Wednesday, December 14, 2011

प्रदेश सरकार ने मलिन बस्ती वालों को दिया तोहफा

गरीबों को मुफ्त मकान, प्लाट ,खंडूरी कैबिनेट ने दी मलिन बस्ती नीति को मंजूरी
पहचान के तौर पर जारी किए जाएंगे आई कार्ड,अफसरों से पूछा, जीओ में क्यों होती है देरी
देहरादून। खंडूरी कैबिनेट ने यह भी तय किया कि प्राइवेट डेवलपर्स 25 फीसदी हिस्सा शहरी गरीबों के लिए आरक्षित रखेंगे। जो सस्ते दर पर बेचे जाएंगे। प्रमुख सचिव (शहरी विकास) रणवीर सिंह के अनुसार जिनके पास मलिन बस्तियों में भी अपनी छत नहीं है, उन्हें भी इस नीति का फायदा मिल सकता है। इसके बदले उन्हें कुछ राहत दी जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि 500 वर्ग मीटर से ज्यादा वाले मकान पर एक और 1000 वर्ग मीटर वाले मकान के लिए दो सर्वेंट क्वार्टर का निर्माण भी जरूरी तौर पर करना होगा। इसके लिए एचडीए, एमडीडीए सरीखे मानचित्र पास करने वाले प्राधिकरणों को विशेष आदेश जारी किए जाएंगे।फैसलों में अमल में देरी पर  मुख्यमंत्री ने मांगी सफाई देहरादून। कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के बावजूद फैसलों पर शासनादेश लटकने या इसमें देरी पर मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी खासे खफा हुए। उन्होंने मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में इस बारे में सफाई तलब की।बैठक में मौजूद समाज कल्याण, सिंचाई और शिक्षा मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने भी कैबिनेट के फैसलों पर अमल में रफ्तार नहीं होने पर असंतोष जताया। उन्होंने पीटीए शिक्षकों के साथ ही कुछ और मिसालें बैठक में पेश कीं।हालांकि, मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि कैबिनेट फैसलों पर काफी हद तक अमल हो गया है। सवा सौ में से सिर्फ, 13 फैसले ऐसे हैं, जिन पर शासनादेश होना है। ये भी प्रक्रिया में शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने फैसलों में अमल की कार्रवाई तेज करने की हिदायत देते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी अगर कोई अफसर शासनादेश जारी करने में हील हवाली करता है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर फैसले में कोई विघ्न या बाधा आ रही है, तो इसे साफ किया जाए। कैबिनेट के फैसलों पर बैठक वाले दिन ही शासनादेश हो जाने चाहिए। अफसर आज देर रात तक फैसलों का शासनादेश जारी करते रहे।  देहरादून। विधानसभा चुनाव से पहले खंडूरी सरकार ने मलिन बस्ती के लोगों को मुफ्त मकान और भूखंड देने के लिए नीति बना दी। इस नीति का फायदा प्रदेश के ऐसी बस्तियों में रहने वाले साढ़े सात लाख लोगों को पहुंच सकता है। पहचान के तौर पर इन लोगों को सरकार पहचान पत्र जारी करेगी।
इस नीति को पिछली लगातार दो कैबिनेट बैठकों में लाया गया था। अहम और खर्चीली होने के कारण इसे पूरे अध्ययन के बाद लाने के लिए टाला जाता रहा। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में तीसरी बार जब इसे पेश किया गया तो किसी ने विरोध नहीं किया। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मलिन बस्ती नीति में प्रदेश के 582 बस्तियों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि हर बस्ती और शहर के लिए नीति में अलग से मास्टर प्लान तैयार करने का प्रावधान किया गया है।

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