Thursday, 15 September 2011

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University I. TEACHING POSTS II. ACADEMIC POSTS II. NON- TEACHING POSTS Office on or before 10.10.2011.

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University
 I. TEACHING  POSTS
 II. ACADEMIC POSTS
II. NON- TEACHING POSTS  Office on or before 10.10.2011.




स्व. बहुगुणा की विरासत खतरे में

बुधाणी: स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा के बुधाणी स्थित पैतृक आवास को संग्रहालय में तब्दील करने की योजना 2006 से अब तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है।

Wednesday, 14 September 2011

हिंदी की आवाज बनी पहाड़ की नारी

हल्द्वानी ,कामकाजी छवि से इतर पहाड़ की नारी हिंदी के माथे की बिंदी बनती जा रही है। उत्तराखंड की आधी दुनिया की कुछ प्रतिनिधि विदेशों में हिंदी की अलख जगा रही हैं तो कुछ अहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी की आवाज बन गई हैं।

निजाम बदलते ही बदल गए लोक गायक नेगी के सुर ‘अब कनगै खैल्यो’

 यह जनरल की छवि ही है  कि उस गायक ने जिसके  स्वर राज्य की सत्ता को हिला देते हो वह फिर  नौछमी नारैण.. शीषर्क से बने इस गीत या अब कतिगा खैल्यो’ हो लेकिन  सत्ता परिवर्तन के बाद नेगी ने ‘अब कनगै खैल्यो’ गाकर एक तरह से जनरल की  ईमानदार छवि की अपने तीन स्वर मे बता दिया ,
प्रख्यात गढ़वाली लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के कंठ से निकली तीन शब्दों की एक रचना इसका ताजा अहसास है। ‘अब कनगै खैल्यो’ यानि ‘अब कैसे खाओगे’ गाने लगे हैं। उत्तराखंड के लोक का मर्म गहराई से समझने वाले नरेन्द्र सिंह नेगी की जुबान से ये शब्द बरबस ही निकल पड़े हैं

जनरल की नई टीम उत्तराखंड की पिंच पर

प्रकाश पंत, त्रिवेंद्र और भौर्याल का कद बढ़ा निशंक के करीबी मंत्रियों का भी रखा ख्याल सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभागों का हुआ गठन

Tuesday, 13 September 2011

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University,I. TEACHING POSTS II. ACADEMIC POSTS II. NON- TEACHING POSTS Office on or before 10.10.2011.

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University
 I. TEACHING  POSTS
 II. ACADEMIC POSTS
II. NON- TEACHING POSTS  Office on or before 10.10.2011.




डोली नहीं घोड़ी पर बैठ विदा होती है दुल्हन

चमोली के दशोली क्षेत्र में डोली नहीं घोड़ी पर बैठ विदा होती है दुल्हन
गोपेश्र्वर ---शादी-ब्याह की बात करें तो घोड़ी पर सवार दूल्हे की तस्वीर आंखों में तैरने लगती है। लेकिन उत्तराखंड के सीमांत चमोली जिले के दशोली क्षेत्र के दर्जन भर गांवों में इसका अलग ही रंग है। यहां दुल्हन डोली में नहीं, बल्कि घोड़ी पर बैठकर विदा होती है।

मातृशक्ति के हौसले ने लिखी नई कहानी

कर्णप्रयाग। -वन माफिया के सामने लाचार दिखने वाले निजाम के लिए पहाड़ की मातृशक्ति ने एक मिसाल कायम की है।कर्णप्रयाग के गांव में वन माफिया के हौसले पस्त करते हुए विकसित कर दिया हरा-भरा मिश्रित वन ,अन्य कुरीतियों पर भी कसी लगाम

Sunday, 11 September 2011

चूक गए सफलता के अचूक मंत्र

( विजय त्रिपाठी)
भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा की पूर्व सन्ध्या पर हिंदू संस्कृति के चिंतकों-लेखकों में शुमार डॉ. (कांग्रेस से क्षमा समेत) रमेश पोखरियाल निशंक

(ब्रेकिंग न्यूज़ ) निशंक की छुट्टी, खंडूरी फिर संभालेंगे उत्तराखंड की कमान

देहरादून।। बीजेपी हाईकमान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की छुट्टी कर दी है। करीब सवा दो साल बाद बी.सी. खंडूरी एक बार फिर उत्तराखंड की कमान संभालेंगे।

