Wednesday, 18 February 2009
घिल्डियाल दून पहुंचे गोस्वामी ऊधमसिंह नगर के एसएसपी
रामनगर पालिकाध्यक्ष की बर्खास्तगी तय
राज्य की आबकारी नीति तैयार
देहरादून, : दून विश्वविद्यालय को संस्कार व मूल्यपरक शिक्षा का माडल बनने का प्रयास करना चाहिए। मंगलवार को दून विवि के पुस्तकालय भवन का शिलान्यास करते हुए मुख्य मंत्री रिटायर्ड मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने ये विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून स्कूली शिक्षा के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। उन्हें आशा है कि दून विवि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देहरादून को यही मुकाम दिलाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दून विवि के कुलपति व सभी शिक्षक विवि को देवभूमि के संस्कारों के अनुरूप संस्कारित शिक्षा का केंद्र तो बनाएंगे ही, यहां के विद्यार्थी भी महज डिग्रियां पाने वाले न होकर बाजार और नए जमाने की जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम होंगे। कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि दून विश्वविद्यालय को दूसरे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की नकल न कर अपनी विशिष्ट पहचान तो बनानी ही होगी। आधुनिक व प्राचीन शिक्षा के सामंजस्य के ज्ञान का केंद्र भी बनना होगा। दून विवि के कुलपति प्रोफेसर गिरजेश पंत ने कहा कि 1533 लाख रुपये की लागत से बन रहे छह मंजिला पुस्तकालय में पांच लाख पुस्तकें व 1000 शोध पत्रिकाएं रखी जाएंगी। उन्होंने प्रदेश के बुद्धिजीवियों से पुस्तकालय के लिए पुस्तकें, पांडुलिपियां आदि दान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सहसपुर परिसर में जैव विविधता पर और अन्य वैज्ञानिक शोध के लिए लैबोरेटरियों की स्थापना की जाएगी। इसके पहले मुख्य मंत्री ने केदारपुरम में 788.38 वर्ग मीटर में 97.48 लाख रुपये की लागत से बने 30 शिशु क्षमता वाले राजकीय शिशु गृह और 850.90 लाख रुपये की लागत से बने 9504 वर्गमीटर के टाइप-4 के 72 शासकीय आवासों का लोकार्पण भी किया। इस मौके पर राजपुर विधायक गणेश जोशी, युवा कल्याणपरिषद के उपाध्यक्ष रवींद्र जुगराण, विवि के कार्यवाहक रजिस्ट्रार रमेश चंद्र अग्रवाल, स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन के प्रो. प्रदीप चक्रवर्ती, नयनदीप समेत अनेक अधिकारी, कर्मचारी स्थानीय भाजपा नेता और स्थानीय जनता मौजूद रही।
उत्तराखंड लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से 55 लाख रुपये कैश, 2.50 लाख कीमत के जेवरात बरामद
कुमाऊं मंडल की विधानसभा सीट रामनगर अब पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट का हिस्सा
अब सुगम होंगे बदरीनाथ के दर्शन
१८feb-
रुद्रप्रयाग शहर के नीचे ९०० मीटर लंबी टनल बनाने का प्रस्तावभवन रहेंगे सुरक्षित, भूमि अधिग्रहण का झांझाट भी नही
रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग में लगने वाले घंटों के जाम से हमेशा के लिए मु1ित मिल सकती है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने केदारनाथ और बदरीनाथ बाईपास के लिए पहाड़ का सीना चीरकर ९०० मीटर लंबी सुरंग बनाने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अब केंद्र सरकार को भेजा रहा है। यदि मंजूरी मिली तो रुद्रप्रयाग शहर के नीचे से यह सुरंग गुजरेगी और इससे तीर्थयात्रियों की यात्रा और सुगम हो जाएगी। सुरंग के लिए ६६-आरसीसी ने मैप तैयारइस सुरंग के लिए ६६-आरसीसी ने मैप तैयार किया है। सर्वेक्षण के लिए कंसलटेंसी एजेंसियों की मदद ली जा रही है। बीआरओ की नजर में यह एकदम सुरक्षित है। फिलहाल बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को कई जगह लंबे जाम का सामना करना पड़ता है। जिसमें तीन से चार घंटे का समय बर्बाद हो जाता है। इस सुरंग के बनने से बदरीनाथ जाने वालों के लिए १० किलोमीटर की दूरी भी कम हो जाएगी। सीजन में छह लाख तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं। दूसरे विकल्प मार्ग की गुंजाइश भी नहींरुद्रप्रयाग शहर की बनावट, बसावट और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूसरे विकल्प मार्ग की गुंजाइश भी नहीं है। सुरंग वाले मोटर मार्ग के निर्माण से आवासीय भवन भी सुरक्षित रहेंगे और भूमि अधिग्रहण का झांझाट भी नहीं रहेगा। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा जाना है। लेकिन इस क्षेत्र में सड़कें, नदी और पहाड़ से सटे भवन हैं। इन्हें हटाना मुश्किल और खर्चीला था। इसलिए प्रस्ताव तैयार किया गया कि केदारनाथ नेशनल हाइवे को पहाड़ी के अंदर से सुरंग द्वारा रुद्रप्रयाग-पोखरी मोटर मार्ग से जोड़ा जाएगा। इसके बाद यह मार्ग बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाएगा। इसके लिए यहां अलकनंदा नदी के ऊपर एक और पुल का निर्माण किया जाएगा, ताकि यात्राकाल में वाहन नगर से सीधे बाहर निकल जाएं। प्रति मीटर पैच पर २५ लाख का खर्च६६ आरसीसी के कमान अधिकारी केके सिंह के मुताबिक सुरंग के प्रति एक मीटर पैच पर लगभग २५ लाख रुपये खर्च आएगा। सुरंग निर्माण में लगभग साढ़े २२ करोड़ रुपये खर्च होंगे। वि8ाीय वर्ष २००९-१० में यह प्रस्ताव पास होने की उ6मीद है। रोहतांग टनल भी ऐसी ही-रोहतांग टनल मनाली और लाहौल घाटी के बीच रोहतांग दर्रे के नीचे से बनेगी। - कुल ८.९ किमी लंबी इस टनल की अनुमानित लागत १७०० करोड़ रुपये हो गई है। - इसके बनने से मनाली और लाहौल स्पीति के मु2यालय केलांग की दूरी करीब ५० किलोमीटर कम हो जाएगी। - इस टनल के निर्माण से लाहौल और पांगी घाटी के बाशिंदे लगभग पूरा साल शेष विश्व से जुड़े रहेंगे।
की सडक़ों पर दौड़ी लखटकिया
17 feb- नैनीताल: टाटा मोटर्स की बहुचर्चित लखटकिया नैनो कार मंगलवार को नैनीताल की माल रोड पर दौड़ी। इन्हें लांग ड्राइव ट्रायल के लिए यहां लाया गया था। कम्पनी के इंजीनियर भी इनमें साथ चल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक पर्वतीय व मैदानी भागों में लंबी दूरी के ट्रायल के लिए दो नैनो कारें साथ-साथ पूना से नैनीताल पहुंची थीं। यह कार दिल्ली होते हुए सिडकुल स्थित टाटा कंपनी में भी पहुंची। कंपनी में दोनों गाडिय़ों की जांच की गई। उसके बाद दोनों कारें नैनीताल को रवाना हुईं। यहां मनु महारानी में ठहरने के उपरांत टाटा कम्पनी की यह बहुचर्चित कार माल रोड होते हुए रानीखेत की ओर रवाना हुई। ट्रायल पर निकली टाटा की लखटकिया को नैनीताल की सडक़ों पर नगरवासी बेहद उत्सुकता से निहारने लगे। इनमें एक सिल्वर कलर व दूसरी ह्वïाइट कलर की नैनो कार शामिल थी। जानकारी के मुताबिक यह दोनों कारें रानीखेत से वापस पूना को लौट जाएंगी। नैनीताल पहुंची टाटा के सपनों की लखटकिया नैनो। लांग ड्राइव पर पूना से चली यह कार दिल्ली होते हुए मंगलवार को सरोवर नगरी पहुंची। इसके बाद यह रानीखेत की वादियों की सैर पर निकल
