Tuesday, February 2, 2010

'एमटीएम' बनने की राह पर पहाड़ की नारी

सरकार के होमवर्क से प्रतिभा निखारने को तैयार 'आधी आबादी' बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार होगा मुख्य फोकस 'पहाड़ की नारी, सब पर भारी' का जुमला इस साल चरितार्थ होने की दहलीज पर है। सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने का होमवर्क पूरा कर चुकी है तो देहात से लेकर शहर तक की नारी मल्टी टास्क मैनेजर (एमटीएम) की भूमिका निभाने को तैयार है। खेत-खलिहान से लेकर आफिस और घर-परिवार से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक महिलाएं अपनी प्रतिभा से किसी को भी हतप्रभ कर सकती हैं। उन्हें केवल प्रोत्साहन की दरकार है और इसका ताना-बाना बुना जा चुका है। देवभूमि की जुझारू और संघर्षशील नारी को अगर जरूरत है तो केवल उचित अवसर की। उनके पास काबलियत भी है और कुछ करने का जज्बा भी। नववर्ष में एक नई सोच और आत्मविश्वास के साथ तरक्की के रथ पर सवार जल, जंगल व चारे के ताने-बाने के बीच देवभूमि में महिलाएं मल्टी टास्क मैनेजर के रूप में नजर आएंगी। और हो भी क्यों नहीं, जब लक्ष्य तय है और निशाना बेहतर है। प्रयासों में कोई कंजूसी नहीं। पहाड़ हो या फिर तराई का अंतिम छोर। आगाज ठीक है, तैयारी चुस्त है, काम दुरुस्त है तो नये साल में अंजाम भी बेहतर होने की उम्मीद है। नए साल में योजनाओं का लाभ सही और सुनिश्चित कराने को सरकारी प्रयास तेज होंगे तो इसके सही मायने समझने को महिलाओं की भी तैयारी पूरी है चाहें गांव की हो या शहर की। हम कह सकते हैं कि सरकारी प्रयास में बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार मुख्य फोकस रहेगा। सभी गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे मौजूदा केंद्रों व मिनी केंद्रों के लिए प्री-स्कूल किट और मेडिसील किट उपलब्ध कराई जाएगी। लैंगिक असमानता दूर करने,भ्रूण हत्या रोकने, बाल विवाह को कम करने के साथ ही कन्या शिशु को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की योजना पर तेजी से काम होगा। राज्य महिला समेकित विकास योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महिला समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। चारधाम के प्रसाद वितरण व्यवस्था का जिम्मा महिलाओं को दिया जाना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसी तरह की कुछ योजनाएं और भी है जो आने वाले दिनों में दिखाई देगा। उरेडा के सहयोग से माता समितियों को सोलर कुकर वितरण के काम में तेजी लाने के प्रयास किए जाएंगे। कामकाजी महिलाओं की बढ़ती तादाद को देखते हुए उनके आवास की व्यवस्था अब हर जिले में कराने की तैयार की जा रही है। इसके लिए सभी जिलों में हास्टल निर्माण पर काम शुरू होगा। मोनाल परियोजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष के बीच की करीब एक हजार किशोरियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल के सहयोग से मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ये ही मास्टर ट्रेनर सूबे के सभी विकास खंडों की किशोरियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाएंगी। संयुक्त राष्ट्र संघ की मदद से सूचना शिक्षा और संचार रणनीति का मसौदा तैयार करने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। बीपीएल श्रेणी से नीचे के परिवारों की कन्याओं को शिक्षा उपलब्ध कराने की योजनाओं का और विस्तार होगा। घरेलू हिंसा रोकने को बने कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिए जाने के साथ राज्य महिला आयोग के अंतर्गत जनपद स्तर पर महिला अधिकार उत्पीड़न मामलों की सुनवाई एवं निस्तारण की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की तैयारी है। -

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