मात्र 30 सीटें हैं। डा. जोशी ने बताया कि 15 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन व 18 फरवरी तक अभ्यर्थियों की सूची विवि प्रशासन को भेजनी है। अभ्यर्थियों की संख्या काफी होने से प्रवेश प्रक्रिया में दिक्कतें हो रही हैं। डा. जोशी ने माना कि बीएड में प्रवेश के लिए हर जगह से काफी प्रेशर पड़ रहा है।

कनु भलु लगदु मेरू मुलक.., कुमाऊंनी गीत हाय काखड़ी झिल मां..

सुरों ने बिखेरी लोकरंग की छटा देहरादून: लियो दि एट्थ एंड राइजिंग सन फिल्म्स व पर्वतीय बिगुल संस्था की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में आवाज पंजाब दी फेम मनु वंदना ने सुरों का जादू बिखेरा। वंदना ने गढ़वाली, पंजाबी गानों के जरिए लोकरंग की छटा बिखेरी। ं शुक्रवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में आयोजित संध्या का उद्घाटन संस्कृति निदेशक सुव‌र्द्धन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान मनु वंदना ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना दैणा हुयां खोली का गणेशा.. से की। इसके बाद उन्होंने गढ़वाली गीत रौंत्याली लगदी मेरी जनम भूमि.., कनु भलु लगदु मेरू मुलक.., कुमाऊंनी गीत हाय काखड़ी झिल मां.. की प्रस्तुति देकर पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत की झलकियां पेश की। कार्यक्रम में प्रदीप भंडारी, गुरदीप सिंह टोनी, त्रिलोक चौहान, बलराज नेगी, पन्नू गुसाई उपस्थित रहे।

उत्तराखंड की जातियों का मूल चलेगा पता

देहरादून, उत्तराखंड में लोग कहां से आए, उनका मूल क्या है, यह जानना अब आसान हो जाएगा। कौलागढ़ रोड स्थित भारतीय मानव सर्वेक्षण (एएसआई) की डीएनए लैब में अत्याधुनिक उपकरण लग जाएंगे। इनके जरिए प्रदेश की विभिन्न जातियों, जनजातियों का जेनेटिक इतिहास जानना आसान हो जाएगा। प्रदेश में राजी, भोटिया, थारू, बोक्सा, जौनसारी जनजातियां रहती हैं। यहां के सवर्णो का मानना है कि उनमें अधिकतर के पूर्वज देश के किसी अन्य भाग से यहां आकर बसे हैं। बहुत से लोग तो खुद को पहाड़ की खस जाति से अलग मानते हैं। डीएनए लैब व विजुअल में लगने वाले जेल डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम और यूवी वीआईएस स्पेक्ट्रोमीटर उपकरणों से सभी जातियों, जनजातियों का डीएनए मिलान आसान हो जाएगा। जेल डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम से प्रोटीनों का विजुअल डॉक्यूमेंटेशन किया जाता है, जबकि स्पेक्ट्रोमीटर से प्रोटीन की शुद्धता की जांच की जाती है। जेल डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम व स्पेक्ट्रोमीटर से यह भी पता चल सकेगा कि कौन-कौन सी जातियों में कौन सी जातियों का रक्त मिश्रित हुआ है और वह मूल रूप से किस मानव जाति से संबंधित हैं। एएसआई के विभागाध्यक्ष डॉ. एनएनएच रिजवी ने बताया कि डीएनए लैब को पूरी तौैर पर काम करने लायक बनने में अभी समय लगेगा। कोलकाता मुख्यालय ने लैब के लिए 10 उपकरणों की स्वीकृति दे दी है। लैब में लगभग दो दर्जन उपकरण लगने हैं। अत्याधुनिक लैब बन जाने से उत्तराखंड ही नहीं, एएसआई के नार्दन सर्किल के अंतर्गत आने वाले जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, हिमाचल, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का आधुनिक जेनेटिक विश्लेषण तकनीक के जरिए मानवशास्त्रीय अध्ययन भी आसान हो जाएगा।

