Tuesday, November 17, 2009

ऐतिहासिक जौलजीवी मेला शुरू

-इलाके का होगा पूर्ण विकास, बनेगा प्रवेश द्वार: चुफाल -भारत-नेपाल की साझी संस्कृति का प्रतीक है मेला -पाल वंश के वंशज कुंवर भानुराज पाल सम्मानित जौलजीवी, (पिथौरागढ़): भारत-नेपाल की साझा संस्कृति का प्रतीक जौलजीवी मेला शनिवार को शुरू हो गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विशन सिंह चुफाल ने मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेले के विकास में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा के द्वार जौलजीवी में उन्होंने एक विशाल प्रवेश द्वार बनाने की घोषणा भी की। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने फीता काटकर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा जौलजीवी मेला सीमांत जिले की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा मुनस्यारी आने वाले पर्यटकों का रुख जौलजीवी और धारचूला की ओर करने के लिए यहां सुविधाओं का विकास किया जायेगा। उन्होंने गोरी नदी में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने की मंशा भी जाहिर की। जौलजीवी कैलाश मानसरोवर यात्रा का द्वार है। शीघ्र ही गोरी नदी पर एक विशाल प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने मेले पर प्रकाशित पुस्तक संगम का विमोचन भी किया। क्षेत्रीय विधायक गगन रजवार ने कहा मेले ने जिले को विशेष पहचान दी है। मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है और इसके विकास के लिए वे अपने स्तर से हरसंभव प्रयास करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने जौलजीबी में स्नान घाट बनाने और सांस्कृतिक कक्ष के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा भी की। महिला आयोग की उपाध्यक्ष गीता ठाकुर ने सांस्कृतिक दलों को 11 हजार रुपये दिये जाने की घोषणा की। उद्घाटन अवसर पर सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। 1914 में मेला शुरू करने वाले पाल वंश के वंशज कुंवर भानुराज पाल को इस अवसर पर सम्मानित किया गया।

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