Monday, 30 May 2011

एकलपीठ के आदेश पर रोक

, नैनीताल: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने लोनिवि में जूनियर इंजीनियरों के 258 पदों को भरने से संबंधी राज्य लोक सेवा आयोग के आदेश की पुष्टि करने वाले एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष एवं न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की संयुक्त पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता बालकृष्ण व अन्य ने विशेष अपील दायर कर कहा कि आयोग ने 7 फरवरी 07 को लोनिवि में जूनियर इंजीनियर के 70 पदों की भर्ती को विज्ञप्ति जारी की थी। 21 अगस्त 10 को 70 के विपरीत 258 पदों के परिणाम घोषित कर दिए गए। आरोप लगाया कि विज्ञाप्ति के विपरीत अधिक पदों पर नियुक्ति नियम विरुद्ध है। यह भी कहा, कई अभ्यर्थियों को अतिरिक्त पदों के लिए चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने से लोक सेवा आयोग ने वंचित किया है। इधर बीती पांच मई को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि सभी पद पूर्व में सृजित किए गए थे। इसके विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की संयुक्त पीठ में विशेष अपील दायर की। गुुरुवार को सुनवाई के बाद प्रथम दृष्टया लोक सेवा आयोग के निर्णय को उचित न पाते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है।

समीक्षा अधिकारी की नियुक्ति टली

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी की नियुक्तियों के मामले में एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। याचिका कर्ता तारा चन्द्र घिल्डियाल व अन्य द्वारा पूर्व में एकलपीठ के समक्ष एक याचिका दाखिल कर राज्य लोक सेवा आयोग के समीक्षा अधिकारियों के पदों को भरने संबंधी आदेश 11 मार्च 10 को इस आधार पर चुनौती दी थी कि मुख्य परीक्षा हेतु एक के सापेक्ष 20 अभ्यार्थियों को सम्मिलित करने का नियम है, किन्तु आयोग द्वारा मनमाने तरीके से मुख्य परीक्षा हेतु कम लोगों को सफल घोषित किया गया। एकलपीठ द्वारा पूर्व में आयोग के निर्णय पर सहमति जताते हुए याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि मुख्य परीक्षा पूर्व में ही हो चुकी है। किन्तु न्यायालय ने आयोग को निर्देश दिया था कि वह अन्तिम परिणाम एक माह तक घोषित न करे। एकलपीठ के उक्त निर्णय के विरुद्ध दायर विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष व न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की खंडपीठ ने एकलपीठ के पूर्व आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और सुनवाई के लिए अगली तिथि 16 जून नियत की है।

जीप खाई में गिरी छह लोगों की मौत

दो अन्य घायल, श्रीनगर से दून जा रही थी टाटा सूमो देवप्रयाग के पास हुआ हादसा कोटीगाड़ के निकट ट्रेकर गिरा, पांच घायल दर्दनाक श्रीनगर/देवप्रयाग । श्रीनगर से देहरादून जा रही जीप देवप्रयाग में तहसील कार्यालय के निकट खाई में जा गिरी। इससे छह यात्रियों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को बेस चिकित्सालय श्रीनगर लाया गया है। मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी को मृतकों के परिजनों और घायलों को राहत राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। ऋषिकेश से उत्तरकाशी जा रहा ट्रेकर कोटीगाड़ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पांच लोग घायल हो गए। उनको नई टिहरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। श्रीनगर से देहरादून जा रही टाटा सूमो संख्या यूए-07-0623 दोपहर डेढ़ बजे देवप्रयाग तहसील के निकट सैकड़ों मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इससे सूमो में सवार श्रीनगर एजेंसी मोहल्ला निवासी आशीष बडोनी (32) पुत्र देवी प्रसाद, श्रीनगर थाना रोड निवासी नरेन्द्र बड़थ्वाल (28) पुत्र देवी हुकुम सिंह बड़थ्वाल, सादीपुर बिजनौर की पार्वती देवी (28) पत्नी चन्द्र सिंह, पार्क रोड देहरादून निवासी अमित धीमान (26) तथा घाट निवासी वाहन चालक हीरा सिंह (37) की मृत्यु हो गयी। एक मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पार्वती देवी के पुत्र विकास (16) तथा रुद्रप्रयाग जिले के मयकोटी निवासी गौरव शर्मा (29) पुत्र स्व. जेपी शर्मा को बेस चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। गौरव शर्मा की हालत नाजुक है। वाहन में कितने यात्री सवार थे इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलते ही लोग घटनास्थल पर पहुंचे। वाहन 300 मीटर गहरी खाई में गिरा था। इसलिए राहत कार्य करना कठिन था। शवों को वहां से निकालने में मुश्किलें आ रही थीं। आपदा प्रबंधन दल ने चार शवों को राफ्ट से निकाल कर देवप्रयाग पहुंचाया। जिस स्थान पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ वहां सड़क बेहद संकरी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि गाड़ी को क्रास करते वक्त वाहन नीचे जा गिरा। अन्य घटना में ऋ षिकेश से उत्तरकाशी जा रहा ट्रेकर संख्या एचआर 56-6708 चंबा से पांच किमी आगे उत्तरकाशी मोटरमार्ग पर कोटीगाड़ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से इसमें सवार पांच लोग घायल हो गए। घायलों को देर सायं जिला अस्पताल नई टिहरी में भर्ती कराया गया। सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। दुर्घटना में घायल लोग झारखंड के निवासी हैं। घायलों में पदमा देवी (45), उर्मिला (50), सुनीता (30), छोटा ठाकुर (60), बाबू लाल (65) शामिल हैं।

Saturday, 28 May 2011

केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल दिल्ली मे तकनीक सहायको की भर्ती अंतिम तिथि

टीईटी में 50 फीसदी से कम अंक वाले भी होंगे शामिल

नैनीताल, : हाईकोर्ट ने विद्यालयी शिक्षा परिषद को स्नातक परीक्षा में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले बीएड डिग्री धारी अभ्यार्थियों को भी अस्थायी रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में सम्मिलित करने के आदेश दिए हैं। याचिका कर्ता बलदेव सिंह, संजय कुमार, नवीन भगत, मनोज सिंह, चन्दन सिंह रावत, देवेन्द्र सिंह रूपल, दिवाकर कांडपाल, निधि अग्रवाल, हेमंत सिंह, पंकज कुमार चौहान व अन्य द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में उन अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है जिनके स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हैं। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि उनके द्वारा एनसीटीसी द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से बीएड की डिग्री हासिल की गयी है। पूर्व में बीएड पाठ्यक्रम के लिए स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों की कोई अनिवार्यता नहीं थी। उन्होंने अदालत से विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर के निर्णय को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे निरस्त करने का आग्रह किया। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विद्यालयी शिक्षा परिषद को स्नातक परीक्षा में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले अभ्यार्थियों को भी अस्थायी रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में सम्मिलित करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

Saturday, 21 May 2011

नियुक्ति के इंतजार में 490 चयनित अनुदेशक

देहरादून -राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए बीते वर्ष आयोजित अनुदेशक भर्ती परीक्षा व साक्षात्कार में चुने गए अनुदेशक नौ माह से नियुक्ति की बाट जोह रहे हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग की उदासीनता से आक्रोशित चयनित अनुदेशकों ने गुरुवार से निरंजनपुर स्थित आइटीआइ में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। गुरुवार को दर्जनों चयनित अनुदेशकों ने निरंजनपुर स्थित आइटीआइ परिसर में धरना शुरू किया। इस मौके पर चयनित अनुदेशक राजकुमार ने बताया कि राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशकों के 490 रिक्त पदों के लिए प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय हल्द्वानी ने बीते वर्ष अगस्त में परीक्षा कराई थी। 27 अगस्त को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। इस बीच कुछ आवेदक उच्च न्यायालय चले गए और नियुक्ति पर रोक लग गई। उच्च न्यायालय ने गत 11 मार्च 2011 को नियुक्ति पर लगी रोक हटाने का आदेश जारी किया। इसके बाद निदेशक प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा ने एक माह में नियुक्ति के निर्देश विभाग को दिए, लेकिन इसके बावजूद अभी तक नियुक्तियां शुरू नहीं हुई। आर्थिक व मानसिक परेशानी से जूझ रहे चयनित अनुदेशक नियुक्ति के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। चयनित अनुदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि इस मामले में दो सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर 17 मई तक नियुक्ति शुरू करने की मांग की गई है। पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया, जिस कारण उन्हें मजबूरन दोबारा धरना शुरू करना पड़ा। जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो उग्र आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा।

Friday, 20 May 2011

समूह ग के तहत आठ हजार पदों पर भर्ती

देहरादून । राज्य के बेरोजगारों के लिए खुशखबरी। चुनावी वर्ष में सरकार ने नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। समूह ग के तहत आठ हजार पदों पर भर्ती होगी। जून के पहले सप्ताह तक इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी होने के आसार हैं। इसके अलावा छह हजार सरकारी कर्मचारियों को भी पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति के लिए कार्मिकों को सेवा शतरे में छूट भी मिलेगी। प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष करीब 25-30 हजार नौकरियां दिए जाने की घोषणा की थी। इसके लिए सभी विभागों से सीधी भर्ती के समूह ग के रिक्त पदों का ब्योरा तलब किया गया था। जल्द भर्ती हो सके, इसके लिए प्राविधिक शिक्षा परिषद को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। इस संबंध में विभागों द्वारा रिक्त पदों की जो सूचना परिषद को दी गई उसके अनुसार करीब 2021 पदों के लिए हाल में विज्ञापन जारी हो चुका है, जबकि अभी हजारों पद रिक्त हैं। इन पर भर्ती की जानी है। इस संबंध में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बुधवार को समूह क, ख ,व ग के रिक्त पदों को लेकर समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि अब तक करीब समूह ग के 5600 पदों और 13,000 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भर्ती हो चुकी है, जबकि समूह ग के 2021 पदों की विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। इसके अतिरिक्त जून के प्रथम सप्ताह तक 2500 पदों के लिए और विज्ञप्ति जारी की जा रही है। सर्वशिक्षा व निर्वाचन विभाग में 2500 भर्ती की जा रही है। इसके अलावा तीन हजार अन्य पदों पर भी भर्ती की जानी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति के द्वारा 12 हजार पदों को भरा जाना है। इनमें छह हजार कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा चुकी है और शेष छह हजार कार्मिकों को आगामी दो सप्ताह में प्रमोशन दे दिया जाएगा। समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियुक्तियों और पदोन्नतियों के संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पदोन्नति के मामले में विभागाध्यक्षों और विभागीय सचिवों को निर्देश दिए कि विभागीय कार्य प्रभावित न हो और सबको प्रमोशन का हक मिले, इसके लिए सेवा अवधि की अर्हता में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है। साथ ही समूह क व ख श्रेणी के रिक्त करीब 1500 पदों के लिए लोक सेवा आयोग को भेज गए प्रस्ताव पर भी जल्द भर्ती कराने को कहा गया है। प्रमुख सचिव, आठ हजार पदों पर होगी भर्ती, साथ ही छह हजार कर्मचारियों को मिलेगी पदोन्नति जून के प्रथम सप्ताह में होगा समूह ग के पदों का विज्ञापन जारी मुख्य सचिव ने दो सप्ताह में पदोन्नतियां करने के दिए निर्देश खुशखबरी

