Saturday, June 4, 2011

पीजी में प्राइवेट परीक्षा को बाय-बाय

नए सत्र से हेमवतीनंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्र्वविद्यालय पोस्ट ग्रेजुएट कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के साथ ही प्राइवेट परीक्षा को बाय-बाय कर रहा है। इससे गढ़वाल के 30 डिग्री शिक्षण संस्थाओं के तकरीबन 26 हजार प्राइवेट परीक्षार्थी संकट में पड़ गए हैं। संकट समाधान को सरकार विकल्प तलाश कर रही है। उत्तराखंड मुक्त विवि को भी यह जिम्मा सौंपने पर मंथन किया जा रहा है। ऐसा होने पर परीक्षार्थियों को बतौर प्राइवेट नहीं, बल्कि डिस्टेंस लर्निग मोड में परीक्षा देनी होगी। केंद्रीय गढ़वाल विवि ने यूजीसी के निर्देशों के मुताबिक नए सत्र से पीजी स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। इस फैसले से पीजी स्तर पर प्राइवेट परीक्षा खतरे में पड़ गई हैं। विवि नए सत्र में एक ही कक्षा के लिए अलग-अलग परीक्षा व्यवस्थाएं संचालित करने के पक्ष में नहीं है। इससे विवि से अगले सत्र में पीजी कक्षाओं की प्राइवेट परीक्षा देने की तमन्ना पूरी नहीं होगी। अलबत्ता, स्नातक स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम लागू नहीं होने से फिलहाल स्नातक कक्षाओं की प्राइवेट परीक्षा पर खतरा नहीं है। हालांकि विवि प्रशासन प्राइवेट परीक्षा से कन्नी काटने का इरादा शासन के सामने जाहिर कर चुका है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार के साथ बीते दिनों कुलसचिव एसके सिंह की बैठक के दौरान भी यह मुद्दा उठा। शासन के अनुरोध पर स्नातक स्तर पर प्राइवेट परीक्षा नए सत्र में जारी रखने का आश्र्वासन कुलपति दे चुके हैं, लेकिन पीजी स्तर पर समय रहते विकल्प की तलाश करने के उनके सुझाव पर अमल किया जा रहा है। प्राइवेट परीक्षा का दबाव किसकदर है, यह परीक्षार्थियों की संख्या से पता चल जाता है। अंतिम दौर में चल रहे मौजूदा सत्र में एमए और एमकॉम की प्राइवेट परीक्षा में 26475 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए हैं। स्नातक कक्षा के प्राइवेट परीक्षार्थियों को शामिल करने पर यह आंकड़ा 78462 हो जाता है। संपर्क करने पर कुलपति एसके सिंह ने कहा कि नए सत्र में पीजी स्तर पर पहले वर्ष के लिए प्राइवेट परीक्षा नहीं होगी। सिर्फ अंतिम वर्ष के परीक्षार्थियों के लिए यह परीक्षा होगी। उधर, सरकार केंद्रीय विवि का दरवाजा बंद होने के बाद प्राइवेट परीक्षा के विकल्प तलाश कर रही है। इसके लिए मुक्त विवि का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। विवि प्रशासन के साथ इस बाबत बैठक हो चुकी है। विवि प्राइवेट परीक्षा संचालित नहीं करेगा। परीक्षार्थियों को डिस्टेंस लर्निग मोड में परीक्षा देनी होगी। फायदा यह होगा कि परीक्षार्थियों को कम फीस में पाठ्यक्रम के मुताबिक किताबें और असाइनमेंट भी मुहैया कराए जाएंगे।

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