Thursday, November 12, 2009

आइए! प्रकृति के रंगों का दीदार करें

- 15 नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा राजाजी नेशनल पार्क - वन्य जीवों के संरक्षण के लिए पर्यटकों को प्रेरित करेगा पार्क प्रशासन देहरादून हाथियों की चिंघाड़, बाघ-गुलदार की दहाड़, कुलाचें भरते हिरन, नीलगाय, रंग-बिरंगे पक्षियों का मन को हर्षाने वाला कलरव, तितलियों का खूबसूरत संसार। प्रकृति का ऐसा कौन सा रूप है, जो वहां मौजूद नहीं है। आपका मन भी इन नजारों के दीदार को मचल रहा हो तो थोड़ा इंतजार कीजिए, 15 नवंबर आने ही वाला है। इस दिन जैव विविधता के लिए मशहूर राजाजी नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। देश-दुनिया में पहचान पा चुका उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क आज पर्यटकों के पसंदीदा स्थलों में शुमार है। शिवालिक रेंज के देहरादून पूर्वी वन प्रभाग से लगे क्षेत्र में वन्य जीवों की बहुलता को देखते हुए इसे पूर्व में देश के पहले गवर्नर जनरल सी.राजगोपालाचारी के सम्मान में राजाजी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी नाम दिया गया। फिर राजाजी सेंचुरी, मोतीचूर व चीला के साथ ही पूर्वी-पश्चिमी देहरादून वन प्रभाग, शिवालिक व लैंसडौन वन प्रभाग के कुछ हिस्सों को मिलाकर वर्ष ृ1983 में इसे राजाजी नेशनल पार्क घोषित किया गया। 820.42 वर्ग किमी में फैले इस संरक्षित क्षेत्र की जैव विविधता का कोई सानी नहीं है। एशियाई हाथियों की तो यह प्रमुख सैरगाह है। वर्तमान में पार्क में हाथियों की संख्या चार से पांच सौ के बीच है। यही नहीं, बाघ, गुलदार, हिरन, सांभर, काकड़, जड़ाव, सूअर, नीलगाय, बंदर, लंगूर समेत वन्य जीवों की 49 प्रजातियां यहां मौजूद हैं। पक्षियों का तो यहां अद्भुत संसार बसता है और करीब 320 पक्षी प्रजातियां यहां मौजूद हैं। प्रवासी पक्षियों का भी आकर्षण कम नहीं है। किंग कोबरा समेत अन्य सरीसृप, तितलियों का रंगीन संसार भी देखा जा सकता है। पर्यटक सीजन के लिए पार्क प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। पार्क के निदेशक एसएस रसाइली बताते हैं कि इस मर्तबा चिल्लावाली क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है और वहां टूरिंग हट लगाया जा रहा है। इसके अलावा एक नया रूट भी खोला जा रहा है। मुंडाल में वाच टावर की हाईट बढ़ाई जा रही है। चीला में पर्यटकों को पार्क के बारे में जानकारी देने के साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इस बार कमाई पर नहीं, क्वालिटी टूरिज्म पर भी विशेष जोर रहेगा।

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