Saturday, November 7, 2009

राज्य में होम्योपैथिक मेडिकल कालेज जल्द

पचास फीसदी वित्तीय मदद को केंद्र सरकार तैयार सूबे के पहले सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोले जाने की कवायद तेज हो गई है। इस मद में केंद्र से वित्तीय मदद की सहमति मिलने से स्वास्थ्य विभाग को और भी बल मिला है। हालांकि कालेज दून में ही स्थापित किये जाने की उम्मीद फिलहाल कम दिख रही है। सरकार का मानना है कि कालेज खुलने से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तो मुहैया होंगी ही, इस संबंध में तैयार की जा रही अन्य योजनाओं के लिए मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। राज्य गठन के बाद से सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज बनाये जाने के प्रयास तो हुए पर इसमे कोई ठोस सफलता नहीं मिली। मुख्यमंत्री बनने के बाद डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने स्वास्थ्य विभाग को नये सिरे से कार्य करने के निर्देश दिये। खुद मुख्यमंत्री ने इस बाबत केंद्र से बात की, जिसका असर दिखने लगा है। स्वास्थ्य महानिदेशक सीपी आर्य के मुताबिक हाल ही में विभाग के इस प्रस्ताव पर केंद्र ने सूबे को हरी झांडी दिखाते हुए मेडिकल कालेज के लिए पचास फीसदी वित्तीय अनुदान देने पर सहमति जताई, जबकि पचास फीसदी धनराशि राज्य सरकार खर्च करेगी। नियमानुसार मेडिकल कालेज से पहले अस्पताल बनाया जाना जरूरी है। भारत सरकार के स्वास्थ्य संयुक्त सचिव (आयुष)संजय कुमार पांडा के साथ विभाग के उच्चाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में अस्पताल के शीघ्र शुरू किये जाने पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक रुड़की के भगवानपुर स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर को तीस या पचास बेड के अस्पताल में बदलने पर विचार विमर्श हुआ। हालांकि पहले यह देहरादून में स्थापित किये जाने की योजना थी, लेकिन इसके लिए जरूरी संसाधन जुटाने में काफी समय लगेगा। इसे देखते हुए भगवानपुर ही बेहतर विकल्प माना जा रहा है। क्या है जरूरी कालेज से पूर्व जरूरी तीस या पचास बेड के अस्पताल के लिए कम से कम साढ़े सात एकड़ जमीन, राज्य सरकार और संबद्ध विवि की एनओसी लेकर केंद्रीय होम्योपैथी परिषद से आवेदन किया जाता है। परिषद की मंजूरी के बाद ही यह योजना मूर्तरूप ले सकेगी।

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