Recruitments. Uttarakhand Police Constable Vacancy for Sports Man, 2011- Last Date 30-9-11


UAPMT counselling उत्तराखंड आयुष प्री-मेडिकल काउंसलिंग 15.9.11 और 16,9,11

Friday, 9 September 2011

ये आरोप हैं पोखरियाल पर


निशंक सराकर पर उत्तराखंड में एक नहीं कई घोटालों का आरोप है। ऋषिकेश में चार सौ करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद राज्य की निशंक सरकार घेरे में आ गई। सरकार ने हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच स्टैडिया इंडस्ट्री के भू-उपयोग को बदल दिया।

आउटसोर्स शिक्षकों की तैनाती अटकी

शिकायतों के बाद नियुक्ति प्रकि्रया रुकी

(ब्रेकिंग न्यूज़)उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निशंक देंगे इस्तीफा!

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक संभवत:10 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा देंगे। उनकी पार्टी भाजपा ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा है। संभावना जताई जा रही है कि वीसी खंडूरी को CM बनाया जाएगा।

प्रवक्ता तैनाती पर सीएम की मुहर, एलटी शिक्षकों की जल्द तैनाती के भी दिए निदेश

Thursday, 8 September 2011

राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी कैसे -हाईकोर्ट

देहरादून। घायल और जेल गए राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी दिए जाने के मामले पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने अपनी टिह्रश्वपणी में इसे आम लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन भी माना है। साथ ही, मु य सचिव, प्रमुख सचिव (गृह),प्रमुख सचिव (कार्मिक) के माध्यम से राज्य सरकार, सभी

Monday, 5 September 2011

group ’C‘ examination second phase date 25 septembet 2011

समुह ग की दितीय फेस की,
GROUP - 3
,GROUP- 15
GROUP -12
GROUP -16
परीक्षा 25 सिंतबर 2011 को होगी इसके लिए सेंटर देहरादनू, श्रीनगर(ग),काशीपुर ,अल्मोडा को परीक्षा का सेंटर बनाया गया है प्रवेश पत्र २० तारीख तक न पहुचने पर आप
GROUP-C RECRUITMENT ADMIT CARD - 2011
से डाउनलोड कर सकते है

group c exam center -कुमाऊं और गढ़वाल में बनेंगे दो-दो सेंटर , पांच हजार से ज्यादा अयर्थी पर सभी जिलों में परीक्षा केंद्र,

देहरादून। -समूह ग परीक्षार्थियों के लिए राहत की खबर है।कुमाऊं और गढ़वाल में बनेंगे दो-दो सेंटर , पांच हजार से ज्यादा अयर्थी पर सभी जिलों में परीक्षा केंद्र, परीक्षार्थियों के लिए कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों मे दो-दो जिलों में तत्काल प्रभाव से परीक्षा केंद्र बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। किसी ग्रुप में अयर्थियों की संख्या पांच हजार से ज्यादा होने पर सभी जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।

