Tuesday, July 27, 2010

-शहादत देने वालों में पीछे नहीं उत्तराखंडी

-12 सौ से अधिक पदक जीत चुके हैं सूबे के जांबाज उत्तराखंड को वीरों की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता। लोक गीतों में यहां के शूरवीरों की जिस वीर गाथाओं का जिक्र होता है वह अब सूबे की सीमाओं में ही न सिमट कर देश-विदेश में फैल गई हैं। हर साल यहां के औसतन दर्जन भर जवान देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान करते हैं। कारगिल युद्ध में सूबे के 75 सैनिकों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। ऐसा कोई पदक नहीं जो उत्तराखंड के जांबाजों ने अपने नाम न किया हो। इनकी याद में उत्तराखंड वासियों की पलकें जरूर नम होती हैं, लेकिन शहीदों की वीरगाथा से इनका सीना हमेशा फख्र से चौड़ा रहता है। राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए उत्तराखंडी हमेशा से ही आगे रहे हैं। यहां के युवाओं में सेना में जाने का क्रेज आज भी बरकरार है। यही कारण है कि आईएमए से पास आउट होने वाला हर 12वां अधिकारी उत्तराखंड से है और भारतीय सेना का हर पांचवां जवान भी इसी वीर भूमि में जन्मा है। देश में जब भी कोई विपदा की घड़ी आई तो यहां के जवान अपने फर्ज से पीछे नहीं हटे। उन्होंने अपने सीने पर गोलियां खाकर देश की एकता और अखंडता पर कोई आंच नहीं आने दी। उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर वतन की आन बान और शान को बरकरार रखा है। चाहे भारत-चीन युद्ध में परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा का शौर्य हो या फिर हाल ही में मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए अशोक चक्र विजेता गजेंद्र सिंंह का अदम्य साहस। उत्तराखंड का जवान हमेशा से ही अपने फर्ज को पूरी शिद्दत के साथ निभाता रहा है। स्वतंत्रता से पूर्व यहां के कई वीर ब्रिटिश सेना के लिए भी अपनी जांबाजी दिखा चुके हैं। इसके लिए वह विक्टोरिया क्रास जैसा सम्मान भी पा चुके हैं। इनमें गबर सिंह का नाम आज भी याद किया जाता है। उनके नाम पर आज भी चंबा(टिहरी) में मेला लगाया जाता है। पदकों की सूची परमवीर चक्र- 1 अशोक चक्र- 04 महावीर चक्र- 10 कीर्ति चक्र- 23 वीर चक्र- 95 शौर्य चक्र- 124 उत्तम युद्ध सेवा मेडल -01 युद्ध सेवा मेडल -15 सेना, नो सेना व वायु सेना मेडल- 541 मेंशन इन डिस्पेच -115 कुल - 929 स्वतंत्रता पूर्व वीरता पदक - विक्टोरिया क्रास - 3 - इंडियन आर्डर आफ मैरिट - 53 - मिलिट्री क्रास - 25 - इंडियन डिस्ंिटग्विस्ड सर्विस मेडल - 89 मिलिट्री मेडल - 44 मेंशन इन डिस्पेच- 150 कुल - 364 इनके अलावा यहां के अधिकारी व सैनिक परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजे जा चुके हैं।

