Friday, January 29, 2010

महाकुंभ: क्षणभर को बनता है कुंभ का दुर्लभ योग

-हरिद्वार में कुंभस्थ गुरु होने पर मेष संक्रांति को बनता है कुंभ स्नान का योग -प्रयाग में माघ मौनी अमावस्या, उज्जैन में वैशाख पूर्णिमा, नासिक में भाद्रपद कुशोत्पाटिनी अमावस्या को कुंभ का योग -संसारबंधन से मुक्तकर अमरत्व प्रदान करता है इस खास घड़ी पर किया गया स्नान -हरिद्वार व प्रयाग में तीन-तीन, उज्जैन में दो और नासिक में चार कुंभ स्नानों का विशिष्ट महात्म्य हरिद्वार 'विष्णु पुराण में कहा गया है कि एक बार अश्वमेध यज्ञ, सौ बार वाजपेय यज्ञ और एक लाख बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने का जो फल है, वही एक बार कुंभपर्व स्नान करने से मिलता है। इसी तरह 'स्कंद पुराण में उल्लेख है कि कार्तिक में एक हजार बार, माघ में एक सौ बार गंगा स्नान करने और वैशाख में एक करोड़ बार नर्मदा स्नान करने का जो फल है, वही फल एक बार कुंभ स्नान का है। यह फल क्या है, इसे 'विष्णुयागÓ में इस तरह परिभाषित किया गया है, 'जो मनुष्य कुंभपर्व के समागम में सम्मिलित होकर स्नान करते हैं, वे संसार बंधन से मुक्त होकर अमरत्व को प्राप्त होते हैं। उनके सामने देवतागण वैसे ही नमन करते हैं, जैसे धनवानों के सामने निर्धन लोगÓ। क्या सचमुच ऐसा संभव है और इसका जवाब यह है कि आस्था कुछ भी संभव करा सकती है। आप सोच रहे होंगे कि फिर तो अपनी भी लाटरी लग गई। अभी तो तीन महीने बाकी हैं, किसी भी दिन जाकर पुण्य बटोर लेंगे, लेकिन ऐसा है नहीं। कुंभपर्व का यह दुर्लभ योग तो घड़ी विशेष पर बनता है। इस कुंभपर्व में यह योग 14 अप्रैल को मेष संक्रांति पर बन रहा है। 'विष्णुयाग में कहा गया है कि कुंभराशिस्थ गुरु के समय जब सूर्य का मेष संक्रमण होता है, तब हरिद्वार में कुंभ नामक उत्तम पर्व का योग होता है। इस पुण्य घड़ी में समस्त पृथ्वी के साढ़े तीन करोड़ तीर्थ हरिद्वार में उपस्थित होते हैं। इसलिए वहां स्नान करने से पृथ्वी के समस्त तीर्थों का स्नान हो जाता है। हरिद्वार कुंभपर्व के तीन स्नान प्रमुख माने गए हैं, पहला महाशिवरात्रि, दूसरा चैत्र कृष्ण अमावस्या और तीसरा मेष संक्रांति। यह तीसरा स्नान ही कुंभपर्व का वास्तविक स्नान है। प्रयाग कुंभपर्व का पुण्यदायी योग माघ की मौनी अमावस्या को बनता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कुंभपर्व के तीनों प्रमुख स्नान माघ में ही होते हैं। हरिद्वार में होने वाले उत्तरायणी व माघ पंचमी के सामान्य स्नान यहां कुंभपर्व के महास्नान हैं, लेकिन इनमें मौनी अमावस्या का द्वितीय स्नान उस घड़ी में पड़ता है, जब गुरु वृष और सूर्य व चंद्रमा मकर राशि में आ जाते हैं। इस पावन योग पर ब्रह्मï, विष्णु, महादेव, रुद्र, आदित्य, मरुद्गण आदि देवता गंगा-यमुना के संगम में होते हैं। 'स्कंद पुराण के अनुसार प्रयाग में गंगा-यमुना का जल माघ में सब प्राणियों से कहता है कि 'अद्र्ध उदित सूर्य के समय जो प्राणी यहां आकर डुबकियां लगाता है, वह महापापी होने पर भी पवित्र बन जाता है। उज्जैन कुंभपर्व पर वैसे तो तीन स्नान होते हैं, लेकिन मुख्य दो ही माने गए हैं। हरिद्वार कुंभपर्व का मेष संक्रांति को पडऩे वाला मुख्य स्नान यहां सामान्य स्नान होता है। द्वितीय स्नान वैशाख कृष्ण अमावस्या और तृतीय वैशाख पूर्णिमा का है। परंपरा के अनुसार उज्जैन कुंभपर्व के मुख्य स्नान के लिए सिंहस्थ बृहस्पति, मेषस्थ सूर्य, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, तुला राशिस्थ चंद्रमा, स्वाति नक्षत्र, व्यतिपात योग, सोमवार व अवंतिका क्षेत्र, ये दस योग माने गए हैं। इसी दिन कुंभपर्व का प्रधान स्नान होता आया है। प्राय: यह योग वैशाख पूर्णिमा को होता है। 'स्कंद पुराण में उल्लेख है कि सिंह राशि में गुरु, सूर्य एवं चंद्रमा स्थित हों और अमावस्या का योग हो, तब गोदावरी के उद्गम स्थल कुशावर्त कुंड त्र्यंबक में पृथ्वी पर कुंभपर्व होता है। गोदावरी सिंहस्थ कुंभपर्व के कुशावर्त कुंड त्र्यंबकेश्वर में होने वाले चार मुख्य स्नान हैं, जिनमें पहला श्रावण कृष्ण अमावस्या, दूसरा सिंह संक्रांति, तीसरा श्रावणी पूर्णिमा व चौथा भाद्रपद कुशोत्पाटिनी अमावस्या को होता है, जो कि कुंभपर्व का सबसे महत्वपूर्ण स्नान है। 'पद्मपुराण में उल्लेख है कि साठ हजार वर्ष तक भागीरथी में स्नान का जो फल है, वही फल सिंहस्थ गुरु के अवसर पर एक बार गोदावरी में स्नान करने से मिलता है। कुंभपर्वों का क्रम हरिद्वार कुंभ : कुंभस्थ गुरु होने पर मेष संक्रांति के दिन प्रयाग कुंभ : वृषस्थ गुरु होने पर मकरस्थ सूर्य की अमावस्या के दिन तीन वर्ष बाद हरिद्वार अद्र्धकुंभ : सिंहस्थ गुरु होने पर मेष संक्रांति के दिन छह वर्ष बाद उज्जैन कुंभ : सिंहस्थ गुरु होने पर मेषस्थ सूर्य की अमावस्या के दिन छह वर्ष बाद नासिक कुंभ : सिंहस्थ गुरु होने पर सिंहस्थ सूर्य की अमावस्या के दिन छह वर्ष बाद प्रयाग अद्र्धकुंभ : वृश्चिकस्थ गुरु होने पर मकरस्थ सूर्य की अमावस्या के दिन नौ वर्ष बाद हरिद्वार कुंभ : पुन: कुंभस्थ गुरु होने पर मेष संक्रांति के दिन 12 वर्ष बाद

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