Thursday, 20 January 2011

अब 'गोदान और 'कफन देववाणी में

अब 'गोदानÓ, 'कफनÓ और 'नमक का दारोगाÓ जैसी कालजयी कृतियां देववाणी संस्कृत भाषा में भी उपलब्ध हो सकेंगी। उत्तराखंड संंस्कृत अकादमी ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कृतियों को संस्कृत में अनुवाद करने की यह पहल की है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी संस्कृत और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए यह अनूठी पहल कर रहे हैं। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद की अनूठी कहानियां अब संस्कृत में भी उपलब्ध हो सकेंगी। अभी तक मुंशी प्रेमचंद की कहानियों को कई भाषाओं में अनुवादित किया गया है, जिसके चलते देश-विदेश में प्रेमचंद की कहानियां लोगों तक पहुंची। आम जनमानस को केंद्र में रखकर लिखी गई कहानियों का ही असर है कि हर भाषा के लोगों ने प्रेमचंद की कहानियों को हाथों हाथ लिया। अब संस्कृत अकादमी भी प्रेमचंद की कहानियों को संस्कृत प्रेमियों तक पहुंचा रही है। अकादमी ने प्रेमचंद की प्रमुख कृतियों को लेकर अध्ययन शुरू कर दिया है। जल्द ही अनुवाद का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए अकादमी में संस्कृत विशेषज्ञों की पूरी टीम गठित की है। टीम में शामिल डॉ. हरीश गुरुरानी का कहना है कि यह संस्कृत प्रेमियों के लिए एक अनोखा अनुभव होगा। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. बु़द्धदेव शर्मा का कहना है कि कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियां अपने आप में बेमिसाल हैं। अब अकादमी संस्कृत प्रेमियों को यह तोहफा देने जा रही है। इसके लिए टीम गठित की गई है और जल्द ही गोदान, कफन जैसी कालजयी कृतियां संस्कृत भाषा में भी उपलब्ध होंगी।

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