Tuesday, 17 February 2009
पुन: जांच से आंदोलनकारियों में पुन: जांच से आंदोलनकारियों में आक्रोश
१७ feb---डीएम के आदेश के खिलाफ उक्रांद के नेतृत्व में संगठनों ने किया धरना-प्रदर्शनवर्ष-२००५ के बाद के चिक्षित आंदोलनकारियों की दुबारा जांच का विरोध देहरादून, जिला प्रशासन ने वर्ष-२००५ से अब तक चिक्षित उ8ाराखंड आंदोलनकारियों की सूची पुन: जांच के लिए एलआईयू को भेज दी है। इससे आंदोलनकारियों में आक्रोश है। उ8ाराखंड क्रांति दल की अगुवाई में आंदोलनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोरचा खोलते हुए धरना दिया और प्रदर्शन किया। उक्रांद की पहल पर दल के कार्यकर्ताओं के साथ ही राज्य आंदोलनकारी मंच, कौशल्या डबराल संघर्ष वाहिनी और उ8ाराखंड संघर्ष मोर्चा से जुड़े आंदोलनकारी पूर्वाक्ष कल1ट्रेट स्थित शहीद स्मारक परिसर में एकत्र हुए और वहां धरना दिया। दुपहर तक आयोजित धरने के दौरान हुई सभा में व1ताओं ने कहा कि सरकार ने पांच मानकों के आधार पर आंदोलनकारियों की चिक्षीकरण प्रक्रिया पूरी करने का शासनादेश जारी किया है। इस शासनादेश को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने २० जुलाई २००५ से अब तक चिक्षित तमाम आंदोलनकारियों की सूची जांच के लिए एलआईयू को भेज दी, जबकि इन आंदोलनकारियों की सूचियां या तो सार्वजनिक हो चुकी थीं, या लंबित थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि दोबारा जांच को भेजी गईं पत्रावलियां जल्द ही वापस न मंगाई गईं, तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। सभा के पश्चात आंदोलनकारी जुलूस की श1ल में जिलाधिकारी कार्यालय तक गए और अपर जिलाधिकारी के माध्यम से मु2यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस तरह के कृत्यों से प्रशासन आंदोलनकारियों को अपमानित कर रहा है। ज्ञापन में १९७९ के बाद के सभी आंदोलनकारियों को शामिल करते हुए चिक्षीकरण होना चाहिए। आंदोलनकारियों को स6मान पत्र, पेंशन आदि की प्रक्रिया भी तत्काल पूरी करने की मांग ज्ञापन में उठाई गई है। उक्रांद नेता लताफत हुसैन के नेतृत्व में किए गए धरना-प्रदर्शन में जयप्रकाश उपाध्याय, सतीश थपलियाल, नारायण सिंह रावत, वाहिद खान, वेदानंद कोठारी, आंदोलनकारी मंच के प्रदीप कुकरेती, प्रभात डंडरियाल, अभय कुकरेती, वाहिनी की सुशीला ध्यानी, सतेश्वरी अमोली, गीता नेगी, सरोज रावत, संघर्ष मोर्चा के राजीव कोठारी, अमर सिंह रटोलिया, जनता दल-एस के नवनीत गुसाईं आदि ने शिरकत की।
पंतनगर एयरपोर्ट से विमान सेवा को हरी झांडी
17 feb-
