Wednesday, June 1, 2011

जलमणि योजना : टॉप सेवन में है उत्तराखंड

पिछले वित्त वर्ष में हासिल किया 711 वाटर प्यूरीफायर स्थापित करने का लक्ष्य प्रदेश भर के 1300 ग्रामीण स्कूलों में वाटर प्यूरीफायर स्थापित करने का प्रस्ताव् देहरादून । अपना प्रदेश उत्तराखंड देश के उन सात राज्यों की कतार में शामिल हो गया है जिन्होंने जलमणि योजना में 100 फीसद या उससे ऊपर भौतिक और वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में कामयाबी पाई है। मजेदार बात यह है कि ग्रामीण स्कूलों में वाटर प्यूरीफायर स्थापित करने की इस योजना का देश के स्तर पर केवल 63.36 फीसद ही लक्ष्य हासिल हो पाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में देश में एक लाख वाटर प्यूरीफायर स्थापित करने का लक्ष्य था जिसके विपरीत देश में केवल 63 हजार 360 वाटर प्यूरीफायर ही स्थापित हो पाए। केंद्र की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में सात राज्यों कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु,उत्तराखंड और मिजोरम ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। जबकि पांच राज्य बिहार,उड़ीसा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और नागालैंड ने 60 फीसद से ज्यादा लक्ष्य तो प्राप्त किया लेकिन पूरा लक्ष्य पाने में नाकाम रहे। राजस्थान केरल और गोवा ने तो इस मामले में कुछ किया ही नहीं यानी उनकी लक्ष्य प्राप्ति शून्य रही। अब केंद्र ने सभी राज्यों को मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य अपना 100 फीसद लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत जलमणि के लिए पूरी वित्तीय सहायता देती है। 2009 में प्रदेश में शुरू हुई जलमणि योजना को पेयजल निगम क्रियान्वित कर रहा है। शुरूआत में प्रदेश में पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चंपावत में ये योजना शुरू की गई थी। प्रमुख सचिव पेयजल उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि जलमणि के तहत प्रदेश में 1300 ग्रामीण स्कूलों में वाटर प्यूरीफायर स्थापित करने का प्रस्ताव है। पिछले वित्तीय वर्ष तक प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों के ग्रामीण स्कूलों में 711 वाटर प्यूरीफायर स्थापित किए जा चुके हैं। जिन पर इसके लिए केंद्र से मिली पूरी रकम यानी 55 .23 लाख रुपये भी खर्च किए जा चुके हैं। इस तरह पेयजल विभाग की ओर से प्रदेश के कुछ प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में स्थापित वाटर फिल्टर न केवल बच्चों की प्यास बुझा रहे हैं बल्कि उन्हें सुरक्षित और साफ पानी भी मुहैया करा रहे हैं। जल निगम ने अब वाटेक्स कंपनी को खुली निविदा के जरिए 2014 तक जलमणि का काम सौंपा है। यह भी कहा गया है कि स्कूलों के हैंड पंपों को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के धन से फोर्स लिफ्ट पंप में बदल दिया जाए और साफ पानी के लिए हैंड पंपों के पास ही टेराफिल फिल्टर स्थापित किए जाएं ताकि बच्चों को हैंडपंप से सीधा साफ व सुरक्षित पेयजल मिल सके।

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