-कारगिल के शहीदों को शत-शत नमन

कारगिल युद्ध को बीते ग्यारह साल सूबे के 75 व दून के 18 जांबाजों ने दी थी शहादत pahar1: कारगिल युद्ध को ग्यारह साल हो चुके हैं। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भारतीय सीमाओं में घुसपैठ कर कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारतीय वीर जवानों ने अपने अदम्य साहस और युद्ध कौशल से इन घुसपैठियों को मार भगाया और इन इलाकों में फिर से तिरंगा लहराने लगा। कारगिल युद्ध के दौरान हजारों जवान शहीद हुए। सरकार ने ऑपरेशन विजय और शहीदों की याद में हर वर्ष 26 जुलाई को विजय दिवस मनाने का निर्णय लिया। दून के अमर शहीद 1. मेजर विवेक गुप्ता (महावीर चक्र) देहरादून के वसंत विहार निवासी ले. कर्नल (रिटायर्ड) बृजमोहन गुप्ता के घर 1970 में जन्मे मेजर विवेक गुप्ता 13 जून 1992 को द्वितीय राजपूताना रेजिमेंट में शामिल हुए। कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान 12 जून 1999 को मेजर विवेक गुप्ता ने तोतोलिंग चोटी को पाक घुसपैठियों से मुक्त करते हुए कई आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा। युद्ध के दौरान विवेक गंभीर रूप से घायल हो गए और मात्र 29 वर्ष की आयु में देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इस वीरता और अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र दिया गया। 2. स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर 28 अप्रैल 1962 में ग्राम बड़ोवाला में ठाकुर राजपाल सिंह व हेमवती पुंडीर के घर इस वीर सपूत का जन्म हुआ। उन्होंने 1979 में राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में प्रवेश कर सैन्य जीवन की शुरुआत की। शहीद पुंडीर एक बेहतरीन पायलट होने के साथ एक कुशल खिलाड़ी, गायक व संगीत प्रेमी थे। ऑपरेशन विजय के दौरान शत्रुओं की गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए उन्होंने उड़ान भरी। वह दुश्मनों के क्षेत्र में शत्रुओं की गतिविधियों का जानकारी हासिल कर रहे थे कि पाकिस्तानी घुसपैठियों ने मिसाइल से उनके हेलीकॉप्टर पर हमला कर दिया। इस हमले में राजीव वीरगति को प्राप्त हुए। 3. नायक बृजमोहन (वीर चक्र) देहरादून के ग्राम तुनवाला में एक जून 1975 में माधो सिंह नेगी के घर इस वीर सपूत का जन्म हुआ। शुरू से सेना में जाने की ललक के चलते बृजमोहन 9 पैरा कमांडों में भर्ती हुए। मई 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें कश्मीर में तैनाती मिली। एक जुलाई को पाकिस्तानी घुसपैठियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारत मां का यह लाडला बृजमोहन मात्र 24 वर्ष की युवावस्था में देश के लिए शहीद हो गया। मरणोपरांत बृजमोहन को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 4. रायफलमैन नरपाल सिंह पट्टी मालकोट में सुरेंद्र सिंह के घर एक जुलाई 1969 को नरपाल सिंह का जन्म हुआ। बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह गढ़वाल रायफल में भर्ती हुए। कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान उन्हें द्रास सेक्टर में तैनाती मिली। 