देहरादून। केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली-पंतनगर की नियमित हवाई सेवा को हरी झांडी दे दी है। सब कुछ ठीक रहा तो २९ मार्च को पंतनगर एयरपोर्ट से किंगफिशर का विमान पहली उड़ान भरेगा। फिलहाल यह व्यवस्था गर्मियों तक के लिए है।पंतनगर से रेग्यूलर 3लाइट की मांग काफी समय से चल रही थी। पंतनगर के आसपास कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। पर्यटन विकास की संभावनाओं के मद्देनजर यहां से विमान सेवा शुरू करने की पहल क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद ने भी की थी। डायरे1टर जनरल सिविल एविएशन की ओर से २८ जनवरी को गर्मियों के लिए जारी घरेलू हवाई सेवा शेड्यूल में पंतनगर एयरपोर्ट का भी नाम शामिल है। यहां दिल्ली से प्रतिदिन किंगफिशर का विमान आएगा और जाएगा। इस संबंध में ९ फरवरी को एयरपोर्ट सि1योरिटी कमेटी (एपीएससीएम) की मीटिंग भी हो चुकी है। यह विमान सेवा फिलहाल २९ मार्च से २४ अ1तूबर तक के लिए है। एयरपोर्ट अथार्टी एडवाइजरी कमेटी, उ8ाराखंड-उ8ारप्रदेश के सदस्य सुरेश गंगवार का कहना है कि इस विमान सेवा से ऊधमसिंह नगर, रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर, बाजपुर के साथ ही हल्द्वानी, नैनीताल तक के लोग लाभांवित होंगे। पंतनगर के आसपास कई पर्यटन और नानकम8ाा, रीठा साहब जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भी हैं। जहां देश-विदेश के सैलानी आते हैं। पंतनगर-दिल्ली के साथ ही पंतनगर-अमृतसर के बीच नियमित विमान सेवा शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मास्टर 4लास्टर के पैरों पर चमकेंगे मसूरी के जुते
17 feb-
किशन शू मेकर को दिया था आर्डर, पत्नी व बच्चों ने भी बनाए जुतेसात नंबर का कैमल-सावर कलर का जुता बनवाया सचिन तेंदुलकर ने मसूरी। मास्टर 4लास्टर सचिन तेंंदुलकर को पहाड़ों की रानी मसूरी की आबोहवा ही नहीं, बल्कि यहां के जुते भी बेहद पंसद हैं। यही वजह है कि मसूरी प्रवास के दैरान उन्होंने न सिर्फ अपने लिए, बल्कि पत्नी अंजली समेत दोनों बच्चों के लिए 5ाी जुते बनाने का ऑर्डर मशहूर किशन शू मेकर को दिया। सचिन से मिले ऑर्डर से बेहद खुश दुकानदार ने सचिन के लिए सात नंबर का कैमल-सावर कलर का जुता तैयार कर उन्हें सौंप भी दिया है।मसूरी को जो लोक सिर्फ सुंदर और शांत वादियों के लिए ही जानते हैं। उन्हें हम बताते चलें कि यहां के जुते भी बड़ी-बड़ी सेलिब्रेटिस को आकर्षित करती है। तभी तो मास्टर 4लास्टर सचिन तेंदुलकर जैसी स2िशयत के पैरों पर भी मसूरी में बने जुते चमकते हैं। सचिन ने सिंदबर में मसूरी प्रवास के दौरान मलिंगार स्थित किशन शू मेकर की दुकान से अपने लिए कैमल-सावर कलर का जुता आर्डर किया। सचिन की पत्नी अंजली, बेटे अर्जून पुत्री सारा को भी किशन शू मेकर के यहां बने जुते बेहद पंसद आए। सो, सचिन ने उनके लिए भी जुते बनाने का ऑर्डर दे दिया। बताया जाता है कि आते-जाते समय सचिन की निगाह मलिंगार स्थित जुते की दुकान पर पड़ी। प्रशंसकों से बचने के लिए सचिन ने दुकान में उतरना तो ठीक नहीं समझाा, लेकिन अपने मित्र संजय नारंग के पास जरूर इस दुकान का जिक्र किया। नारंग ने भी शू मेकर किशन मुरेना को २८ दिसंबर को बोथवैल बैंक कॉटेज नाप लेने के लिए बुला लिया। मुरेना ने सचिन को काफी डिजाइन दिखाए। जिसमें से उन्होंने कैमल-सावर कलर का जुता पंसद किया। सचिन की पत्नी और दोनों बच्चों ने भी लगे हाथ जुते और सैंडल बनाने का आर्डर दे दिया। किशन ने चार दिन में जुते तैयार कर ३१ दिसंबर को सचिन को सौंप भी दिए। सचिन से जुते बनाने का ऑर्डर मिलने से बेहद खुश किशन मुरेना बताते हैं कि उनके द्वारा तैयार जुते सचिन ने पंसद किए, यह उसके लिए शौभाग्य की बात है। मनपंसद के जुते तैयार करने के लिए सचिन और उनकी पत्नी अंजली ने किशन की जमकर तारीफ भी की। किशन पहले भी कई सेलिब्रेटिस के लिए जुते तैयार कर चुका है।
