Saturday, 29 August 2009

-दून से गहरा रिश्ता रहा है मदर टेरेसा का

पहली बार 18 अगस्त 1986 को 'स्नेह सदन' के शुभारंभ पर दून पहुंची थी मदर -मदर की प्रेरणा से दून में भी तमाम संस्थाएं जुटी हैं सेवा कार्य में देहरादून- 'गरीबों की सेवा द्वारा हम ईश्वर के लिए कुछ अच्छा (सुंदर) करें'। दया, करुणा और ममता की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा के इस सूत्र वाक्य पर चलते हुए देहरादून में भी 'मिशनरीज आफ चैरिटी' के अलावा तमाम संस्थाएं सेवा कार्य में जुटी हैं। आखिर, मदर का दून से नाता जो रहा है। उन्होंने यहां अनाथों, असहायों व रोगियों की सेवा के लिए तेईस वर्ष पूर्व 'स्नेह सदन' का श्रीगणेश किया था। मदर टेरेसा ने कोलकाता में गरीबों के अलावा बीमारों और कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए संकल्प का जो दीप जलाया था, वह आज भी रोशन है। 18 अगस्त 1986 को नेशविला रोड पर स्थापित 'स्नेह सदन' के उद््घाटन के लिए मदर पहली बार देहरादून आईं थीं। मिशनरीज आफ चैरिटी की देहरादून शाखा की सिस्टर मारिट्टा बताती हैं कि स्नेह सदन का उद्घाटन करने के बाद मदर देहरादून में कई कुष्ठ रोगियों के अलावा झाुग्गी-झाोपडिय़ों में रहने वाले गरीबों से मिलीं। वर्ष 1996 में मदर के कदम दूसरी बार दून की धरती पर पड़े। तब वह सरधना-मेरठ में एक कार्यक्रम में भाग लेने आई थीं, लेकिन दून से लगाव के चलते वह यहां आने से स्वयं को नहीं रोक पाईं। वह बताती हैं कि दून की आबोहवा ने भी मदर को काफी प्रभावित किया। वह यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, लोगों के बीच आपसी प्रेम, सेवाभाव से अभिभूत थीं। याद रहेंगे मदर के साथ बिताए दिन देहरादून: मदर अक्सर कहा करती थीं-'गरीबों की सेवा भगवान की सेवा है। हम गरीबों को देखते हैं तो भगवान को देखते हैं। गरीबी के दयनीय लिबास में छिपे ईश्वर के लिए हम उनकी सेवा करती हैंैं'। यह कहते-कहते सिस्टर मारिट््टा मदर के साथ बिताए दिनों की याद में खो जाती हैं। मिशनरीज आफ चैरिटी से जुड़ी सिस्टर मारिट्टा अ_ारह साल की उम्र में मदर के संपर्क में आईं। मदर की प्रेरणा से उनके मन में भी सेवा का भाव जागा। वर्ष 1963 के आखिर में वह कोलकाता में मदर से मिलीं और अपनी इच्छा जताई। इस पर मदर ने उन्हें जनवरी 1964 में बुलाया। बकौल सिस्टर मारिट्टा-'मदर ने पूछा रोगियों की सेवा कर पाओगी, कठिन कार्य है। मैंने कहा- मदर जब आप कर सकती हैं तो मैं क्यों नहीं। बस फिर, मदर के साथ मैं भी सेवा कार्य में जुट गई'।

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