29 जून 1999 को यह वीर सपूत अपने साथियों को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। 5. रायफलमैन रमेश कुमार थापा देहरादून के इस लाडले ने वर्ष 1976 में अनारवाला निवासी सर्वजीत थापा के घर जन्म लिया। प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद वह 5/3 गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हुए। ऑपरेशन विजय के दौरान उनकी यूनिट को 32 राष्ट्रीय रायफल के साथ लगाया गया। पांच जुलाई 1999 को कारगिल में दुश्मनों को खदेड़ते हुए दून का यह जाबांज शहीद हो गया। 6. नायक कृष्ण बहादुर भारत के इस वीर सपूत का जन्म 24 जून 1964 में सेलाकुई निवासी मोहन सिंह थापा के घर हुआ था। हाईस्कूल पास करने के बाद वह 4/3 गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हो गए। ऑपरेशन विजय के दौरान बटालिक सेक्टर को मुक्त कराते हुए 11 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए। 7. रायफलमैन जयदीप सिंह भंडारी शहीद जयदीप सिंह भंडारी का जन्म 15 जनवरी 1978 को नेहरूग्राम निवासी बचन सिंह भंडारी के घर हुआ। इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर वह 17 गढ़वाल रायफल में भर्ती हुए। निशानेबाजी और बाक्सिंग के शौकीन जयदीप ने कई पदक भी हासिल किए। ऑपरेशन विजय के दौरान उन्हें बटालिक सेक्टर की जुबार हिल में तैनाती मिली। दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीस जून को उत्तराखंड का यह जाबांज 21 वर्ष की आयु में वीरगति को प्राप्त हुआ। 8. लांस नायक शिवचरण शहीद शिवचरण प्रसाद का जन्म 12 मई 1973 को अनारवाला निवासी सदानंद के घर हुआ। बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद व सेना में भर्ती हो गए। ऑपरेशन विजय में मश्को घाटी में दुश्मनों से लोहा लेते हुए छह जुलाई को इस वीर सपूत ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। 9. राजेश गुरुंग अमर शहीद राजेश गुरूंग का जन्म 1975 को चांदमरी, घंघोड़ा निवासी श्याम सिंह गुरूंग के घर हुआ। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे नागा रेजीमेंट में भर्ती हो गए। कारगिल में दुश्मनों से मुकाबले करते हुए छह जुलाई को राजेश वीरगति को प्राप्त हुए। 10. तेंगजिंग नमखा कारगिल शहीद तेंगजिंग नमखा का जन्म विकासनगर निवासी नोरबू थुंडुप के घर 1979 में हुआ था। सातवीं परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे सेना में भर्ती हुए। युद्ध के दौरान व अपनी कंपनी के साथ तुरतुक सेक्टर में तैनात थे। 19 जुलाई को यह जाबांज मातृभूमि की रक्षा करता हुआ शहीद हो गया। 