Thursday, February 25, 2010

पानी: खुद से ही जंग की तैयारी में पहाड़

- चोटियों व मध्य ऊंचाई के लोगों की प्यास बुझाने में विफल घाटियों की नदियां शासन और विभाग ने किया पुख्ता तैयारियों को दावा Pahar1-चोटियों तथा मध्य ऊंचाई पर बसे गांवों की प्यास बुझाने में पहाड़ की घाटियों में बहती नदियां विफल रही हैं। इस बार कम बफबारी-वर्षा की वजह से पहाड़ों पर आने वाले पेयजल संकट की आहट पहले से ही सुनी जा सकती है। यह संकट आभास दे रहा है कि इस बार पानी के लिए पहाड़ को खुद से ही बड़ा युद्ध लड़ना होगा। बर्फबारी और बारिश पहाड़ के पेयजल स्रोतों को जीवन देते हैं। पिछले कई सालों से कम बर्फबारी और कम बारिश के साथ ही पर्यावरण हानि की वजह से सूख रहे स्रोतों के सामने नया संकट उठ खड़ा हुआ है। शासन स्तर पर इस संकट से बचने के लिए प्रयास करने के दावे किए जा रहे हैं पर इन पर बहुत विश्वास करने को कोई तैयार नहीं है। पेयजल सचिव एमएच खान बताते हैं कि गरमी में पेयजल संकट की आहट अभी से सुनी जा सकती है। कोशिश है कि योजनाएं पूर्ण होने के करीब हैं, उन्हें तेजी से मुकाम तक पहुंचाया जाए। श्री खान स्वीकार करते हैं कि अधिकांश जल स्रोतों पर पानी की मात्रा कम हो रही है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि कहां पानी की उपलब्धता सबसे कम होगी, ताकि वहां के लिए कंटिजेंसी प्लान अभी से तैयार किए जा सकें। पिथौरागढ़ समेत उन तमाम शहरों में मिनी ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं, जहां पानी की समस्या अधिक है। सूत्रों ने बताया कि पौड़ी को पानी देने वाली श्रीनगर पंपिंग योजना की पुरानी मशीनों को बदला जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द ही यह काम हो जाए, ताकि पूरी क्षमता से पौड़ी को पानी मिलता रहे। पौड़ी में दो ट्यूबवैल बनाए हैं पर ग्रामीणों के विरोध से उन्हें संचालित नहंी किया जा सका है। विरोध करने वालों का मानना है कि यदि ये ट्यूबवेल चलेंगे तो उनके प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाएंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष के सहयोग से ग्रामीणों को सही जानकारी दी जा रही है, साथ ही इन ट्यूबवेलों से उन्हें पानी देने की योजना भी बनाई जा रही है। विभागीय सचिव की मानें तो पहाड़ों में दूसरे स्थानों पर और हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। एससी-एसटी क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता से पेयजल योजनाएं बनाई जा रही हैं। कोशिश की जा रही है कि पानी की कमी को वितरण में निपुणता लाकर पूरा किया जा रहा है। पेयजल योजनाओं के आड़े धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।

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