Tuesday, 17 May 2011

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा दिनांक 9.10 जनवरी 2010 सयुक्त अवर /कविष्ठ अभियंता परिक्षा 2005 की लिखित परिक्षा तथा 6,7,8 ,11,12,13,14,15 व 20 अक्टूबर

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा दिनांक 9.10 जनवरी 2010 सयुक्त अवर /कविष्ठ अभियंता परिक्षा 2005 की लिखित परिक्षा तथा 6,7,8 ,11,12,13,14,15 व 20 अक्टूबर 2010 को आयोजित साक्षात्कार परिक्षा के आधार पर श्रेष्ठाक्रम में अंतिम रुप से विभागवार चयनित सूची

उत्तराखंड न्यायिक सेवा-सिविल जज ( जूनियर डिविजन) अंतिम तिथि १३ जून २०११

अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2011 विज्ञप्ति

अब ऑनलाइन हो सकेंगे आयोग में आवेदन

हरिद्वार: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने अपने दसवें स्थापना दिवस पर युवाओं को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की। इस अवसर पर आयोग ने भविष्य में भी युवाओं को अधिक से अधिक सुविधाएं देने की बात कही। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का दसवां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। प्रमुख सचिव सुभाष कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। इस अवसर पर सुभाष कुमार ने कहा कि लोक सेवा आयोग अपने गठन के बाद से ही बेहतरीन काम कर रहा है। उसके बाद सुभाष कुमार ने एलएएन और इंट्रानेट का उद्घाटन किया। अब आवेदक ऑन लाइन आवेदन कर सकेंगे। ऑन लाइन सुविधा के बाद से अब आवेदकों को फार्म भरकर देने की जरूरत नहीं है। बस इंटरनेट पर ही फार्म भरे जा सकेंगे।

Sunday, 15 May 2011

श्रीनगर (गढवाल )की पहली महिला आइएएस

श्रीनगर गढ़वाल,: इस उपलब्धि ने रिजुला को अखिल भारतीय सिविल सेवा में श्रीनगर की पहली महिला आइएएस बना दिया है। वर्ष 2010 की अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 231 वीं रेंक पाने वाली रिजुला ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और पति को दिया है। श्रीनगर निवासी डॉ. कैलाश उनियाल और शिक्षाविद् डॉ. रेखा उनियाल की बड़ी पुत्री रिजुला उनियाल ने अपने परिवार के साथ-साथ श्रीनगर का नाम भी गौरवान्वित किया है। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रिजुला ने कान्वेंट स्कूल श्रीनगर से 10 वीं की परीक्षा और उसके बाद ब्राइटलैंड स्कूल देहरादून से इंटर की परीक्षा 93 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। खास बात यह है कि वह पहली से लेकर 12 वीं तक सभी कक्षाओं में टॉपर भी रही। लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए ऑनर्स अर्थशास्त्र की परीक्षा 70 प्रतिशत से भी अधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने जेएनयू से स्नाकोत्तर व एमफिल किया। नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वर्तमान में वह शिवाजी कॉलेज दिल्ली में अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। रिजुला की माता डॉ. रेखा उनियाल का कहना है कि रिजुला की कठोर मेहनत और लगन ने ही उसे इस मंजिल तक पहुंचाया है। रिजुला ने किसी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि रिजुला के फोन पर जानकारी देते ही उनकी आंखों में आंसू आ गये। रिजुला के पिता कैलाश चंद्र उनियाल, छोटी बहन ऋतुश्री और भाई रिद्धीश भी रिजुला की इस कामयाबी से खासे उत्साहित हैं और उसके श्रीनगर आने के इंतजार में पलकें बिछाये हैं। रिजुला के पिता रेनबो पब्लिक स्कूल के प्रबंधक और माता रेनबो पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या हैं। उन्होंने बताया कि रिजुला गुरुवार देर रात तक देहरादून से श्रीनगर पहुंच जायेगी। एमएससी, एमएड, पीएचडी उपाधिधारी शिक्षाविद् रिजुला की मां डॉ. रेखा उनियाल का कहना है कि पहाड़ की लड़कियों में अपार प्रतिभा है। लड़कियों को अखिल भारतीय स्तर की परीक्षाओं के लिए पूरा मौका भी मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि रिजुला का विवाह दस दिसंबर 2010 को हुआ था। उसके पति अजीत हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। रिजुला की कामयाबी के बारे में सुनकर नगर के लोग दिनभर रिजुला के घर पहुंच उसके माता-पिता को बधाई देते रहे। उसकी छोटी बहन ऋतुश्री भी लेडी इर्विन कॉलेज दिल्ली में बीएससी तृतीय वर्ष में और छोटा भाई रिद्धीश रेनबो पब्लिक स्कूल चौरास में दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है।

Sunday, 8 May 2011

23जुलाई २०१० के अपने फैसले से बदल गयी उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड के बेरोजगार युवको को एक बार फिर सरकार ने धोखा दे दिया सरकार 4 may 2011 को समूह-ग की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट न देकर लाखो युवाओं की उम्मीद पर पानी फेर दिया । इससे पहले २३ जुलाई 2010 को कैबिनेट के महपूर्ण फैसले मे कहा था कि तृतीय श्रेणी के इन 12 हजार पदों को जल्द भरा जाएगा। आयोग के बाहर के साढ़े दस हजार पदों के लिए भर्ती परीक्षा का जिम्मा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद रुड़की को दिया गया है। परिषद की चयन समिति इस कार्य को अंजाम देगी। भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। इस परीक्षा में 40 वर्ष आयु के युवा आवेदन कर सकेंगे। यह व्यवस्था सिर्फ मौजूद वर्ष के लिए लागू होगी। इसके बाद पहले से तय आयु सीमा 35 वर्ष लागू रहेगी। कैबिनेट के २३ जुलाई २०१० को pahar1.blogspot.com पर कैबिनेट के महपूर्ण फैसले की खबर भी प्रकाशित की गयी थी । (कैबिनेट ने लिए महत्वपूर्ण फैसले )-तीन माह में शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया -राज्य लोक सेवा आयोग के दायरे में समूह-ग की भर्ती को रोजगार दफ्तर में पंजीकरण अनिवार्य -आयोग से बाहर के पदों की भर्ती परीक्षा कराएगा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद, आवेदकों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट -तकनीकी शिक्षा महकमे के तहत होंगे आईटीआई और पालीटेक्निक -आईटीआई के आठ नए ट्रेडों को मंजूरी, मृतप्राय: ट्रेडों के पद होंगे कन्वर्ट प्रदेश में समूह-ग की भर्तियों में अब स्थानीय युवाओं को रोजगार के ज्यादा मौके मिलेंगे। इस श्रेणी में राज्य लोक सेवा आयोग के पदों पर भर्ती की पात्रता के लिए अब रोजगार दफ्तर में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। आयोग से बाहर और उसके दायरे के तकरीबन 12 हजार पदों पर तीन माह में भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। भर्ती परीक्षा के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की बढ़ोत्तरी की गई है। साथ ही आईआईटी व पालीटेक्निक अब तकनीकी शिक्षा का हिस्सा होंगे। राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। सचिवालय में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के निर्णयों को मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि सूबे में समूह-ग के रिक्त 12 हजार पदों में तकरीबन 1500 पद आयोग के परिधि में हैं, जबकि 10500 पद इससे बाहर हैं। आयोग से बाहर समूह-ग के पदों पर भर्ती के लिए राज्य के सेवायोजन दफ्तरों में पंजीकरण अनिवार्य है। पड़ोसी राज्य हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। आयोग के पदों पर भर्ती के लिए रोजगार दफ्तर में पंजीकरण जरूरी होगा। यही नहीं समूह-ग के लिए आयोग की लिखित परीक्षा अथवा साक्षात्कार में भी राज्य की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विशिष्ट रीति-रिवाज से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। समूह-ग की भर्ती के नए प्रावधानों को सेवा नियमावली में शामिल किया जाएगा। विभिन्न महकमों में इन पदों के लिए अलग-अलग के बजाए एक नियमावली होगी। तृतीय श्रेणी के इन 12 हजार पदों को जल्द भरा जाएगा। आयोग के बाहर के साढ़े दस हजार पदों के लिए भर्ती परीक्षा का जिम्मा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद रुड़की को दिया गया है। परिषद की चयन समिति इस कार्य को अंजाम देगी। भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। इस परीक्षा में 40 वर्ष आयु के युवा आवेदन कर सकेंगे। यह व्यवस्था सिर्फ मौजूद वर्ष के लिए लागू होगी। इसके बाद पहले से तय आयु सीमा 35 वर्ष लागू रहेगी। समूह-ग की भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियों पर चर्चा के बाद कैबिनेट ने यह निर्णय लिया। अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के गठन पर भी कैबिनेट में चर्चा की गई, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया गया। तकनीकी शिक्षा का कैनवास अब बड़ा हो गया। इसके दायरे में अब आईटीआई भी होंगे। विशेष तौर पर आईटीआई संचालित कर रहा प्रशिक्षण महकमा अब तकनीकी शिक्षा के अधीन होगा। विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पालीटेक्निक भी तकनीकी शिक्षा की एक छतरी के नीचे होंगे। तकनीकी कौशल से जुड़े सर्टिफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री कोर्स की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए तकनीकी शिक्षा का एकीकरण किया गया है। अलबत्ता, एक महकमे के तहत दोनों निदेशालय बदस्तूर काम करेंगे। मुख्य सचिव के मुताबिक नई व्यवस्था में आईटीआई पास करने वालों को पालीटेक्निक में लेटरल इंट्री का मौका देने पर विचार किया जाएगा। आईटीआई में आठ नए कोर्स को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इनमें एडवांस मॉड्यूल आटोमोबाइल सेक्टर, एडवांस मॉड्यूल इलेक्ट्रिकल सेक्टर, एडवांस मॉड्यूल प्लांट प्रोसेसिंग, लाइब्रेरी एंड इनफोरमेशन साइंस, हास्पिटल हाउसकीपिंग, हेयर एंड स्किन केयर, डेंटल टेक्निशियन व फ्रंट आफिस असिस्टेंट शामिल हैं। इंडस्ट्रीज और रोजगार की जरूरत को ध्यान में रखकर नए ट्रेड तैयार किए गए। नए ट्रेड के लिए अलग से अनुदेशकों के नए पद सृजित नहीं किए जाएंगे। मृतप्राय: अथवा जिन ट्रेड की मांग बेहद कम हो गई है, उनके रिक्त पदों को नए में कन्वर्ट किया जाएगा। इससे सरकार पर वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कैबिनेट ने हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय उत्तरांचल के नए नाम हिमगिरी जी विश्वविद्यालय उत्तराखंड को मंजूरी दी। इसके लिए निजी विवि अधिनियम में आंशिक संशोधन होगा। इस मौके पर तकनीकी शिक्षा प्रमुख सचिव राकेश शर्मा, उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव पीसी शर्मा व मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डीके कोटिया भी मौजूद थे। () कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। सचिवालय में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के निर्णयों को मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने ब्रीफ किया तृतीय श्रेणी के इन 12 हजार पदों को जल्द भरा जाएगा। आयोग के बाहर के साढ़े दस हजार पदों के लिए भर्ती परीक्षा का जिम्मा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद रुड़की को दिया गया है। परिषद की चयन समिति इस कार्य को अंजाम देगी। भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। इस परीक्षा में 40 वर्ष आयु के युवा आवेदन कर सकेंगे। यह व्यवस्था सिर्फ मौजूद वर्ष के लिए लागू होगी। इसके बाद पहले से तय आयु सीमा 35 वर्ष लागू रहेगी।

