Sunday, 21 August 2011

MPhil and PhD programmes through Distance education .अब मुक्त विवि से भी पीएचडी और एमफिल


देहरादून,- पीएचडी करने के इच्छुक राज्य के हजारों युवाओं का सपना अब उत्तराखंड मुक्त विवि व इग्नू सच करेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों के बाद मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। आयोग ने यूजीसी रेगुलेशन-09 के मानकों के पालन की शर्त पर यह अनिवार्यता प्रदान की है।


इस मामले में यूजीसी की आठ जुलाई को हुई बैठक में मुहर लग गई, इस फैसले से सभी मुक्त विश्वविद्यालयों को अवगत करा दिया गया है। अब यूओयू व इग्नू इसी सत्र से पंजीकरण शुरू करने की योजना बना रहे हैं। शोध का स्तर सुधारने के उद्देश्य से यूजीसी ने मिनिमम स्टैंडर्ड फॉर अवॉर्ड ऑफ पीएचडी-एमफिल रेगुलेशन-2009 लागू किया था। इसके कारण देशभर के मुक्त विश्वविद्यालयों से की जानी वाली पीएचडी व एमफिल पर रोक लगा दी गई थी। बीते माह यूजीसी की 479वीं बैठक में स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिश पर गौर करते हुए यूजीसी ने दोबारा मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह दोनों उपाधियां मुक्त विवि दूरस्थ शिक्षण माध्यम में शुरू कर पाएंगे। हालांकि इसके लिए यूजीसी ने सख्ती से यूजीसी रेगुलेशन-09 का पालन करने की शर्त भी रखी है। शोध कोर्सेज के लिए यूजीसी रेगुलेशन में 11 बिंदु तय किए गए हैं। आयोग ने कहा है कि पीएचडी व एमफिल में प्रवेश के लिए इन बिंदुओं का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पीएचडी व एमफिल संचालित करने के लिए मुक्त विश्वविद्यालयों को रेगुलेशन में दर्ज जरूरी ढांचा व सुविधाएं खुद विकसित करनी होगी।
साथ ही दूरस्थ माध्यम से पीएचडी के लिए मुख्य गाइड संबंधित विवि से ही होना चाहिए, हालांकि आयोग ने जरूरत के अनुसार बाहर के विवि से को-गाइड रखने की सुविधा दी है। मुक्त विश्वविद्यालयों को पीएचडी व एमफिल संचालित करने की अनुमति मिलने से राज्य के हजारों छात्रों का शोध करने का सपना सच हो सकेगा। एचएनबी गढ़वाल विवि के केंद्रीय विवि बनने के बाद अब तक केवल एक बार पीएचडी के लिए प्रवेश हो पाए हैं, हालांकि इन पर भी अब तक सुचारू रूप से काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं अन्य विश्वविद्यालयों में शोध की तस्वीर बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में उत्तराखंड मुक्त विवि व इग्नू के माध्यम से शोध करना आसान होगा व इसके लिए दोनों विश्वविद्यालयों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रयास हैं कि इसी सत्र से पंजीकरण शुरू कर दिया जाए।



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