11. जय सिंह नेगी अमर शहीद जय सिंह नेगी का जन्म नया गांव मल्हान निवासी शिवराज सिंह नेगी के घर 20 दिसंबर 1977 को हुआ। इंटरमीडिएट करने के बाद वे गढ़वाल रायफल्स में भर्ती हो गए। ऑपरेशन विजय के दौरान मश्कोह घाटी में दुश्मनों से लोहा लेते हुए सात जुलाई 1999 को भारत मां के इस लाडले ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। दून के अन्य शहीदों में 12. नायक मेख बहादुर गुरुंग, निवासी डाकरा कैंट, देहरादून 13.कैलाश कुमार, ग्राम डांडी, रानीपोखरी देहरादून 14. देवेंद्र सिंह, शांति विहार, गढ़ी कैंट, देहरादून 15. संजय गुरुंग, ग्राम नवादा, देहरादून 16. जिगमे सोनम, तिब्बत कालोनी, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून 17. नायक विजय सिंह भंडारी, प्रेमनगर 18.नायक कश्मीर सिंह वीर चक्र, आमवाला, नींबूवाला, देहरादून शेष स्थानों से कितने हुए शहीद पौड़ी - नायक मंगत सिंह - रायफलमैन मान सिंह - लांस नायक मदन सिंह - रायफलमैन कुलदीप सिंह - नायक धर्म सिंह चमोली - हवलदार पदम राम - रायफलमैन सतीश चंद - रायफलमैन रंजीत सिंह - नायक दिवाकर सिंह - लांस नायक कृपाल सिंह - नायक हीरा सिंह - सिपाही हिम्मत सिंह - नायक आनंद सिंह रुद्रप्रयाग - रायफलमैन भगवान सिंह - नायक गोविंद सिंह - नायक सुनील दत्त टिहरी - रायफलमैन दलबीर सिंह - रायफलमैन विरेंद्र लाल - लांस नायक दिनेश दत्त - रायफलमैन बिक्रम सिंह - नायक शिव सिंह - सिपाही सुंदर सिंह - रायफलमैन राजेंद्र सिंह - नायक जगत सिंह - रायफलमैन बिजेंद्र सिंह - सुबेदार प्रताप सिंह - नायक सुबाब सिंह - रायफलमैन दिलवर सिंह लैंसडौन - नायक हरेंद्र सिंह - लांस नायक सुरमन सिंह - रायफलमैन डबल सिंह - नायक अनिल सिंह - लांस नायक देवेंद्र प्रसाद - नायक ज्ञान सिंह - नायक सुरेंद्र सिंह - हवलदार मदन सिंह - रायफलमैन बलबीर सिंह नेगी - नायक भरत सिंह - सिपाही भरत सिंह - रायफलमैन अनसुया प्रसाद ध्यानी उत्तरकाशी - रायफलमैन दिनेश चंद्र नैनीताल - मेजर आरएस अधिकारी - लांस नायक चंदन सिंह - लांस नायक राम प्रसाद - सिपाही एमसी जोशी पिथौरागढ़ - रायफलमैन जौहर सिंह - नायक किशन सिंह - हवलदार गिरीश ंिसह - पीटीआर कुंडल सिंह अल्मोड़ा - लांस नायक हरी सिंह देवडी - नायक हरी बहादुर घले - हवलदार तम बहादुर क्षेत्री - कैप्टन आदित्य मिश्रा बागेश्वर - पीटीआर राम सिंह बोरा - सिपाही मोहन सिंह - हवलदार हरी सिंह थापा ऊधमसिंह नगर - रायफलमैन अमित नेगी भुला दिए जाते हैं शहीद कारगिल शहीदों के लिए मात्र विजय दिवस मनाकर सरकार व प्रशासन अपने कार्यों की इतिश्री कर लेता है, लेकिन शहीदों के परिजन और गांव वाले एकत्र होकर अपने लाडलों को याद करते हैं। शहीद नरपाल सिंह - 29 जून शहीद बृजमोहन सिंह - 1 जुलाई शहीद विवेक गुप्ता - 12 जून शहीद रमेश कुमार थापा- 5 जुलाई शहीद जय दीप सिंह नेगी- 30 जून शहीद शिव चरण- 6 जुलाई शहीद राजेश गुरुंग - 6 जुलाई शहीद जय सिंह नेगी- 7 जुलाई शहीद तेंजिग नेमखा- 11 जुलाई शहीद कृष्ण बहादुर- 11 जुलाई