Friday, 6 May 2011

जेई भर्ती परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

नैनीताल, हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग द्वारा लोनिवि में 258 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती के लिए घोषित परीक्षा परिणामों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। बालकृष्ण एवं अन्य द्वारा एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल कर कहा गया था कि लोक सेवा आयोग द्वारा 7 फरवरी 07 को लोनिवि में जूनियर इंजीनियरों के 70 पदों को भरने हेतु विज्ञप्ति जारी की गई थी। लेकिन लोक सेवा आयोग ने 21 अगस्त 10 को 70 पदों के सापेक्ष 258 पदों के परिणाम घोषित कर दिये गये। याचिका कर्ताओं का कहना था कि सरकार द्वारा पूर्व घोषित पदों के लिए ही नियुक्ति की जानी थी, लेकिन सरकार द्वारा विज्ञप्ति में घोषित पदों से अधिक संख्या में भर्ती की गई है। जिस कारण अन्य अभ्यर्थियों को रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया में भाग लेने का मौका नहीं मिला। इधर लोक सेवा आयोग की ओर से अदालत में जवाब दाखिल कर कहा गया कि लोनिवि द्वारा ढांचा संशोधित कर उसमें पदों की संख्या बढ़ाकर 258 कर दी गई और विभाग द्वारा 30 मार्च 07 को संशोधित ढांचे के अनुरूप पदों को भरने संबंधी सूचना आयोग को दी गयी थी। आयोग ने बताया कि उक्त संशोधन विज्ञप्ति निकलने से पूर्व हो चुके थे। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि संशोधित पद विज्ञापन की तिथि से पूर्व के सृजित पद हैं एवं याचिका कर्ता विज्ञापन तिथि तक नियत योग्यता धारित नहीं थे। अदालत ने इस आधार पर याचिका कर्ताओं की याचिका को खारिज कर दिया।

Uttranchal Pre Medical Test – UPMT Application Forms 2011

UPMT 2011 Important Dates : Issue of UPMT 2011 application form 22 February 2011 Last Date of Sale & Submission of Complete UPMT 2011 Application Form 15 May 2011 Date of UPMT Entrance Exam 2011 30 May 2011 ( Monday ) Declaration of UPMT 2011 Result 1st week of June 2011 UPMT 2011 application form can be obtained by either of the following ways 1. By sending DD of Rupee 1,300/- in favour of “UCEE” payable at “Rishikesh“ to the address mentioned against Submission of UPMT Forms. 2. By paying cash of Rupee 1,250/- in person or through representative UPMT From i. Ramesh Book Depot, Moti Bazar, Dehradun, Phone : 0135-2653637. ii. Oasis Infosolutions Pvt. Ltd., 4855 / 24, flat # 104, Near Sanjeevan hospital, Ansari Raoad, Daryaganj, Delhi – 02, Phone : 9811835725.: iii. Offices of the Principal of the above colleges. UPMT 2011 Application Forms are available at following centres : Medical Entrance Exam Question Bank CD Shri Guru Ram Rai Institute of Medical & Health Sciences Post Box No. 80, Patel Nagar, Dehra Dun, 248001 Uttarakhand Phone No : 0135-2728106, 25221077, 9412992800, 9927011243 Website : www.sgrrcollege.com Seema Dental College and Hospital, Rishikesh Phone No : 0135-2452962, 0-9639630803, 0-9568957130, 0-9568957028 Fax : 0135-2453743 Website : www.seemadentalcollege.org Uttranchal Dental & Medical Research Institute, Mazri Grant, Haridwar Road, Dehradun. Mobile : 0135-2113931, 0-9454977244, 0-9651765023,0-9412050618 Website : www.udmri.in The Director, Uttaranchal Ayurvedic College 17, Old Mussoorie Road Rajpur, Dehradun {Uttarakhand} Phone No : 09411778738 Website : www.uac.com The Principal, Himalayiya Ayurvedic Medical College and Hospital, Gram-Fatehpur Tanda, Jeevanwala, Dehradun Phone No : 0135-300859, Email : hamc2006@gmail.com Patanjail Ayurved College Patanjali Yogpeeth, Phase-I Maharshi Dayanand Gram, Delhi - Hardwar National Highway, Near Bahadrabad, Hardwar, Uttarakhand, (India), 249402 Phone No : 01334-240008, 244107, 246737 Fax No : 01334-244805, 240664 Website : www.divyayoga.com Chandola Homoeopathic Medical CoIlege & Hospital, Kicha Road, Rudrapur. Phone No : ( 05944-280071, 09897107000 ) Submission of UPMT 2011 Application Forms : The UPMT 2011 Application Form completed in all respect along with enclosures, should be sent by post to The Secretary, Uttaranchal Council of Entrance Examination, Seema Dental College & Hospital P.O., Pashulok Virbhadra Road, Rishikesh – 249 203 {Uttarakhand}, Phone : 0135-2452962, 0-9639630803, 0-9568957130, 0-9568957028.

उत्तराखंड समूह ‘ग’ सम्मिलित भर्ती परीक्षा- पदो की संख्या 2021

विज्ञापन संख्याः 699 राज्य समूह ‘ग’ भर्ती/01/2011-12 दिनांकः 4 मई 2011 विज्ञापन प्रकाशन की तिथि: मई 04, 2011 आवेदन पत्र स्वीकार किये जाने की अन्तिम तिथि: जून 04, 2011 विस्तृत pahar1.blogspot.com पर भी देखा जा सकता है। में लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर उपयुक्त अभ्यर्थियों का चयन करने हेतु उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद् रुड़की को ‘चयन संस्था’ घोषित किया गया है। अतः उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद्’ द्वारा भर्ती अभियान के ‘प्रथम चरण’ में उत्तराखंड समूह ‘ग’ सम्मिलित भर्ती परीक्षा-2011’’ हेतु परिशिष्ट-1 में उल्लिखित पद जो विभिन्न विभागों से (रोस्टर एवं बैकलाग के पद भी सम्मिलित हैं) प्राप्त हुए हैं, इन पदो ं हेतु अर्ह अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रारूप पर आवेदन पत्र आमंत्रित किये जाते हैं। समान शैक्षिक/तकनीकी अर्हता के पदों के आधार पर गु्रप वर्गीकृत किये गये हैं। अभ्यर्थी द्वारा एक से अधिक गु्रप के लिए आवेदन करने की स्थिति में प्रत्येक गु्रप के लिए अलग-अलग आवेदन पत्र भरना अनिवार्य है। जिसका विवरण अभ्यर्थी द्वारा प्रत्येक आवेदन पत्र के बिन्दु सं0 21 पर अंकित किया जाना अनिवार्य है। गु्रप कोड परिशिष्ट-3 पर है। आवेदन पत्र का प्रारूप परिशिष्ट-6 पर है। इसे परिषद् की वेबसाइट से भी डाऊनलोड किया जा सकता है। इस प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से उपयुक्त अभ्यर्थियों का चयन करने हेतु उत्तराखंड राज्य में अभ्यर्थियों की यथाआवश्यक संख्या के आधार पर विभिन्न जनपदों में लिखित परीक्षा आयोजित की जायेगी, जिसकी सूचना अभ्यर्थियों को समाचार पत्र के माध्यम से दी जायेगी, साथ ही परीक्षा की तिथि, समय, परीक्षा केन्द्र का नाम, अनुक्रमांक, आवेदित गु्रप इत्यादि आवश्यक सूचना परिषद् द्वारा अभ्यर्थी को प्रवेश पत्र के माध्यम से स्पीड पोस्ट द्वारा दी जायेगीः- 1. रिक्तियो ं की संख्याः विभागवार एवं पदवार रिक्तियों की संख्या परिशिष्ट-1 में विवरणानुसार हैं। रिक्तियों की संख्या घट-बढ़ सकती हैं। 2. अनिवार्य/वांछनीय अर्हताः (एक) लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती के किसी पद पर भर्ती हेतु वही अभ्यर्थी पात्र होगा जिसका नाम उŸाराखण्ड राज्य मे ं स्थित किसी सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत होगा। (दो) लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती के किसी पद पर भर्ती हेतु अभ्यर्थी के लिए उŸाराखण्ड राज्य की परम्पराओं, रीतियों एवं बोलियों का ज्ञान तथा प्रदेश में विद्यमान विशिष्ट परिस्थितियों में नियुक्ति के लिए उपयुक्त होना वांछनीय होगा। (कार्मिक अनुभाग-2, उत्तराखण्ड शासन अधिसूचना सं0-1270ध्ग्ग्ग्;2द्धध्2010 दिनांक 02 सितम्बर 2010) (तीन) सेवा में किसी पद के लिए निर्धारित अनिवार्य शैक्षिक/प्राविधिक अर्हताएं परिशिष्ट-2 में विवरणानुसार हैं। (चार) अन्य बातों के समान होने पर सेवा में ऐसे अभ्यर्थी को अधिमान दिया जायेगा जिसने ; ;पद्ध प्रादेशिक सेना में न्यूनतम 02 वर्ष की अवधि तक सेवा की हो, या ;पपद्ध राष्ट्रीय कैडेट कोर का ‘बी’ प्रमाणपत्र प्राप्त किया हो, या ;पपपद्ध जैसा अधिमानी अर्हता किसी पद विशेष के परिप्रेक्ष्य में परिशिष्ट-2 में उल्लिखित किया गया हो। 3. राष्ट्रीयताः सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थीः- (क) भारत का नागरिक हो; (ख) तिब्बती शरणार्थी हो, जो भारत में स्थायी निवास करने के अभिप्राय से पहली जनवरी 1962 के पूर्व भारत आया हो; या होना चाहिए या (ग) भारतीय उद्भव का ऐसा व्यक्ति हो, जिसने भारत में स्थायी निवास करने के लिए अभिप्राय से पाकिस्तान, बर्मा या किसी पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या, युगांडा और यूनाटेड रिपब्लिक आॅफ तन्जानिया (पूर्ववर्ती तांगानिका और जंजीबार) से प्रवर्जन किया होः परन्तु उपर्युक्त श्रेणी (ख) या (ग) के अभ्यर्थी को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जिसके पक्ष में राज्य सरकार द्वारा पात्रता प्रमाण-पत्र जारी किया होः परन्तु यह और कि श्रेणी (ख) के अभ्यर्थी से यह भी अपेक्षा की जायेगी कि वह पुलिस उप महानिरीक्षक, अभिसूचना शाखा, उŸाराखण्ड से पात्रता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लेः परन्तु यह भी कि यदि कोई अभ्यर्थी उपर्युक्त श्रेणी (ग) का हो तो पात्रता का प्रमाण-पत्र एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी नहीं किया जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी को एक वर्ष की अवधि के आगे सेवा में इस शर्त पर रहने दिया जायेगा कि वह भारत की नागरिकता प्राप्त कर ले। टिप्पणीः- ऐसे अभ्यर्थी को जिसके मामले में पात्रता का प्रमाण-पत्र आवश्यक हो किन्तु वह न तो जारी किया गया हो और न देने से इंकार किया गया हो, किसी परीक्षा या साक्षात्कार में सम्मिलित किया जा सकता है और उसे इस शर्त पर अनन्तिम रूप से नियुक्त भी किया जा सकता है कि आवश्यक प्रमाण-पत्र उसके द्वारा प्राप्त कर लिया जाय या उसके पक्ष में जारी कर दिया जाय। 4. चरित्रः सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा होना चाहिए कि वह सरकारी सेवा में सेवायोजन के लिए सभी प्रकार से उपयुक्त हो सके, नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं इस सम्बन्ध में अपना समाधान कर लेगा। टिप्पणीः- संघ सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या संघ सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्व में या नियन्त्रणाधीन किसी निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। 5. वैवाहिक प्रास्थितिः सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए ऐसा पुरूष अभ्यर्थी पात्र नहीं होगा, जिसकी एक से अधिक पत्नियाँ जीवित हो और न ऐसी महिला अभ्यर्थी पात्र होगी, जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो, जिसकी पहले से जीवित पत्नी होः परन्तु राज्यपाल किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकते हैं यदि उसका यह समाधान हो कि ऐसा करने के लिए विशेष कारण विद्यमान हैं। 2

