Friday, January 29, 2010

ओंकारेश्वर दर्शन में पंचकेदारों का पुण्य

-स्कंद पुराण में है मंदिर के महत्व का उल्लेख -साल भर किए जा सकते हैं भगवान के दर्शन , रुद्रप्रयाग समय की कमी है, सेहत साथ नहीं दे रही या शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं, लेकिन मन में भगवान केदारनाथ समेत परम आस्था के केंद्र पंचकेदारों के दर्शन की इच्छा भी बलवती हो, तो परेशान होने की जरूरत नहीं। पंचकेदारों के गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव के पांचों स्वरूपों के दर्शन का लाभ लिया जा सकता है। खास बात यह है कि जहां केदारधाम के कपाट शीतकाल में बंद रहते हैं, वहीं ओंकारेश्वर मंदिर में साल भर श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। उत्तराखंड में भगवान शिव के पांच स्वरूप स्थापित हैं। इनमें केदारनाथ के साथ तुंगनाथ, मदमहेश्वर, कल्पेश्वर और रुद्रनाथ मंदिर शामिल हैं। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पांचों केदार मंदिरों में भगवान का दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित होने के कारण शीतकाल में मौसम की विपरीत परिस्थितियों में यहां मानवीय गतिविधियां नगण्य रहती हैं। ऐसे में शीतकाल में पांचों केदारों की गद्दियां ओंकारेश्वर मंदिर में स्थापित की जाती है। ग्रीष्मकाल में पंचकेदारों के कपाट खुलने के बाद भी उनके स्वरूपों की पूजा यहां की जाती है। ऐसे में ओंकारेश्वर मंदिर में वर्ष भर पांचों केदारों के दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। इसके मुताबिक इस मंदिर में पंचकेदारों दर्शन से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना कि केदारनाथ व अन्य चार केदारस्थानों पर दर्शन का मिलता है। हालांकि, धार्मिक व पौराणिक महत्व होने के बावजूद पर्यटकों व श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी नहीं है। जहां केदारनाथ में ग्रीष्मकाल में पांच लाख व अन्य चारों केदारों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहीं गद्दीस्थल होने के बावजूद ओंकारेश्वर मंदिर में सीमित संख्या में ही भक्त पहुंचते हैं। जानकारी के अभाव में अधिसंख्य श्रद्धालु ग्रीष्मकाल में कपाट खुलने के बाद ही पंचकेदारों के दर्शन करते हैं। इस संबंध में मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा का कहना है कि मंदिर समिति लगातार भक्तों को पांचों केदारों के बाबत जानकारी उपलब्ध कराती रहती है। उन्होंने बताया कि मंदिर के विकास व जनसामान्य को यहां आने के लिए प्रेरित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

No comments:

Post a Comment