Saturday, July 24, 2010

बारह हजार पदों पर नियुक्तियां जल्द

-कैबिनेट ने लिए महत्वपूर्ण फैसले, तीन माह में शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया -राज्य लोक सेवा आयोग के दायरे में समूह-ग की भर्ती को रोजगार दफ्तर में पंजीकरण अनिवार्य -आयोग से बाहर के पदों की भर्ती परीक्षा कराएगा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद, आवेदकों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट -तकनीकी शिक्षा महकमे के तहत होंगे आईटीआई और पालीटेक्निक -आईटीआई के आठ नए ट्रेडों को मंजूरी, मृतप्राय: ट्रेडों के पद होंगे कन्वर्ट pahar1- प्रदेश में समूह-ग की भर्तियों में अब स्थानीय युवाओं को रोजगार के ज्यादा मौके मिलेंगे। इस श्रेणी में राज्य लोक सेवा आयोग के पदों पर भर्ती की पात्रता के लिए अब रोजगार दफ्तर में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। आयोग से बाहर और उसके दायरे के तकरीबन 12 हजार पदों पर तीन माह में भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। भर्ती परीक्षा के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की बढ़ोत्तरी की गई है। साथ ही आईआईटी व पालीटेक्निक अब तकनीकी शिक्षा का हिस्सा होंगे। राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। सचिवालय में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के निर्णयों को मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि सूबे में समूह-ग के रिक्त 12 हजार पदों में तकरीबन 1500 पद आयोग के परिधि में हैं, जबकि 10500 पद इससे बाहर हैं। आयोग से बाहर समूह-ग के पदों पर भर्ती के लिए राज्य के सेवायोजन दफ्तरों में पंजीकरण अनिवार्य है। पड़ोसी राज्य हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। आयोग के पदों पर भर्ती के लिए रोजगार दफ्तर में पंजीकरण जरूरी होगा। यही नहीं समूह-ग के लिए आयोग की लिखित परीक्षा अथवा साक्षात्कार में भी राज्य की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विशिष्ट रीति-रिवाज से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। समूह-ग की भर्ती के नए प्रावधानों को सेवा नियमावली में शामिल किया जाएगा। विभिन्न महकमों में इन पदों के लिए अलग-अलग के बजाए एक नियमावली होगी। तृतीय श्रेणी के इन 12 हजार पदों को जल्द भरा जाएगा। आयोग के बाहर के साढ़े दस हजार पदों के लिए भर्ती परीक्षा का जिम्मा प्राविधिक शिक्षा परीक्षा परिषद रुड़की को दिया गया है। परिषद की चयन समिति इस कार्य को अंजाम देगी। भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। इस परीक्षा में 40 वर्ष आयु के युवा आवेदन कर सकेंगे। यह व्यवस्था सिर्फ मौजूद वर्ष के लिए लागू होगी। इसके बाद पहले से तय आयु सीमा 35 वर्ष लागू रहेगी। समूह-ग की भर्ती प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियों पर चर्चा के बाद कैबिनेट ने यह निर्णय लिया। अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के गठन पर भी कैबिनेट में चर्चा की गई, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया गया। तकनीकी शिक्षा का कैनवास अब बड़ा हो गया। इसके दायरे में अब आईटीआई भी होंगे। विशेष तौर पर आईटीआई संचालित कर रहा प्रशिक्षण महकमा अब तकनीकी शिक्षा के अधीन होगा। विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पालीटेक्निक भी तकनीकी शिक्षा की एक छतरी के नीचे होंगे। तकनीकी कौशल से जुड़े सर्टिफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री कोर्स की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए तकनीकी शिक्षा का एकीकरण किया गया है। अलबत्ता, एक महकमे के तहत दोनों निदेशालय बदस्तूर काम करेंगे। मुख्य सचिव के मुताबिक नई व्यवस्था में आईटीआई पास करने वालों को पालीटेक्निक में लेटरल इंट्री का मौका देने पर विचार किया जाएगा। आईटीआई में आठ नए कोर्स को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इनमें एडवांस मॉड्यूल आटोमोबाइल सेक्टर, एडवांस मॉड्यूल इलेक्ट्रिकल सेक्टर, एडवांस मॉड्यूल प्लांट प्रोसेसिंग, लाइब्रेरी एंड इनफोरमेशन साइंस, हास्पिटल हाउसकीपिंग, हेयर एंड स्किन केयर, डेंटल टेक्निशियन व फ्रंट आफिस असिस्टेंट शामिल हैं। इंडस्ट्रीज और रोजगार की जरूरत को ध्यान में रखकर नए ट्रेड तैयार किए गए। नए ट्रेड के लिए अलग से अनुदेशकों के नए पद सृजित नहीं किए जाएंगे। मृतप्राय: अथवा जिन ट्रेड की मांग बेहद कम हो गई है, उनके रिक्त पदों को नए में कन्वर्ट किया जाएगा। इससे सरकार पर वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कैबिनेट ने हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय उत्तरांचल के नए नाम हिमगिरी जी विश्वविद्यालय उत्तराखंड को मंजूरी दी। इसके लिए निजी विवि अधिनियम में आंशिक संशोधन होगा। इस मौके पर तकनीकी शिक्षा प्रमुख सचिव राकेश शर्मा, उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव पीसी शर्मा व मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डीके कोटिया भी मौजूद थे।

नैनीताल तक नहीं पहुंचेगी ट्रेन!