Tuesday, 3 May 2011

प्रदेश की पहली पुलिस प्रशिक्षण अकादमी शुरू

नरेंद्रनगर(टिहरी)।- मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को यहां राज्य की पहली पुलिस प्रशिक्षण अकादमी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस प्रशिक्षण अकादमी का शुरू होना राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अवसर है। यहां पुलिस के कार्मिकों को राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और एकेडमिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो विदेशी सीमाओं से जुड़े प्रदेश में पुलिस को हर चुनौतियों और परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए। सीएम ने अवस्थापना निर्माण के लिए छह करोड़ और साजसज्जा के लिए एक करोड़ देने के साथ ही समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए हर जिले और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अपर पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की घोषणा की। साथ ही 74 उपनिरीक्षकों को निरीक्षक पद पर पदोन्नति देने की भी बात कही। प्रशिक्षण अकादमी में शेष कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडे ने भी इस मौके पर विचार व्यक्त किए।

10 जुलाई को प्रदेश में पहली बार आयोजित होगी टीईटी 15 मई से डाकघरों में मिल सकेंगे परीक्षा फार्म

टीचर बनने का सपना देख रहे बेरोजगार एक बार नहीं बल्कि कई बार अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) दे सकेंगे। इस परीक्षा में पास होने के लिए 60 फीसद अंक पाने जरूरी हैं, लेकिन अपने अंकों में सुधार के लिए अभ्यर्थी कई बार परीक्षा दे सकता है। टीईटी पास करने के बाद परीक्षा दोबारा देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वैसे टीईटी परीक्षा पास करने पास करने वाले टीचर बनने के योग्य माने जाएंगे और उन्हें वरीयता भी दी जाएगी लेकिन टीईटी प्रमाण पत्र पास करने वालों शिक्षक के रूप में नौकरी की गारंटी नहीं होगी। बता दें कि प्रदेश में बच्चों के लिए अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा कानून के लागू होने के बाद शिक्षक बनने के हर इच्छुक अभ्यर्थी के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। टीईटी में वही अभ्यर्थी बैठ सकता है जिसने स्नातक स्तर पर 50 फीसद अंक पाए हों और जो नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन(एनसीटीई) के मुताबिक व्यावसायिक योग्यता रखता हो। अनुसूचित जाति और जनजाति के परीक्षार्थियों के लिए हालांकि स्नातक परीक्षा के अंकों में छूट दी गई है और वह 45 प्रतिशत अंकों के साथ टीईटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वैसे प्रदेश सरकार की आरक्षण नीति के मुताबिक एससी-एसटी, ओबीसी और विकलांगों को अन्य छूट भी दी जा सकती हैं। प्रदेश सरकार ने हालांकि टीईटी में स्नातक परीक्षा के अंकों में छूट के लिए केंद्र से अनुरोध किया था लेकिन केंद्र सरकार के छूट न देने से फिलहाल छूट नहीं मिल पाई है। प्रदेश में 10 जुलाई को पहली बार टीईटी आयोजित हो रही है, जिसे विद्यालयी शिक्षा परिषद आयोजित कर रही है। मिली जानकारी के मुताबिक तीन मई से परीक्षा का आवेदन पत्र विद्यालयी शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध हो जाएगा। 15 मई से टीईटी आवेदन प्रदेश के डाकघरों से मिल सकेंगे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 4 जून होगी जबकि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। टीईटी में दो पेपर होंगे। जिनमें बहु-विकल्पीय सवाल पूछे जाएंगे। पहला पेपर कक्षा एक से पांच के लिए और दूसरा पेपर कक्षा छह से आठ के लिए होगा। परीक्षा में हर सवाल एक अंक का होगा और किसी किस्म की नेगेटिव मार्किग नहीं होगी। इसमें अभ्यर्थी के लिए यह छूट होगी कि वह प्राइमरी टीचर बनना चाहता है तो वह पहला पेपर ही दे सकता है और अगर वह अपर प्राइमरी टीचर बनना चाहता है तो उसे कक्षा छह से आठ का यानी द्वितीय प्रश्नपत्र देना होगा। दोनों परीक्षाएं डेढ़डे ढ़ घंटे अवधि की होंगी। अभ्यर्थी दोनों पेपर भी दे सकता है। प्राइमरी टीचर के लिए 150 अंकों का प्रश्नपत्र होगा जिसमें बाल विकास व शिक्षा शास्त्र के 30, भाषा-1 के 30, भाषा-2 के 30, गणित के 30 और पर्यावरण अध्ययन के 30 सवाल पूछे जाएंगे। अपर प्राइमरी टीचर के लिए बाल विकास व शिक्षा शास्त्र के 30, भाषा-1(अनिवार्य) के 30, भाषा-2(अनिवार्य) के 30 सवाल तो पूछे ही जाएंगे। गणित व विज्ञान शिक्षक बनना चाहने वालों से इन विषयों के 60 सवाल, सामाजिक विज्ञान का शिक्षक बनना चाहने वालों से सामाजिक विज्ञान के 60 सवाल पूछे जाएंगे। भाषा-1 के सवाल शिक्षण की माध्यम भाषा से जुड़े होंगे तो भाषा- 2 के सवाल भाषा के तत्वों आदि से जुड़े होंगे। प्रश्नपत्र द्विभाषी यानी हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध होंगे। एनसीटीई ने यह भी साफ किया है कि प्रदेश सरकार को साल में कम से कम एक बार टीईटी आयोजित करना होगा। टीईटी प्रमाण पत्र की मान्यता की अवधि राज्य सरकार ही निर्धारित करेगी। हालांकि एनसीटीई के मुताबिक यह अधिकतम सात साल हो सकती है।

Saturday, 30 April 2011

हेमवती नंदन विवि को हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

2009-10 का परिणाम घोषित करे नैनीताल। हाईकोर्ट ने ऋषिकेश की कृष्णा सेवा आश्रम सोसाइटी की याचिका पर हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय को बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी एवं बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेट्री का वर्ष 2009-10 का परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है। साथ ही 2010-11 के लिए याची संस्थान को उक्त कोर्स के संचालन की अनुमति प्रदान करने को कहा है। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऋषिकेश के कृष्णा सेवा आश्रम सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 29 मार्च 2010 को गढ़वाल विवि ने एक आदेश पारित कर संस्थान को उपरोक्त कोर्स चलाने की अनुमति नहीं दी। इसका कारण गढ़वाल विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा मिलना बताया गया। याचिका में कहा गया था कि संस्थान 2006 से मान्यता प्राप्त है और वर्ष 2009-10 की परीक्षा हो चुकी है, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किया जा रहा है। पूर्व में हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर परीक्षा परिणामों को न्यायालय के आदेश के अधीन रखा था। आज पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विवि को आदेश दिया कि वह परिणाम घोषित करने के साथ ही 2010-11 के लिए याची संस्थान को कोर्स के संचालन की अनुमति प्रदान करे।

जौनसार बावर का बिस्सू मेला

बिस्सू का त्योहार उत्तराखंड के जौनसार बावर इलाके और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि जौनसार बावर और सिरमौर के सांस्कृतिक महत्व की देश-दुनिया में पहचान है। यह पर्व हर साल 12 से 30 अप्रैल तक मनाया जाता है। इस उत्सव की तैयारी एक महीना पहले से ही होने लगती है। गांववासी अपने मकानों और गोशालाओं की लिपाई के लिए स्थानीय मिट्टी इकट्ठा करने लगते हैं। इस मिट्टी का लेप करने के बाद सफेद मिट्टी (गदिया/कमेड़ा) से पुताई की जाती हैं। बिस्सू के पहले दिन पारंपरिक हथियारों जैसे ढांगरा (फरसा), तलवार और धनुष-बाण को साफ करने की तैयारी की जाती हैं। इस त्योहार की खास विशेषता धनुष-बाण (ठोउड़ा) का प्रदर्शन है, जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहता है। धनुष-बाण खेलने वाले कलाकारों को स्थानीय भाषा में ठोउड़ाय के नाम से पुकराते हैं। इस पर्व में विविध लोकनृत्य का आयोजन होता है और सामूहिक रूप से गीत भी गाए जाते हैं। इन गातों के लय व ताल के साथ गांव का सामूहिक आंगन (साजो आंगण) थिरक उठता है। जिस स्थान पर बिस्सू का त्योहार मनाया जाता हैं, वहां पर गोल समूह बनाकर तांद/हारुल जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक गीत गाए जाते हैं। इस ठोउड़ा खेल में कौरव-पांडवों के समय की परंपरा के आधार पर अस्त्र-शस्त्र व तीर-कमान तैयार करना, उसका अभ्यास करना और योद्धाओं की प्रतिष्ठा को प्रमुखता देना होता है। ठोउड़ा खेलने वाले कलाकार दूसरे कलाकार पर बाण मारते हुए कहते हैं, जैथे लागों ली शाटो तैथे कइड़ी भी फाटों (यानी जहां पर मैं बाण मारता हूं, वहां पत्थर भी फट जाता है)। खेल में भाग लेने वाले कलाकार जो पोशाक धारण करते हैं, उसे जंगेल कहते हैं। इस खेल में सुरक्षा की दृष्टि से पांव में विशेष जूते पहने जाते हैं। इस खेल की एक विशेषता यह भी है कि इसमें हमउम्र कलाकार ही भाग लेते हैं। जहां यह खेल होता है, वहां दुकानें भी सजी रहती हैं। कहीं-कहीं पर बिस्सू के पहले दिन दूर जंगल से बुरांस के फूल लाने की परंपरा है, जिसे अगले दिन देवताओं को चढ़ाया जाता है। इस पर्व की इस इलाके में काफी मान्यता है। हालांकि गांवों से पलायन के कारण युवा पीढ़ी इस पारंपरिक त्योहार को अब उतनी अहमियत नहीं दे रही। इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि जिस कोटा क्वानू (चकराता) के प्रसिद्ध खिलाड़ी नैन सिंह राणा ने इस ठोउड़ा खेल में प्रसिद्धि पाई है, उस गांव में आज कोई युवा इस खेल में भाग लेने को उत्सुक नहीं दिखता। जबकि इस परंपरागत त्योहार को बचाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।