group ’C‘ examination first phase held समूह ’ग‘ के पहले चरण की परीक्षा संपन्न

परीक्षा सेंटर खोजने में अभ्यर्थियों को करनी पड़ी खासी मशक्कत, प्रदेशभर के 6000 अभ्यर्थी पहुंचे दून
देहरादून - समूह ‘ग’ के पहले चरण की परीक्षा रविवार को देहरादून में सम्पन्न हुई। राजधानी में 10 केंद्रों में आयोजित परीक्षा में करीब 6000 अभ्यर्थी शामिल हुए। अधिकांश परीक्षा केंद्र शहर से बाहर होने के कारण अभ्यर्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई अभ्यर्थी तो अंतिम समय तक परीक्षा केंद्र ढूंढते रहे। वहीं, उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से अभ्यर्थियों व अभिभावकों की सुविधा के लिए कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रविवार को समूह ‘ग’ में ग्रुप पांच व आठ की परीक्षा देने के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों से तमाम अभ्यर्थी दून पहुंचे। चयन परीक्षा के लिए राजधानी में अल्पाइन इंस्टीट्यूट, पित्थूवाला व सिद्धोवाला पालीटेक्निक, निम्बस एकेडमी, इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नोलॉजी, राजकीय इंटर कालेज मेहूंवाला व पटेलनगर में 10 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। सभी केंद्रों में पहली पाली की परीक्षा पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होकर दोपहर एक बजे तक चली, जबकि दूसरी पाली की परीक्षा अपराह्न तीन से सायं पांच बजे तक चली। केंद्र के निकट बैठने की कोई व्यवस्था न होने से परीक्षा के दौरान अभिभावकों को केंद्रों के बाहर ही घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा। परीक्षा के दौरान परिषद के अधिकारियों ने केंद्रों में पहुंच कर स्थिति का जायजा भी लिया। परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकांश अभ्यर्थियों ने महज दून में ही केंद्र बनाने पर नाराजगी जताई। कई अभ्यर्थियों का कहना था कि जगह-जगह मार्ग बंद होने के कारण उन्हें दो दिन पहले ही घर से निकलना पड़ा, ताकि वह परीक्षा में शामिल हो सकें। इससे पूर्व रविवार की सुबह प्रदेश के विभिन्न स्थानों से दून पहुंचे अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों की तलाश के लिए इधर-उधर भटकते रहे। कई अभ्यर्थियों को केंद्र तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि अधिकांश परीक्षा केंद्र शहर से बाहर थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था करनी चाहिए थी। उक्त मागरे पर एकाएक यात्रियों का भार पड़ने से वाहन चालक मनमाना किराया वसूलने से भी बाज नहीं आये। इसके अलावा कई अभ्यर्थियों को इंटरनेट से प्रवेश पत्र डाउन लोड करने के लिए साइबर कैफे की तलाश में पसीना बहाना पड़ा, क्योंकि रविवार को अवकाश होने के कारण अधिकांश साइबर कैफे बंद थे।

Friday, 2 September 2011

उत्तराखंड बोर्ड ने जारी किए सिविल न्यायालय लिपिकीय वर्गीय सेवा परीक्षा के गलत उत्तर- The Board has issued the civil court clerical class service examination wrong answers-

उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिकीय वर्गीय सेवा परीक्षा 28 अगस्त 2011 आयोजित की गई। परीक्षा की आंसर सीट को उत्तराखंड बोर्ड आर्फ टैक्निकल एजुकेशन की वेबसाइट पर जारी करने के बाद से ही परीक्षार्थियों के होश उड़ गए । परीक्षा के दूसरे दिन जारी आंसर सीट में कई विसंगतियां हैं। इस ओर ध्यान दिलाते हुए कुछ परीक्षार्थियों ने दावा-आपत्ति दर्ज कराने की बात कहीं है ।

जारी किए गए गलत उत्तर -

उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिकीय वर्गीय सेवा परीक्षा 2011 की सेट D की उत्तरमाला मे प्रश्न संख्या 14, 46, 67, 74, 87, 93, 135, तथा 140 के उत्तर गलत दिये गए हैं।
1- प्रश्न संख्या 14 का सही उत्तर है यकृत, जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है गुर्दा।
2- प्रश्न संख्या 46 मे आर्चियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया को कोलकाता से सुमेलित माना गया है जबकि इसका सही सुमेल दिल्ली है, साथ ही विकल्प D भी गलत है अतः इस प्रश्न पर बोनस मिलना चाहिए।
3- प्रश्न संख्या 67 का सही उत्तर है राज्य की समेकित निधि, जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है भारत की समेकित निधि ।
4- प्रश्न संख्या 74 का सही उत्तर है मुंबई, जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है कलकत्ता।
5- प्रश्न संख्या 87 का सही उत्तर है नीला प्रकाश, जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है लाल प्रकाश ।
6- प्रश्न संख्या 93 का सही उत्तर है भारत सरकार के कार्य का संचालन , जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है राज्य के नीति निदेशक तत्व ।
7- प्रश्न संख्या 135 का सही उत्तर है उपरोक्त सभी , जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है विकल्प B ।
8- प्रश्न संख्या 140 का सही उत्तर है विकल्प B , जबकि उत्तरमाला मे दिया गया है विकल्प C ।
परीक्षार्थियों यदि चाहे तो बोर्ड के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

Uttarakhand Police Recruitment 2011 vacancy details: Total no of vacancies: 2114 last date 30.9.2011


Tuesday, 30 August 2011

EXAM DATE, UTTARAKHAND GROUP-C ( SAMUH 'G') - 4 September 2011


GROUP-code 5 (पद कोड 06,28,35,36,56,57,60) exam time (11.00 बजे से 1.00)