वेतन व भत्तों का शासनादेश जारी

14 feb- देहरादून, : सरकार ने चुनावी बेला में कर्मियों की मुराद पूरी कर ही दी। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रम में कैबिनेट की मंजूरी के बाद कर्मियों के वेतन और भत्तों आदि के बारे में आज एक साथ दस शासनादेश जारी किए गए हैं। प्रमुख सचिव (वित्त) आलोक कुमार जैन की ओर से जारी एक शासनादेश में कहा गया है कि सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों तथा कर्मियों को राजकीय के समान वेतन तथा अन्य भत्ते देय होंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि सहायताप्राप्त स्कूलों को शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों का प्रतिशत तय मानक के अनुसार 10:1 करना होगा। इन स्कूलों की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। मानकों पर खरा न उतरने वाले स्कूलों को अनुदान सूची से बाहर किया जाएगा। मकान भत्ते विषयक शासनादेश में कहा गया है कि शहरों की श्रेंणी के आधार पर ग्रेड-पे का 75 से 40 फीसदी तक भत्ता देय होगा। इसके तहत राज्य के मैदानी क्षेत्रों में अब तक दिया जा रहा पर्वतीय तथा सीमांत भत्ता अब नहीं दिया जाएगा। एक हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही पर्वतीय भत्ता दिया जाएगा। एक जनवरी 06 के बाद नियुक्त कर्मियों को एक ही पे बैंड में रखने के बारे में भी जीओ जारी किया गया है।सचिवालय के अधिकारियों तथा कर्मियों के भत्ते का जीओ किए गए हैं। इसके अलावा प्रतिनियुक्ति भत्ता, परिवार कल्याण भत्ता के साथ ही बीमा योजना राशि में बढ़ोतरी का शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। एक अन्य जीओ में समयमान वेतनमान के साथ ग्रेड पे भी देने के निर्देश हुए हैं। एक जीओ में एक जनवरी-06 से 31 अगस्त 08 तक विकल्प चुनने की छूट दी गई है। इसके लिए तीन महीने का समय और बढ़ाया गया है। शासन ने एरियर भुगतान को अब नई व्यवस्था बनाई है। चालू वित्तीय वर्ष में 40 प्रतिशत, वर्ष 09-10 में 30 और वर्ष 10-11 में शेष 30 प्रतिशत का भुगतान किया जाएगा। कर्मचारी संगठन के प्रदेश प्रवक्ता डीसी नौटियाल और अरुण पांडे ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद जीओ जारी होने में देरी से कर्मियों में असंतोष था। उन्होंने इस फैसले के लिए मुख्य मंत्री का आभार भी व्यक्त किया है।

रेल बजट निराशाजनक, उत्तराखंड की उपेक्षा

Feb 14, 01:19 am देहरादून। मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने रेल बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि केंद्र ने उत्तराखंड की फिर उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि यात्री किराये में भी आशा के अनुरूप रियायत नहीं दी गई। रेल बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में यह बजट पूरी तरह निराशाजनक है। रेल मंत्री ने उत्तराखंड की रेल जरूरतों पर अधिक ध्यान नहीं दिया है। हरिद्वार-हावड़ा के लिए नई सुपर फास्ट देने की घोषणा स्वागत योग्य है। इसके बावजूद उत्तराखंड की जरूरतों के लिहाज से जो नई रेल योजनाएं प्रस्तावित थी, उन पर ध्यान नहीं दिया गया। टनकपुर-बागेश्वर तथा रुद्रपुर-किच्छा-सितारगंज रेलवे लाइन के विस्तार पर कोई पहल नहीं की गई है। दिल्ली से ऋषिकेश के लिए चार धाम एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। देहरादून से हरिद्वार व ऋषिकेश के लिए एक सर्किट में पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखकर ट्रेन चलाने का जो प्रस्ताव था, उस पर भी रेल मंत्री ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। रेल बजट से साफ हो गया है कि केंद्र का उत्तराखंड के प्रति उपेक्षा का भाव बना हुआ है। खंडूड़ी ने कहा कि तेल के मूल्यों में भारी कमी होने के बावजूद रेल मंत्री ने यात्री किराए में मात्र दो प्रतिशत की कमी की है, जो काफी कम है। इस रियायत को अधिक किया जा सकता था।