उच्च शिक्षा में ऊंची उड़ान

काशीपुर में सिब्बल ने किया आईआईएम का शिलान्यास काशीपुर। शुक्रवार को आईआईएम काशीपुर का शिलान्यास होते ही राज्य ने उच्च शिक्षा में ऊंची उड़ान भरी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने दावा किया कि आईआईएम के शिलान्यास के साथ ही काशीपुर ने अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में अपना स्थान बना लिया है। कहा कि आईआईएम काशीपुर देश ही नहीं विदेश का इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस बनेगा। यही नहीं किसी अर्द्धशहरी क्षेत्र में स्थापित होने वाला यह देश का पहला आईआईएम है। उन्होंने कहा कि देश में 30 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, आठ आईआईएम, सात एनआईटी, 20 ट्रिपल आईऱ्टी की स्थापना की जाएगी। शुक्रवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ कुंडेश्वरी स्थित एस्कार्ट फार्म की 200 एकड़ भूमि में 800 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाले आईआईएम का शिलान्यास किया। इस मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कपिल सिब्बल ने कहा कि आईआईएम काशीपुर को संचालित करने वाले गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष, सदस्य, निदेशक से लेकर फैकल्टी तक का चयन मेरिट के आधार पर किया गया है।

Thursday, 28 April 2011

क्वालीफाइंग मा‌र्क्स होंगे अब 50 प्रतिशत

हरिद्वार, लोक सेवा आयोग ने युवाओं को सौगात देते हुए पीसीएस-जे की प्री परीक्षा में सफलता के लिए 50 प्रतिशत अंक निर्धारित कर दिए हैं, जबकि एससी और एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा तक पहुंचने के लिए 40 फीसदी अंक लाने होंगे। अब तक अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में सफलता के लिए 60 प्रतिशत अंक लाने होते थे। आयोग को इस संबंध में शासन से निर्देश मिल चुके हैं।उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-जे (ज्यूडिशियरी ) लिखित परीक्षा में सफल होने के लिए सामान्य और ओबीसी श्रेणी के अभ्यर्थियों को अब 50 प्रतिशत अंक लाने होंगे, जबकि अब तक 60 प्रतिशत अंक लाने पर अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाता था। आयोग ने एससी और एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 50 प्रतिशत की जगह अब 40 प्रतिशत अंक निर्धारित कर दिए हैं।

मुख्य परीक्षा के बाद दायर याचिका खारिज

नैनीताल: हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सचिवालय के समीक्षा व सहायक समीक्षा अधिकारी के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती संबंधी याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के अनुसार याचिका मुख्य परीक्षा के बाद दायर की गई। साथ ही लोक सेवा आयोग को परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिए एक माह तक इंतजार करने का आदेश दिया है।फरवरी 2007 में राज्य लोक सेवा आयोग ने सचिवालय के समीक्षा व सहायक समीक्षा अधिकारी के रिक्त पदों के लिए भर्ती को विज्ञप्ति जारी की थी। इन पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा 22 नवंबर 09 को हुई थी और परिणाम 11 मार्च 10 को घोषित किया गया। इसके बाद हुई मुख्य परीक्षा का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ है।

Wednesday, 27 April 2011

यहां हर घर में पैदा होता है एक अफसर

बागेश्वर। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। ये लाइनें खंतोली गांव के उन युवाआं पर सटीक बैठती हैं जिन्होंने किसी भी स्कूल से सात किमी दूर रहते हुए भारत की सरकारी सेवाओं में सबसे ऊंचा मुकाम पाया। गांव छोड़कर सड़कों की तरफ भाग रहे लोगों को आईना दिखाया कि सुविधाओं से प्रतिभा नहीं प्रतिभाएं सुविधाओं को जन्म देती हैं। तमाम सुविधाओं के अभाव में इस गांव के छह लोग केंद्रीय प्रशासनिक सेवा के उच्च पदों तक पहुंचे तो यह किसी आश्चर्य से कम नहीं। सात सौ लोगों के इस गांव में लगभग हर घर से एक अधिकारी निकला है। कुमाऊं में बिजली की रोशनी पहुंचाने वाले पहले इंजीनियर रामचंद्र पंत के गांव में आज भी प्रतिभाओं की कमी नहीं। कांडा-विजयपुर मार्ग से तीन किमी दूर खंतोली गांव में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव उसी तरह है जैसे पहाड़ के और गांवों में है। इन अभावों के बावजूद यह गांव कुछ अलग है। इस गांव में इतनी प्रतिभाएं हैं की अंगुली में नहीं गिनी जा सकतीं। देश का शायद ही कोई सेवा क्षेत्र हो जिसका कोई बड़ा पद खंतोली के हिस्से न आया हो। खंतोली से निकली प्रतिभाओं की बात करें तो इसमें एक आईएएस, एक आईएएस एलाइड, दो आईएफएस और एक आईईएस है। सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती पांच पीसीएस भी हैं और तीन वैज्ञानिक भी। इसमें दो वैज्ञानिक देश के परमाणु केंद्रों में काम कर रहे हैं। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए इस गांव ने एक ब्रिगेडियर, तीन विंग कमांडर और एक कमांडेंट भी दिया है। चिकित्सा और इंजीनियरिंग में भी गांव के युवाओं का बड़ा योगदान है। गांव के पांच युवा डाक्टर और 30 इंजीनियर हैं। कुमाऊं में बिजली पहुंचाने का काम भी इसी गांव के इंजीनियर रामचंद्र पंत के निर्देशन में हुआ। शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में भी खंतोली के नाम बड़ी उपलब्धि है। गांव के आठ लोग महाविद्यालयों में प्रोफेसर हैं तो संगीतज्ञ चंद्रशेखर पंत के नाम पर नैनीताल में संगीत विद्यालय चल रहा है। देश की आजादी में देवी दत्त पंत, नारायण दत्त पंत, हरि दत्त पंत, कीर्ति बल्लभ पंत, पूर्णानंद पंत, चंद्र शेखर पंत, पुरुषोत्तम का नाम भुलाया नहीं जा सकता। सेवानिवृत्त शिक्षक दयाधर पंत बताते हैं कि गांव की सफलता का सबसे बड़ा कारण है लोगों का गांव से जुड़े रहना। वह कहते हैं गांव में अधिकारियों की कोई कमी नहीं लेकिन हर अधिकारी आज भी गांव से जुड़ा है। समय-समय पर गांव आकर यही अधिकारी गांव में शिक्षा ले रहे युवाओं को आज भी ऊर्जा और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री निशंक पर मुकदमा

देहरादून, हरिद्वार में सन 2010 में आयोजित महाकुंभ मेले में षडयंत्र रचकर सरकारी धन की बंदरबाट व साक्ष्य मिटाने के आरोप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिवक्ता जेडी जैन की ओर से सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री, मेला मंत्री और मेला अधिकारी पर दो सौ करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया। मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. उमाकांत पंवार ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है। याचिकाकर्ता जेडी जैन ने यह याचिका बीती 15 अप्रैल को दायर की थी, मगर यह चर्चा में शनिवार शाम को आई। महाकुंभ मेले के समापन के एक वर्ष बाद दायर इस याचिका में आरोप है कि मेले के आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने सरकारी धन के खर्चे की समस्त जिम्मेदारी मेला अधिकारी आनंद वर्धन को दी थी। आरोप है कि मुख्यमंत्री, मेला अधिकारी व मेला मंत्री मदन कौशिक ने आपराधिक षडयंत्र रचकर दो सौ करोड़ रुपये का घोटाला कर सरकारी धन की बंदरबांट की। उधर, एडवोकेट जेडी जैन ने मुकदमा दर्ज कराए जाने की पुष्टि की।

Sunday, 24 April 2011

भ्रष्टाचार का बादशाह है उत्तराखंड

इकोनोमिक टाइम्स के सर्व में यूपी और यूके को करेप्शन में सबसे ज्यादा 8.88 अंक मिले है नई दिल्ली. बिमारु कहे जाने वाले बिहार और नक्सली हिंसा से ग्रस्त झारखंड को पीछे छोड़कर उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड इकोनोमिक टाइम्स के करप्शन इंडेक्स में नम्बर वन बन गये हैं। करप्शन के इस ताज़ का पूरा श्रेय दोनों सूबों के मुख्यमंत्रियों को जाता है। देवभूमि का भी है जहां जंगल कट रहा है, सुखना भूमि घोटानो के तर्ज पर ज़मीन करप्शन से बिक रही है, जहां के जवानों को रोज़गार नहीं मिलता बस देहरादून जाने पर जेल ज़रुर मिल जाती है। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में पानी बिकना और मुख्यमंत्री कविता सुनाते है..पानी और जवानी की..। इकोनोमिक टाइम्स के सर्व में यूपी और यूके को करेप्शन में सबसे ज्यादा 8.88 अंक मिले है उसका स्थान आता है बिहार, झारखंड और राजधानी दिल्ली का..। हांलाकि इसके पड़ोसी पंजाब और हरियाणा में कहीं कम भ्रष्टाचार है। इकोनॉमिक टाइम्स की माने तो खाद्य और राशनिंग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है, उसके बाद नम्बर आता है बिजली और शिक्षा लेकिन खनिज और सड़को पर अच्छा खासा काला धन कमाया जा सकता हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में विस्तार से बताया है कि कैसे प्रभाव, लॉबिंग और डर दिखाकर नीलामी और टेंडरों में काला धन कमाया जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे नोएडा में बाजार की कीमतों से कहीं कम दामों पर ज़मीन मिल जाती है। सरकारी कीमत और बाजारु कीमत के बीच का काला-धन बंटना है सियासी नेताओं और उद्योगपतियों के बीच..। आजकल सस्ती कीमत पर ज़मीन मिलने के मामले मे कुछ शांति भूषण और प्रशांत भूषण की सुर्खियों में हैं। इस गोरखधंधे में जो पिसता है, वो है आम-आमदी। पहले एक किसान के रुप में जिसके खेती की ज़मीन सरकार ने औने-पौने दामों पर ख़रीद ली और वो सड़क पर आ गया। फिर सड़को के नाम पर नए-नए टेंडरों से घोटाले हुऐ और बिल्डिंग के मुखौटे के पीछे बिल्डरों और नेताओं ने पैसा कमाया। इसके बाद भी आम-आदमी भी पिस्ता है जो अपना पसीना बेचकर पैसा जोड़कर किसानों से सस्ती खरीदी ज़मीन को उंची कीमत देकर खरीदने पर मजबूर हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के सर्वे में यूपीए सरकार की हालत भी पतली ही दिखाई देती है, जिसे 77 फीसदी लोग फिक्स या भ्रष्ट मानते हैं। लेकिन आज हालात को लोकपाल बिल बनाने वाली अन्ना की टीम की भी पतली है। यूपी और यूके के सिर भले ही भ्रष्टाचार का ताज़ है लेकिन इस ताज़ में तिनके हमने ही जोड़े हैं, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर..।