- अत्यधिक लंबा रूट व भूगर्भीय संरचना बनी बाधक - कच्ची पहाडिय़ों के दरकने का खतरा - चीफ इंजीनियर कर चुके हैं प्री-फिजिबिलटी स्टडी - आजादी से पूर्व भी हो चुकी है कवायद हल्द्वानी (नैनीताल): विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल तक ट्रेन का सफर शुरू हो पाने की कवायद को प्रथम चरण में ही तगड़ा झटका लगा है। हाल ही में रेलवे बोर्ड ने काठगोदाम से नैनीताल तक रेलवे लाइन बिछाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय से चीफ इंजीनियर भी यहां का प्राथमिक मुआयना (प्री-फिजिबिलिटी स्टडी) कर चुके हैं। यहां के लंबे रूट, दरकती तथा कमजोर पहाडिय़ों ने इस राह को मुश्किल बना दिया है। खूबसूरत झील के चारों ओर बसा नैनीताल शहर देश से ही नहीं विदेश से भी हजारों पर्यटकों को हर वर्ष अपनी ओर आकर्षित करता है। झील के अलावा आसपास के तमाम पर्यटन स्थल सैलानियों के जेहन में उत्तराखंड की विशेष तस्वीर पेश करते हैं। भीमताल, सातताल, भवाली, सूखाताल सहित आसपास के सुंदर पर्यटक स्थल नैनीताल आने वाले सैलानियों को आकर्षित करते हैं। राज्य की पहचान में भी नैनीताल का अहम रोल है। इसी को देखते हुए रेलवे ने कुमाऊं के अंतिम स्टेशन काठगोदाम से नैनीताल तक रेलवे लाइन बिछाने की बात कही। पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक यूसी द्वादशश्रेणी ने मई में काठगोदाम के वार्षिक निरीक्षण के दौरान बोर्ड की मंशा को सार्वजनिक भी किया था। तभी से कुमाऊं वासियों की आशाओं को मानो पंख लग गए थे। उन्होंने इसके लिए जुलाई में प्री फिजीबिलिटी स्टडी कराने के निर्देश दिए थे। इधर इसी माह पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर से चीफ इंजीनियर टीम सहित यहां का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इस स्टडी के जो रिजल्ट सामने आए है उसने पहाड़ पर ट्रेन चढऩे की कवायद को फिर तगड़ा झटका लगा दिया है। स्टडी में एक ओर काठगोदाम से नैनीताल की रेल लाइन के लिहाज से स्थलीय दूरी को अत्यधिक पाया गया है। दूसरी ओर दरकती पहाडिय़ों का खतरा भी बाधा बना। स्टडी के मुताबिक काठगोदाम से नैनीताल की हवाई दूरी करीब 16 किमी और सड़क मार्ग से 35 किमी है। वहीं रेल लाइन के लिहाज से यह करीब 250 किमी होगी। ऐसे में अत्यधिक लंबे रूट के चलते योजना का खर्च भी बहुत अधिक हो जाएगा। जानकारों के मुताबिक यहां की पहाडिय़ां भी अत्यंत कमजोर हैं और इनके दरकने का खतरा भी अधिक है। इतना ही नहीं आजादी से पूर्व पहाडिय़ों पर ट्रेन चढ़ा चुके अंग्रेजों ने भी नैनीताल तक रेलवे लाइन बिछाने की कवायद शुरू की थी। वर्ष 1930 से 35 के बीच इसकी पहल हुई थी, लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी थी। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) अमित सिंह ने बताया कि प्री-फिजीबिलिटी स्टडी में इस रूट की लंबाई अत्यधिक पाई गई है। इससे फिलहाल यहां ट्रेन संचालन की कोशिश मुश्किल हो गई है। अब प्री फिजीबिलिटी स्टडी में ही रेल लाइन बन पाने की संभावनाओं पर लगे विराम से कुमाऊं वासियों के साथ-साथ पर्यटन व्यवसाय को भी तगड़ा झटका लगा है।