मुनस्यारी और मानिला में भारी हिमपात

पिथौरागढ़/रानीखेत:पर्वतीय इलाकों में बुधवार को हुए भारी हिमपात ने सभी को निहाल कर दिया। मुनस्यारी पूरी तरह बर्फ से ढक गई, जबकि काली पड़ रहीं उच्च हिमालयी चोटियों ने भी ठंडी सफेद चादर ओढ़ ली। सल्ट के मानिला में पांच वर्ष बाद लोगों को हिम दर्शन हुए। मौसम के एकाएक बदले मिजाज से जनजीवन पर भी काफी प्रभाव पड़ा। हिमपात वाले इलाकों में गुरुवार को भी बर्फ न पिघलने से यातायात भी अवरुद्ध रहा। वाहन जहां-तहां बर्फ में फंसे रहे। देशी-विदेशी सैलानियों ने हिमपात का जमकर लुत्फ उठाया। हिमपात से तापमान में भी काफी गिरावट आ गयी है। पिथौरागढ़ जिले के कई क्षेत्रों में बुधवार को भारी वर्षा व चोटियों पर हिमपात के बाद गुरुवार को खुले मौसम में लोगों ने गुनगुनी धूप का आनंद लिया। कालामुनि-बिटलीधार के बीच भारी हिमपात के कारण थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग दूसरे दिन भी यातायात के लिये बंद रहा। दो दिन पूर्व तक काली नजर आ रहीं हिमालय की चोटियां बर्फ से लकदक हो गयी हैं।

बाहरी नहीं, उत्तराखंड का वाशिंदा हूं: बचदा

,हल्द्वानी: बाहरी बताने वालों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रत्याशी व प्रदेशाध्यक्ष बची सिंह रावत ने कहा कि मैं बाहरी नहीं उत्तराखंड का वाशिंदा हूं। उन्होंने अपने संसदीय काल में कराये विकास कार्य बताये और कहा कि भाजपा चुनाव के लिए तैयार है। पार्टी राज्य की पांचों सीटें जीतेगी। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि विरोधी उन्हें बाहरी बताकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वह (बचदा) उत्तराखंड के रहने वाले हैं और हल्द्वानी में उनका आवास भी है। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा के सांसद होने के बाद भी वह क्षेत्र में ही बंधकर नहीं रहे। राज्य के विकास की सोच रखी। नैनीताल में एरीज की स्थापना में सहयोग किया, इसके लिए 78 करोड़ भी स्वीकृत कराये। रुद्रपुर में बायोटेक्नोलॅाजी पार्क की स्थापना के लिए भी 20 करोड़ रुपये स्वीकृत कराये।

विश्वविद्यालय से लगायी काउंसिलिंग की गुहार

हल्द्वानी : कुमाऊं विश्र्वविद्यालय से संबद्ध निजी बीएड कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया में असमंजस की स्थिति को दूर करने के लिये गुरुवार को दो निजी बीएड कालेजों के संचालकों ने मैनेजमेंट कोटे की सीटें के लिये कुमाऊं विश्र्वविद्यालय से ही काउंसिलिंग करने की मांग की है। जेएन कौल इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन भीमताल के प्रधानाचार्य डा. एलएम जोशी व इंस्प्रेशन कालेज ऑफ टीचर्स एजूकेशन के निदेशक दीपक बल्यूटिया ने संयुक्त रुप से पत्रकार वार्ता में कहा कि मैनेजमेंट कोटे की सीटों को लेकर उत्पन्न विवाद ठीक नहीं है। मंडल में 700 सीटों इससे पांच हजार से अधिक लोग प्रभावित हो गये हैं। इसलिये विश्र्वविद्यालय से प्रबंधन कोटे की सीटों पर काउंसिलिंग करके प्रवेश प्रक्रिया पूरी किये जाने की मांग की है। जिससे की पारदर्शिता बनी रहे और संस्थानों की छवि भी खराब न हो।