एनटीटी प्रशिक्षितों का हंगामा
आओ बसाएं छोटी सी दुनिया
हरिद्वार: कुदरत की मार से कद में छोटे रह गए रमेश चंद्र व पूनम ने कभी परिवार बसाने की कल्पना भी नहीं की थी। किस्मत को खुद से रूठा हुआ मानकर दोनों अपनी जिंदगी बिता रहे थे। उनकी किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि दोनों पूरे धूमधाम से सात जन्मों के बंधन में बंध गए। तीर्थनगरी में रविवार की रात हुई दोनों की शादी काफी चर्चित रही। जैन धर्मशाला में रविवार को शादी के लिये सजा शामियाना अपने आप में खास था। हालांकि यहां पर खाने पीने के इंतजाम सहित घरातियों की मेहमान नवाजी से लेकर बारातियों के हुल्लड़ तक सब कुछ सामान्य था। कुछ खास यह था कि साढ़े तीन फुट के देहरादून निवासी दूल्हे रमेश (26 वर्ष) और इतने ही छोटे कद की ज्वालापुर मोहल्ला कड़च्छ निवासी 21 वर्षीय दुल्हन पूनम। इनकी वजह से यह शादी यादगार बन गई। शादी की आस छोड़ चुके दोनों के चेहरों के भाव बता रहे थे कि उनके मन की मुराद पूरी हो गई है। दुल्हन के पिता प्रेम सिंह राठौर और मां बाला रह रहकर बेटी और दामाद की बलाएं ले रहे थे। देहरादून के सुभाषनगर की आदर्श कॉलोनी से पहुंची इस बारात के स्वागत से विदाई तक की हर रस्म दूल्हा-दुल्हन के छोटे कद के कारण कई रोचक प्रसंगों के साथ पूरी हुई। देहरादून में टाइटन कंपनी में काम करने वाले रमेश ने बताया कि पूनम जैसी दुल्हन पाने की उसने कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन उसके दिल में जो चाह थी, वह आज पूरी हो गई। पूनम ने बताया कि मनपसंद और उसके कंधे से कंधा मिलाकर चल सकने वाला जीवन साथी पाने के लिये उसने तीन साल पहले नीलकंठ मंदिर जाकर मन्नत मांगी और अनेक व्रत किये।
रुद्रपुर परगना से जुड़ेगी गदरपुर तहसील
Monday, 16 February 2009
मिस करती हूं पहाड़ को
16feb-
देहरादून: मेरा बचपन दून की वादियों में ही गुजरा है। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसे पाने में कहीं न कहीं दून का जुड़ाव भी रहा है। मेरा ननिहाल दून में है और मैंने स्कूली पढ़ाई भी यहीं पूरी की है, इसलिए दून में बिताए पलों को मैंने अपनी यादों में सहेज कर रखा है। मुझे उत्तराखंडी होने पर गर्व है। मिस इंडिया वर्ल्ड वाइड में फर्स्ट रनर अप सुरभि मिश्रा ने खिताब हासिल करने के बाद जागरण से बातचीत के दौरान कुछ इस तरह अपनी बात रखी। रविवार को सोनी टीवी पर मिस इंडिया वर्ल्ड वाइड प्रतियोगिता का प्रसारण देखने को दूनवासी बेताब रहे, वजह कि कांटेस्ट में दून की बेटी भी पार्टिसिपेट कर रही थी। शाम को जैसे ही कांटेस्ट के रिजल्ट घोषित किए गए, उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। सुरभि मिश्रा प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर अप के खिताब से नवाजी गई। इसके लिए उन्होंने परिवार से मिले सहयोग और सहयोगियों का आभार जताया। सुरभि के पिता एसडी मिश्रा मूलत: दून के रहने वाले हैं और अभी कर्नल के पद पर मेरठ में नियुक्त हैं, जबकि माता शिवानी मिश्रा गृहणी हैं। सुरभि ने बताया कि वह अभी पुणे के फग्र्यूसन कालेज से स्नातक कर रही हैं। माडलिंग चुनने के बारे में उन्होंने बताया कि जेट एयरवेज में एयर होस्टेस के तौर पर काम करने के दौरान ही उन्होंने इस बारे में सोचा। भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो पढ़ाई पूरी करनी है, इसके बाद प्रतियोगिता के दौरान मिले एक साल के कांट्रेक्ट को पूरा करने है।