कदमों को हौसला मिले तो नाप डालेंगे दूरियां

- मध्यम-लंबी दूरी के एथलीट कर रहे अंतर्राष्ट्रीय फलक पर सूबे का नाम रोशन - कसक बस इतनी कि बढ़ते कदमों को कोई प्रोत्साहन देेने वाला नहीं - सुविधाओं की कमी बन रही प्रतिभाओं की राह में रोड़ा केरल की तर्ज पर सूबे में भी डेवलप हो एथलेटिक्स एकेडमी देहरादून: बढ़ते कदमों को हौसला मिलता रहे तो मंजिल आसान हो जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखा रहे हैं सूबे के मध्यम-लंबी दूरी के एथलीट। अपने प्रदर्शन से उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय फलक पर सूबे का नाम रोशन किया है। कसक है तो बस इतनी कि उनके बढ़ते कदमों को कोई प्रोत्साहन देेने वाला नहीं मिल पा रहा। वर्तमान में प्रदेश के लंबी-मध्यम दूरी के धावकों ने देशभर में अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ी है। ओलंपियन सुरेंद्र भंडारी, पंकज डिमरी, ईलम सिंह, प्रीतम बिंद आदि ऐसे नाम हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहचान कायम की है। पंकज डिमरी ने हाल ही में एशियन ग्रां प्री 'एकÓ व 'दोÓ में कांस्य व रजत पदक जीतकर प्रदेश का झंडा बुलंद किया। ईलम सिंह के अलावा लंबे अर्से बाद ट्रैक पर लौटे प्रीतम सिंह ने भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। इन दिनों ये सभी धावक इंटर स्टेट चैंपियनशिप के साथ-साथ कॉमनवेल्थ की तैयारी के लिए पसीना बहा रहे हैं। सूबे की अंतर्राष्ट्रीय महिला एथलीट किरन तिवारी भी कॉमनवेल्थ की तैयारियों में जुटी हैं। पिछले कुछ समय से उत्तराखंड मध्यम व लंबी दूरी के धावकों की नर्सरी के रूप में उभरा है। इस सब के बावजूद मूलभूत सुविधाओं और प्रोत्साहन की कमी प्रतिभाओं की राह में रोड़ा बन रही है। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक पर प्रदेश का नाम चमका रहे एथलीट अभी भी सरकार से सम्मान की आस लिए हुए हैं। इंटर स्टेट चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे पंकज डिमरी का कहना है कि पिछले दो साल में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद अभी तक उन्हें प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। सरकार ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों के लिए पुरस्कार राशि की घोषणा तो कर दी, मगर कब देगी, इसका किसी को पता नहीं। प्रीतम बिंद का कहना है कि खिलाडिय़ों की हौसलाअफजाई के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। वह कहते हंै कि सूबे में सिंथेटिक ट्रैक की बेहद जरूरत है। इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द व्यवस्था करनी चाहिए। एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव संदीप शर्मा कहते हंै कि लंबी-मध्यम दूरी में प्रदेश के धावकों ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय जो चमक बिखेरी है, इसके लिए उन्हेें प्रोत्साहन मिलना ही चाहिए। इससे युवा एथलीट भी प्रेरित होंगे। इसके अलावा विभागों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे एथलीटों के सहयोग को आगे आएं। पूर्व अंतर्राष्ट्रीय एथलीट विनोद पोखरियाल का कहना है कि केरल की तर्ज पर यहां भी एथलेटिक्स एकेडमी डेवलप करने की जरूरत है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलने से अन्य स्पर्धाओं में भी सूबे के खिलाड़ी अपनी चमक बिखेर सकेंगे।

Thursday, July 1, 2010

उत्तराखण्ड राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशकों के पदों पर भर्ती के लिये विज्ञापन

अनुदेशक भर्ती विवरणिका-2010 (आवेदन पत्र सहित) उत्तराखण्ड राज्य की वेबसाईट www.gov.ua.nic.in OR www.ubter.in से अथवां जिले की नोडल आई0टी0आई0 से दिनांक 22-06-2010 से रु0 50/- अतिरिक्त शुल्क देकर प्राप्त कर सकते है। पूर्ण आवेदन प़त्र ,समस्त शैक्षिक योग्यता एवं अन्य वांछित प्रमाण पत्रों सहित सामान्य / अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यथियों के लिए रु0 500/-और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति के अभ्यर्थियां के लिए रु0 250/- का बैंक ड्राप्ट जो कि सचिव ,उत्तराखण्ड प्राविधिक शिक्षा परिषद रुड़की को देय हो के साथ दिनांक 13-07-2010 तक पंजीकृत डाक/स्पीडपोस्ट /स्वयं द्वारा निदेशक , व्यवसायिक परीक्षा परिषद, आई0टी0आई0 (युवक) कैम्पस निरंजनपुर देहेहरादून-248001 कार्यालय में प्राप्त हो जाने चाहिए ।