रोडवेज के बेड़े में 10 बसें और शामिल

हल्द्वानी: परिवहन मंत्री बंशीधर भगत ने गुरूवार को एक सादे समारोह में दस नई बसों को रवाना किया। यह बसें भी अब उत्तराखंड परिवहन निगम के बेड़े में शामिल हो गयीं। उत्तराखंड परिवहन निगम के बेड़े में कुमाऊं व टनकपुर मंडलीय डिपो के अंतर्गत करीब 550 बसें हैं। विभागीय मंत्री द्वारा बसों को रवाना करने से बेड़े में अब दस और बसें जुड़ गयी हैं। इस मौके पर श्री भगत ने कहा कि एक वर्ष पहले उत्तराखंड परिवहन निगम के बेड़े में 200 नई बसें आई थीं। इस वर्ष 190 नई बसों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमे से अब तक 65 नई बसें निगम को उपलब्ध करवा दी गई हैं। श्री भगत ने कहा कि दस दिन में दस एसी बसें बेड़े में और शामिल जाएंगी। इनमे से छह बसें कुमाऊं व चार बसें गढ़वाल मंडल को मिलेंगी। इसके अलावा 50 और छोटी बसों के शीघ्र आने की संभावना है। श्री भगत ने कहा कि निगम के बेड़े में 11 सौ बसों का बेड़ा बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि पुरानी बसों को कंडम घोषित किया जाएगा। इस अवसर पर आरएम मुकुल पंत, एआरएम संजय गुप्ता, एआरएम वित्त एसएस बिष्ट, परिचालक कमल पपनै सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हिमपात: अभी भी कई मार्ग बंद, कालाढूंगी रोड खुला

13 feb-नैनीताल: बुधवार को हुए हिमपात के चलते पर्वतीय क्षेत्र में अभी भी कई मार्ग अवरुद्ध हैं। लोगों को इन मार्गो से पैदल ही आना-जाना पड़ रहा है। इस बीच नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है। बंद मार्गो से बर्फ हटाने के लिए लोनिवि की गैंग जुटी है, जबकि कई स्थानों पर जेसीबी व डोजर भेजे गए हैं। ज्ञात हो बुधवार को हुए हिमपात से नैनीताल-कालाढूंगी व किलबरी व पंगूठ समेत शहरफाटक, धानाचूली, पदमपुरी व मुक्तेश्र्वर तथा रामगढ़ मार्ग बंद हो गए थे। इस बीच नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग को अब यातायात के लिए खोल दिया गया है जबकि किलबरी-पंगूठ को खोलने के लिए लोनिवि की गैंग लगाई गयी है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता छंगाबाबू के अनुसार शुक्रवार तक इस मार्ग पर भी यातायात सुचारु हो जाएगा भवाली: ओलावृष्टि व बर्फबारी से भवाली सैनिटोरियम बैंड के पास बंद हुए भवाली-नैनीताल मार्ग गुरुवार की सुबह से लोनिवि ने जेसीबी और गैंग द्वारा हटवाना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद शाम चार बजे तक इस मार्ग पर यातायात चालू हो सका। इस मार्ग के बंद होने से बुधवार से ही सैकड़ों वाहन फंस गए। इसके चलते भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर रातीघाट तक व हल्द्वानी मार्ग पर भूमियाधार तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इधर रामगढ़ मार्ग पर भी वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है लेकिन मुक्तेश्र्वर मार्ग भारी बर्फबारी के कारण अभी भी बंद पड़ा है।

तिवारी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दी राहत

: आंध्र प्रदेश के राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी को गुरुवार को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शेर सिंह के पौत्र रोहित शेखर द्वारा तिवारी को अपना पिता बताने के मामले में अदालत ने कहा कि तिवारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए नहीं कह सकता। मामले में सुनवाई जस्टिस एसएन अग्रवाल की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी नहीं किया जा सकता। ऐसा संविधान में प्रावधान है। पीठ ने याचिकाकर्ता रोहित से कहा कि वह तिवारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए दबाव न डाले, बल्कि अन्य पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दे। रोहित का दावा है कि तिवारी और उसकी मां उज्ज्वला सिंह के संबंधों के कारण उसका जन्म हुआ था। उज्ज्वला सिंह भी कांग्रेस से जुड़ी रही हैं। गौरतलब है कि पिछले साल 15 दिसंबर को जस्टिस एके सीकरी व जस्टिस मनमोहन सिंह की पीठ ने तिवारी की चुनौती याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें कोर्ट में तत्काल व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी थी। इससे पहले एकल पीठ ने बीते 25 नवंबर को उन्हें अदालत में पेश होने के लिए कहा था।