Sunday, March 21, 2010

अर्थ आवर डे पर जगमगाएंगे पहाड़

27 की रात हिमाचल और उत्तराखंड के सीमांत जिलों के हजारों गांवो में जलेंगी मशालें भैलो (पहाड़ी इलाकों में दीवाली मनाने का स्थानीय तरीका) खेला जाएगा। -गांवों के हजारों लोग लेंगे वनो को आग से बचाने का संकल्प PAHAR1-सत्ताइस मार्च का दिन पहाड़ों के लिए कुछ खास होगा। इस दिन जहां द़निया के शहर एक घंटे के लिए अपने घर, दफ्तर अथवा संस्थान में बत्तियां बंद रखेंगे, वहीं पहाड़ रोशनी से जगमगा रहे होंगे। हिमाचल और उत्तराखंड के गांवों में अर्थ आवर डे पर दीये रोशन किए जाएंगे और भैलो (पहाड़ी इलाकों में दीवाली मनाने का स्थानीय तरीका) खेला जाएगा। यह अनूठी पहल की है पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे मैती आंदोलन के संस्थापक व उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के वैज्ञानिक कल्याण सिंह रावत ने। इस विशेष आयोजन का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रो को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करना तो है ही, साथ ही दुनिया का ध्यान हिमालय के पारिस्थितिकीय तंत्र की ओर आकर्षित करना भी है। इसीलिए अर्थ आवर डे को स्थानीय पुट देकर आयोजित किया जा रहा है। बता दें कि दीवाली के वक्त एकादशी को समूचे उत्तराखंड व नेपाल में भैलो त्योहार मनाया जाता है। इसमें रात को लोग मशालें लेकर भैलो, भैलो करते हुए लोकगीतों के साथ नृत्य करते हैैं। श्री रावत ने बताया कि इस मौके पर गांवों के लोग वनो को आग से बचाने का संकल्प भी लेंगे। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में उत्तराखंड के दो हजार से ज्यादा गांव भाग लेंगे। पिथौरागढ़ के गुंजी व अस्कोट से लेकर उत्तरकाशी के सरनोल-बडियार व आराकोट तक के गांवों को प्रकाशोत्सव से जोड़ा गया है। हिमाचल प्रदेश में शिमला विश्वविद्याल.य के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड हिमालयन स्टडीज के डॉ. रान्टा व आकाश दीप संस्था ने भी इस कार्यक्रम को लाहौल स्पीति व किन्नौर जिले के सीमांत गांवों में प्रकाशोत्सव मनाने का फैसला लिया। रैणी गांव में चिपको उत्सव देहरादून: मैती आंदोलन चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरादेवी की याद में 26 मार्च को चमोली के रैणी गांव में चिपको उत्सव आयोजित करेगा। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित मैती आंदोलन के संस्थापक कल्याण सिंह रावत ने बताया कि 26 मार्च 1974 को गौरादेवी ने रैणी से चिपको आंदोलन की शुरुआत की थी। इसमें सीमांत क्षेत्रों के गांवों के मैती संगठन हिस्सा लेंगे

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