GROUP-code 8 (पद कोड़ 09,14,46) exam time (3.00 बजे से - 5.00)

Sunday, 21 August 2011

पहाड़ की बेटी ने झुका दिया आसमां

पेरिस में भारतीय फुटबाल टीम का नेतृत्व करेगी सोनम बर्लिन में हुई फुटबाल चैम्पियनशिप में धनाभाव के कारण नहीं ले सकी थी भाग प्रदेश के खेल विभाग की आर्थिक मदद की पेशकश ठुकराई

देहरादून -(-उत्तराखंड की बेटी सोनम नेगी शुक्रवार को भारतीय महिला फुटबाल टीम का नेतृत्व करने के लिए पेरिस रवाना हो गई। रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ प्रखंड के अंतर्गत ओरिंग गांव निवासी नारायण सिंह नेगी की 23 वर्षीय बेटी सोनम की इस उपलब्धि पर प्रदेश को नाज है। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी सोनम इस समय नागपुर के देशमुख शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय से एमपीएड की पढ़ाई कर रही है। रुद्रप्रयाग जिले के लिए गौरव की बात यह है कि यहां उसकी महाविद्यालय स्तर तक की पढ़ाई हुई। सोनम ने अगस्त्यमुनि के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। उस दौरान वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रही। बीते 26 जून से तीन जुलाई तक बर्लिन में हुई र्वल्ड डिस्कवर वूमैन फुटबाल चैम्पियनशिप में सोनम नेगी महज इसलिए भाग नहीं ले पाई थी, क्योंकि बर्लिन जाने के लिए 75 हजार रुपये का इंतजाम नहीं हो पाया था। तब उसे टीम सदस्य के रूप में शामिल होना था। सोनम को बर्लिन जाने के लिए कुल एक लाख 75 हजार रुपये की जरूरत थी। एक लाख रुपये महाराष्ट्र के एक एनजीओ ने देने की घोषणा की थी और बाकी 75 हजार रुपये सोनम को खुद जुटाने थे लेकिन धनराशि का इंतजाम न हो पाने के कारण उसकी हसरत तब अधूरी रह गई थी। पूर्व सांसद ले.जनरल टीपीएस रावत को इसका पता चला तो उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण माना था। बाद में उन्होंने हंस फाउंडेशन के संस्थापक संत भोले जी महाराज से सोनम नेगी की मदद करने का आग्रह किया। विगत पांच अगस्त को सतपुली में आयोजित समारोह में हंस फाउंडेशन की ओर से माता मंगला देवी ने खुद अपने हाथों से सोनम नेगी की हौसलाअफजाई करते हुए उसे एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया। ले. जनरल टीपीएस रावत ने भी सोनम नेगी का उत्साहवर्धन करते हुए कहा था कि पहाड़ की बेटी को मायूस नहीं होने दिया जाएगा। अभी हाल में प्रदेश के खेल विभाग की ओर से सोनम नेगी को आर्थिक सहायता की पेशकश की गई लेकिन स्वाभिमानी सोनम ने महज इसलिए ठुकरा दिया दिया कि उसकी जरूरत पूरी हो गई है। विगत 11 अगस्त को राज्य सरकार द्वारा आयोजित खेल प्रतिभाओं का अभिनंदन समारोह में भी सोनम नेगी शामिल नहीं हुई। बहरहाल सोनम नेगी पेरिस रवाना हो गई है, जहां वह नौवीं वि महिला फुटबाल चैम्पियनशिप में भारतीय टीम का नेतृत्व करेगी। यह चैम्पियनशिप 21 अगस्त से शुरू हो रही है।


MPhil and PhD programmes through Distance education .अब मुक्त विवि से भी पीएचडी और एमफिल


देहरादून,- पीएचडी करने के इच्छुक राज्य के हजारों युवाओं का सपना अब उत्तराखंड मुक्त विवि व इग्नू सच करेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों के बाद मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। आयोग ने यूजीसी रेगुलेशन-09 के मानकों के पालन की शर्त पर यह अनिवार्यता प्रदान की है।


