Monday, November 3, 2014

एवरेस्ट धारावाहिक में नजर आएगी उत्तरकाशी की बेटी ममता

आपदा से लड़ ‘एवरेस्ट’ तक पहुंची
देहरादून। इरादे मजबूत हो तो राह के रोड़े भी दूर होते चले जाते हैं। आपदा पीड़ित गांव भंकोली की ममता ने भी इसे साबित किया है। आपदा की चुनौतियों से लड़कर ममता ‘एवरेस्ट’ तक पहुंच गई। एवरेस्ट सीरियल बनाने आशुतोष गोवारिकर जब उत्तरकाशी आए तो वे ममता की हिम्मत और जज्बे को देखकर काफी प्रभावित हुए।
उन्होंने सीरियल में इंस्ट्रक्टर की भूमिका के लिए ममता का चयन कर लिया।
उत्तरकाशी से करीब 19 किलोमीटर दूर असी घाटी में एक छोटा सा गांव है भंकोली। 2012 की आपदा के बाद रोजी-रोटी गंवा चुके लोग जब सरकार और अन्य संगठनों की ओर देख रहे थे, तब 19 किमी का दुर्गम रास्ता पार कर ममता उत्तरकाशी पहुंचती और पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण देती। 2012 में ममता के सिर से पिता का साया उठ गया। तीन बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण पूरे घर की जिम्मेदारी ममता पर आ गई। यह ममता की जिंदगी की पहली परीक्षा थी। इससे उबरने के लिए ममता ने असी गंगा के किनारे स्थित टाटा एंडवेचर कंपनी में नौकरी की। वह अपने परिजनों को पिता की कमी खलने नहीं देना चाहती थी। इस नौकरी के सहारे वह परिवार को संभालने की कोशिश में जुट गई। अभी वह ठीक से संभली भी नहीं थी कि कुदरत ने एक और कहर बरपाया। अगस्त 2012 में असी गंगा में ऐसा सैलाब आया कि बड़े-बड़े दरख्त बह गए। पर्यटन गतिविधियों से गुलजार रहने वाला यह घाटी बेजार हो गया। घाटी का बाजार संगमचट्टी असी गंगा के बाढ़ में बह गया। करीब 400 परिवार वाला भंकोली गांव पूरी तरह आपदाग्रस्त हो गया। आपदा से ममता का परिवार भी अछूता नहीं रहा। टाटा एंडवेचर कंपनी का परिसर भी बाढ़ में बह गया। ममता इसी कंपनी के सहारे घर चला रही थी। उधेड़बुन में फंसी ममता ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) से संपर्क किया। ममता निम से पर्वतारोहण का कोर्स कर चुकी थी। निम ने ममता की कहानी सुनी तो उसको अपने अनुभवों को प्रशिक्षण में ढालने का मौका दिया। लेकिन इसमें भी एक दिक्कत थी। निम का कार्यालय उत्तरकाशी में था और ममता भंकोली में रहती थी। 19 किमी का कठिन रास्ता पार कर उत्तरकाशी पहुंचना किसी युवती के लिए आसान नहीं था। ममता ने हार नहीं मानी। उसने निम का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। हर हफ्ते वह उत्तरकाशी पहुंच कर प्रशिक्षण देने लगी। ममता के हौसले ने आपदा को हारने पर बाध्य कर दिया। निम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोटियाल की मदद से ममता ने भंकोली में ही अपना नया मकान बनाया। इसी दौरान एवरेस्ट पर टीवी सीरियल बनाने के लिए आशुतोष गोवारिकर उत्तरकाशी पहुंचे। उन्होंने जाना कि ममता आपदा पीड़ित है और अपने हिम्मत और जज्बे से यहां तक पहुंची है तो काफी प्रभावित हुए। उन्होंने लीड रोल का बाडी डबल (स्टंट) भी ममता से ही कराया। एवरेस्ट पर चढ़ने से लेकर खतरनाक दर्रों को पार करने में ममता ने लीड रोल का बाडी डबल किया है। खुद ममता मान रही है कि यह रोल उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। 3 नवंबर से रात दस बजे स्टार प्लस पर एवरेस्ट का प्रसारण होना है। इस सीरियल में आपदाग्रस्त ममता निम में इंस्ट्रक्टरकी भूमिका में नजर आएगी।
परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही आपदा पीड़ित भंकोली की युवती
सीरियल आज से स्टार प्लस पर 10 बजे रात को प्रसारित होगा 
 साभार -सुधाकर भट्ट(अमर उजाला देहरादून) 

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