Thursday, February 25, 2010

-निर्मल को सालता रहा पहाड़ की महिलाओं का दर्द

-कठिन संघर्षों के साथ किया बालीवुड का सफर तय -उपलब्धियों पर समूचा ग्रामीण भारत गौरवान्वित नैनीताल: प्रसिद्ध अभिनेता निर्मल पांडे ने साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद बालीवुड में जिस तरह अपनी असाधारण अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया उससे उत्तराखंड ही नहीं पूरा ग्रामीण भारत गर्व महसूस कर रहा है। उनके साथियों के अनुसार पहाड़ में ग्रामीण महिलाओं की बेहद जटिल जीवन चर्या का दर्द निर्मल को हमेशा सालता रहा। जागरण ने शुक्रवार को अभिनेता निर्मल पांडे के साथियों व रंगकर्मियों के अलावा सिने कलाकार हेमंत पांडे से बातचीत की तो सभी ने उनकी अभिनय क्षमता को अद्वितीय बताया। नाट्य संस्था युगमंच के जरिए नाटकों में अमिट छाप छोड़ चुके निर्मल के बारे में संस्था के अध्यक्ष जहूर आलम का कहना था कि निर्मल पांडे ने साधारण परिवार में जन्म लेकर मेहनत व अपनी निष्ठा से जो मुकाम फिल्म इंडस्ट्री व रंगमंच के क्षेत्र में हासिल किया, उसकी भरपाई होना निकट समय में मुश्किल है। जहूर आलम के शब्दों में निर्मल बेहद कर्मठ व उदयीमान कलाकार थे। उनके जाने से रंगमंच मेें शून्य पैदा हो गया है। उन्होंने बताया अंग्रेजी का ज्ञान कम होने पर भी निर्मल ने अंग्रेजी नाटकों के डॉयलाग याद कर अभिनय के झंडे गाड़े। उन्होंने बताया नाटक के रिहर्सल में जरा सी देरी होने पर वह साथी कलाकारों पर बिगड़ जाते थे। उन्होंने कहा निर्मल पांडे ने काम व प्रतिभा के दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना सभी कलाकार करते हैं। राष्टï्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली में अध्ययन के दौरान निर्मल पांडे के रूम पार्टनर रहे रंगकर्मी एम दिलावर बताते हैं कि सीआरएसटी के सिल्वर जुबली समारोह में निर्मल ने नाटक 'एक कफन औरÓ में अभिनय कर तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी को खासा प्रभावित किया था। वह बताते हैं कि निर्मल रंगमंच का निपुण कलाकार थे और साथी कलाकारों को भी प्रेरित करता थे। निर्मल पांडे ने वर्ष 1992 में श्रीराम सेवक सभा द्वारा आयोजित होली महोत्सव में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाई। निर्मल के सीनियर रहे व पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल बताते हैं कि अभिनेता होने के बावजूद निर्मल पाण्डे पहाड़ के विकास के प्रति हमेशा चिंतित रहे। वर्ष 2002 में हुए राज्य के पहले विस चुनाव में पहली फरवरी को निर्मल पांडे ने कालाढूंगी, भीमताल व भवाली में उक्रांद के पक्ष में जनसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय ताकतों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। इनसेट ग्रामीण भारत ने खोया उभरता सितारा: हेमंत नैनीताल: सिने अभिनेता निर्मल पांडे के अचानक संसार से विदा होने पर टीवी कलाकार हेमंत पांडे भी बेहद दु:खी हैं। दूरभाष पर हुई बातचीत में उनका कहना था-'छोटे से शहर से इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना बहुत मायने रखता है। भारत के गांवों से सैकड़ों कलाकार मुंबई आते हैं, लेकिन कम ही लोगों को मुकाम हासिल हो पाता है, निर्मल पाण्डे सभी में भाग्यशाली रहेÓ। निर्माता-निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में निर्मल के साथ काम कर चुके हेमंत का कहना था निर्मल ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया। निर्मल का अचानक इस संसार से विदा होने से उत्तराखंड ही नहीं समूचे ग्रामीण भारत के कलाकारों को झटका लगा है। हेमंत की निर्मल से आखिरी मुलाकात करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मुंबई में प्रवासी उत्तराखण्ड के लोगों द्वारा आयोजित संगीत संध्या में हुई थी। निर्मल की घड़ी बनी अनमोल निशानी नैनीताल: अभिनेता निर्मल पांडे द्वारा रंगकर्मी जहूर आलम को भेंट की गई जापानी घड़ी अब उनकी अनमोल निशानी बन गई है। जहूर बताते हैं कि जापान में शूटिंग से लौटकर जब निर्मल घर आया तो उन्हें भेंट स्वरूप घड़ी प्रदान की। जहूर मानते हैं कि यही घड़ी हमेशा उन्हें निर्मल की याद ताजा कराती रहेगी।

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