Friday, June 3, 2011

राजनीतिक हलकों में नेगी के इस गीत को लेकर है चर्चा

कमीशन की मीट भात, रिस्बत को रैलो रिस्बत को रैलो रे बसकर भन्डि ना सपोड़ अब कथगा खैल्यो कथगा जि खैल्यो रे यनि घुळुणू रैल्यो, कनुकै पचैल्यो दुख्यरू ह्वे जैल्यो रे कमिसन की.. घुन्ड घुन्डों शिकार सुर्वा कमर कमर भात रे-भात रे भात बासमति भात इथगा खाण पचाण तेरै बसै बात रे मैंगै की मरीं जनता, कनुकै बुथैल्यो रे नयु नयु राज उत्तराखंड आस मा छन लोग-लोग रे बियाणा छन डाम यख, लैन्दा को तेरो जोग कुम्भ नह्येगे भुलू, अब आपदा नह्येल्यो रे नियुकत्यूं की रसमलाई ट्रांसफरूकों हलुवा-हलुवा रे हलुवा सोनहलुवा मालदार विभागुमा तेरा चेलों को जलुवा भन्डि मिट्ठु ना खलौ तौऊं सुगर बढ़ि जालो रे छप्पन डामूकि डडवार कै कैन बांटी बांटी रे बॉटी स्टरडियाकी रबड़ि कथगौन चाटी बारामा चुनौ छ भुलू हैंसल्यो के र्वेल्यो कमिसन को डेंगू रोग सैरि दिल्लीमा फैल्यूं नेता अफसर ल्हीगैनि भोरी भोरि थैल्यू भरिगेनि विदेशी बैंक अब कख कोचैल्यो रे राष्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला-घोटाला रे घोटाला टूजि घोटाला अरबू खरबू को माल लगेयालि छाला ये देसै लाज प्रभो कनुकै बचैल्यो रे।

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