Wednesday, June 29, 2011

अगले वर्ष तक मिल जाएंगे 200 डाक्टर : निशंक

देहरादून - मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि अगले वर्ष तक प्रदेश को श्रीनगर व हल्द्वानी मेडिकल कालेज से दो सौ डाक्टर मिल जाएंगे। इन मेडिकल कालेजों के छात्रों से सरकार ने अनुबंध किया हुआ है। इसके अतिरिक्त देहरादून व अल्मोड़ा में भी मेडिकल कालेज खुलने से स्वास्थ्य सेवा और मजबूत हो जाएगी। मंगलवार को यह बात डा. निशंक ने सहस्त्रधारा रोड डांडा लखौड़ स्थित नवनिर्मित स्वास्थ्य महानिदेशालय, आयुष महानिदेशालय व होम्यापैथिक निदेशालय के भवनों का लोकार्पण करने के दौरान कही। लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में एलोपैथिक और आयुष दोनों ही क्षेत्रों में तेजी से कार्य हो रहा है। आयुष ग्राम की स्थापना अल्मोड़ा (भवानी) में 100 करोड़ की लागत से की जाएगी। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए श्रीनगर एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज स्थापित है, जबकि जल्द ही देहरादून और अल्मोड़ा में मेडिकल कालेज स्थापित होगा। इससे प्रदेश में डाक्टरों की कमी को दूर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी मेडिकल कालेज में एमएस और एमडी पाठ्यक्रम में 27 सीटों की अनुमति मिलने से विशेषज्ञ डाक्टर प्रदेश को मिल पाएंगे। उन्होंने कहा कि देहरादून से प्रदेश का पहला बीएससी नर्सिग कालेज भी प्रारम्भ हो गया है और जल्द ही नर्सिग कालेजों की एक श्रृंखला प्रदेश भर में शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों को निजी क्षेत्र की सहभागिता से उच्चीकृत किया जा रहा है। व्याधि निधि योजना के अन्तर्गत 5 करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया गया है। उन्होंने स्वयं अपने विवेकाधीन कोष से 3500 से अधिक लोगों को लगभग 12 करोड़ रुपये की राशि गम्भीर रोगों के उपचार के लिए दी है। जौलीग्रांट अस्पताल में कैंसर की यूनिट खोली है। अब कुमाऊं में भी कैंसर यूनिट खोलना प्रस्तावित है। सरकार का प्रयास है कि स्वास्थ्य सुविधाएं हर व्यक्ति तक पहुंचे। सीएम ने 108 एम्बुलेंस सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उक्त सेवा आपात स्थिति के लिए कारगर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने महानिदेशालय के कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की बात पर स्वास्थ्य सचिव को संभावना तलाशने की बात कही। महानिदेशालय शहर से दूर होने पर कर्मचारियों के लिए दो बसे चलाने की स्वीकृति प्रदान की। कार्यक्रम में विधायक गणोश जोशी ने डांडा लखौड़ में स्टेडियम बनाने की मांग सीएम के आगे रखी। सचिव स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत पंवार ने बताया कि उत्तराखण्ड में पिछले तीन वर्षो में 500 स्वास्थ्य उपकेन्द्र, 37 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और एक जिला अस्पताल खोला गया है। ब्लड बैंक और ट्रामा सेंटर भी खोले गये हैं। डाक्टरों की कमी से निपटने के लिए 141 आयुव्रेदिक चिकित्सकों को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में ऐलोपैथिक अस्पतालों में तैनात किया गया है। बाल स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत बच्चों के नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण हेतु चिरायु योजना चलाई जा रही है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आशा माथुर, आयुव्रेद महानिदेशक डॉ़ पूजा भारद्वाज, होमियोपैथिक निदेशक डॉ. बीसी लखेड़ा, एनआरएचएम के निदेशक पीयूष सिंह, अपर सचिव अजय प्रद्योत सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। स्वास्थ्य व आयुष महानिदेशालय तथा होम्योपैथिक निदेशालय के भवनों का लोकार्पण किया भवाली में होगी आयुष ग्राम की स्थापना

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