इस मामले में यूजीसी की आठ जुलाई को हुई बैठक में मुहर लग गई, इस फैसले से सभी मुक्त विश्वविद्यालयों को अवगत करा दिया गया है। अब यूओयू व इग्नू इसी सत्र से पंजीकरण शुरू करने की योजना बना रहे हैं। शोध का स्तर सुधारने के उद्देश्य से यूजीसी ने मिनिमम स्टैंडर्ड फॉर अवॉर्ड ऑफ पीएचडी-एमफिल रेगुलेशन-2009 लागू किया था। इसके कारण देशभर के मुक्त विश्वविद्यालयों से की जानी वाली पीएचडी व एमफिल पर रोक लगा दी गई थी। बीते माह यूजीसी की 479वीं बैठक में स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिश पर गौर करते हुए यूजीसी ने दोबारा मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह दोनों उपाधियां मुक्त विवि दूरस्थ शिक्षण माध्यम में शुरू कर पाएंगे। हालांकि इसके लिए यूजीसी ने सख्ती से यूजीसी रेगुलेशन-09 का पालन करने की शर्त भी रखी है। शोध कोर्सेज के लिए यूजीसी रेगुलेशन में 11 बिंदु तय किए गए हैं। आयोग ने कहा है कि पीएचडी व एमफिल में प्रवेश के लिए इन बिंदुओं का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पीएचडी व एमफिल संचालित करने के लिए मुक्त विश्वविद्यालयों को रेगुलेशन में दर्ज जरूरी ढांचा व सुविधाएं खुद विकसित करनी होगी।
साथ ही दूरस्थ माध्यम से पीएचडी के लिए मुख्य गाइड संबंधित विवि से ही होना चाहिए, हालांकि आयोग ने जरूरत के अनुसार बाहर के विवि से को-गाइड रखने की सुविधा दी है। मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति मिलने से राज्य के हजारों छात्रों का शोध करने का सपना सच हो सकेगा। एचएनबी गढ़वाल विवि के केंद्रीय विवि बनने के बाद अब तक केवल एक बार पीएचडी के लिए प्रवेश हो पाए हैं, हालांकि इन पर भी अब तक सुचारू रूप से काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं अन्य विश्वविद्यालयों में शोध की तस्वीर बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में उत्तराखंड मुक्त विवि व इग्नू के माध्यम से शोध करना आसान होगा व इसके लिए दोनों विश्वविद्यालयों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रयास हैं कि इसी सत्र से पंजीकरण शुरू कर दिया जाए।



..result (Clerk-cum-Cashier/ Office Assistant) in Nainital Almora Kshetriya Gramin Bank


गढ़वाली-कुमाऊंनी को निजी विधेयक पेश

देहरादून,- गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने शुक्रवार को लोकसभा में गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने संबंधी निजी विधेयक पेश किया।
सांसद सतपाल महाराज ने कहा कि गढ़वाल क्षेत्र की प्राचीन भाषा वैदिकी थी। ऋषि-मुनियों ने इसी वैदिकी में संहिताएं लिखी हैं। करीब 500 ईसा पूर्व पणिनी ने इसका संस्कार किया और इसे व्याकरण के नियमों में बांधा। इसे वैदिक संस्कृति कहा गया। आगे चलकर वैदिक संस्कृत ने ही प्राकृत भाषा का रूप लिया। इसका प्रयोग कालिदास ने अपने नाटकों में किया। उन्होंने कहा कि द्वितीय प्राकृत भाषा के कई रूप शौरसेनी प्राकृत, पैशाची प्राकृत, महाराष्ट्री प्राकृत आदि बनीं। शौरसेनी अपभ्रंश से पश्चिमी हिंदी, राजस्थानी, गुजराती एवं मध्यवर्ती पहाड़ी समूह की भाषाएं उत्पन्न हुई। इसी समूह में गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं की उत्पत्ति हुई। इन्हीं के साथ पूर्वी पहाड़ी भाषा के रूप में नेपाली और पश्चिमी पहाड़ी के रूप में हिमाचली भाषा का जन्म हुआ। लौकिक संस्कृत पाली प्राकृत अपभ्रंश गढ़वाली के क्रम में गढ़वाली भाषा का विकास हुआ।
सांसद ने कहा कि पुराणों के अनुसाद स्वर और नाद का ज्ञान भगवान शिव के रुद्र रूप से देव ऋषि नारद को इसी देवभूमि में मिलने का वर्णन है। ढोलसागर में गुनीजन दास नाम औजी का बार-बार संबोधन होता है। जिसमें स्वर, ताल, लय, गमक का विस्तार से संवाद होता है। गुरु खेगदास का संबोधन आह्वान मंत्रोच्चारण में है। जागरों में अभीष्ट की प्राप्ति और अनिष्ट निवारण के लिए देवता नाचने की प्रथा है। जागरों में ढोल दमौं, हुड़का, ढौंर, थाली वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व है। उन्होंने उक्त दोनों लोक भाषाओं के पौराणिक-एतिहासिक महत्व को सामने रखा।

