Wednesday, August 3, 2011

निशंक कैबिनेट ने डाक्टरों, व्यापारियों, किसानों के हित के लिए घोषित की नई नीति

781 डाक्टरों की पदोन्नति, 136 आबकारी सिपाहियों की भर्ती और तीन निजी विश्र्वविद्यालयों के गठन का रास्ता

देहरादून- सूबे में डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगेगी।

कैबिनेट ने उत्तराखंड मेडिकेयर सर्विस परसंस एंड इंस्टीट्यूट्स (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज टू प्रापर्टी) बिल-2011 को मंजूरी दे दी, लेकिन शर्त यह भी है कि गलत एफआइआर या शिकायत करने पर दोषी भी नपेंगे। संशोधित कृषि नीति में अब विशेष कृषि क्षेत्र (एसएजेड), स्वैच्छिक चकबंदी को तवज्जो दी गई है। अब सर्वसम्मति से चकबंदी लागू करने पर ग्राम पंचायत को एसएजेड का लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने फिलहाल कृषि भूमि की खरीद पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण के साथ ही व्यापार कर के बकाएदार व्यापारियों और 76 संविदा आयुष डाक्टरों की कार्य अवधि एक साल बढ़ाकर राहत दी गई है। 781 डाक्टरों की पदोन्नति, 136 आबकारी सिपाहियों की भर्ती और तीन निजी विश्र्वविद्यालयों के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक कैबिनेट ने मंगलवार को डाक्टरों, व्यापारियों, किसानों के हित में नई नीतियों पर मुहर लगा दी। कैबिनेट के तकरीबन दर्जनभर फैसलों की मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने ब्रीफिंग की। उन्होंने बताया कि अब सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में डाक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंड के भागीदार होंगे। लंबे इंतजार के बाद कैबिनेट ने इस बिल को सशर्त मंजूरी दी। यह बिल उन्हीं सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों पर लागू हो, जो क्लिनिकल एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होंगे। गलत एफआइआर या शिकायत करने पर डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर भी कार्यवाही का प्रावधान बिल में शामिल किया गया है। उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य नियमावली 2009 में संशोधन कर 781 डाक्टरों की पदोन्नति और अन्य लाभ दिए जा सकेंगे। समूह-घ डेड कैडर होने के बावजूद आबकारी महकमे में 139 आबकारी सिपाहियों के पदों को कैबिनेट ने उपयोगी मानते हुए भर्ती की मंजूरी दी। केंद्रपोषित राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम में केंद्र और राज्य की 60:40 की भागीदारी पर कैबिनेट ने आपत्ति जताई। यह तय किया कि विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण उत्तराखंड को 90:10 अनुपात में इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। तब तक तय अनुपात के मुताबिक राज्य हर साल 20 करोड़ की राशि इस कार्यक्रम के तहत देगा। केंद्र 120 करोड़ और राज्य 89 करोड़ रुपये देगा। होटलों के लिए सुख संसाधन कर नियमावली में तीन संशोधन किए गए हैं। अब एक हजार से ज्यादा कीमत वाले कमरों का रजिस्ट्रेशन होगा। उन्हें मुख्यालय स्थापित करना होगा। वे लग्जरी टैक्स के लिए मौजूदा एक अपील की व्यवस्था के बजाए दो अपील कर सकेंगे। एक अन्य फैसले में वर्ष 1988 से 2006 तक एक लाख के बकाया कर पर ब्याज और अर्थदंड खत्म किया गया है। दस लाख तक बकाया पर सिर्फ दस फीसदी ब्याज और इससे अधिक बकाया पर 25 फीसदी ब्याज देना होगा। व्यापारियों को अर्थदंड माफ किया गया है। 76 संविदा आयुष डाक्टरों को 31 मार्च, 2011 तक संविदा अवधि खत्म होने पर एक साल का कार्य विस्तार दिया गया है। गढ़वाल मंडल विकास निगम की वर्ष 2002-03 में शराब की अलाभकारी दुकानों पर करीब 12.50 लाख रुपये की देनदारी भी माफ की गई है। पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लॉक में बांगघाट पर 1978 में बने पुल पर पथकर नहीं लगेगा। कैबिनेट ने यह बकाया भी माफ कर दिया। तीन निजी विश्र्वविद्यालयों वनस्थली विद्यापीठ (हरिद्वार), लिंग्याज विवि (हरिद्वार) और एचटी ग्लोबल विवि के दून के साथ गढ़वाल व कुमाऊं में एक-एक हिल कैंपस को मंजूरी दी गई। उत्तराखंड लेखा कृषि सेवा नियमावली पारित की गई। इस मौके पर कृषि सचिव ओमप्रकाश, वित्त अपर सचिव हेमलता ढौंडियाल, प्रभारी सचिव अजय प्रद्योत भी मौजूद थे।

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