जिस ब्लाक में नौकरी वहीं कटेगी जिंदगी

देहरादून। प्राइमरी शिक्षकों की नई भर्ती में शिक्षक पात्रता परीक्षा के साथ ही सरकार ने ब्लाक काडर भी लागू कर दिया है। प्रस्ताव पर मंत्री की मंजूरी मिल चुकी है। अब शासनादेश जारी होना है। विधानसभा में दिए गए आश्वासन के मुताबिक शिक्षा विभाग मई-जून में टीईटी कराने की तैयारी में है। इसका नोटीफिकेशन जल्द जारी कर दिया जाएगा। प्राइमरी शिक्षकों की जुलाई तक नई नियुक्तियां शुरू हो जाएंगी। लेकिन ये नियुक्तियां अब ब्लाक काडर की कहलाएंगी। प्राइमरी के शिक्षक जिस ब्लाक में नियुक्त होंगे, पूरे सेवाकाल में उसी ब्लाक के अंतर्गत आने वाले प्राइमरी स्कूलों में उनकी तैनाती रहेगी। उसके बाहर सामान्य तबादले संभव नहीं होंगे। इस व्यवस्था को आरटीई की नियमावली में भी शामिल किया जा रहा है। निदेशालय की ओर से भेजे गए टीईटी के प्रस्ताव की मंजूरी के साथ ही शिक्षा मंत्री ने ब्लाक काडर के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है। शिक्षा विभाग को इसका जीओ जारी करना है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह बिष्ट ने ब्लाक काडर की पुष्टि की है। उनका मानना है कि इस व्यवस्था से स्कूलों में शिक्षकों की मौजूदगी बनी रहेगी। महकमे पर तबादलों का दबाव कम होगा। नियुक्ति के वक्त ही शिक्षक को पता होगा कि उसे पूरी सेवा में कहां रहना है। सबसे ज्यादा लाभ विद्यार्थियों को होगा। अब स्कूलों में विलेज काडर अथवा ब्लाक काडर का कोई न कोई शिक्षक मौजूद रहेगा। स्कूलों में कभी भी ताले नहीं लटकेंगे। इस व्यवस्था से स्कूलों में शिक्षकों की मौजूदगी बनी रहेगी। महकमे पर तबादलों का दबाव कम होगा। नियुक्ति के वक्त ही शिक्षक को पता होगा कि उसे पूरी सेवा में कहां रहना है। सबसे ज्यादा लाभ विद्यार्थियों को होगा। स्कूलों में विलेज काडर अथवा ब्लाक काडर का कोई न कोई शिक्षक मौजूद रहेगा। स्कूलों में कभी ताले नहीं लटकेंगे। - गोविंद सिंह बिष्ट, शिक्षा मंत्री द ड शिक्षा मंत्री ने की टीईटी कराने की संस्तुति ड

परीक्षा प्रक्रिया ही निरस्त कर दी

राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 का विज्ञापन भी रद्द हरिद्वार। उत्तराखंड लोकसेवा आयोग की ओर से सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 की पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। आयोग के सचिव कुंवर सिंह का कहना है कि सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 का विज्ञापन 20 अप्रैल को निरस्त कर दिया गया। 22 अप्रैल को इसकी सूचना सार्वजनिक की गई। फार्म का मूल्य अभ्यर्थियों को लौटाए जाने के बारे में कोई निर्देश नहीं मिला है। उधर, आवेदन पत्र खरीदने वाले युवाओं का कहना है कि उनका पैसा हजम कर लिया गया है। आवेदन पत्र की बिक्री कर युवाओं की जेब से निकाला गया पैसा कौन लौटाएगा यह तय नहीं है। उत्तराखंड लोकसेवा आयोग की ओर से सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा के लिए 29 मई 2010 को विज्ञापन निकाला गया था। आवेदन पत्रों की बिक्री प्रमुख डाकघरों से शुरू हुई थी लेकिन इसी बीच इन पदों को लोकसेवा आयोग की परिधि से बाहर करने की मांग को लेकर बवाल हो गया। कई स्थानों से मांग उठी कि परीक्षा के लिए राज्य का मूल निवासी होने की शर्त लागू की जाए। 10 दिन बाद सरकार ने आवेदन की बिक्री पर रोक लगा दी। इस बीच उत्तराखंड और दूसरे प्रदेशों के युवा आवेदन पत्र खरीद चुके थे। आयोग की ओर से सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 का विज्ञापन 20 अप्रैल को निरस्त कर दिया गया है। 22 अप्रैल को इसकी सूचना सार्वजनिक की गई। फॉर्म का मूल्य अभ्यर्थियों को लौटाए जाने के बारे में निर्देश नहीं मिले हैं। - कुंवर सिंह, सचिव उत्तराखंड लोक सेवा आयोग

Saturday, 23 April 2011

जीएमवीएन में नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर लगी मुहर

नियुक्तियां रद्द होने के एक माह बाद भी जमे थे पदों पर शासन नहीं दे रहा था स्वीकृति देहरादून = गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) में सवालों के घेरे में आई नियुक्तियों के मामले में शासन ने फैसला सुना दिया है। प्रमुख सचिव पर्यटन राकेश शर्मा ने निदेशक मंडल की बैठक में नियुक्तियों को रद्द करने के बाबत लिए गए फैसले को तत्काल लागू करने के निर्देश प्रबंध निदेशक जीएमवीएन को दिए हैं। इस निर्णय के बाद कर्मचारियों व जीएमवीएन प्रबंधन के बीच बना गतिरोध खत्म हो गया है। जुलाई 2010 में तत्कालीन एमडी पुरुषोत्तम पुरी के कार्यकाल में जीएमवीएन में डीजीएम स्तर व क्षेत्रीय प्रबंधक के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। नियुक्तियां शुरू से ही सवालों के घेरे में थीं। निगम कर्मचारियों सहित विभिन्न संगठनों ने नियुक्तियों में धांधली होने का आरोप लगाते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की थी। इस पर शासन ने मंडलायुक्त को नियुक्तियों में धांधली की जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में नियुक्तियों में धांधली उजागर हुई थी।

आयु सीमा में शिथिलता को सीएम को भेजा पत्र

देहरादून: राज्य लोक सेवा आयोग की परिधि में आने वाली व राज्याधीन सेवाओं में उत्तराखंड के निवासियों को पांच वर्ष की शिथिलता की मांग को लेकर राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने दोबारा मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। जुगरान ने अन्य राज्यों का हवाला देते हुए शीघ्र मामले में कार्यवाही की मांग दोहराई। मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को भेजे पत्र में जुगरान ने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश समेत तमाम राज्य इन सेवाओं में 40 वर्ष आयु को स्वीकारते हैं, जबकि राज्य में अभी भी 35 वर्ष आयु निर्धारित है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के दस वर्ष बीतने के बाद भी आयोग केवल तीन बार पीसीएस परीक्षा करा पाया। ऐसे में राज्य के निवासियों को ज्यादा मौके मुहैया कराने के लिए आयु में शिथिलता दी जानी चाहिए। बीते माह जारी पीसीएस पदों के लिए भी आयु सीमा 35 वर्ष रखी गई है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि युवाओं को लाभ मिल सके। -

बीसी गब्बर सिंह मेला पर्यटन मेला घोषित

शहीद गब्बर सिंह का घर बनेगा राजकीय धरोहर संस्कृति विभाग करेगा शहीद के घर का संरक्षण शहीद के नाम पर होने वाले पर्यटन मेले के लिए निशंक ने पांच लाख रुपये देने का किया ऐलान चम्बा,: मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देवभूमि वीरों की भूमि है जिसमें समय-समय पर बीसी गब्बर सिंह जैसे कई योद्धाओं ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस मौके पर उन्होंने बीसी गब्बर सिंह मेले को पर्यटन मेला घोषित कर प्रतिवर्ष इसके लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। डॉ. निशंक ने मेले के शुभारंभ से पूर्व वीर गब्बर सिंह के स्मारक पर पहुंचकर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गुरुवार दोपहर एक बजे चम्बा पहुंचे मुख्यमंत्री ने मेले का शुभारंभ करते हुए कहा कि विक्टोरिया क्रास विजेता वीर गब्बर सिंह के पैतृक निवास को संस्कृति विभाग के माध्यम से संरक्षित कर उनके जीवनक्रम को पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा ताकि नई पीढ़ी के लोग उनसे प्रेरणा ले सके। इस अवसर पर उन्होंने चम्बा में सैनिक विश्राम गृह खोलने की बात कही। उन्होंने शहीद के गांव मज्यूड़ को शीघ्र सड़क से जोड़ने का आश्र्वासन दिया। मुख्यमंत्री निशंक ने कहा कि उत्तराखंड को 2020 तक आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि वीर गब्बर सिंह के घर को संरक्षित किया जाएगा। यह कार्य संस्कृति विभाग को दिया गया है। चंबा सैनिक विश्राम गृह गब्बर सिंह के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने शहीद के नाम से आयोजित मेले को प्रतिवर्ष पर्यटन मेले के रूप में मनाने के लिए पांच लाख रुपये की धनराशि देने के घोषणा की। इसके अलावा तीन सैनिक विधवाओं की पुत्रियों की शादी के लिए 25-25 हजार रुपये की धनराशि देने का ऐलान भी सीएम ने किया।

Friday, 22 April 2011

पद्मश्री प्रो. डीडी शर्मा को उत्तराखंड भाषा सम्मान

हल्द्वानी: प्रसिद्ध भाषाविद व पद्मश्री प्रो. डीडी शर्मा को उनके शोधपरक ग्रंथों के लिए एक और सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से उत्तराखंड भाषा सम्मान प्रदान किया है। नवाबी रोड निवासी प्रो. डीडी शर्मा को यह सम्मान मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा देहरादून में 16 अप्रैल को दिया गया है। प्रो. शर्मा के अब तक 56 अनुसंधान ग्रंथों, 200 से अधिक अनुसंधान पत्रों का प्रकाशन किया जा चुका है। उत्तराखंड पर ही उनके 28 ग्रंथ प्रकाशित हैं। इसमें 16 हिन्दी और 12 अंग्रेजी विषय पर हैं। उनके द्वारा प्रकाशित कल्चरल हिस्ट्री ऑफ उत्तराखंड एवं हिमालय के खश ग्रंथों की खूब चर्चा हो रही है। इससे पहले प्रो. शर्मा को राष्ट्रपति सम्मान, मिलेनियम सम्मान, वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा युगाब्द सम्मान, ज्ञान कल्याण दातव्य न्यास दिल्ली द्वारा सरस्वती सम्मान, साहित्य शिरोमणी सम्मान, भागीरथी सम्मान, केदार संस्कृति संस्थान का केदार गौरव सम्मान, कुमाऊं गौरव सम्मान समेत तमाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। श्री शर्मा ने कहा कि यह पुरस्कार उनके अथक प्रयासों का ही फल है।

