Saturday, January 30, 2010

उत्तराखंड में खुलेगा हिंदू अध्ययन केंद्र

-राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने पर सीएम का अभिनंदन हरिद्वार, मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राज्य में हिंदू अध्ययन केंद्र खोला जाएगा। इसमें देश-विदेश के लोग हिंदू संस्कृति के बारे में तथ्यात्मक जानकारी हासिल करेंगे। रविवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में संस्कृत भारती के तत्वावधान में राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिए जाने पर आयोजित अभिनंदन समारोह में डा. निशंक ने कहा कि संस्कृत अकादमी प्रत्येक वर्ष संस्कृत प्रतियोगिता आयोजित कराएगी, जिसमें विजेता को एक लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। डा. निशंक ने कहा कि उत्तराखंड आदि काल से ही अध्यात्म का केंद्र रहा है। यदि भारत विश्व गुरु है तो उत्तराखंड उसका भाल है। चारों वेद, पुराण, उपनिषदों की रचना देवभूमि में ही हुई। राज्य में सरकार द्वारा संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए किए गए कार्यो पर संतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भाषा के लिए कई कार्य किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सर संघ चालक केसी सुदर्शन ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने संस्कृत को राष्ट्रभाषा नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद डा. भीमराव अंबेडकर ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन नेहरू ने इसे नकार दिया। श्री सुदर्शन ने कहा कि संस्कृत को केवल राजभाषा बनाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इसे आम बोल चाल की भाषा बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा बनाने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि देश के अन्य प्रांतों के मुख्यमंत्रियों को भी इस दिशा में सोचना चाहिए। संस्कृत अकादमी के सचिव व संस्कृत भारती के प्रदेश अध्यक्ष डा. बुद्धदेव शर्मा, संस्कृत भारती के संरक्षक आचार्य बुद्धिवल्लभ शास्त्री, विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय सचिव डा. प्रेम चंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। उन्होंने उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया।

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