स्टेट कोटे की सीटों के लिए भी होगी काउंसिलिंगश्रीनगर।
बुजुर्ग आंदोलनकारियों को मिलेगी पेंशन
चुनाव से पहले होगा ऐलानमु2यमंत्री दरबार में पहुंची फाइल देहरादून,
उ8ाराखंड राज्य के गठन की खातिर खुद को दांव पर लगाते हुए जेल और लाठी से घबराए बगैर संघर्ष करने वाले अश1त या बुजुर्ग हो चुके आंदोलनकारियों को सरकार नवाजने वाली है। उन्हें पेंशन दी जाएगी। संभवत: इसका ऐलान लोकसभा चुनाव से पहले हो जाएगा। प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों को पहले ही सरकारी नौकरी दे चुकी है। जो लोग खुद नौकरी कर सकते थे वे नौकरी में चले गए और जिनके लिए उम्र अधिक हो जाने के कारण यह मुमकिन नहीं था, उनके आश्रित नौकरी कर रहे हैं। इसके बावजूद ऐसे लोगों की तादाद भी काफी है, जो न तो नौकरी कर सकते हैं न ही उनके आश्रित ही हैं। हालांकि, इनकी ठीक-ठीक तादाद के बारे में जानकारी नहीं है। सरकार ने जिलाधिकारियों को उनकी पहचान कर रिपोर्ट देने की हिदायत दी हुई है। ऐसे लोगों पर सरकार की जल्द ही नजरें इनायत होने वाली है। शासन सूत्रों के अनुसार सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर फैसला कर लिया है कि ऐसे आंदोलनकारियों को उनके संघर्ष का स6मान करते हुए ताउम्र पेंशन दी जाएगी। पेंशन की राशि कितनी होगी, यह तय होना है लेकिन एक आला अफसर के अनुसार यह फैसला पूरी तरह मु2यमंत्री के हाथ में है। लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले ही सरकार इसे लागू करने की कोशिश में है। सूत्रों के अनुसार पेंशन देने संबंधी प्रस्ताव मु2यमंत्री सचिवालय में पहुंच चुकी है। आंदोलनकारियों का चयन करने के लिए सरकार ने पहले ही मानक बना लिए हैं। आंदोलनकारी खुद के जेल जाने, आंदोलन में घायल होने के कारण अस्पताल में भरती होने या इलाज कराने, पुलिस की दैनिक डायरी में नाम शामिल होने या एलआईयू रिपोर्ट में खुद के आंदोलनकारी होने और कचहरी में अभिलेखों में खुद का नाम बतौर आंदोलनकारी शुमार होने का सुबूत दे देते हैं, तो सरकार के ऐलानों का फायदा ले सकेंगे। राज्य आंदोलनकारी स6मान परिषद की अध्यक्ष सुशीला बलूनी के मुताबिक परिषद के पास अभी आंदोलनकारियों की पूरी सूची नहीं पहुंची है। इसके पहुंचने के बाद ही मालूम चल सकेगा कि नौकरी न कर पाने वाले आंदोलनकारियों की तादाद कितनी है।
केंद्र ने देश की सुरक्षा से किया खिलवाड़
एचएमटी कारखाने की बदहाली को प्रबंधन दोषी
गोमूत्र व गोबर से धनवान बनेगा उत्तराखंड
कुमाऊं विवि में वेतन के लाले
बाघों को कैद करेगा पिंजरा
शंकर बाबा बने ज्योतिर्मठ के दंडी स्वामी
जलविद्युत परियोजनाओं को बाहरी कंपनियों की भरमार
मुनस्यारी में भूकंप के झटके
प्रशिक्षित बेरोजगारों पर लाठीचार्ज
पर्यटन नियमावली बनायेगा उत्तराखंड
Sunday, 15 February 2009
पहाड़ में अमर हैं कई प्रेम गाथाएं
Saturday, 14 February 2009
बेतालघाट व रामगढ़ को मिले 10.73 करोड़
बीएड: मैनेजमेंट कोटे में एडमीशन बना चुनौती
कनु भलु लगदु मेरू मुलक.., कुमाऊंनी गीत हाय काखड़ी झिल मां..
