Saturday, December 5, 2009

महाकुंभ: गुम होने पर भी मिल जाएगा 'लाडला'

-मेला क्षेत्र में गुमशुदा बच्चों को ढूंढने को पुलिस लेगी तकनीक का सहारा -आतंकी व असामाजिक तत्वों की धरपकड़ को भी अपनाएगी पुलिस फार्मूला हरिद्वार: महाकुंभ का शाही स्नान और अचानक भीड़ में आपका 'लाडला' आपसे बिछड़ जाए। लाखों की भीड़ में आखिर उसे ढूंढें भी तो कहां। पुलिस ने माइक से बच्चे का हुलिया बताने के बजाय लोगों से अपने मोबाइल फोन देखने को कहा है। घबराइए मत पुलिस आपके साथ कोई मजाक नहीं कर रही, बल्कि बच्चे को खोजने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। कुंभ में बच्चों के खोने की घटनाओं के बाद मेला पुलिस आधुनिक जीपीआरएस सिस्टम का सहारा लेगी। आतंकी या असामाजिक तत्वों की धरपकड़ के लिए भी यही रणनीति होगी। सुरक्षा की दृष्टि से महाकुंभ को सकुशल निपटाना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए सुरक्षा व खोजबीन को आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाना आवश्यक हो गया है। आपने फिल्मों में ऐसे दृश्य तो जरूर देखे होंगे जिनमें मेले के दौरान बच्चा मां-बाप से बिछुड़ जाता है। कई बार असल जिदंगी में भी ऐसा ही हो जाता है। इस बार कुंभ में मेला पुलिस बच्चों के गुम होने की घटनाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्क है। ऐसी स्थिति में अब तक केवल माइक से बच्चे का हुलिया बता पुलिस अपना पल्ला झााड़ लेती थी। लेकिन इस बार आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर बच्चों को बरामद करने का प्रयास किया जाएगा। दरअसल, कुंभ क्षेत्र में पुलिस जीपीआरएस सिस्टम लगाएगी। बच्चे के गुम होने की स्थिति में पुलिस उन सभी लोगों से अपने मोबाइल फोन खोलने को कहेगी जिनके मोबाइल पर ब्लू-टूथ की सुविधा होगी। ब्लू-टूथ खोलने के साथ ही आपके मोबाइल पर गुमशुदा बच्चे की तस्वीर आ जाएगी और आपको उसके बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। इस तकनीक का प्रयोग केवल बच्चों के गुम होने की दशा में नहीं, बल्कि आतंकवादी या किसी असामाजिक तत्व की धरपकड़ के लिए भी किया जाएगा। वैसे भी पुलिस की असली चिंता कथित आतंकी हमले व असामाजिक तत्वों को लेकर है। मेला डीआईजी आलोक शर्मा का कहना है कि सुरक्षा को लेकर हर प्रकार की सतर्कता बरती जा रही है। आधुनिक तकनीक भी इसलिए इस्तेमाल की जा रही है क्योंकि वर्तमान में अधिकांश लोगों के पास अत्याधुनिक सुविधाओं वाले फोन हैं। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस का यह प्रयास सफल होगा। उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में तकनीकी संचालन के लिए पांच 'ब्लू-5' मशीन लगा दी गई हैं और ऐसी कुल 12 मशीनें लगेंगी।

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