Thursday, February 25, 2010

हर जगह मिलेगी झंगोरे की खीर

पर्वतीय क्षेत्रों के व्यंजनों और जैविक फसलों को देश-दुनिया में मशहूर करने की पहल Pahar1- जल्द ही आपको अगर राजधानी देहरादून में देशी-विदेशी पर्यटक झंगोरे की खीर, फाणू, कफली, बाड़ी, गंजड़ू, धबड़ी, मंडुए की रोटी, रैम्वडि़, चुरक्याणी, ठठ्वाणी, भट्वाणी, भट का जौला जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेते दिखाई दिए तो अचरज न करें। सब कुछ ठीकठाक रहा तो प्रदेश में पहली बार ऐसे ग्रीन रेस्टोरेंट खुलेंगे। जहां पर्यटक मंडुआ, झंगोरा, कौणी, मक्का, कुट्टू, गहत, चौलाई, मास, रंयास और अन्य जैविक फसलों के स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद ने प्रदेश के कम मशहूर स्थानीय व्यंजनों को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय करने का बीड़ा उठाया है। इस शुभ कार्य की शुरुआत के लिए परिषद ने पहले देहरादून को ही चुना है। ग्रीन रेस्टोरेंट स्थापित करने, और चलाने के लिए परिषद ने एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट आमंत्रित की हैं। परिषद की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी बिनीता शाह के मुताबिक अब तक ग्रीन रेस्टोरेंट के लिए चार आवेदन भी आ चुके हैं। उनका कहना है कि ग्रीन रेस्टोरेंट की अवधारणा उत्तराखंड के लिए कुछ नई है। परिषद की इन ग्रीन रेस्टोरेंट में लोगों को पूरी तौैर पर जैविक तरीके से उत्पादित फसलों से बने व्यंजन परोसने की योजना है। इन रेस्टोरेंट को स्थापित कराने का एक बड़ा उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के व्यंजनों को मशहूर करना भी है। बिनीता शाह का कहना है कि पर्यटक जब भी किसी प्रदेश में जाते हैं तो जब वे लौटते हैं तो उनकी जुबान पर वहां के किसी न किसी व्यजंन का स्वाद और नाम होता है। उत्तराखंड के व्यंजन अभी इतने मकबूल नहींहो पाए हैं। ऐसे में ग्रीन रेस्टोरेंट इस उद्देश्य को पूरा कर पाएंगे। उनका कहना है कि दरअसल आज दुनिया भर में खासकर यूरोप और अमेरिका आदि में लोग जैविक उत्पादों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में ग्रीन रेस्टोरेंट में अगर जैविक तरीके से उगाई गई फसलों से बने स्थानीय व्यंजन परोसे जाएंगे तो एक ओर विदेशी पर्यटक उनकी ओर आकर्षित होंगे और दूसरी ओर उत्तराखंड के व्यंजन अंतर्राष्ट्रीय ख्याति पा सकेंगे। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वैसे भी अभी रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बगैर ही फसलें उगाई जाती हैं। ऐसे में प्रदेश भर में ग्रीन रेस्टोरेंट खुलेंगे तो पर्वतीय किसानों को सीधा लाभ होगा क्योंकि ग्रीन रेस्टोरेंट में केवल जैविक फसल उत्पादों

No comments:

Post a Comment