Friday, 19 August 2011

सच हुआ वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का सपना



कोटद्वार आखिरकार कोटद्वार क्षेत्र की जनता पिछले कई वर्षो से देखा जा रहा सपना सच हो ही गया। पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का सपना भले

ही भरत नगर को जिला बनाने का रहा हो, लेकिन कोटद्वार को जिला घोषित कर प्रदेश सरकार ने भरतनगर के विकास की राह को आसान कर दिया है।
कोटद्वार क्षेत्र के जिला निर्माण की मांग सर्वप्रथम पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की ओर से उठी। हालांकि, स्व.गढ़वाली कोटद्वार से लगे घाड़ क्षेत्र में स्थित भरत नगर को जिला बनाने की मांग कर रहे थे। मकसद साफ था, जिला बनने के बाद न सिर्फ भरतनगर का विकास होता, बल्कि पूरे कोटद्वार क्षेत्र में विकास की नई किरण जगती। स्व.गढ़वाली के देहावसन के बाद जनता की मांग ठंडे बस्ते में पहुंच गई। अस्सी के दशक में अधिवक्ताओं व छात्रों ने एक बार फिर अलग जिले की मांग उठानी शुरू कर दी व इस मर्तबा मांग कोटद्वार को जिला बनाने की उठी। अस्सी के दशक से उठनी शुरू हुई यह मांग वर्ष 1997-98 में उस वक्त प्रबल हो गई, जब अधिवक्ताओं के साथ ही विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने तहसील परिसर में अनशन शुरू कर दिया। 68 दिनों तक चले इस अनशन कार्यक्रम का असर यह रहा कि उत्तर प्रदेश शासन ने इस अनशन की सुध लेते हुए तत्कालीन उपजिलाधिकारी कै.सुशील कुमार को कोटद्वार जिला का ब्लू प्रिंट तैयार करे के निर्देश दे दिए। शासन स्तर से जिले की घोषणा होती, इससे पूर्व ही उत्तराखंड राज्य का गठन हो गया।
राज्य गठन के बाद भी जिला निर्माण को लेकर आंदोलन जारी रहा व अधिवक्ताओं सहित विभिन्न संगठनों ने यहां तहसील परिसर में 56 दिनों का धरना दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी से मिले आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया। वर्ष 2004 में छात्रों, अधिवक्ताओं सहित विभिन्न संगठनों ने अनशन शुरू कर दिया। इसके बाद भी जिला निर्माण को लेकर लगातार जुलूस-प्रदर्शन, रैलियां आयोजित होती रही। पिछले करीब छह माह से अधिवक्ता भी जिला निर्माण की मांग को लेकर प्रत्येक शनिवार न्यायिक कार्यो से विरत रह रहे थे। आखिर जनप्रयास रंग लाए व प्रदेश के मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कोटद्वार को नया जिला बनाने की घोषणा कर दी।

HNB BED ENTRENCE DATE 28 AUGUST .

मौसम की खराबी और रास्ते बंद होने के कारण HNB UNIVERSITY BED ENTRENCE सह्रश्वताह भर के
लिए स्थगित कर दी गई है। अब 21 अगस्त की बजाय यह परीक्षा 28 अगस्त को होगी।