Saturday, 16 April 2011

History will be lost and Ssirane इतिहास में खो जाएंगे घोंटी और सिरांई

नई टिहरी - टिहरी बांध परियोजना में अनेक गांव जलमग्न हुए हैं, जो अपने विस्थापित इलाकों में उसी नाम से बसाये गए। विस्थापित होने वाले कस्बों में सिरांई और घोंटी ऐसे कस्बे रहे हैं जो कई पट्टियों के केन्द्र बिन्दु तो रहे हैं साथ ही यहां पर बड़ी जनसंख्या के भू-भाग के कभी व्यापारिक केन्द्र के रूप में भी जाने जाते थे। टिहरी बांध बनने के बाद न तो सिरांई आस पास के क्षेत्र में बसाया गया और न ही घोंटी।आने वाले समय में इन स्थानों का इतिहास से भी नाम मिट जाएगा। टिहरी बांध की झील बनने से पूर्व की बात करें तो टिहरी जिले के घोंटी और सिरांई नाम आते ही हर व्यक्ति के जेहन में यही दृश्य आता कि उक्त स्थान पर पहुंचने के बाद घोड़े-खच्चरों की ढूंढ शुरू हो जाती जो दर्जनों गांव के लिए हर रोज चलते। घनसाली के पास घोंटी एक ऐसा कस्बा था जिसमें करीबन चार दर्जन से अधिक दुकानें थी। इन दुकानों में वस्तुविनिमय भी होता था। लोग ग्रामीण क्षेत्रों से कृषि उपज यहां के दुकानदारों को बेचते और वहां से अपनी जरूरत का सामान ले जाते। यदि घोंटी की बात की जाए तो यह ढुंगमन्दार, धारमण्डल, कोटी फैगुल और पट्टी खास के करीबन एक लाख लोगों का व्यापारिक केन्द्र था। हर गांव से सुबह दर्जनों खच्चर और घोड़े यहां आते और शहरी क्षेत्रों से आने वाले लोगों का सामान के साथ साथ ग्रामीणों क्षेत्रों की रोजमर्रा की वस्तुएं गांव के लिए ले जाते। सैकड़ों लोगों का व्यवसाय घोड़े खच्चरों पर टिका था। टिहरी बांध में जलमग्न होने के बाद घोंटी अन्यत्र कहीं नहीं बस पाया। झील बन जाने से धारमण्डल और ढुंगमन्दार क्षेत्र के लोगों के लिए घोंटी से ऊपर डूब क्षेत्र से ऊपर कहीं भी आने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है, जिससे नया घोंटी न तो कहीं बस पाया और न ही नये घोंटी के बसाये जाने का कोई शुलभ स्थान ही मिल पाया। रही सही कसर प्रस्तावित घोंटी पुल के निर्माण न होने से निकल गई। यह माना जा रहा था कि घोंटी और पिपोला के बीच पुल निर्माण होने से पुल के दोनों ओर घोंटी बाजार के रूप में एक कस्बा विकसित हो जाएगा, जो ढुंगमंदार व कोटी फैगुल के दर्जनों गांवों का व्यापारिक केन्द्र बन पाएगा। यही स्थिति सिरांई के साथ भी रही है, सिरांई कभी सारजूला, रैका पट्टी का मिलन केन्द्र रहा है। खासकर रैका के एक दर्जन से अधिक गांव के लिए यहीं से सामान के खच्चर लदते और इस पूरी पट्टी का यह मोटरहेड भी था। जहां पर लोग उतरते और आस-पास के अपने गांवों में सामान पहुंचाने के लिए घोड़े-खच्चरों की ढूंढ करते। ग्रामीण क्षेत्र से भी विभिन्न प्रकार कृषि उपजें सहित कई वस्तुओं का यहां पर विनिमय होता। नजदीक बसे टिहरी शहर से भी लोग ग्रामीण उपज को खरीदने को भी यहां आते। सिरांई कई गांवों का व्यापारिक केन्द्र था, जिसमें करीबन पांच दर्जन से अधिक दुकानें स्थापित थी। झील के बीच में आने के कारण सिरांई के डूब क्षेत्र से उपर बसने की कहीं गुजाइश ही नहीं बची। जिससे नया सिरांई आज तक स्थापित नहीं हो पाया है। यहां के व्यापारियों को पुनर्वासित स्थलों पर दुकानें देने की बात पुनर्वास विभाग ने की है लेकिन न तो सिरांई और न ही घोंटी नाम का कोई कस्बा बस पाया। इन कस्बों के स्थापित होने में भले ही सैकड़ों वर्ष लग गए हों लेकिन इतिहास के पन्नों मे अब कुछ वर्षों के बाद लोग इन कस्बों का नाम ही भूल जाएंगे। नहीं बस पाए इन नामों के कस्बे कभी ग्रामीण क्षेत्रों के बड़े व्यापारिक केंद्र थे ये कस्बे

Golden Forest, Government of the land now Significant case to the Supreme Court, High Court reversed the decision

गोल्डन फारेस्ट की भूमि अब सरकार की सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, पलटा हाईकोर्ट का निर्णय हजारों एकड़ बेशकीमती जमीन पर थी भ्रष्ट अफसरों व भू-माफिया की नजर राष्ट्रीय सहारा ने उठाया था जमीन खुर्द- बुर्द करने का मामला देहरादून - सुप्रीम कोर्ट ने गोल्डन फारेस्ट जमीन के मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है। उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2005 में दिए गए एक फैसले को खारिज कर दिया है। इस फैसले में हाई कोर्ट ने बेशकीमती जमीन पर गोल्डन फारेस्ट, सवरेदय रिट्रीट व अन्य कंपनियों का मालिकाना हक दे दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन पर राज्य सरकार का हक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से इस केस की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता रचना श्रीवास्तव ने इस फैसले की पुष्टि की है। टेलीफोन पर उन्होंने बताया कि इस फैसले से उत्तराखंड राज्य को बहुत फायदा होगा। इस फैसले से भू-माफिया व भ्रष्ट अफसरों को करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उत्तराखंड सरकार बनाम गोल्डन फारेस्ट, सवरेदय रिट्रीट व अन्य कंपनियों के मामले में फैसला सुनाया गया। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व अशोक गांगुली की बेंच ने इस फैसले में हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2005 में गोल्डन फारेस्ट और सवरेदय रिट्रीट के पक्ष में दिए गए फैसले को खारिज कर दिया है। केस की पैरवी कर रही अधिवक्ता रचना ने बताया कि पूरे मामले को मुख्य राजस्व आयुक्त को रिमांड कर दिया गया है, ताकि कई स्थानों की जमीन पर कब्जे लेने के लिए कार्रवाई की जा सके। इस फैसले से भू- माफिया की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। भू-माफिया ने शीशमबाड़ा स्थित इस बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने के लिए बड़े स्तर से प्रयास किए थे, लेकिन राष्ट्रीय सहारा ने समय रहते इस मामले का भांडा फोड़ दिया था। (शेष पेज 15) गोल्डन फारेस्ट.. भू-माफिया ने 2006 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी राशिद अली से फर्जी तरीके से इस जमीन का परवाना जारी कराया था और एक बार फिर कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखने के बाद भी कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इसी फर्जी परवाने के आधार पर परवाना अमल दरामद करने का कुत्सित प्रयास किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद इसी मकसद से वहां तैनात किए गए तहसीलदार व एसडीएम ने भी परवाना चढ़ाने में असमर्थता जताने से यह बेशकीमती जमीन भू- माफिया के हाथ में जाने से बच गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिसम्बर 2010 में ही फैसला सुरक्षित कर लिया था। सरकार बनाम सवरेदय रिट्रीट के बीच हाईकोर्ट में वाद संख्या 34/96-97 चला था। दिसम्बर 2005 में राज्य सरकार यह मुकदमा हार ग थी। इससे बाद राज्य सरकार ने 2006 में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिए जाने के बाद भी इस जमीन का परवाने को चढ़ाने की कोशिश हुई। तत्कालीन एसडीएम विकासनगर झरना कमठान व तहसीलदार शालिनी नेगी हटा दिया गया था। रजिस्ट्रार कानूनगो द्वारा मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण परवाना चढ़ाने में असमर्थता जताने पर इन दोनों अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। जबकि इस मामले में डीजीसी ने कानूनी अड़चन न होने की बात कही थी।मामला खुलने के बाद सचिव राजस्व राकेश कुमार ने जिलाधिकारी से इस मामले की फाइल भी तलब की थी और जांच चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बहुत बड़ी राहत मिली है। देहरादून में ही सरकारी उपयोग के लिए जमीनों की बहुत अधिक आवश्यकता होने के कारण जिला प्रशासन सरकारी जमीनों का चिह्नीकरण कर रहा है।

Friday, 8 April 2011

शास्त्र की मर्यादाओं में ढलकर रस की वर्षा करते हैं लोकगीत

ग्ततुक नी लगा उदेख, घुनन मुनई नि टेक (सोरठ) ग्चम चमकि घाम डांड्यूं मा (मिश्र जोगकौंश) ग्सुरमा स्याली कलौ टीपि ल्यादी (मिश्र गारा) ग्दैणा हूयां खोली का गणेशा, दैणा हूयां पंचनाम द्यवतौं (दुर्गा) ग्कैला बाजी मुरूली हे बैणा..(धानी) ग्मेरी उनाल्या माणी लौ बिजी जादी (भैरवी) ग्ग्वीराल फूल फुलगिना, डांड्यूं बुरांश फुलगिना (पहाड़ी) लोकगायक स्व. मोहन उप्रेती का कालजयी गीत बेडू पाको बारामासा, नारैणा काफल पाको चैता मेरी छैला इसका प्रमाण है। राग दुर्गा में गाया गया यह गीत आज पूरी दुनिया में हृदयग्राही बन गया। रागों की उत्पत्ति लोक से मानी गई है, फिर भी लोक में स्वच्छंदता है। -लोकगीत कानों में उसी तरह रस घोलते हैं, जैसे होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली चीनी की बारीक गोलियां मुंह में मिठास। इन गोलियों में मदर टिंचर की चार बूंदें मिलते ही यह साधारण से असाधारण बन जाती हैं। ठीक इसी तरह लोकगीतों में भी राग-रागनियों का समावेश होने पर फिजा में सुरों की महताबी रोशनी-सी लहरा उठती है। लोकगीत तो पहाड़ी नदी की तरह हैं, जहां गए वहीं के रंग में ढल गए, लेकिन जब उन्हें शास्त्र की मर्यादाओं में ढाला गया तो रस की वर्षा करने लगे। लोकगायक स्व. मोहन उप्रेती का कालजयी गीत बेडू पाको बारामासा, नारैणा काफल पाको चैता मेरी छैला इसका प्रमाण है। राग दुर्गा में गाया गया यह गीत आज पूरी दुनिया में हृदयग्राही बन गया। रागों की उत्पत्ति लोक से मानी गई है, फिर भी लोक में स्वच्छंदता है। लोकगीत उस अल्हड़ नवयौवना की तरह हैं, जो अपने सौंदर्य के प्रति बेपरवाह है। वह कंदराओं में फ्यूंली की तरह महकते हैं, आंगन में गौरेया की तरह चहकते हैं, लेकिन मिट्टी से जुदा नहीं हो पाते। जब यही गीत षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद सुरों में गूंजते हैं तो मिट्टी की महक पूरी दुनिया में फैल जाती है। देवभूमि में गाए जाने वाले थडि़या, चौंफला, बाजूबंद, झुमैला, झोड़ा, चांचरी, न्योली, बारामासा, चौमासा, छपेली, छोपती आदि लोकगीतों में मिश्र गारा, पहाड़ी, भीम पलासी, मदमाद सारंग, मिश्र मदमाद सारंग, मिश्र धानी, भैरवी, मिश्र मालकौंश, मिश्र जोग कौंश, मालगुंजी, भूपाली, सोरठ आदि रागों का प्रयोग बहुतायत में देखने को मिलता है। यही वजह है इनकी मधुर सुरलहरियां कानों में पड़ते ही हृदय के तार झंकृत होने लगते हैं। कुछ लोकगीत ऐसे भी हैं, जो विलंबित लय और द्रुत लय में अलग-अलग अनुभूति कराते हैं।