सुरों ने बिखेरी लोकरंग की छटा
देहरादून: लियो दि एट्थ एंड राइजिंग सन फिल्म्स व पर्वतीय बिगुल संस्था की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में आवाज पंजाब दी फेम मनु वंदना ने सुरों का जादू बिखेरा। वंदना ने गढ़वाली, पंजाबी गानों के जरिए लोकरंग की छटा बिखेरी। ं शुक्रवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में आयोजित संध्या का उद्घाटन संस्कृति निदेशक सुवर्द्धन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान मनु वंदना ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना दैणा हुयां खोली का गणेशा.. से की। इसके बाद उन्होंने गढ़वाली गीत रौंत्याली लगदी मेरी जनम भूमि.., कनु भलु लगदु मेरू मुलक.., कुमाऊंनी गीत हाय काखड़ी झिल मां.. की प्रस्तुति देकर पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत की झलकियां पेश की। कार्यक्रम में प्रदीप भंडारी, गुरदीप सिंह टोनी, त्रिलोक चौहान, बलराज नेगी, पन्नू गुसाई उपस्थित रहे।
उत्तराखंड की जातियों का मूल चलेगा पता
वेतन व भत्तों का शासनादेश जारी
रेल बजट निराशाजनक, उत्तराखंड की उपेक्षा
मुनस्यारी और मानिला में भारी हिमपात
बाहरी नहीं, उत्तराखंड का वाशिंदा हूं: बचदा
विश्वविद्यालय से लगायी काउंसिलिंग की गुहार
रोडवेज के बेड़े में 10 बसें और शामिल
हिमपात: अभी भी कई मार्ग बंद, कालाढूंगी रोड खुला
13 feb-नैनीताल: बुधवार को हुए हिमपात के चलते पर्वतीय क्षेत्र में अभी भी कई मार्ग अवरुद्ध हैं। लोगों को इन मार्गो से पैदल ही आना-जाना पड़ रहा है। इस बीच नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है। बंद मार्गो से बर्फ हटाने के लिए लोनिवि की गैंग जुटी है, जबकि कई स्थानों पर जेसीबी व डोजर भेजे गए हैं। ज्ञात हो बुधवार को हुए हिमपात से नैनीताल-कालाढूंगी व किलबरी व पंगूठ समेत शहरफाटक, धानाचूली, पदमपुरी व मुक्तेश्र्वर तथा रामगढ़ मार्ग बंद हो गए थे। इस बीच नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग को अब यातायात के लिए खोल दिया गया है जबकि किलबरी-पंगूठ को खोलने के लिए लोनिवि की गैंग लगाई गयी है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता छंगाबाबू के अनुसार शुक्रवार तक इस मार्ग पर भी यातायात सुचारु हो जाएगा भवाली: ओलावृष्टि व बर्फबारी से भवाली सैनिटोरियम बैंड के पास बंद हुए भवाली-नैनीताल मार्ग गुरुवार की सुबह से लोनिवि ने जेसीबी और गैंग द्वारा हटवाना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद शाम चार बजे तक इस मार्ग पर यातायात चालू हो सका। इस मार्ग के बंद होने से बुधवार से ही सैकड़ों वाहन फंस गए। इसके चलते भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर रातीघाट तक व हल्द्वानी मार्ग पर भूमियाधार तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इधर रामगढ़ मार्ग पर भी वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है लेकिन मुक्तेश्र्वर मार्ग भारी बर्फबारी के कारण अभी भी बंद पड़ा है।