3600 पदों पर भर्ती जल्द


देहरादून, - समूह-ग के रिक्त पदों पर नियुक्तियों का इंतजार कर रहे बेरोजगार युवाओं के लिए खुशखबरी। 2300 पदों के लिए आवेदन कर चुके युवाओं को तकरीबन डेढ़ माह में 3600 पदों पर भाग्य आजमाने का मौका मिलेगा। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार के सख्त निर्देशों के चलते प्राविधिक शिक्षा परिषद इसकी तैयारी में जुटा है। तमाम सरकारी महकमों में समूह-ग के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए खुद सरकार को जमकर पसीना बहाना पड़ रहा है। मुख्य सचिव स्तर पर बार-बार मानीटरिंग के बाद नियमावली और कायदे-कानूनों का हवाला देते हुए भर्ती से हाथ खड़े करने वाले महकमों को आखिरकार हथियार डालने पड़े हैं। नतीजतन करीब 70 महकमे 5900 पदों पर भर्ती कराने को प्राविधिक शिक्षा परिषद में दस्तक दे चुके हैं। फिलहाल इनमें 2021 पदों के लिए आवेदन मंगाए जा चुके हैं, जबकि उत्तराखंड अधीनस्थ सिविल न्यायालय लिपिक संवर्गीय सेवा के रिक्त 279 पदों पर भर्ती को परीक्षा 28 अगस्त को होगी। 23 महकमों में रिक्त 2021 पदों की भर्ती परीक्षा के लिए परिषद को मशक्कत करनी पड़ रही है। दरअसल, उक्त पदों के लिए शैक्षिक योग्यता अलग होने के कारण विभागवार परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षार्थियों को 27 पेपर से जूझना पड़ेगा। इन पेपरों में तकरीबन 50 फीसदी सवाल तय शैक्षिक योग्यता के दायरे में पूछे जाने हैं। इन पेपरों के मुताबिक अलग-अलग परीक्षा तिथियां तय होंगी। इस पूरे तामझाम को देखते हुए परीक्षाएं अगले माह सितंबर के पहले हफ्ते से शुरू होकर तकरीबन नवंबर माह तक चलेंगी।
परिषद की रणनीति यह है कि बीच की इस अवधि में ही शेष 3600 रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। इस कड़ी में लिपिक और लेखाकार संवर्ग के 1315 पदों पर भर्ती आवेदन जल्द मांगे जाएंगे, जबकि इसके बाद वाहन चालकों के 215 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके बाद शेष दो हजार पदों पर नियुक्तियां होंगी। परिषद सचिव डा. मुकेश पांडेय के मुताबिक चुनाव आचार संहिता से पहले समूह-ग के उपलब्ध कराए गए सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।


यूटीईटी अब २७ को


रामनगर - मौसम की
खराबी और रास्ते बंद होने के
कारण उतराखंड अध्यापक पात्रता
परीक्षा (यूटीईटी) सह्रश्वताह भर के
लिए स्थगित कर दी गई है। अब
२१ अगस्त की बजाय यह परीक्षा
२७ अगस्त को होगी।

उत्तराखंड वानिकी एवं औद्यानिकी विश्र्वविद्यालय भरसार के पहले वीसी मैथ्यू (Uttarakhand's first VC forestry and horticulture Brsar University Matthew)

pahar1- उत्तराखंड वानिकी एवं औद्यानिकी विश्र्वविद्यालय भरसार, पौड़ी के पहले कुलपति प्रो. (डा.) मैथ्यू प्रसाद नियुक्त किए गए हैं। औद्यानिकी विशेषज्ञ डा. प्रसाद मूल रूप से दून (उत्तराखंड) के निवासी हैं।
कुलपति पद पर उनकी तैनाती तीन वर्ष के लिए की गई है। उन्होंने प्रदेश में वन उत्पादकता बढ़ाने और औद्यानिकी में रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करने को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शुमार किया। प्रो. प्रसाद ने औद्यानिकी विशेषज्ञ के तौर विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं और व‌र्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट समेत विभिन्न संस्थानों में 30 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने आइआइटी खड़गपुर से फूड प्रोसेसिंग में पोस्ट ग्रेजुएट और डाक्टरेट की डिग्री लीं और इलाहाबाद विश्र्वविद्यालय से एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। दून में जन्मे प्रो. प्रसाद को उनके रिसर्च कार्यो के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने इस्राइल में वोलकानी रिसर्च इंस्टीट्यूट से पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलाजी में एडवांस ट्रेनिंग ली। 14 साल से अधिक समय तक उन्होंने जम्मू-कश्मीर कृषि विवि में औद्यानिकी पर कार्य किया।
वह ग्रीन बोनस के परिप्रेक्ष्य में वन उत्पादों की प्रोसेसिंग और मूल्य वृद्धि के गहन अध्येता रहे। प्रदेश सरकार ने डा मैथ्यू को भरसार विवि के कुलपति की कमान सौंपी है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से विवि में कुलपति के साथ ही फाइनेंस कंट्रोलर और रजिस्ट्रार के पद सृजित किए गए हैं।