Wednesday, 6 April 2011

विकलांगों के लिए आरक्षित पदों पर होगी अब नियुक्ति

2130 पद आरक्षित हैं सरकारी सेवाओं में विकलांगों के लिए विभिन्न श्रेणियों के 913 पद ही भरे गए हैं कुल आरक्षित पदों में से बाकी 1217 हैं खाली विकलांगों के लिए आरक्षित पदों को खाली नहीं रख सकेंगे महकमे देनी ही होगी अब नियुक्ति देहरादून। कोई भी महकमा अब विकलांगों को आरक्षित तीन प्रतिशत पदों को खाली नहीं रख सकेगा। पदों का चिह्नांकन होने के बाद इन पदों पर विकलांग अभ्यर्थियों को नियुक्ति देनी ही होगी। अभी तक पात्र अभ्यर्थी न मिलने की बात कहकर विभाग इन्हें खाली छोड़ दिया करते थे। इससे बैकलाग काफी बढ़ गया है। सरकारी सेवाओं में विकलांगों के लिए विभिन्न श्रेणियों के 2130 पद आरक्षित हैं। इनमें से कुल 913 पद ही भरे गए हैं। बाकी 1217 खाली हैं। विभागों का तर्क है कि इन पदों के लिए पात्र अभ्यर्थी नहीं मिल सके। इन दिक्कतों को देखते हुए ही सरकार ने विकलांगों के लिए आरक्षित पदों का चिह्नांकन करवाया है। किस पद पर किस तरह के विकलांग अभ्यर्थी भर्ती किए जा सकते हैं, इसका कार्य पूरा कर लिया गया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी महकमों से विकलांगों के लिए आरक्षित तीन प्रतिशत पदों को भरने का अनुरोध किया गया है। प्रदेश में लोक सेवाओं में दृष्टिहीनता या कम दृष्टि, श्रवण ह्रास और चलन क्रिया संबंधी नि:शक्तता या प्रमस्तिष्कीय अंघात वाले व्यक्तियों के लिए क्रमश: एक-एक प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है। सचिव एवं आयुक्त समाज कल्याण विभाग एमएच खान द्वारा जारी आदेश में सभी विभागों से विकलांगजनों के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है। ड् ड् आयोग की सेवाओं में विकलांगों को तीन प्रतिशत आरक्षण द्

विशिष्ट बीटीसी भर्ती विज्ञप्ति इसी महीने

शिक्षकों के 2200 पद विशिष्ट बीटीसी के लिए आरक्षित टीईटी के माध्यम से होगी भर्ती, मई में टीईटी की योजना सरकार से मिले आश्वासन पर काम शुरू देहरादून। बीएड-बीपीएड प्रशिक्षितों को सरकार से मिले आश्वासन पर काम शुरू हो गया है। विद्यालयी शिक्षा विभाग ने विशिष्ट बीटीसी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी महीने भर्ती की विज्ञप्ति जारी हो जाएगी। टीईटी के माध्यम से ये भर्तियां होंगी। मई में टीईटी की योजना है। विशिष्ट बीटीसी भर्ती का यह अंतिम मौका होगा। केंद्र ने इस साल 31 दिसंबर तक ही विशिष्ट बीटीसी भर्ती की छूट दे रखी है। बीए-बीएस के साथ बीएड योग्यताधारियों के लिए मई में टीईटी का फैसला हुआ है। इसके बाद बीएड की वर्षवार मेरिट के आधार पर जुलाई तक नियुक्ति कर छह महीने की ट्रेनिंग पर भेज दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने विशिष्ट बीटीसी के लिए फिलवक्त 2200 पद आरक्षित कर रखे हैं। आगे से विशिष्ट बीटीसी खत्म हो जाएगी। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्राइमरी शिक्षक की भर्ती में इंटरमीडिएट मुख्य शैक्षिक अर्हता होगी और शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। सचिव विद्यालयी शिक्षा, मनीषा पवार का कहना है कि टीईटी की प्रक्रिया के लिए सोमवार को मंजूरी दे दी गई है। अब टीईटी कराने वाली एजेंसी उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद को अपनी व्यवस्थाएं बनाकर तारीख की घोषणा करनी है। उन्होंने कहा कि टीईटी में एनसीटीई के निर्धारित मानकों को पूरा करने वाला कोई भी अभ्यर्थी शामिल हो सकता है।

Tuesday, 5 April 2011

..जहां छतरी में विदा होती है दुल्हन

युवाओं के पलायन व कहारों की कमी के कारण निकाला विकल्प चम्बा। गढ़वाल में परंपरागत रूप से जब दुल्हन की विदाई होती है तो उसे पालकी में बिठाकर विदा किया जाता है। पालकी को कहार उठाकर ले जाते हैं, लेकिन चंबा का एक गांव ऐसा है जहां दुल्हन को सजी-धजी छतरी के नीचे विदा होती है। धारकोट गांव में यह परंपरा सत्तर के दशक में शुरू हुई। इस परंपरा की शुरूआत के लिए भी पलायन को ही जिम्मेदार है। कारण, अब गांवों में डोली ले जाने वाले कहार मिलते ही नहीं हैं। विकासखंड चम्बा के धारकोट गांव कुछ ऐसी ही अलग पहचान के लिए जाना जाता है। यहां शादी में जब दूल्हा-दुल्हन अपने ससुराल जाते हैं तो वह डोली या पालकी में नहीं, बल्कि सजी-धजी छतरी में विदाई लेते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सन 70 के दशक में जब यातायात की सुविधाएं नहीं होती थी और गांव से बारात मीलों पैदल चलकर दूसरे गांव जाती थी तो डोली उठाने वाले कहारों की संख्या कम थी और कहारों को डोली ले जाने के एवज में रुपया नहीं अनाज दिया जाता था। इस कारण अधिकतर लोगों ने इस काम को छोड़ दिया। कारण गांवों से युवाओं का पलायन होना भी है। इस समस्या से निजात पाने के लिए गांव के बुजुगरे ने इसका विकल्प छतरी को बनाया। इसमें न तो किसी कहार की आवश्यकता होती है और न ही किसी शारीरिक परिश्रम की। पहली बार महिलाओं व युवतियों ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन फिर धीरे-धीरे समझने लगे और इस तरह की परम्परा कायम होने लगी। धारकोट गांव की कविता बताती है कि वह अपनी शादी में छतरी ओढ़कर आई थी। हालांकि उस समय उसे काफी बुरा लगा लेकिन अब यह परम्परा बन चुकी है। गांव के एसएस तोपवाल का कहना है कि उन्हें खुशी भी होती है कि इस तरह की परम्परा से गांव को एक अलग पहचान मिली है। गांव के लोगों का कहना है कि कई बार दूसरे गांववालों ने भी बिना डोली के बारात लाने पर लड़की को विदा करने से मना किया, लेकिन अब सभी इस परम्परा का निर्वहन करने लगे हैं। गांव की लड़कियां भी खुश है कि इस तरह की परम्परा केवल उनके गांव में ही है।

82 हजार युवाओं को मिल सकता है रोजगार

सरकार चाहे तो बेरोजगारों की हो सकती है बल्ले-बल्ले ताजा आंकड़ों में हुआ खुलासा, कई महकमों में रिक्त हैं 82 हजार पद कई विभागों में तो 50 प्रतिशत से भी अधिक पद हैं खाली प्रदेश में विभिन्न सरकारी महकमों में करीब 82,000 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें राजकीय व सहायतित विभागों सहित निगम भी शामिल हैं। सरकार चाहे तो इन पदों में भर्ती कर बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मुहैया करा सकती है। इससे जहां कार्मिकों की कमी से जूझ रहे विभागों को राहत मिलेगी, वहीं विकास की गति को नया आयाम मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश में लाखों की संख्या में युवा रोजगार की तलाश में घूम रहे हैं। इसके लिए वह प्रदेश से भी पलायन कर रहे हैं। कार्मिकों की कमी का बहाना बना कर विभाग विकास कायरे में लापरवाही बरत रहे हैं। आलम यह है कि कई विभागों में 50 प्रतिशत से भी अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 120 राजकीय विभागों में कुल 246299 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 178268 पद पर कार्मिक हैं, जबकि 68031 पद रिक्त चल रहे हैं। इसी प्रकार करीब 30 ऐसी संस्थाएं व बोर्ड जो कि राज्य सरकार की सहायतित हैं, इनमें कुल 19,464 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 13,425 पद ही भरे हैं, शेष 6039 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रदेश के 24 निगमों में कुल 32,544 पद स्वीकृत हैं। इन निगमों में 25287 पद ही भरे हैं, शेष 7257 पद इनमें भी रिक्त चल रहे हैं। इस प्रकार प्रदेश में विभिन्न महकमों में कुल 81327 पद रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त करीब 500 पद ऐसे हैं जो उत्तरप्रदेश के विकल्पधारियों से भरे हुए हैं। यदि इन सभी को वापस उत्तर प्रदेश भेज दिया जाए तो इन पदों पर भी प्रदेश के बेरोजगारों को भर्ती किया जा सकता है। विगत दिनों सरकार ने करीब 50 हजार सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। बावजूद इसके इसमें अभी उसे सफलता हासिल नहीं हो सकी है। सरकार की मंशा यदि साफ रही तो ताजा आंकड़ों से उसके समक्ष और अतिरिक्त सरकारी रोजगार उपलब्ध कराने के अवसर उपलब्ध हो गए हैं। कई महकमें ऐसे हैं जहां कार्मिकों की भर्ती करना अतिआवश्यक है। शासन की बात करे, जहां से पूरे प्रदेश का संचालन होता है। वह भी कार्मिकों की कमी से जूझ रहा है। सचिवालय में कुल 1664 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 829 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रदेश को राजस्व उपलब्ध कराने वाला वाणिज्य कर विभाग में कुल 1891 पदों के सापेक्ष 1090 पद रिक्त चल रहे हैं। कोषागार निदेशालय में कुल 49 पद स्वीकृत है जिसमें मात्र 15 पद भरे हैं। प्रदेश की योजना का जिम्मा जिस योजना विभाग के पास है उसमें 101 पद के सापेक्ष 80 पद रिक्त चल रहे हैं। पुलिस विभाग में 4054 पद रिक्त चल रहे हैं। कारगार में कुल 704 पदों के सापेक्ष 262 पद रिक्त चल रहे हैं। यही हाल विद्यालयी शिक्षा का है। इसमें कुल 86642 पदों के सापेक्ष 18,737 पद रिक्त चल रहे हैं। उच्च शिक्षा में 2585 पदों के सापेक्ष 1201 पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग में 13870 पदों के सापेक्ष 4324 पद रिक्त हैं। होम्योपैथी विभाग में 417 पदों के सापेक्ष 187 पद रिक्त चल रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा में 619 पद के सापेक्ष 422 पद रिक्त है।, आयुव्रेदिक एवं यूनानी सेवाओं में 3138 पदों के विपरीत 893 पद रिक्त हैं। यही हाल परिवार कल्याण का है, कुल 3777 पदों के सापेक्ष 1115 पद खाली हैं। महिला सशक्तिकरण में 34065 पद के सापेक्ष 14460 पद रिक्त हैं। यही हाल अन्य विभागों का भी है।