Thursday, June 9, 2011

केंद्रीय टीम पहुंची धारी देवी मंदिर

श्रीनगर गढ़वाल, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय निरीक्षण कमेटी ने मंगलवार को प्रात: धारी देवी मंदिर पहुंचकर पुजारियों, क्षेत्र की जनता से वार्ता करने के साथ ही धारी देवी मंदिर की प्राचीनता के बारे में जानकारियां लीं। धारी देवी मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ भी उन्होंने वार्ता की। धारी देवी मंदिर परिसर में बहुत बड़ी संख्या में परियोजना समर्थक भी पहुंचे थे। उनसे भी कमेटी ने बात की। परियोजना के डेम साइट का भी विस्तार से निरीक्षण किया। मंगलवार को तड़के केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की निरीक्षण टीम के तीनों सदस्य डॉ. संचिता जिंदल, डॉ. नयनज्योत लहरी और डॉ. दास श्रीनगर से लगभग 13 किमी दूर धारी देवी मंदिर पहुंचे। मंदिर समिति के अध्यक्ष विश्वेश्वर पांडे, सचिव विवेक पांडे, पंडित मनीष पांडे, पंडित आशीष पांडे के साथ मंदिर सौंदर्यीकरण के मुद्दे पर उन्होंने विस्तार से वार्ता की। धारी देवी मंदिर की प्राचीनता के बारे में भी जानकारियां लीं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि परियोजना बनाने के लिए यदि मंदिर सौंदर्यीकरण अंतिम विकल्प है तो मंदिर को ऊंचाई पर उठाने के लिए वहां पर मिट्टी बोल्डर डालकर उठाया जाय। मां भगवती का मंदिर जमीन से जुड़ा होना चाहिए। मंदिर सौंदर्यीकरण को लेकर मापदंडों के अनुसार कार्य हो जिसके लिए मॉनिटरिंग कमेटी में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही मंदिर समिति के लोग भी हों। प्रदेश के पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर वह स्वयं भूख हड़ताल करेंगे। आनंद लाल ने कहा कि परियोजना के विरोध में उसे गुमराह कर उसके हस्ताक्षर लिए गए। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने कोटेश्वर में आकर डेम साइट का निरीक्षण किया। जीवीके कंपनी के मुख्य कार्यकारी निदेशक प्रसन्ना रेड्डी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष रेड्डी और ए बहादुर ने जानकारियां दीं। थापली पहुंचकर कमेटी के सदस्यों ने प्रभावित गांवों की जनता से वार्ता की। बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं और पुरुषों का कहना था कि परियोजना का निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाय। राजस्व मंत्री दिवाकर भट्ट ने भी परियोजना का निर्माण कार्य तुरंत शुरू करने पर बल दिया। उमा के विरोध को लोगों ने गैर जिम्मेदार बताया। प्रकृति पर्यावरण संस्थान की अध्यक्ष बीना चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कमेटी के सदस्यों से भेंट कर धारी देवी मंदिर को डूब क्षेत्र से बचाने का अनुरोध किया।

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