क्वींस बेटन का उत्तराखंड में होगा शानदार अभिनंदन

-छह जुलाई को पांवटा साहिब से सूबे की सीमा में प्रवेश करेगी क्वींस बेटन रैली में बिखरेगी गढ़वाली-कुमाऊंनी संस्कृति की छटा परेड ग्राउंड पर आयोजित होगा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम -हरिद्वार में गंगा आरती में शरीक होगी 'क्वींस बेटन रिलेÓ pahar1- राष्ट्रकुल खेलों की मशाल क्वींस बेटन के स्वागत के लिए प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। रैली में स्कूली बच्चों को शामिल करने के साथ ही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। कुल्हाल गेट से सूबे की सीमा में प्रवेश करने वाली क्वींस बेटन विभिन्न रास्तों से होते हुए परेड ग्राउंड तक पहुंचेगी। एडीएम प्रशासन विनोद कुमार सुमन के मुताबिक रैली की तैयारियों के लिए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैैं। हरिद्वार में सात जुलाई को क्वींस बेट रिले गंगा आरती में शामिल होगी । छह जुलाई को क्वींस बेटन हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब की ओर से उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेगी। अपराह्न लगभग तीन बजे कुल्हाल गेट पर मशाल के जनपद की सीमा में प्रवेश करने पर इसका जोरदार स्वागत किया जाएगा। प्रेमनगर से राष्ट्रकुल खेलों की मशाल को मोटरसाइकिल रैली द्वारा एस्कार्ट किया जाएगा। राजभवन गेट के पास से उत्तराखंड की दो सांस्कृतिक टीमें (एक गढ़वाली तथा एक कुमाऊंनी) एक बड़े ट्रक पर रैली में शामिल होंगी। ट्रक पर बने प्लेटफार्म पर उत्तराखंड की सांस्कृतिक झलकियों की छटा बिखेरते हुए क्वींस बेटन परेड ग्राउंड तक पहुंचेगी। खेल विभाग द्वारा तय किए गए खिलाड़ी राजभवन गेट से इसे रिले के रूप में परेड ग्राउंड तक लाएंगे। गांधी पार्क के आगे के रास्ते पर लगभग एक हजार स्कूली बच्चे रैली का स्वागत करेंगे। परेड ग्राउंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इसके लिए वहां वाटर प्रूफ पंडाल तैयार किया जाएगा। हरिद्वार: कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 की क्वींस बेटन रिले सात जुलाई को अलसुबह शहर में प्रवेश करेगी। सबसे पहले गंगा आरती में शरीक होने के बाद यह मशाल राफ्ट के जरिये बिरला घाट तक पहुंचेगी। इसके बाद यहीं से यह मशाल हेलीकॉप्टर के माध्यम से श्रीनगर गढ़वाल के लिए रवाना हो जाएगी। इसके स्वागत के लिए जिला प्रशासन तैयारियों में लग गया है। मंगलवार को क्वींस बेटन रिले के स्वागत की तैयारियों की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी डा. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अतिथि देवो भव: की तर्ज पर रिले का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रिले सुबह 5.10 बजे हर की पैड़ी स्थित गंगा आरती में शामिल होने के बाद राफ्ट के जरिये बिरला घाट पहुंचेगी। नैनीताल: राष्टï्रकुल खेलों की मशाल 'क्वींस बेटन रिलेÓ का 7 जुलाई को नैनीताल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। स्वागत समारोह में शहर के विभिन्न संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। जिलाधिकारी शैलैश बगौली की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक बैठक आयोजित की गयी, जिसमें स्वागत समारोह की तैयारियों पर विचार विमर्श किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि तय कार्यक्रम के अनुसार राष्टï्रकुल खेलों की मशाल क्वींस बेटन रिले 7 जुलाई को हैलीकाप्टर से कैलाखान हैलीपैड पहुंचेगी। उसके बाद वह नैनीताल क्लब के लिए रवाना होंगी। यहां तल्लीताल बस स्टैण्ड पर क्वींस वेटन रिले का छोलिया नृतकों द्वारा परम्परागत ढंग से स्वागत किया जाएगा।